बिहार में एसआईआर 2025 के तहत अब तक 98.2% निर्वाचकों के दस्तावेज़ जमा हो चुके हैं। शेष 1.8% के लिए 1 सितंबर तक समय, अंतिम सूची 30 सितंबर को।
Posted On: 24 AUG 2025, 10:15 AM | By PIB Delhi | जनचौपाल36
🔹 बिहार में निर्वाचक सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण
बिहार में 24 जून से 25 जुलाई 2025 तक चले निर्वाचक सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के गणना चरण का सफल समापन हो चुका है। इसके बाद 1 अगस्त 2025 को प्रारूप निर्वाचक सूची प्रकाशित की गई।
दावे, आपत्तियां और दस्तावेज़ जमा करने की अवधि 1 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तय की गई है।
🔹 98.2% निर्वाचकों के दस्तावेज़ प्राप्त
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार के अनुसार अब तक 98.2% निर्वाचकों के दस्तावेज़ प्राप्त हो चुके हैं।
इसका अर्थ है कि 60 दिनों में प्रतिदिन औसतन 1.64% निर्वाचकों ने दस्तावेज़ जमा किए।
अब केवल 1.8% निर्वाचक शेष हैं, जिनके दस्तावेज़ बीएलओ और स्वयंसेवकों की मदद से एकत्र किए जा रहे हैं।
🔹 राजनीतिक दलों और अधिकारियों की सक्रिय भूमिका
भारत निर्वाचन आयोग ने 38 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी, 243 ईआरओ, 2,976 एईआरओ, 90,712 बीएलओ, लाखों स्वयंसेवकों और सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की है।
इन राजनीतिक दलों के 1.60 लाख बीएलए (Booth Level Agents) भी प्रक्रिया में लगातार सहयोग कर रहे हैं।
🔹 दावे और आपत्तियां
अब तक कुल 0.16% दावे और आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
इनमें से 1,21,143 दावे और आपत्तियां सीधे निर्वाचकों से प्राप्त हुई हैं।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए से 10 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
अन्य व्यक्तियों की ओर से कोई दावा दर्ज नहीं हुआ।
🔹 नए निर्वाचक
1 जुलाई या 1 अक्टूबर 2025 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं में से 3,28,847 नए निर्वाचकों ने फार्म-6 और घोषणा पत्र प्रस्तुत किया है।
🔹 आगे की प्रक्रिया
25 सितंबर 2025 तक सभी दावों और आपत्तियों पर निर्णय एवं दस्तावेज़ों का सत्यापन संबंधित ईआरओ/एईआरओ द्वारा पूरा किया जाएगा।
अंतिम निर्वाचक सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित होगी।
✅ निष्कर्ष / संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial View):
बिहार में एसआईआर की प्रगति यह दर्शाती है कि प्रशासनिक व्यवस्था, तकनीकी सहयोग और जनता की भागीदारी के चलते निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है बल्कि आने वाले चुनावों की विश्वसनीयता को भी सुनिश्चित करती है।


