जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने बेमेतरा में कोटवारी/सेवा भूमि के कथित विक्रय का मामला राज्यपाल रमेन डेका के सामने उठाया है। उन्होंने सर्किट हाउस में राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में आशीष छाबड़ा ने बताया कि बेमेतरा जिला मुख्यालय के पटवारी हल्का नंबर 27, कोबिया में स्थित कोटवारी/सेवा भूमि के विक्रय का मामला सामने आया है। उनका आरोप है कि पूर्व में यह भूमि संतू दास मानिकपुरी के नाम दर्ज थी, जिसका बाद में नामांतरण/फौती उनके पोते प्रदीप कुमार मानिकपुरी के नाम कर दिया गया।
पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि यदि संबंधित भूमि कोटवारी सेवा भूमि है तो उसका इस तरह फौती नामांतरण कैसे किया गया। उनका आरोप है कि भूमि को बेचने का रास्ता तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई।
कोटवारी भूमि की बिक्री की जांच की मांग
आशीष छाबड़ा ने राज्यपाल से मांग की कि कोबिया सहित बेमेतरा जिले के अन्य गांवों में कोटवारी या सेवा भूमि की बिक्री और रजिस्ट्री के मामलों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी जमीनों को कथित रूप से अवैध तरीके से बेचने और रजिस्ट्री किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
उन्होंने संबंधित पटवारियों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
कोबिया में कोटवार व्यवस्था खत्म होने के बाद जमीन बेचने का आरोप
पूर्व विधायक ने कहा कि कोबिया अब बेमेतरा नगर पालिका का हिस्सा है और यहां कोटवार नियुक्त करने की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद पहले कोटवार को दी गई सेवा भूमि को बेच दिया गया।
उन्होंने इस मामले में तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
आशीष छाबड़ा का कहना है कि यह मामला केवल कोबिया तक सीमित नहीं है। जिले के दूसरे गांवों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना जरूरी है कि कोटवारी/सेवा भूमि की बिक्री में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और यदि हुआ है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने पाकिस्तान से भारत में सामान लाने पर लगे प्रतिबंध को दरकिनार करने की कोशिश का बड़ा मामला पकड़ा है। DRI ने महाराष्ट्र के नासिक में 362 मीट्रिक टन से ज्यादा सूखे खजूर जब्त किए हैं।
DRI अधिकारियों को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर नासिक के CFS अंबड में 13 कंटेनरों को रोका गया। ये कंटेनर मुंबई की एक फर्म ने मंगवाए थे। कागजों में इन सूखे खजूर का मूल देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) बताया गया था और खेप UAE के जेबेल अली बंदरगाह से भारत पहुंची थी।
जांच में पाकिस्तान से कनेक्शन सामने आया
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन सूखे खजूर को पाकिस्तान से भेजा गया था। इसे छिपाने के लिए माल को पहले पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से UAE के जेबेल अली बंदरगाह भेजा गया।
जेबेल अली पहुंचने के बाद माल को दूसरे कंटेनरों में डालकर अलग जहाज में लोड किया गया और फिर भारत भेजा गया। जांच में यह भी पता चला है कि इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान के नागरिकों द्वारा संचालित संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया। यानी माल पाकिस्तान से चला, लेकिन भारत पहुंचने से पहले UAE के रास्ते और दूसरे कंटेनरों के जरिए उसकी पहचान बदलने की कोशिश की गई।
पाकिस्तान से आयात पर लगा है प्रतिबंध
भारत सरकार ने 2 मई 2025 से पाकिस्तान से आने वाले सामान के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात और ट्रांजिट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। यह प्रतिबंध पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया गया था।
इसके बाद DRI ने ऐसे मामलों पर निगरानी बढ़ाई है, जिनमें पाकिस्तान के सामान को किसी तीसरे देश के रास्ते भारत लाने की कोशिश की जा रही है।
तीसरे देश के रास्ते सामान लाने पर DRI की नजर
DRI के मुताबिक, ‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’ के तहत ऐसे मामलों की लगातार जांच की जा रही है। इस अभियान में पाकिस्तान से आने वाले उन सामानों को पकड़ा जा रहा है, जिन्हें दूसरे देशों के जरिए भारत लाने की कोशिश की जा रही है।
नासिक में हुई यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। अधिकारियों को आशंका है कि पाकिस्तान से आने वाले सामान की असली पहचान छिपाकर भारत में पहुंचाने के लिए दस्तावेजों और शिपमेंट की व्यवस्था में बदलाव किया गया।
मामले की आगे जांच जारी है। DRI यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग और कंपनियां शामिल हैं और पाकिस्तान से भारत तक सामान पहुंचाने के लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा – टीम की सफलता खिलाड़ियों की प्रतिभा और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है
नई दिल्ली- 13 सितंबर 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अजेय रहते हुए शानदार प्रदर्शन के साथ लगातार दूसरी बार एशिया कप का खिताब जीतने पर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई दी है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने संदेश में कहा, “भारतीय हॉकी के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण! अजेय रहते हुए शानदार प्रदर्शन के साथ लगातार दूसरी बार एशिया कप का खिताब जीतने पर हमारी जूनियर महिला हॉकी टीम को बधाई। उनकी यह सफलता खिलाड़ियों की प्रतिभा और उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। पूरी टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!”
प्रधानमंत्री ने पूरी टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह जीत भारतीय हॉकी के लिए गर्व का पल है।
बेमेतरा, 14 सितंबर 2026 — छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका आज अपने बेमेतरा प्रवास के दौरान जिले के प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से मां भद्रकाली की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
मंदिर पहुंचने पर मंदिर समिति द्वारा राज्यपाल महोदय का आत्मीय स्वागत किया गया। पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई गई। राज्यपाल ने मंदिर परिसर में कुछ समय व्यतीत किया और मंदिर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी ली।
छत्तीसगढ़ देवी-देवताओं और आध्यात्म की पावन भूमि है। यहां की संस्कृति और आस्था अत्यंत समृद्ध है। मां भद्रकाली के दरबार में आकर मन को असीम शांति प्राप्त हुई है- राज्यपाल श्री डेका
“फिट रहेगा युवा, तभी हिट रहेगा छत्तीसगढ़”
माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज बेमेतरा शहर के परशुराम चौक स्थित अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित “द प्राइम जिम” का फीता काटकर भव्य शुभारंभ किया। जिम का अवलोकन किया और संचालकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज के समय में शारीरिक फिटनेस अत्यंत आवश्यक है।
युवा नशे से दूर रहकर जिम और खेलों से जुड़ेंगे तो शरीर के साथ-साथ मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे। स्वस्थ युवा ही स्वस्थ छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का निर्माण करेंगे।
जिम संचालक द्वारा बताया गया कि इस जिम में युवाओं एवं महिलाओं के लिए आधुनिक कार्डियो, वेट ट्रेनिंग मशीनें, पर्सनल ट्रेनिंग एवं डाइट काउंसलिंग की विशेष सुविधा उपलब्ध है।
इस गरिमामय अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारी, नगर के गणमान्य नागरिक, खेल प्रेमी एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना ही हमारी सुशासन सरकार का संकल्प: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
बेमेतरा- 13 सितंबर 2026
शिक्षक राष्ट्र निर्माण के सच्चे शिल्पकार शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 81 शिक्षकों का सम्मान किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बेमेतरा के बेसिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित भव्य शिक्षक सम्मान समारोह और विकास कार्यों के लोकार्पण व भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे और हर क्षेत्र में बेहतर सुविधाओं का विस्तार हो—यही हमारी सुशासन सरकार का संकल्प है।” उन्होंने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और ग्रामीण विकास से जुड़ी ये परियोजनाएं बेमेतरा की जनसुविधाओं को मजबूत करेंगी और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के हमारे संकल्प को नई गति और मजबूती प्रदान करेंगी।
बेमेतरा के बेसिक स्कूल मैदान में शिक्षक सम्मान समारोह और ₹183.36 करोड़ के 30 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन संपन्न।
इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे जीवन की सही राह दिखाते हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए नई पीढ़ी को तैयार करते हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बेमेतरा जिले को 183.36 करोड़ रुपये की लागत वाले 30 विभिन्न विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। इनमें 153.55 करोड़ रुपये के 22 कार्यों का भूमिपूजन और 29.80 करोड़ रुपये के 8 कार्यों का लोकार्पण शामिल है।
राष्ट्र के विकास में शिक्षकों का योगदान अतुलनीय: अरुण साव
कार्यक्रम में उपस्थित उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षकों के ज्ञान और सही मार्गदर्शन से ही युवा राष्ट्र की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान देते हैं।
जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि वेदों-पुराणों में शिक्षकों का बड़ा महत्व रहा है। हमारी सनातन परम्परा में गुरु का स्थान सदैव सर्वोपरि रहा है।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी उपस्थिति इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री दयालदास बघेल, बेमेतरा विधायक दीपेश साहू, साजा विधायक ईश्वर साहू, भाजपा जिलाध्यक्ष, स्थानीय जनप्रतिनिधि, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ अब सोलर क्रांति की ओर बढ़ रहा है आज बहुत से घरों में सोलर पैनल लगाया गया है, जिससे बिजली की बचत और बिजली की खपत कम की जा रही है ।
बिजली के बढ़ते हुए दर और सरकारी सुविधाओं में कमी के कारण आज आम आदमी के घरों में अब सोलर पैनल सिर्फ़ बिजली बचत का ज़रिया नहीं, बल्कि एक छोटी ‘छत की कमाई’ बनता जा रहा है।
गर्मियों में एसी-पंखे चलते ही बिल आसमान छूने लगता है—ऐसे में 3 किलोवाट (kW) का घरेलू सोलर सिस्टम सबसे ज़्यादा पसंद किया जा रहा है।
2026 में सोलर पैनल की असली कीमत (मॉड्यूल लेवल)सब अनुमानित है।
इसका मतलब, 400–450 Wp का एक पैनल मोटे तौर पर ₹9,000–₹13,000 और 560–600 Wp का प्रीमियम पैनल ₹16,000–₹21,000 के बीच पड़ सकता है—जैसा कि आपने बताया, यह सिर्फ़ पैनल की कीमत है।
मोनो PERC (400–500 Wp): ₹13.8–₹14.2 प्रति वाट (फ़ैक्टरी/मॉड्यूल रेट) TOPCon / N-Type (540–600 Wp): ₹14.2–₹22.3 प्रति वाट (DCR वाले महंगे) पॉलीक्रिस्टलाइन: ₹20–₹26 प्रति वाट (कम दक्षता, बजट विकल्प)
3 kW सिस्टम पर एक अनुमानित बजट
3 kW = 3000 वाट। पैनल संख्या सीधे वाटेज पर निर्भर करती है:
पैनल क्षमता
अनुमानित पैनल संख्या
छत क्षेत्र (लगभग)
400 Wp
8 पैनल
300–320 वर्ग फुट
450 Wp
7 पैनल
280–300 वर्ग फुट
500 Wp
6 पैनल
250–280 वर्ग फुट
540–550 Wp
6 पैनल
250–280 वर्ग फुट
600 Wp
5 पैनल
220–250 वर्ग फुट
कुल सिस्टम लागत (इन्वर्टर, माउंटिंग, वायरिंग, इंस्टॉलेशन समेत): बिना सब्सिडी: ₹1.5 लाख – ₹2.4 लाख PM सूर्य घर सब्सिडी (केंद्रीय ₹78,000) के बाद: ₹72,000 – ₹1.62 लाख ।
कीमत और सब्सिडी इसके लिए आप सोलर पैनल लगाने वाले एजेंसियों से संपर्क कर सकते हैं।
छत चेक करें: धूप सीधी पड़ती हो, छाया (पेड़/पड़ोसी इमारत) कम हो। DCR पैनल लें: सब्सिडी के लिए DCR (Domestic Content Requirement) पैनल ज़रूरी है—थोड़ा महंगा, पर सब्सिडी मिलती है।
कंपनी/वेंडर: स्थानीय इंस्टॉलर से कम से कम 3 कोटेशन लें; वारंटी (पैनल 25 साल, इन्वर्टर 5–10 साल) और AMC ज़रूर पूछें।
बिल के हिसाब से साइज़: 3 kW आमतौर पर 250–400 यूनिट/महीना खपत वाले घरों के लिए ठीक बैठता है।
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर अब सिर्फ़ तकनीक का मुद्दा नहीं, बल्कि आम आदमी की जेब और भरोसे का सवाल बन गया है। उपभोक्ता कह रहे हैं—घर के सभी उपकरण बंद होने के बाद भी मीटर की रीडिंग बढ़ रही है। विपक्ष ने इसी को पकड़कर राज्यव्यापी अभियान छेड़ दिया है।
शिकायतें: बंद उपकरण, फिर भी बढ़ता बिल
चरणदास महंत समेत कई नेताओं का कहना है कि प्रदेश के कई इलाकों से स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें लगातार आ रही हैं। लोगों ने वीडियो और अन्य सबूत भी दिखाए हैं, जिनमें साफ़ दिखता है कि मुख्य स्विच ऑफ़ होने के बावजूद मीटर की रीडिंग चलती रहती है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
कांग्रेस का ‘स्मार्ट मीटर हटाओ’ अभियान
महिला कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर हटाने का विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। ग्रामीण महिला कांग्रेस की महामंत्री भुवनेश्वरी दास की अगुवाई में हुई बैठक में कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से यह कदम उठाया। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद ‘कथनी और करनी’ में फर्क साफ़ दिख रहा है।
जिला-दर-जिला तैयारी
रायपुर,कोरबा,बिलासपुर,कोरबा,जगदलपुर,में ग्रामीण महिलाओं को जोड़ने और स्मार्ट मीटर हटाने के लिए खास रूपरेखा तैयार की गई है। शहर और ग्रामीण कांग्रेस इकाइयों ने वार्ड और पंचायत स्तर पर बैठकें कर विरोध को तेज किया है।
रायपुर राजधानी के वार्डों और आसपास के ग्रामीण इलाकों (जैसे भाटापारा) में कार्यकर्ता घर-घर जाकर विरोध फॉर्म भरवा रहे हैं। बस्तर क्षेत्र में नांगुर और आसपास के गांवों में ‘डोर-टू-डोर अभियान’ चलाकर ग्रामीणों से आवेदन लिए गए हैं।
अन्य जिले पर भी जांजगीर-चंपा (सक्ती), रायगढ़, दुर्ग और बैकुंठपुर (अंबिकापुर) जैसे इलाकों से भी ‘स्मार्ट मीटर हटाओ’ अभियान की खबरें हैं।
महिला संगठन को मिलेगी नई ताकत
महामंत्री भुवनेश्वरी दास ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला संगठन को और मजबूत करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को जोड़ना पहली प्राथमिकता है। साथ ही, वार्ड स्तर पर पदाधिकारियों का चयन कर सभी महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।
स्थानीय समस्याएं: पानी, बिजली, सफाई
नेताओं का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में पानी, बिजली और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं में लगातार दिक्कतें आ रही हैं। गर्मी और बारिश, दोनों मौसम में परेशानी बनी हुई है। उनका सवाल है—केंद्र, राज्य और नगर में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार होने के बाद भी ये समस्याएं क्यों बनी हैं?अगले चरण में यह मुद्दा और तेजी से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
जन चौपाल 36 विशेष :_स्मार्ट फोन स्मार्ट टीवी अब स्मार्ट मीटर हो गया कि जनता से पैसा वसूलें कैसे पर अभी देखना यह बाकी है कि जनता स्मार्ट कब होती है ,जनता स्मार्ट हो जाएगी तो सरकार को सोचना पड़ेगा।
युवा ड्रीम्स में आज नौकरी पाना हर युवा की पहली चिंता है। चाहे भारत हो या अमेरिका—दोनों जगह टेक सेक्टर में प्रतिस्पर्धा तेज है, लेकिन प्रक्रिया और परिणाम में फर्क साफ दिखता है। एक टेकी ने हाल ही में रेडिट पर दोनों देशों के इंटरव्यू और सैलरी का तुलनात्मक चित्र रखा, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी।
भारत: लंबा रेस, ज्यादा दौड़ने वाले
भारत में अच्छी टेक नौकरी पाना आसान नहीं रहा। एक पोस्ट के लिए सैकड़ों-हजारों उम्मीदवार आवेदन करते हैं। यही वजह है कि कंपनियां चयन प्रक्रिया को कई चरणों में बांट देती हैं—रिज्यूमे स्क्रीनिंग, फोन राउंड, टेक्निकल टेस्ट, कोडिंग राउंड, मैनेजर और एचआर इंटरव्यू। कई बार यह पूरा दौर कई दिनों तक चलता है।
कंपनियां सिर्फ तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि समस्या सुलझाने की क्षमता, टीम वर्क और कम्युनिकेशन स्किल भी परखती हैं। उम्मीदवार को हर राउंड के लिए अलग से तैयारी करनी पड़ती है, जिसमें कई घंटे लग जाते हैं।
अमेरिका: कम भीड़, पर कसौटी वही
अमेरिका में भी टेक नौकरियों के इंटरव्यू आसान नहीं होते। वहां भी कोडिंग, सिस्टम डिजाइन और पिछले प्रोजेक्ट्स पर गहरे सवाल पूछे जाते हैं। लेकिन अंतर यह है कि वहां एक पद के लिए उम्मीदवारों की संख्या भारत जितनी ज्यादा नहीं होती। इसलिए प्रक्रिया कुछ हद तक सीधी और तेज हो सकती है।
सैलरी का फर्क: आंकड़े बनाम हकीकत
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हुई कि भारत में कठिन इंटरव्यू के बाद भी सैलरी अमेरिका के मुकाबले कम मिलती है। सच यह है कि अमेरिका में उसी प्रकार की पोस्ट के लिए वेतन पैकेज काफी ऊंचा हो सकता है। लेकिन सीधी तुलना पूरी तस्वीर नहीं दिखाती—दोनों देशों में रहने का खर्च, टैक्स संरचना, नौकरी का बाजार, कंपनी का आकार और अनुभव के आधार पर वेतन में बड़ा अंतर होता है।
सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?
मीडिया चर्चा के अनुसार भारत में टेक सेक्टर में भीड़ बहुत ज्यादा है, इसलिए कंपनियां सख्त चयन प्रक्रिया अपनाती हैं।
कुछ का मानना है कि अमेरिका के इंटरव्यू भी उतने ही कठिन होते हैं, इसलिए सिर्फ मुश्किल होने के आधार पर तुलना ठीक नहीं। कई युवाओं ने कहा कि तैयारी और सही कंपनी चुनना दोनों ही मायने रखते हैं।
आखिर नौकरी कैसे मिलेगी?
चाहे भारत हो या अमेरिका, सिर्फ डिग्री से काम नहीं चलता। मजबूत तकनीकी पकड़, समस्या समझने और हल निकालने की क्षमता, अच्छी बातचीत और टीम के साथ काम करने का हुनर जरूरी है। साथ ही, जिस कंपनी में आवेदन कर रहे हैं, उसके इंटरव्यू पैटर्न को पहले से समझ लेना फायदेमंद रहता है।
नौकरी का रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन सही तैयारी और धैर्य से मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।
बेमेतरा पुलिस ने करीब 65 हजार रुपये का माल किया बरामद, मोटरसाइकिल और चोरी में इस्तेमाल औजार जब्त।
बेमेतरा-12 सितंबर 2026
बेमेतरा पुलिस ने सोलर प्लांट से तांबे का केबल वायर चोरी करने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में एक विधि से संघर्षरत बालक की संलिप्तता भी सामने आई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी का तांबे का केबल, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और चोरी में इस्तेमाल किए गए औजार समेत करीब 65 हजार रुपये का सामान बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार, ग्राम गाड़ाडीह स्थित परम पूज्य सोलर प्लांट में लगे 10 तड़ित चालक खंभों से करीब 320 मीटर तांबे का केबल वायर चोरी हो गया था। इसकी कीमत लगभग 40 हजार रुपये बताई गई। प्रार्थी योगेन्द्र सिरमौर की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हरीश यादव और एसडीओपी बेरला रुचि वर्मा के मार्गदर्शन में थाना परपोडी पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने भोजराम वर्मा, जागेश्वर ठाकुर और रोहन यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पूछताछ में आरोपियों ने एक अन्य साथी के साथ मिलकर चोरी करना स्वीकार किया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 40 हजार रुपये का तांबे का केबल, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल क्रमांक CG 07 LR 7771 जिसकी कीमत करीब 25 हजार रुपये है, तथा कटर, पेंचिंस और छेनी बरामद की।
तीनों आरोपियों को 10 सितंबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में न्यायिक रिमांड पर भेजा गया, जबकि विधि से संघर्षरत बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
13 सितंबर को बेमेतरा छत्तीसगढ़ में शिक्षक सम्मान समारोह होगा। मंच सजेगा, अतिथि आएंगे, भाषण होंगे, शिक्षक सम्मानित होंगे और विकास कार्यों का भूमिपूजन-शिलान्यास भी होगा। निमंत्रण पत्र देखकर लगता है कि शिक्षा और विकास दोनों ने मिलकर छुट्टी के दिन शादी कर ली है।
अब सवाल यह है कि क्या साल में एक दिन शिक्षक को सम्मानित कर देने से शिक्षा व्यवस्था का सम्मान हो जाता है?
जिस शिक्षक को मंच पर सम्मान मिलेगा, वही अगले दिन स्कूल में संसाधनों, शिक्षकों और व्यवस्थाओं की कमी से जूझ सकता है। दूसरी तरफ विद्यार्थी डिग्री लेकर रोजगार की तलाश में भटक रहा है।
विकसित भारत में आज विकास की तस्वीर बड़ी शानदार है—5G है, एक्सप्रेस-वे हैं, स्मार्ट सिटी है, डिजिटल इंडिया है। लेकिन उसी तस्वीर का दूसरा हिस्सा भी है—कहीं साफ पानी के लिए कतार, कहीं रोजगार के लिए लाइन और कहीं अच्छी शिक्षा के लिए महंगी फीस।
देखते हैं मोबाइल स्मार्ट हो गया, शहर स्मार्ट हो गया, सवाल जस का तस—इंसान कब स्मार्ट जीवन जिएगा?
सरकारें जनता को राहत देने के लिए फ्रीबीज योजनाएं चलाती हैं, यह जरूरी भी है। गरीब को सहायता मिलनी चाहिए।अब सवाल खड़ा हो जाता है जब ‘मुफ्त’ राजनीति का स्थायी चुनावी झुनझुना बन जाता है।
जनता यह कभी नहीं पूछेगी— “साहब, मुफ्त में सब कुछ देने की बजाय ऐसा रोजगार दे दीजिए कि अगली बार हमें मुफ्त मांगने की जरूरत ही न पड़े।”
फिर मुद्दे पर आइए,, शिक्षा का असली उद्देश्य सिर्फ डिग्री बांटना नहीं, बल्कि हुनर और रोजगार की तरफ रास्ता खोलना है। अगर डिग्री बढ़ रही है और बेरोजगारी भी बढ़ रही है, तो कहीं न कहीं शिक्षा और रोजगार के बीच का पुल टूट चुका है।और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने पर अगर स्कूल या शिक्षक ‘एडजस्ट’ करने की बात होती है, तो सवाल यह भी होना चाहिए कि बच्चे सरकारी स्कूल से दूर क्यों हुए? गुणवत्ता सुधारने की जिम्मेदारी किसकी है?
छत्तीसगढ़ में एक और उलट पलट पर बहस जरूरी है—एक तरफ बच्चों को संस्कार, शिक्षा और नशामुक्त भविष्य देने की बात, दूसरी तरफ शराब से राजस्व जुटाने की व्यवस्था। समाज पूछ सकता है—हम युवा को अवसर दे रहे हैं या बाजार?
इसलिए शिक्षक सम्मान समारोह में तालियां जरूर बजाइए, लेकिन सवाल भी पूछिए। विकास सिर्फ चौड़ी सड़क नहीं, बेहतर जिंदगी है।
शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, रोजगार की राह है। और सम्मान सिर्फ मंच पर माला नहीं, व्यवस्था में शिक्षक और विद्यार्थी की गरिमा है।