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Wednesday, July 22, 2026

“मोह का प्रभाव और बढ़ता असंतोष”

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लेख आलेख/जनचौपाल 36 _18/11/2025

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोह और तुलना लोगों के भीतर असंतोष और बेचैनी बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब इंसान अपने पास मौजूद चीज़ों से संतुष्ट न होकर दूसरों की उपलब्धियों और वस्तुओं पर मोहित होता है, तो चेतना में दूरी और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।
मुख्य कारण:
सोशल मीडिया और सामाजिक तुलना
तात्कालिक लाभ की प्रवृत्ति
अभाव और भय की मानसिकता
उपाय:
रोज़ाना तीन आभारी बातें लिखें
ज़रूरत और चाह में अंतर समझें
सोशल मीडिया का समय कम करें
अपनी उपलब्धियों को स्वीकारें
छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें

जब भी हम किसी वस्तु या स्थिति के कारण असंतोष अनुभव करें, एक पल रुकें, गहरी सांस लें, और पूछें—”क्या यह वाकई हमारे अभी के अहंकार को संतुष्ठ कर रहा है?” – संतोष का अभ्यास: जो है उसी में पूर्णता ढूंढना, न कि जो नहीं है उसे पाने की मानसिकता।

निष्कर्ष:
असंतोष का हल बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि आत्म-स्वीकृति और संतोष के अभ्यास में है।

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