रायपुर, 16 मई 2026
छत्तीसगढ़ में बाल विवाह के खिलाफ जो अभियान चल रहा है वह पूरे देश के लिए एक सबक है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर बाल विवाह होता क्यों है और इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है?सरकार तो प्रयास करती ही है समाज जागरूक क्यूं नहीं हो रहा है ,ऐसी क्या मजबूरी है कि समाज को बाल विवाह का कदम उठाना पड़ता है। एक प्राचीन सामाजिक कुप्रथा को आखिर हम आधुनिकता की दौड़ में शामिल क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
बाल विवाह क्यों नहीं करना चाहिए
विवाह जरूरी है पर बाल विवाह क्यों?कम उम्र में विवाह से बालिका की पढ़ाई छूट जाती है, स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है और उसका पूरा भविष्य अंधेरे में चला जाता है। जो हाथ कलम थामने चाहिए थे, वे समय से पहले घर की जिम्मेदारी उठाने पर मजबूर हो जाते हैं।
विवाह कब करना चाहिए
स्वयं को समझने लायक नहीं होने पर विवाह की जिम्मेदारी क्या समझेंगे।कानून के अनुसार लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष न्यूनतम आयु है। लेकिन सही समय वह है जब शिक्षा पूरी हो, मन और शरीर परिपक्व हो और दोनों की अपनी सहमति हो।
सबकी जिम्मेदारी है
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” शुरू किया। 31 मार्च 2026 तक 7,498 पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित हो चुकी हैं। बालोद जिला पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बन चुका है। सरकार 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है।
लेकिन सरकार अकेले यह लड़ाई नहीं जीत सकती। माता-पिता को बेटी को बोझ नहीं बल्कि अपनी शान समझना होगा। समाज को चुप्पी तोड़नी होगी। और बालिका को खुद अपने अधिकार पहचानने होंगे।(स्रोत: जनसंपर्क संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन)


