पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आमंत्रण पर तीजा-पोरा पर्व धूमधाम से सम्पन्न, हजारों माताओं-बहनों ने किया उत्साहपूर्वक सहभागिता।
रायपुर।25।08।2025 (छत्तीसगढ़ जनसंपर्क)
लोक संस्कृति तीजा पोरा पर महिला सम्मेलन
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेवता पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम आज पारंपरिक लोक संस्कृति और नारी शक्ति की भावनाओं से गूंज उठा। तीजा-पोरा पर्व के अवसर पर आयोजित भव्य महिला सम्मेलन में प्रदेशभर से हजारों माताएँ-बहनें शामिल हुईं।
मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने महिलाओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि तीजा नारी शक्ति की दृढ़ निष्ठा और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “माताओं-बहनों की इतनी बड़ी उपस्थिति मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति अपनत्व और इस पर्व की महत्ता को दर्शाती है।”
कार्यक्रम में माताओं-बहनों का स्वागत साड़ी, श्रृंगार सामग्री और छत्तीसगढ़ी कलेवा भेंटकर किया गया।
कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने तीजा को खुशी और आत्मीयता का पर्व बताया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने
इसे धार्मिक, सामाजिक और प्राकृतिक सामंजस्य का प्रतीक कहा।
सरकार की महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए श्री साव ने बताया कि प्रदेश की 70 लाख से अधिक महिलाओं को हर माह एक हजार रुपए की राशि दी जा रही है, जिससे महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और परिवार को मजबूती दे रही हैं।
इस अवसर पर पूर्व सांसद श्रीमती सरोज पांडेय, श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे समेत अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।
पंडवानी गायिका पद्मश्री श्रीमती उषा बारले और लोकगायिका कुमारी आरु साहू को सम्मानित कर आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।
संपादकीय भाव (रिव्यू)
तीजा-पोरा पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और नारी शक्ति के मान-सम्मान का उत्सव भी है। ‘विष्णु भइया’ के आमंत्रण पर बहनों की भारी भागीदारी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की परंपराएँ आज भी जीवन और राजनीति को जोड़ने का काम करती हैं। यह आयोजन केवल संस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम भी है।


