रायपुर, 21 मई 2026:
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से लगातार ऐतिहासिक और दुर्लभ पांडुलिपियां सामने आ रही हैं, जिससे प्रदेश की समृद्ध ज्ञान परंपरा के संरक्षण और डिजिटलीकरण को नई गति मिल रही है।
अम्बिकापुर के ब्रह्मपारा राममंदिर के पास रहने वाले पाण्डेय परिवार के पास तंत्र साधना से जुड़ी लगभग 140 वर्ष पुरानी चार दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित मिली हैं, जिनका अवलोकन सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेंद्र कुमार दुग्गा और उपायुक्त श्री आर.के. खूंटे ने उनके निवास पर पहुंचकर किया।
पांडुलिपि संरक्षक राकेश पाण्डेय ने बताया कि वनदुर्गा तंत्र साधना, भुजंग प्रपात, अथ बगलामुखी और वनदुर्गा अथर्वण रहस्य नामक ये पांडुलिपियां संवत् 1886 में उनके प्रपितामह स्वर्गीय चतुरा प्रसाद शर्मा द्वारा हस्तलिखित रूप में तैयार की गई थीं और परिवार द्वारा पीढ़ियों से सहेजकर रखी गई हैं।
संभागायुक्त श्री दुग्गा ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ज्ञानभारतम अभियान भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, पुरातात्त्विक धरोहरों और जनजातीय विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी सहायक है; उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध प्रदेश में ऐसी पांडुलिपियों का मिलना ऐतिहासिक है और प्रशासन इनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।
एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जगदलपुर के सरगुजा प्रभारी अधिकारी श्री हरनेक सिंह ने इन पांडुलिपियों का तकनीकी दस्तावेजीकरण कर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया, जबकि संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल ने जिले में चल रहे सर्वेक्षण कार्यों की प्रगति और भावी कार्ययोजना की जानकारी साझा की।
इन पांडुलिपियों की सुंदर हस्तलिपि, विशिष्ट संरचना और कलात्मक शैली तत्कालीन विद्वत्ता, साधना परंपरा और भारतीय ज्ञान संस्कृति के गौरवशाली अतीत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।


