जन चौपाल डेस्क | बेमेतरा | 04 जुलाई 2025
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली को लागू हुए आठ वर्ष पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को शुरू हुई इस कर प्रणाली ने देश की कर व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव लाया। GST के माध्यम से पूरे देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार किया गया।
रिकॉर्ड कर संग्रह: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली को लागू हुए आठ वर्ष पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को शुरू हुई इस कर प्रणाली ने देश की कर व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव लाया। GST के माध्यम से पूरे देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार किया गया।
रिकॉर्ड कर संग्रह: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती
GST लागू होने के आठ वर्षों में कर संग्रह लगातार बढ़ता गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल GST संग्रह ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2024-25 में मासिक औसत संग्रह ₹1.84 लाख करोड़ रहा, जो आर्थिक मजबूती और करदाताओं के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
उद्योग जगत की सकारात्मक प्रतिक्रिया
हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में देश के 85% से अधिक उद्योगपतियों और व्यापारियों ने GST प्रणाली को पारदर्शी, सरल और विकासोन्मुख बताया है। व्यापारियों का मानना है कि GST से कर प्रक्रिया में जटिलताएं कम हुई हैं और अनुपालन आसान हुआ है।
सरकार का सरलीकरण पर जोर
वित्त मंत्रालय का कहना है कि GST प्रणाली को और सरल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। छोटे व्यवसायों के लिए ई-इनवॉयसिंग, कंपोजीशन स्कीम और त्वरित रिफंड जैसी सुविधाएं GST प्रणाली को अधिक सहज बना रही हैं।
अर्थशास्त्रियों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि GST ने भारत को एकीकृत बाजार में बदल दिया है, जिससे व्यापार में आसानी और निवेश के नए अवसर खुले हैं। आने वाले वर्षों में GST प्रणाली से डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को भी बल मिलेगा।
निष्कर्ष: GST बना भारत की आर्थिक मजबूती का आधार
GST के आठ वर्षों के सफर ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक समान कर प्रणाली से न केवल कर संग्रह बढ़ता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। GST आज भारतीय व्यापार जगत के लिए एक स्थायी और विकासशील आधार बन चुका है।
✍️ रिपोर्ट: जन चौपाल टीम


