प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर लोकसभा में विशेष चर्चा के दौरान अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं।
नई दिल्ली_ 09/12/2025
प्रधानमंत्री के वक्तव्य के कुछ अंश_
“मैं आपका और सदन के सभी माननीय सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है, जिस मंत्र ने, जिस जय_घोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी, प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना, इस सदन में हम सबका यह बहुत बड़ा सौभाग्य है। और हमारे लिए गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष निमित्त, इस ऐतिहासिक अवसर के हम साक्षी बने हुए हैं।”
“सत्ता से नहीं, जनता के दिल से उठती आवाज़—वंदे मातरम्”
उन्होंने कहा कि इस 150-वर्ष की यात्रा ने देश को अनेक कालखण्डों से गुजरते हुए आजादी दिलाने तक पहुँचाया। वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं था — यह स्वतंत्रता की लड़ाई, भारत माता की स्वतंत्रता की जंग का स्वप्न और संकल्प था।
“गले का हार वंदे मातरम्—हर गरीब का अभिमान
मोदी ने यह भी स्मरण कराया कि जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए थे, देश गुलामी में था; 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा था।
150-वर्ष पूरा होना इसलिए भी खास है कि यह हमें हमारी आज़ादी की लड़ाई, हमारी संस्कृति और एकता को याद कराने वाला अवसर है।
“गरीबों की जुबान का उजाला—वंदे मातरम्”
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने केवल राजनैतिक आज़ादी की लड़ाई में नहीं बल्कि भारत की “संस्कृति, आत्म-विश्वास और राष्ट्रीय पहचान” को मजबूत करने में भी योगदान दिया।


