डिजिटल डेस्क | 02 अप्रैल 2026
हां हम इंसान हैं की समस्याओं का जीता जागता पुतला हमेशा समस्याओं से घिरे होते है कभी आर्थिक कभी शैक्षणिक कभी घरेलू तो कभी राष्ट्रीय।इस तरह की पैनिक बुकिंग के कारण कुल बुकिंग में करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे सप्लाई नेटवर्क पर अचानक दबाव बढ़ गया है
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण भारत में रसोई गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है। राजस्थान, दिल्ली, मुंबई, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं; उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में रत्नाकर गैस एजेंसी के बाहर लोग रात 10 बजे से ही नंबर सुरक्षित करने लगते हैं, कई युवक और बुजुर्ग मच्छरदानी लगाकर फुटपाथ पर रात गुज़ार रहे हैं।
बस्ती में भीषण गैस किल्लत के कारण उपभोक्ता घर जाने की बजाय एजेंसी के बाहर डेरा डाले हुए हैं; लोग खाली हाथ लौटने के डर से धूप‑सूखा, मच्छरों और अन्य जोखिमों को नज़रअंदाज़ करके वहीं रहने को मजबूर हैं। वीडियो वायरल होने से गैस वितरण व्यवस्था की खामियां भी उजागर हुई हैं।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में भी स्थिति तनावपूर्ण है: रायपुर में घरेलू 14.2 kg सिलेंडर लगभग 984 रुपये के आसपास है, जबकि वाणिज्यिक सिलेंडरों की दरों में भारी वृद्धि ने छोटे दुकानदारों और होटल‑रेस्तरां संचालकों को झटका दिया है। राज्य सरकार ने वाणिज्यिक गैस आपूर्ति सीमित कर दी है और रिफिल बुकिंग के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
आम आदमी की जिंदगी पर असर
गैस की कीमत और किल्लत के चलते अनेक शहरी और ग्रामीण महिलाओं को फिर से लकड़ी या दूसरे ठोस ईंधन पर लौटना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर दबाव बढ़ा है।
सरकारे दावा करती है कि देश के पास लगभग 60–70 दिन के लिए LPG भंडार हैं, लेकिन वितरण व्यवस्था और भीड़ के कारण जमीन पर “किल्लत” का अहसास बना हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव शांत होता है और नई आयात राहें खुलती हैं, तो अगले 12–24 महीने में गैस सप्लाई और कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर हो सकती हैं; लेकिन जब तक यह नहीं होता, आम उपभोक्ता के लिए यह संकट बना रह सकता है।
गैस किल्लत: एजेंसी के बाहर मच्छरदानी, आम आदमी थका घर से बेघर


