डिजिटल डेस्क/रायपुर / नई दिल्ली | 26 अप्रैल 2026
प्रकृति ने इंसानों का पोषण किया है लेकिन आज इंसान प्रकृति का इतना दोहन कर चुका है की प्रकृति जलवायु के रूप में विभक्त तरीके से इंसानों को बीच अपना रौद्र रूप दिखाने आ रही है। हम बात कर रहे हैं अल-नीनो की। सरकार अगर पानी को लेकर के कड़े नियम और जागरूकता नहीं लाएगी तो यह धरती को सुखा होने से कोई नहीं रोक सकता।
इस साल मानसून से पहले ही खेती-किसानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में मानसून की बारिश ‘सामान्य से कम’ रहने की प्रबल संभावना है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल कुल वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) का महज 92 प्रतिशत ही रह सकती है।
अलनीनो बना सबसे बड़ा खतरा
मानसून के कमजोर रहने की सबसे बड़ी वजह ‘अल नीनो’ को माना जा रहा है। प्रशांत महासागर में बनने वाली यह जलवायु स्थिति भारतीय मानसून को प्रभावित करती है। फिलहाल भूमध्य प्रशांत क्षेत्र में ला नीना की स्थिति समाप्त हो रही है और ENSO तटस्थ स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 2026 के मध्य तक अल नीनो के मजबूत होने की प्रबल संभावना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक वित्तीय संस्था जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार इस बार अल नीनो के मजबूत होने की 60 प्रतिशत संभावना है। ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि जब भी अल नीनो मजबूत हुआ है, भारत में बारिश में 15 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
महीनेवार की स्थिति में सितंबर सबसे खतरनाक
स्काईमेट ने मानसून के चारों महीनों के लिए अलग-अलग अनुमान जारी किए हैं — जून में LPA का 101%, जुलाई में 95%, अगस्त में 92% और सितंबर में केवल 89% बारिश होने का अनुमान है। यानी मानसून का अंतिम दौर किसानों के लिए सबसे कठिन रह सकता है।उत्तर व मध्य भारत के कृषि प्रधान राज्य ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है।
कृषि पर मंडराया गहरा संकट
अगर बारिश का वितरण असंतुलित रहता है या समय पर बुवाई नहीं हो पाती तो इसका सीधा असर फसलों की पैदावार और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। इस पूर्वानुमान का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है, क्योंकि इनकी बुवाई और विकास काफी हद तक मानसून पर निर्भर करते हैं। कम बारिश की स्थिति में धान, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
खबरों पर तो विश्व बैंक ने भी कहा है कि कमजोर मानसून से भारत में कृषि की पैदावार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने और विकास दर में कमी की चुनौती होगी।
छत्तीसगढ़ की स्थिति
हालांकि, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति रहने की उम्मीद जताई गई है,लेकिन राज्य की बड़ी आबादी धान की खेती पर निर्भर होने के कारण प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। कम बारिश की स्थिति में सरकार की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है — समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को इस बार सावधानी के साथ खेती की योजना बनानी चाहिए — कम पानी वाली फसलों का चयन और ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग करना जरूरी होगा।
जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन जैसी दीर्घकालिक योजनाओं पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके।
अलनीनो का खतरा मंडराया: कमजोर मानसून से कृषि पर संकट, छत्तीसगढ़ भी अलर्ट पर


