चौपाल चर्चा/18/04/2026
(दृश्य: गांव की एक पुरानी लेकिन व्यवस्थित चौपाल, बरगद का पेड़। ज्योतिपति एक अखबार पढ़ रहे हैं और ज्वाला पास ही बैठे हैं।)
ज्योतिपति:(अखबार की ओर इशारा करते हुए) ज्वाला भाई, दुनिया के नक्शे पर एक बहुत बड़ी गांठ खुली है। 49 दिनों के बाद ‘होर्मुज स्ट्रेट’ का रास्ता फिर से खुल गया है।
ज्वाला: (हैरानी से) ये ‘होर्मुज स्ट्रेट’ का बला क्या है दादा? और ये हमारे गांव से कैसे जुड़ा है?
ज्योतिपति: यही तो समझने वाली बात है। देख, ईरान और अमेरिका-इजरायल की लड़ाई में जो रास्ता बंद हुआ था, वो दुनिया का ‘रसोईघर’ है। सारी गैस, सारा तेल इसी रास्ते से आता है। 28 फरवरी से जो रास्ता बंद था, उसने हमारे देश की कमर तोड़ दी थी।
ज्वाला: अच्छा! तभी कहूं कि आजकल गैस सिलेंडर और तेल के दाम आसमान क्यों छू रहे थे? गांव में चर्चा तो हो रही थी, लेकिन किसी को ये नहीं पता था कि ये सब इतने दूर बैठे ईरान की वजह से हो रहा है।
ज्योतिपति: बिल्कुल! ट्रंप साहब ने भी कह दिया है कि रास्ता खुल गया है। लेकिन याद रखना ज्वाला, ये शांति अभी ‘शर्तों’ वाली है। ईरान ने सिर्फ संघर्ष-विराम तक के लिए इसे खोला है। अगर डील पूरी नहीं हुई, तो खतरा फिर मंडरा सकता है।
ज्वाला:मतलब दादा, आज के ज़माने में शहर के लोग या देश के बड़े नेता क्या कर रहे हैं, इसका सीधा असर हमारी रसोई और खेत की सिंचाई पर पड़ता है?
ज्योतिपति: सटीक पकड़ा! भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है। हम अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से लाते हैं, और उसका 60% हिस्सा इसी होर्मुज के रास्ते आता है। ये जो रास्ता खुला है, इसका मतलब है कि अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा को थोड़ी राहत मिलेगी। महंगाई का जो दौर था, वो शायद अब थोड़ा थम जाए।
ज्वाला: (गहराई से सोचते हुए) दादा, ये तकनीक और इंटरनेट का जमाना है। पहले हम अपने गांव की खबरों में मस्त रहते थे, अब ये ‘ग्लोबल खबरें’ सीधे हमारी चौपाल पर आ गई हैं। हमें सचेत रहना होगा।
ज्योतिपति:सही कहा ज्वाला। पत्रकारिता का मतलब ही यही है कि ‘ईरान’ में क्या हो रहा है और उसका ‘इम्पैक्ट’ हमारे गांव की गरीब जनता पर क्या पड़ेगा, इसका हिसाब रखना। ‘जनचौपाल36’ इसीलिए है—ताकि लोग समझें कि हम एक-दूसरे से कितने जुड़े हैं।
(ज्योतिपति अखबार को मोड़ते हुए)
ज्वाला: चलो, अब अगली खबर की तैयारी करते हैं। दुनिया भाग रही है, हमें उसे समझना है, भागना नहीं है।


