शेणदुरसनी/यवतमाल:_19/12/2025
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का शेणदुरसनी गांव आज एक ऐसी ‘डिजिटल डकैती’ का गवाह बना है, जिसने सरकारी तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मात्र 1,500 की आबादी वाले इस गांव में महज तीन महीनों के भीतर 27,397 जन्म पंजीकरण दर्ज होना कोई तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर अपराध है। यह घटना दर्शाती है कि हमारे प्रशासनिक सर्वर कितने असुरक्षित हैं।
इस घोटाले के तार जिस तरह से मुंबई से जुड़े पाए गए हैं और पंजीकृत लोगों में से 99 प्रतिशत का उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल से संबंध सामने आया है, वह मामले को बेहद संवेदनशील बनाता है। जन्म प्रमाण पत्र किसी भी नागरिक का प्राथमिक दस्तावेज होता है। इसी के आधार पर आधार, पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जाते हैं।
आशंका है कि इस फर्जी वाड़े का उपयोग अवैध रूप से नागरिकता हासिल करने या पहचान बदलने के लिए किया जा रहा था। यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती है।प्रशासनिक जांच में यह खुलासा होना कि ग्राम पंचायत की आईडी को मुंबई से एक्सेस किया जा रहा था, हमारे ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के सुरक्षा मानकों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
क्या ग्राम स्तर के पोर्टल्स के लिए ‘जियोग्राफिकल फेंसिंग’ या ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ जैसे बुनियादी सुरक्षा उपाय अनिवार्य नहीं होने चाहिए?अगर आज हम अपने डिजिटल किलों की दरारों को नहीं भरेंगे, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की विश्वसनीयता को खत्म कर देंगी।


