ईगल टीम की जांच में खुलासा हुआ कि तैयार ड्रग्स केवल हैदराबाद तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उनका नेटवर्क और भी व्यापक था। नशीले पदार्थों की सप्लाई शहर की ड्रग कंपनियों के अलावा आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक की जा रही थी।
हैदराबाद/तेलंगाना-16 सितंबर (मीडिया सूत्र
तेलंगाना ड्रग लॉ एनफोर्समेंट की विशेष टीम ईगल (Eagle) ने शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग्स का गोरखधंधा पकड़ा। टीम ने सिकंदराबाद के बोवेनपल्ली इलाके में स्थित मेधा हाई स्कूल पर छापा मारा और पाया कि वहां स्कूल की आड़ में ड्रग्स फैक्ट्री चलाई जा रही थी।
छापेमारी में भारी बरामदगी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने
3.5 किलो अल्प्राज़ोलम
4.3 किलो अधपका अल्प्राज़ोलम
21 लाख रुपये नकद
कच्चा माल और निर्माण उपकरण
बरामद किए। पुलिस के अनुसार, जब्त की गई नकदी सिर्फ दो दिन की बिक्री से हुई कमाई है।
मास्टरमाइंड और साथी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा है।
मलेला जया प्रकाश गौड़ (39) – स्कूल का डायरेक्टर और पूरे धंधे का मास्टरमाइंड।
पी. उदय साई (23) – ड्राइवर।
जी. मुरली साई – ट्रांसपोर्टर।
गौड़ मूल रूप से महबूबनगर का रहने वाला है। पहले वह ताड़ी की दुकान चलाता था। बाद में उसकी मुलाकात गुरुवा रेड्डी से हुई, जिसने उसे अल्प्राज़ोलम बनाने का फॉर्मूला 2 लाख रुपये में बेचा।
स्कूल की आड़ में एक साल से चल रहा था खेल
जांच से पता चला कि गौड़ पिछले एक साल से स्कूल की इमारत का इस्तेमाल कर रहा था।
स्कूल में करीब 130 बच्चे पढ़ते थे और कक्षा 7 तक की पढ़ाई होती थी।
ग्राउंड फ्लोर पर बैंक था,
पहली मंजिल पर कुछ कक्षाएं,
और पिछले हिस्से में ड्रग्स बनाने की यूनिट लगाई गई थी।
ताड़ी में मिलाकर बेचा जाता था नशा
गौड़ तैयार माल को महबूबनगर जिले के बूथपुर और आसपास के ताड़ी डिपो में सप्लाई करता था। वहां अल्प्राज़ोलम को ताड़ी में मिलाकर अधिक नशे वाला बनाया जाता था।
बड़ी वारदात से जुड़ा मामला
पुलिस के अनुसार, जुलाई 2025 में हैदराबाद के कुकटपल्ली इलाके में ताड़ी में अल्प्राज़ोलम मिलाने से 9 लोगों की मौत हो गई थी और 50 लोग बीमार पड़े थे। अब ईगल टीम गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि उन सप्लायरों तक पहुंचा जा सके, जो रसायन उपलब्ध कराते थे।


