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Thursday, October 29, 2026

धान के साथ मछली पालन से बदली महासमुंद के किसानों की किस्मत

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रायपुर- 16 सितंबर 2026

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत जिले के लगभग 150 किसान मत्स्य पालन से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।

महासमुंद जिले में परंपरागत रूप से धान की खेती पर निर्भर किसान अब मछली पालन को आय का नया जरिया बना रहे हैं। किसी ने तालाब बनाकर तो किसी ने हैचरी और पाउंड लाइनर यूनिट स्थापित कर इसे व्यवसाय का रूप दिया है।
बिरकोनी के किसान दिनेश चन्द्राकर ने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब और 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी तैयार की। उनके अनुसार 8 से 9 महीने में 15 टन तक मछली तैयार हो जाती है, जिसकी लागत करीब 70-80 रुपए प्रति किलो आती है जबकि बाजार में यह 120-150 रुपए प्रति किलो तक बिकती है।
बकमा के हिमांशु चंद्राकर ने 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट स्थापित कीं, जिसमें उन्हें 60 प्रतिशत सरकारी अनुदान मिला। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपए की बचत हो रही है।

मछली पालन के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार भी बढ़ा है। बिरकोनी में जुड़े मजदूरों को अब गांव में ही सालभर काम मिल रहा है, जिससे उन्हें करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह की आय हो रही है।

योजना के तहत नए तालाब, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।

धान की पारंपरिक खेती के साथ अब मछली पालन महासमुंद के किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी, स्वरोजगार और ग्रामीण रोजगार का मजबूत आधार बन रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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