34.4 C
Raipur
Saturday, March 7, 2026

“सीधी बात: दिल्ली और देश” लापता और गुमशुदा होते लोग

Must read

आज की चौपाल: ज्वाला: एक युवा, जिसका लहजा सख्त है और जिसकी आवाज़ में व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा है।
ज्योतिपति: एक अनुभवी, गंभीर और जागरूक नागरिक जो आंकड़ों और गहरी चिंताओं पर बात करता है।

नई दिल्ली 08/02/2026

ज्वाला: (सख्त और ऊंचे स्वर में) मीडिया पर जारी खबरों पर :शर्म आनी चाहिए इस सिस्टम को! दिल्ली की सड़कों पर इंसान गायब हो रहे हैं या हवा में भाप बन रहे हैं? सिर्फ 27 दिनों में 538 लोग गायब! जिसमें 137 मासूम बच्चे हैं। क्या यहाँ कोई इंसानों को निगलने वाला गैंग पाल रखा है किसी ने? वजीराबाद का 16 साल का ऋतिक पिछले साल से गायब है, और सुरक्षा के जिम्मेदार? व्यवस्था और प्रदेश के मुखिया का दफ्तर सिर्फ ‘सीसी’ (CC) और मेल-मेल खेल रहे हैं। धिक्कार है ऐसी व्यवस्था पर!

ज्योतिपति: (खबरों पर गंभीर पर संयमित स्वर में)
ज्वाला, तुम्हारा गुस्सा जायज है, लेकिन इस तबाही की गहराई को देखो। ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये उजड़ते हुए घर हैं। देशभर में हर रोज 1,328 लोग लापता हो रहे हैं। गणित लगाएंगे तो रूह कांप जाएगी—हर मिनट एक व्यक्ति गायब हो रहा है। हमारी बहनें, हमारी बेटियां… हर 2 मिनट में एक महिला का पता नहीं चलता। दिल्ली अब दिलवालों की नहीं, ‘लापतागंज’ बन चुकी है।

ज्वाला: (आक्रामक होकर)
ज्योतिपति जी, आप तो सुलझे हुए आदमी हैं, मुझे बताइए—ये कौन सा देश बन रहा है? संसद के भीतर देश के मुखिया की सुरक्षा पर खतरा मंडराता है, तो बाहर आम नागरिक की क्या बिसात? मुखिया सदन में न आएं तो देश चल जाता है, उनकी कुर्सी सलामत रहती है। लेकिन एक गरीब बाप, एक मजदूर भाई, एक कामकाजी महिला… अगर ये रोजगार के लिए बाहर न निकलें, तो घर का चूल्हा बुझ जाएगा। क्या अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर निकलना अब मौत या गायब होने को दावत देना है?

ज्योतिपति: (चिंताजनक मुद्रा में)
यही तो सबसे बड़ा संकट है। हम समस्याओं से लड़ना छोड़ चुके हैं, अब हम समस्याओं से भागना और डरना शुरू कर चुके हैं। जब रक्षक ही भक्षक के सामने घुटने टेक दें या सुस्त हो जाएं, तो समाज में खौफ पसर जाता है। ऋतिक के माता-पिता दर-दर भटक रहे हैं, मेट्रो स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में वो आखिरी बार दिखा, फिर धुएं की तरह उड़ गया? क्या हमारी तकनीक, हमारी सुरक्षा व्यवस्था इतनी लाचार है?

ज्वाला: (सपाट लहजे में)
लाचार नहीं है ज्योतिपति जी, ये नीयत की कमी है! अगर किसी नेता का कुत्ता गायब हो जाए तो पूरी फौज लगा दी जाती है, पर एक आम आदमी का बच्चा गायब हो तो उसे थानों के चक्कर कटवाए जाते हैं। मैं पूछता हूँ—ये जो 2023 में 3 लाख से ज्यादा महिलाएं गायब हुईं, ये कहाँ गईं? क्या ज़मीन निगल गई या आसमान खा गया?

ज्योतिपति: (लंबी सांस लेते हुए)
सच्चाई कड़वी है ज्वाला। हर घंटे 37 महिलाएं गायब होना एक ‘नेशनल इमरजेंसी’ है। हमें अब जागना होगा। हमें सरकार से और हर उस जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे शख्स से पूछना होगा—क्या आपकी सुरक्षा की गारंटी सिर्फ आपके पद तक है? हमारी सुरक्षा का क्या?





- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article