अब कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी जनता की उम्मीद।
किरंदुल/कोड़ेनार/बस्तर न्यूज -14/05/2026(रवि सरकार)
हर चुनाव में नेता आते हैं,बड़े-बड़े वादे करते हैं,वोट लेकर चले जाते हैं, और फिर जनता को उसी हालात में छोड़ दिया जाता है।सड़कें भारी वाहनों से घिरी रहती हैं,आम नागरिकों की जान जोखिम में रहती है,लेकिन जिम्मेदार लोग आंखें मूंदे बैठे हैं।
“किरंदुल: मौत के साये में कोड़ेनार! सड़कों पर खड़े भारी वाहन दे रहे बड़े हादसे को न्योता, आखिर किसका इंतज़ार कर रहा प्रशासन?”
लौह अयस्क की नगरी कहा जाने वाला किरंदुल आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कोड़ेनार पंचायत के वार्ड नंबर 4 में बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के सामने से लेकर प्रमुख चौक-चौराहों तक खड़ी 10 चक्का भारी गाड़ियां किसी भी वक्त बड़ी जनहानि का कारण बन सकती हैं।
वादे अनेक, व्यवस्था शून्य !
किरंदुल को नगर पालिका बने 28 साल बीत चुके हैं और देश को आज़ाद हुए 78 साल, लेकिन यहाँ का बुनियादी ढांचा आज भी लचर है। चुनाव दर चुनाव नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे कर वोट बटोरते हैं और गायब हो जाते हैं। जनता आज भी गंदगी, बदबू और जानलेवा ट्रैफिक के बीच जीने को मजबूर है।
बड़ा सवाल ?
अगर इन बेतरतीब खड़े वाहनों की वजह से कल कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधि या ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन?
पल्ला झाड़ते जिम्मेदार
जब वाहन मालिकों से गाड़ियां हटाने को कहा जाता है, तो उनका रटा-रटाया जवाब मिलता है— “हमें जगह दो”। यहाँ सवाल यह उठता है कि पार्किंग की व्यवस्था करना पत्रकारों का काम है या शासन-प्रशासन का? पत्रकार समाज का आईना है, लेकिन व्यवस्था सुधारना उन जिम्मेदार कंधों का काम है जिन्हें जनता ने चुनकर भेजा है।
कलेक्टर से जगी उम्मीद
इस गंभीर समस्या को लेकर जब कलेक्टर महोदय से चर्चा की गई, तो उन्होंने संज्ञान लेते हुए फोटो और वीडियो साक्ष्य मांगे हैं और जल्द ही ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। नेताओं के खोखले वादों से थक चुकी जनता को अब केवल जिला प्रशासन से ही न्याय की उम्मीद बची है।
जन चौपाल 36/निष्कर्ष
किरंदुल आज खतरों के मुहाने पर खड़ा है। यदि समय रहते इन भारी वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग सुनिश्चित नहीं की गई और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो कोई बड़ा हादसा पूरे क्षेत्र को झकझोर सकता है। प्रशासन को जागना होगा, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।


