डिजिटल डेस्क /नासिक /17 अप्रैल 2026
महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक आईटी–बीपीओ यूनिट में कथित यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और धर्मांतरण के आरोपों ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस छेड़ दी है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और जांच को तेज करने के लिए पुलिस ने 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि शिकायतों का सिलसिला मार्च के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ, लेकिन कई पीड़ितों के बयानों में आरोप है कि इस तरह की गतिविधियां करीब 2022 से 2026 तक पिछले चार वर्षों से चल रही थीं।
कैसे सामने आया मामला
मामला उस समय सुर्खियों में आया जब एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर शोषण करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अन्य महिला कर्मचारियों ने भी सामने आकर उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और धार्मिक दबाव से जुड़े आरोप लगाए।
पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 7 कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक मुख्य आरोपी अब भी फरार बताई जा रही है।
मुख्य आरोपी और कार्रवाई
इस मामले में एचआर मैनेजर निदा खान का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। पुलिस के अनुसार वह फिलहाल फरार है और उसने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। वहीं, अन्य आरोपियों में कई टीम लीडर्स के नाम शामिल हैं, जिन पर यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव के आरोप लगाए गए हैं।
स्थानीय अदालत ने दो मुख्य आरोपियों को 18 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा है।
SIT और अन्य एजेंसियों की जांच
नासिक पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT का गठन किया है। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय जांच फिलहाल 9 एफआईआर तक सीमित है, जबकि अन्य संभावित पहलुओं—जैसे बाहरी नेटवर्क या फंडिंग—की जांच के लिए ATS, NIA और राज्य खुफिया विभाग को भी पत्र भेजा गया है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने सबूत जुटाने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को अंडरकवर स्टाफ के रूप में तैनात किया था, हालांकि इस पहलू पर आधिकारिक विस्तृत बयान अभी प्रतीक्षित है।
कंपनी का रुख
कंपनी ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और कहा है कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न या किसी भी प्रकार की जबरदस्ती के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां कथित जबरन धर्मांतरण और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवाल उठाए गए हैं।


