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Saturday, March 7, 2026

क्या.? मुर्शिदाबाद में बाबर की सोच फिर जिंदा हो रही है?

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दृश्य बाबरी मस्जिद निर्माण,मीडिया की खबर देखकर ज्वाला के चेहरे पर गुस्सा है और ज्योतिपति शांत पर गंभीर मुद्रा में हैं)

मुर्शिदाबाद(भारत)_11/02/2026

(ज्योतिपति-ज्वाला संवाद)
ज्वाला: ज्योतिपति जी, क्या देख रहे हैं आप? क्या आपको दिखाई नहीं दे रहा कि मुर्शिदाबाद में क्या हो रहा है? हुमायूं कबीर ‘बाबरी’ के नाम पर नई इबारत लिख रहे हैं। क्या बाबर अब भी जिंदा है?
ज्योतिपति: (लंबी सांस लेकर) ज्वाला, बाबर तो मर गया, लेकिन उसकी छोड़ी हुई नफरत की लकीरें आज भी कुछ लोग खींचने की कोशिश कर रहे हैं। जिस नाम ने भारत की सभ्यता को घायल किया, उसी नाम को फिर से प्रतिष्ठित करना केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि एक चुनौती है।

ज्वाला: चुनौती? यह तो सीधा प्रहार है! हमारी आस्था पर, हमारे इतिहास पर। जब अयोध्या में कलंक मिट गया, तो मुर्शिदाबाद में ये नया बीज क्यों बोया जा रहा है? कहाँ है इस देश का कानून? कहाँ सो रहे हैं वो बड़े-बड़े ज्ञान बघारने वाले IAS-IPS अधिकारी? क्या उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
ज्योतिपति: जिम्मेदारी तो सबकी है, ज्वाला। लेकिन सत्ता और व्यवस्था कभी-कभी ‘वोट बैंक’ और ‘तुष्टीकरण’ के चश्मे से देखने लगती है। अधिकारी कागजों में उलझे हैं और प्रशासन कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है। पर क्या राष्ट्र की अखंडता के लिए हर बार कोर्ट के धक्के खाना जरूरी है?

ज्वाला: यही तो विडंबना है! अगर ये बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का मामला होता तो अब तक धाराएं लग चुकी होतीं। जब अमन के दुश्मनों की बात आती है, तो सबको सांप सूंघ जाता है। क्या हम अपनी सभ्यता को फिर से उन्हीं आक्रांताओं के नाम पर मिटने देंगे? बाबर लूटने आया था, और आज उसके नाम पर ये निर्माण क्या देश को बांटने की नई साजिश नहीं है?

ज्योतिपति: ज्वाला, तुम्हारी आग सही है। किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र में विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन आत्मघाती होता है। 1947 में हमने जमीन खोई, अब अगर हमने अपनी सांस्कृतिक पहचान और चेतना खो दी, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। सरकार और कोर्ट को इस ‘बाबरी सोच’ को वक्त रहते रोकना होगा।
ज्वाला: बिल्कुल! ‘जन चौपाल 36’ चुप नहीं रहेगा। हम पूछेंगे सवाल— कि जब तक भारत का नागरिक जागृत है, तब तक किसी बाबर की सोच को यहाँ पनपने नहीं दिया जाएगा। प्रशासन जागे, इससे पहले कि जनता का धैर्य जवाब दे दे!


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