रणनीतिक फैसला: कैपिटल खर्च का एक बड़ा हिस्सा रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक हथियारों के निर्माण में लगाया जा रहा है।
नई दिल्ली_16 फरवरी, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटीआई (PTI) के साथ हालिया प्रेस वार्ता में वैश्विक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों पर गहरा विमर्श किया। पीएम ने साफ तौर पर संकेत दिया कि भारत की रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाना और उसके लिए संसाधनों का आवंटन करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि समय की मांग और सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।
एडवांस डिफेंस और बजट: सामरिक आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने बजट 2026-27 के संदर्भ में रक्षा क्षेत्र की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियां बदल रही हैं, भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए ‘एडवांस’ होना ही पड़ेगा।
रक्षा बजट में बढ़ोतरी: सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में न केवल पूंजी निवेश बढ़ाना है, बल्कि स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना भी है।
ग्लोबल ट्रेड और MSME का रक्षा क्षेत्र में योगदान
पीएम मोदी ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सीधा लाभ भारत के MSMEs को मिल रहा है।
“आज हमारे छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) ग्लोबल वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहे हैं। ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ का विजन हमारे युवाओं और स्टार्टअप्स को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धी बना रहा है।”
विकसित भारत के लिए ‘हाई-क्वालिटी इंफ्रा’ अनिवार्य
प्रधानमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर अपना कड़ा रुख दोहराया:
“पुराने और टूटे-फूटे इंफ्रास्ट्रक्चर की उस देश में कोई जगह नहीं है जो विकसित भारत बनने की राह पर है। हाई-क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे बिज़नेस और नागरिकों की सुरक्षा, दोनों के लिए अनिवार्य है।”


