32.8 C
Raipur
Friday, June 5, 2026

जमीन की घटती उर्वरता पर कृषि विभाग की चिंता:- अब धरती को दवाई नहीं, हरी खाद दीजिए

Must read

रायपुर, 11 अप्रैल 2026

सूरजपुर जिले में मिट्टी की घटती उर्वरता चिंता का विषय बनती जा रही है। लगातार सघन खेती, रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग और पशुधन में कमी के कारण खेतों में जैविक कार्बन तेजी से घट रहा है। इस संकट से निपटने के लिए कृषि विभाग ने किसानों से हरी खाद अपनाने का आह्वान किया है।

हरी खाद यानी ढैंचा, सन, मूंग, उड़द, लोबिया जैसी दलहनी फसलें जिन्हें हरी अवस्था में ही खेत में जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इनकी जड़ों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सीधे मिट्टी में स्थिर कर देता है — वही काम जो किसान महंगे यूरिया से कराता है। ढैंचा तो प्रति एकड़ करीब तीन बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन देता है।

इसके फायदे सिर्फ नाइट्रोजन तक सीमित नहीं हैं। मिट्टी नरम और भुरभुरी बनती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है, खरपतवार स्वाभाविक रूप से दबते हैं और अगली फसल में कीट-रोग का प्रकोप भी कम होता है। सबसे बड़ी बात — रासायनिक खाद की लागत घटने से किसान की जेब में सीधा फायदा पहुँचता है।

कृषि विभाग की सलाह है कि सिंचित क्षेत्रों में मई में और असिंचित क्षेत्रों में जून में बुवाई करें। जब फसल 40 से 50 दिन की हो जाए तो उसे मिट्टी में पलट दें। रबी के लिए बरसीम की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में करें।

अधिक जानकारी के लिए जिला कृषि कार्यालय अथवा मृदा परीक्षण कार्यालय, सूरजपुर से संपर्क करें।


- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article