हनमकोंडा (तेलंगाना), 12 जनवरी 2026:
तेलंगाना के हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में छह से आठ जनवरी के बीच करीब 300 आवारा कुत्तों को जहर देकर बेरहमी से मार डालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पशु कल्याण कार्यकर्ताओं अदुलपुरम गौतम और फरजाना बेगम की शिकायत पर श्यामपेट पुलिस ने नौ लोगों—जिनमें ग्राम पंचायत सरपंच और सचिव शामिल हैं—के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने दो व्यक्तियों को हायर कर कुत्तों को जहर दिया और शवों को गांव के बाहर फेंक दिए। यह घटना पशु कल्याण के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती है, क्योंकि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या रेबीज और हमलों का कारण बन रही है। कार्यकर्ता अदुलपुरम गौतम ने कहा, “यह क्रूरता नहीं, तो क्या है? पशु अधिकारों का सम्मान जरूरी है।”
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या?
हालांकि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों का जिक्र महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सभी राज्यों को हाईवे, सड़कों, एक्सप्रेस-वे से आवारा कुत्तों व मवेशियों को हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने शैक्षिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों आदि में बाड़बंदी अनिवार्य की ताकि आवारा जानवर घुसें नहीं। एक याचिका में 90 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के मामले का जिक्र हुआ, जहां आवारा कुत्तों के हमले को कारण बताया गया। जस्टिस ने तस्वीर देखने से इनकार करते हुए कहा, “ऐसी तस्वीरें दिखाने की जरूरत नहीं।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेबीज संदिग्ध कुत्तों को छोड़ा न जाए, लेकिन सामान्य हत्या पर रोक लगाई। लाइव लॉ के अनुसार, यह आदेश सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाता है। फिर भी, जहर देकर हत्या पशु क्रूरता अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
पशु कल्याण मंत्रालय ने आवारा कुत्तों के लिए टीकाकरण और स्टेरलाइजेशन पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम मजबूत करने से ऐसी घटनाएं रुकेंगी। पुलिस जांच पूरी होने पर आरोपी गिरफ्तार हो सकते हैं।


