23.1 C
Raipur
Thursday, October 29, 2026
Home Blog Page 83

जशपुर में जनजातीय पर्यटन को बड़ी सौगात, क्लस्टर होमस्टे परियोजना को मिली मंजूरी

रायपुर- 16 सितंबर 2026

सरकार की यह पहल जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (पीएम-जुगा) के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।

परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ सहित 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे, प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे के हिसाब से। इस क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है, जिसमें होमस्टे निर्माण के साथ सामुदायिक सुविधाओं का भी प्रावधान है।

यह परियोजना पारंपरिक होटल आधारित पर्यटन से आगे बढ़कर कम्यूनिटी बेस्ड टूरिज्म को प्रोत्साहित करेगी। पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवन को करीब से अनुभव करने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक गांव में सामुदायिक सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपये तक के कार्य भी प्रस्तावित हैं।

चयनित गांव कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के निकट हैं, जिससे पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने की संभावना है। परियोजना से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, गाइडिंग, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार मिलेगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनजातीय व ग्रामीण संस्कृति की विरासत संरक्षित रखते हुए स्थानीय समुदायों को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।

उन्होंने कहा कि यह क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे पर्यटक जशपुर की प्रकृति के साथ जनजातीय जीवन और परंपराओं को भी करीब से अनुभव करेंगे।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव और स्थानीय परिवारों को भी इसका सीधा भागीदार बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को जोड़ने वाला मॉडल बनेगा।

धान के साथ मछली पालन से बदली महासमुंद के किसानों की किस्मत

0

रायपुर- 16 सितंबर 2026

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत जिले के लगभग 150 किसान मत्स्य पालन से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।

महासमुंद जिले में परंपरागत रूप से धान की खेती पर निर्भर किसान अब मछली पालन को आय का नया जरिया बना रहे हैं। किसी ने तालाब बनाकर तो किसी ने हैचरी और पाउंड लाइनर यूनिट स्थापित कर इसे व्यवसाय का रूप दिया है।
बिरकोनी के किसान दिनेश चन्द्राकर ने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब और 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी तैयार की। उनके अनुसार 8 से 9 महीने में 15 टन तक मछली तैयार हो जाती है, जिसकी लागत करीब 70-80 रुपए प्रति किलो आती है जबकि बाजार में यह 120-150 रुपए प्रति किलो तक बिकती है।
बकमा के हिमांशु चंद्राकर ने 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट स्थापित कीं, जिसमें उन्हें 60 प्रतिशत सरकारी अनुदान मिला। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपए की बचत हो रही है।

मछली पालन के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार भी बढ़ा है। बिरकोनी में जुड़े मजदूरों को अब गांव में ही सालभर काम मिल रहा है, जिससे उन्हें करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह की आय हो रही है।

योजना के तहत नए तालाब, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।

धान की पारंपरिक खेती के साथ अब मछली पालन महासमुंद के किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी, स्वरोजगार और ग्रामीण रोजगार का मजबूत आधार बन रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण: राज्यपाल रमेन डेका

अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह

रायपुर 16 सितंबर 2026

राज्यपाल रमेन डेका ने संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा से जुड़ी रायगढ़ की धरती पर 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का सोमवार को महाराजा चक्रधर की तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। 14 से 23 सितंबर तक रामलीला मैदान में आयोजित इस समारोह में देश-प्रदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाएं भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगी।

शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया, जिनमें पद्मश्री डॉ. उषा बारले, पद्मश्री अनुज शर्मा सहित कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्य शामिल थे। राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया और उनकी कृतियां ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ तथा ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ, करमा जैसी लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि चक्रधर समारोह सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि महाराजा चक्रधर सिंह का जन्म 19 अगस्त 1905 को हुआ था और उन्होंने भारतीय कला-संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने महाराजा की रचनाओं के संरक्षण-प्रकाशन का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा है, जिस पर प्रधानमंत्री ने विशेष रुचि दिखाई है।
लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। महापौर जीवर्धन चौहान ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत करते हुए जिला-पुलिस प्रशासन, आयोजन समिति व रायगढ़वासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और मीडिया के सहयोग के लिए आभार जताया।
समारोह की पहली शाम की शुरुआत रामलीला मैदान में गणेश वंदना से हुई, जिसे वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पिछले वर्ष समारोह ने अपने 40 वर्ष पूरे किए थे और अब 41वां समारोह नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।

महिला स्वास्थ्य अधिकारियों से अभद्र व्यवहार के आरोप में बेमेतरा सीएमएचओ निलंबित

स्वास्थ्य विभाग की जांच में आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट, कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से समझौता नहीं: स्वास्थ्य मंत्री

रायपुर-15 सितंबर 2026

बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अमृतलाल रोहलेडर को राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ अशोभनीय एवं अमर्यादित टिप्पणी, अभद्र और आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग तथा अनुचित स्पर्श किए जाने संबंधी शिकायतों की जांच के बाद लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने यह कार्रवाई की है।

शिकायत की जांच के दौरान संबंधित महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच प्रतिवेदन में डॉ. रोहलेडर के विरुद्ध अनुचित भाषा के प्रयोग और अनुचित स्पर्श से जुड़े आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच अधिकारी ने मामले में विधिवत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल सेवाएं देना ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और मर्यादित आचरण बनाए रखना भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पद पर बैठा व्यक्ति नियमों और मर्यादाओं से ऊपर नहीं है। शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य विभाग में भयमुक्त, सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा।

राज्य शासन ने डॉ. रोहलेडर को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित किया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, जगदलपुर संभाग-बस्तर निर्धारित किया गया है। वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

राजेश्री महन्त जी महाराज का दो दिवसीय प्रवास

रायपुर 15 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज का दो दिवसीय प्रवास का कार्यक्रम निर्धारित हुआ है प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश्री महन्त जी महाराज दिनांक 16 सितंबर को दोपहर 12:00 बजे श्री दूधाधारी मठ रायपुर से रवाना होकर जांजगीर पहुंचेंगे।

यहां अपराह्न 3:00 बजे भोपालपुरिया परिवार, शाम 4:00 बजे नैला में बसईवाल परिवार आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। शाम 6:00 बजे उनका आगमन नगर पंचायत राहौद होगा, यहां देवांगन परिवार के जन्मोत्सव के कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।

रात्रि विश्राम शिवरीनारायण मठ में होगा। दिनांक 17 सितंबर को अपराह्न 3 बजे शिवरीनारायण से बम्हनीडीह के लिए रवाना होंगे यहां गगन जयपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित होंगे, शाम 5:50 बजे जांजगीर पहुंचकर राजमिस्त्री कल्याण संघ द्वारा आयोजित भगवान विश्वकर्मा की महाआरती में सम्मिलित होंगे रात्रि 10:30 बजे उनका आगमन श्री दूधाधारी मठ रायपुर होगा।

प्याज का ‘आंसू गैस’ फॉर्मूला: खेत खाली, मंडी में आग और थाली से गायब!

0

NEWS_DESK -15 सितंबर 2026

सितंबर 2026 के आंकड़े साफ़ बता रहे हैं कि प्याज एक बार फिर देश की रिटेल महंगाई का ‘हीरो’ बनने की होड़ में है। केवल एक महीने में थोक भाव 3,235 रुपये से छलांग लगाकर 4,249 रुपये प्रति क्विंटल (31.3% की बढ़त) पर पहुँच गए हैं। अगर पिछले साल सितंबर 2025 (1,837 रुपये/क्विंटल) से तुलना करें, तो यह उछाल 131.3% की रिकॉर्ड तोड़ तेजी दर्शाता है।
राज्यवार तेजी का मिजाज:

  • उत्तरी व मध्य भारत: उत्तर प्रदेश (50.7%), गुजरात (51.4%) और छत्तीसगढ़ (46.4%) में मासिक आधार पर सबसे बड़ी बढ़त देखी गई।
  • पूर्वोत्तर व सुदूर राज्य: मेघालय (6,117 रुपये/क्विंटल), मणिपुर (6,044 रुपये) और केरल (6,072 रुपये) में परिवहन खर्च के चलते कीमतें 6,000 के पार पहुँच चुकी हैं।
  • उत्पादक राज्य: महाराष्ट्र खुद 41.6% की बढ़ोतरी के साथ 3,950 रुपये प्रति क्विंटल पर खड़ा है।
  • बाज़ार का गणित बनाम किसान का गणित:
    मंडी के इस ‘हॉट स्पॉट’ के पीछे तीन मुख्य विलेन हैं—खरीफ फसल की सुस्त आवक, बेमौसम बारिश की अनिश्चितता और ट्रांसपोर्ट का बढ़ता खर्च। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ यह है कि मंडी की इस गर्माहट की मलाई किसान नहीं, बल्कि बिचौलिए और लॉजिस्टिक्स चेन काट रहे हैं। लागत, भंडारण का नुकसान और मंडी तक पहुँचने का किराया निकालने के बाद किसान का मुनाफा जस का तस है।

  • आगे की राह:
    त्योहारी सीज़न सामने है। अगर नई फसल की आवक में हफ़्ते-दस दिन की और देरी हुई, तो आम उपभोक्ता की रसोई का बजट और बिगड़ेगा। फिलहाल प्याज न सिर्फ किचन का जायका बिगाड़ रहा है, बल्कि कृषि बाज़ार के नीति-निर्माताओं की भी नींद उड़ा रहा है।

नकली दवाओं का ‘साइलेंट किलर’ नेटवर्क: 50% छूट, 90+ अस्पताल और जिंदगी पर सौदा!

न्यूज डेस्क 15 सितंबर 2026

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाला यह रैकेट इशारा करता है कि नकली दवाओं का यह जाल अभी कई और राज्यों के बड़े अस्पतालों तक फैल सकता है।
कैंसर और आईसीयू की लाइफ-सेविंग (जीवनरक्षक) दवाओं के नाम पर चल रहे देश के संभवतः सबसे बड़े और खौफनाक रैकेट का खुलासा हुआ है। बेंगलुरु में एसआईटी (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने जो परतें खोली हैं, वे सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका नेटवर्क पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
ऑपरेशन बिदादी से कृपा हेल्थकेयर तक: 18 अगस्त को बेंगलुरु के बिदादी और दोद्देरी स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी से इस रैकेट की पहली कड़ी जुड़ी। वहां से लगभग 5 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली दवाएं, फर्जी इनवॉइस, इंजेक्शन भरने के उपकरण और नामी कंपनियों के नकली लेबल जब्त किए गए। इसके बाद कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के 10 ठिकानों पर की गई तलाशी ने जांच का दायरा मिनर्वा सर्कल स्थित ‘कृपा हेल्थकेयर’ तक पहुंचा दिया।
मोडस ऑपरेंडी: कम कीमत और एक्सपायर्ड दवाओं का ‘रीब्रांडिंग’ खेल:
फर्जीवाड़ा: गिरोह सस्ती या एक्सपायर हो चुकी दवाओं को खरीदकर उन पर महंगी लाइफ-सेविंग दवाओं के नकली लेबल चिपका देता था।
अस्पतालों की सांठगांठ: 50 फीसदी तक के भारी डिस्काउंट का लालच देकर यह नकली स्टॉक 90 से ज्यादा अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर्स तक पहुंचाया गया।
नेटवर्क: इस पूरे काले कारोबार को चलाने के लिए 15 से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (MRs) और बिचौलियों के इस्तेमाल का अंदेशा है।
जांच की मौजूदा स्थिति: मामले में कृपा हेल्थकेयर का संचालक वीरेश कुमार गिरफ्तार हो चुका है, जो पिछले 5 सालों से मुख्य मास्टरमाइंड प्रशांत (फिलहाल फरार) के साथ मिलकर यह धंधा चला रहा था।
एसआईटी प्रमुख के मुताबिक, बैंक लेनदेन और सप्लाई चेन के दस्तावेजों की जांच जारी है।

त्यौहार विशेष: औरतों का ‘अदृश्य’ साम्राज्य और त्योहारों का ऑल-इन-वन रिचार्ज

न्यूज आर्टिकल 15 सितंबर 2026

दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को अगर किसी बात का हल नहीं मिला, तो वो है भारतीय महिला का मन! भारतीय औरत समाज का मुख्य केंद्र बिंदु होती है, लेकिन उसे केंद्र में बैठकर हुकूमत चलाने का कोई खास शौक नहीं होता। वो राज्यों में बंटे भारत देश की तरह अपनी जिम्मेदारियों में बंटी रहना पसंद करती है।

थोड़ा ध्यान किचन में, थोड़ा बच्चों के करियर में, थोड़ा सास की सेहत में और थोड़ा मोहल्ले की गॉसिप में!
महिलाओं के इस ‘विकेंद्रित’ स्वभाव का सबसे बड़ा सबूत हैं हमारे देश के त्योहार। सच मानिए, अगर देश में महिलाएं न हों, तो सारे त्योहार कैलेंडर की तारीखों में ही सिमटकर रह जाएं। पुरुष तो त्योहार के नाम पर बस एक दिन की छुट्टी तलाशते हैं, लेकिन उसे जीवंत बनाती हैं महिलाएं।
हाल ही में गया तीजा और हरतालिका तीज। 24 घंटे बिना पानी पिए, बिना अन्न का एक दाना खाए महिलाएं उपवास रखती हैं। अब पुरुषों को लगता है कि ये सब उनके लंबे जीवन के लिए हो रहा है, लेकिन इसका असली हास्य-रस तो यह है कि यह 12 महीने का हिसाब-किताब बराबर करने का तरीका है! 24 घंटे की तपस्या करके वो सालभर की अपनी हर बात मनवाने का ‘कोटा’ बुक करा लेती हैं।
अब आगे करवा चौथ और दिवाली की कतार है। करवा चौथ पर पत्नियों की मांग सीधी और स्पष्ट होती है—पतिदेव का ‘दिवाली बोनस’! बोनस जेब में आते ही हर चौखट पर दीया जल उठता है और घर का अंधेरा गायब हो जाता है।

महिलाएं दिवाली इसलिए मनाती हैं ताकि घर में खुशहाली आए, रौनक आए और पूरा परिवार एक साथ झूम उठे। शास्त्रों में ठीक ही कहा गया है—’यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’। जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवता भी नतमस्तक हो जाते हैं।

आखिर देवताओं को भी पता है कि अगर देवी जी रुठ गईं, तो घर का शांति-बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा!

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी से लेकर आज और कल यही गीत गुनगुनाते रहे तो जिंदगी में मजा ही मजा। तुम ही हो माता, पिता तुम ही हो। तुम ही हो बंधु, सखा तुम ही हो॥ तुम ही हो साथी, तुम ही सहारे…।”

राजनीति बुनने लगी भारत माता का आंचल, तो पाणिनि का व्याकरण भी विरोध करेगा”

हिंदी दिवस के संदर्भ में—धर्म, समाज और भाषा को बांटती राजनीति पर एक बेबाक व्यंग्य।

न्यूज आर्टिकल 15 सितंबर 2026

इन दिनों ‘हनुमान’ नाम पर बनी फिल्में चल रही हैं और बड़े-बड़े नेता भी इन्हें देखने की सलाह दे रहे हैं।

लेकिन सवाल यह है कि हनुमान जी का नाम किसने रखा और वे किसके प्रतीक थे? वे तो निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक थे, न कि वोट बैंक की राजनीति के! एक पार्टी कहती है कि दूसरी ने 1947 में देश का भू-भाग बांट दिया, लेकिन आज तो आम आदमी के दिलों और उनके आपसी भाईचारे को बांटने के सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं।

मां की जमीन पर बच्चे कैसे खेलते कूदते है क्या आपने ध्यान से देखा है!?

एक मां ही जानती है कि अपने अलग-अलग मिजाज वाले बच्चों को कैसे पालना है और कैसे संस्कार देने हैं। हम सब उसी भारत माता की संताने हैं—अलग स्थानों पर रहे, अलग काम किए, लेकिन मां का आंचल सबके लिए एक जैसा रहा। पर आजकल के हालात देखकर लगता है कि राजनीति और धर्म के ठेकेदार इस आंचल को ही अलग-अलग थान में काटने पर तुले हैं। अगर भाई-भाई आपस में लड़ने लगे, तो मां का दिल तो टूटेगा ही।

राजनीति में असली मुद्दे कम हो गए हैं!?

आजकल की राजनीति के पास जब असली मुद्दों की कमी होती है, तो वे भावनाओं का बाजार सजा लेते हैं। कभी राम मंदिर के नाम पर चर्चा गरम होती है, तो कभी किसी नए कोटे या कानून को लेकर बहस छिड़ जाती है। सुनने में आया है कि कुछ राज्यों ने इन बदलावों पर विस्तृत चर्चा के लिए गृह मंत्रालय से समय मांगा है, क्योंकि हमारा देश मूलतः धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद पर खड़ा है।

उधर कानपुर से लेकर बड़े शहरों तक यूजीसी और आरक्षण के नए-पुराने नियमों को लेकर आंदोलन चल रहे हैं।

जो वर्ग कभी सत्ता का मुख्य स्तंभ माना जाता था, वह भी सड़कों पर है। मजा देखिए, भाषा से लेकर ग्रंथों तक, प्रकृति के वैज्ञानिक वर्गीकरण से लेकर पाणिनि के व्याकरण तक—जिस संस्कृति ने इस देश को शब्द और पहचान दी, आज राजनीति उसी समाज को बांटने के नए-नए समीकरण खोज रही है।
अगर सबकुछ बांटना ही तय है, तो फिर भाषा और नामकरण भी क्यों छोड़ते हो?अपना नाम क्यों नहीं बदल लेते!!
क्या भारत माता के आंचल को भी बांट देगी वर्तमान राजनीति? पाणिनि के व्याकरण से राजनीति का विरोध!क्या उचित होगा।

1947 में धर्म के आधार पर विभाजन झेल चुका यह देश अब जातियों और वर्गों में नए विभाजन बर्दाश्त नहीं कर सकता। वोट बैंक के लिए चाहे जितने भी टुकड़े करने की कोशिश कर ली जाए, यह पावन भूमि और इसकी मूल भावना कभी इस विभाजन को स्वीकार नहीं करेगी।

छत्तीसगढ़ के शहरों में जलभराव पर बरसे पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया –

“मंत्री-अफसर AC कमरों में सोए हैं, सड़कों पर जनता डूब रही”

रायपुर 14 सितंबर 2026

प्रदेश के पूर्व नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने वर्तमान भाजपा सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की घोर लापरवाही और प्रशासनिक अदूरदर्शिता के कारण आज प्रदेश की जनता नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में भारी बारिश के बाद उपजे जलभराव और बदहाली को लेकर राजनीति गरमा गई है।

स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ कागजी विकास

पूर्व मंत्री डॉ डहरिया ने राजधानी रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और अंबिकापुर की स्थिति का हवाला देते हुए कहा, “प्रदेश के मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे करते नहीं थकते, लेकिन मात्र कुछ घंटों की बारिश ने इनकी ‘डबल इंजन’ सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

आज छत्तीसगढ़ की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।”
उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर के पॉश इलाकों से लेकर बिलासपुर और कोरबा की निचली बस्तियों तक में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। बिलासपुर में स्थिति इतनी बदतर है कि लोग खुद अपने पैसों से सड़कों के गड्ढे भरने को मजबूर हैं। स्मार्ट सिटी और सीवरेज प्रोजेक्ट के अधूरे कामों ने शहरों को मलबे और गड्ढों के ढेर में तब्दील कर दिया है।

मानसून से पहले नालों की सफाई में हुआ बड़ा भ्रष्टाचार

पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा, “हमारे कार्यकाल में मानसून से ठीक पहले सभी नगरीय निकायों में नालों की सफाई और ड्रेनेज मेंटेनेंस की सख्त मॉनिटरिंग की जाती थी। लेकिन वर्तमान सरकार में केवल कागजों पर नालों की सफाई दिखाई गई और बजट को ठिकाने लगा दिया गया। यदि सही समय पर नालों की गाद (सफाई) निकाली गई होती, तो आज कोरबा में 40 से अधिक घरों में पानी नहीं घुसता और न ही लोगों का राशन बर्बाद होता।”

जनता बेहाल, प्रशासन और मंत्री नदारद

उन्होंने गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने और धमतरी-कांकेर जैसे इलाकों में बाढ़ के खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन के नाम पर सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है। “जब जनता के घरों में पानी घुस रहा है, तब नगरीय प्रशासन विभाग सोया हुआ है। मंत्री और अधिकारी वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं।”

पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं की, सड़कों के गड्ढे नहीं सुधारे और पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं दिया, तो वे जनता की आवाज बनकर सड़कों पर उतरेंगे और इस सोई हुई सरकार को जगाने के लिए उग्र आंदोलन करेंगे।