रायपुर 22 मई 2026
रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में “2 लाख नए एम-पैक्स, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों का गठन एवं सुदृढ़ीकरण” तथा “विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना” की प्रगति की समीक्षा की गई। कार्यशाला में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नाबार्ड, एफसीआई, नेफेड, एनसीसीएफ और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सहकार से समृद्धि” के मंत्र के माध्यम से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विज़न तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी के
नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना, प्रौद्योगिकी-
सक्षम प्रणालियों एवं किसान-केंद्रित पहलों के माध्यम से देशभर में
सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
छत्तीसगढ़ में आयोजित कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि डेयरी सहकारी समितियाँ महिलाओं को गृहिणी से उद्यमी बनाने का माध्यम बन रही हैं। सहकारी संस्थाओं से जुड़ने पर महिलाओं को संगठित बाजार, वित्तीय समावेशन, रोजगार और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी के अवसर मिल रहे हैं।
सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और “व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0” पूर्वी एवं मध्य भारत में समृद्धि के नए अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारी आंदोलन ने गुजरात जैसे राज्यों में महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इससे ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था मजबूत होने के साथ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है।
बैठक में सहकारिता के माध्यम से डेयरी, मत्स्य पालन, अन्न भंडारण, बायोगैस, सोलर रूफटॉप, गोबरधन योजना तथा डेयरी वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
वक्ताओं ने “सहकारिता में सहकार” की भावना को मजबूत करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर बल दिया।
छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने कार्यशाला के आयोजन हेतु आभार व्यक्त करते हुए राज्य में सहकारी क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी।


