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Tuesday, July 21, 2026

लेह हिंसा और स्थिति पर ताज़ा ख़बर

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‘राज्य के दर्जे’ की मांग हुई हिंसक, 4 की मौत; सोनम वांगचुक पर लगे गंभीर आरोप

लेह/श्रीनगर, 26 सितंबर 2025:

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में ‘पूर्ण राज्य के दर्जे’ और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार, 24 सितंबर 2025 को हिंसक हो गया।
इस हिंसा में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 पुलिसकर्मियों सहित 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

हिंसा का घटनाक्रम और मुख्य मांगें
लद्दाख में यह आंदोलन पिछले कई वर्षों से जारी है, लेकिन यह हिंसा उस समय भड़की जब प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने लेह में भाजपा कार्यालय और हिल काउंसिल दफ्तरों पर पथराव किया और वाहनों में आग लगा दी।

मांग: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें हैं:
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा, और रोज़गार में आरक्षण। उनका मानना है कि छठी अनुसूची के बिना लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र, भूमि अधिकार और संस्कृति को खतरा है।

प्रदर्शन का कारण:
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 10 सितंबर से इन्हीं मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। उनके समर्थन में कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी भूख हड़ताल कर रहे थे। मंगलवार (23 सितंबर) शाम को जब दो अनशनकारियों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, तो युवाओं का गुस्सा भड़क उठा और बुधवार को विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया।

प्रशासन का एक्शन:
हिंसा के बाद प्रशासन ने लेह शहर में कर्फ्यू लगा दिया और धारा 163 (पांच से अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध) लागू कर दी। इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, जिसके बाद दुर्भाग्यवश कुछ लोगों के हताहत होने की खबर आई।

सोनम वांगचुक पर सरकार का रुख
इस हिंसा के बाद केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय ने सीधे तौर पर कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है।

सरकार का आरोप:
गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि वांगचुक के “भड़काऊ बयानों” से भीड़ को उकसाया गया। सरकार ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने अपने भाषणों में बांग्लादेश और नेपाल में ‘Gen Z’ (युवा पीढ़ी) आंदोलनों का ज़िक्र कर युवाओं को हिंसा के लिए प्रेरित किया।

FCRA लाइसेंस रद्द:
हिंसा के अगले दिन, 25 सितंबर को, गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक की संस्था SECMOL (स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख) का FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) लाइसेंस भी रद्द कर दिया। संस्था पर विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है।

वांगचुक की प्रतिक्रिया
सरकारी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने स्वयं को ‘बलि का बकरा’ (Scapegoat) बनाए जाने की बात कही है।

वांगचुक का खंडन:
उन्होंने कहा कि लद्दाख में हिंसा उनकी वजह से नहीं, बल्कि पिछले छह वर्षों से युवाओं के बीच बेरोजगारी, असंतोष और वादों को पूरा न करने के कारण उपजे गहरे गुस्से का परिणाम है।

गिरफ्तारी की आशंका:
वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्हें डर नहीं है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी से लद्दाख में समस्या और बढ़ सकती है। उन्होंने युवाओं से शांति बनाए रखने और आंदोलन को अहिंसक तरीके से जारी रखने की अपील की है।
लेह में गुरुवार (25 सितंबर) को तनावपूर्ण शांति बनी रही, और शुक्रवार (26 सितंबर) को भी कर्फ्यू और प्रतिबंधों के चलते जनजीवन प्रभावित रहा।

प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और आगे की जांच जारी है।

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