20.5 C
Raipur
Thursday, October 29, 2026
Home Blog Page 61

भूतपूर्व सैनिकों के कोटे में पद खाली रहने पर अब नहीं होगा लंबा इंतजार, सामान्य अभ्यर्थियों से भरने का रास्ता साफ

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD ने सीधी भर्ती में भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। नए आदेश के मुताबिक, यदि किसी भर्ती में भूतपूर्व सैनिक कोटे के लिए पात्र अभ्यर्थी नहीं मिलता है, तो संबंधित पद को अगले वर्ष के लिए आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।ऐसे पदों को चयन सूची या प्रावीण्य सूची के आधार पर गैर-भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थियों से भरा जा सकेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय तक पद खाली रहने की स्थिति को खत्म करने की कोशिश की गई है।

पहले खाली पद अगले साल के लिए हो जाते थे आगे

सीधी भर्ती की कई प्रक्रियाओं में भूतपूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित पदों पर पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने की स्थिति सामने आती थी। ऐसे मामलों में पद रिक्त रह जाते थे और उन्हें अगले भर्ती वर्ष के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जाता था।इसका असर पूरी भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ता था। पदों के खाली रहने के कारण नियुक्तियों में देरी होती थी और कई बार चयन सूची जारी करने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती थी।

GAD ने नियम के तहत स्थिति की साफ

सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार की ओर से जारी आदेश में ऐसी परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। विभाग ने यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ भूतपूर्व सैनिक नियम, 1985 के नियम 4 (3) के तहत बताई है।अब यदि आरक्षित पद के लिए योग्य भूतपूर्व सैनिक उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता है, तो उस पद को खाली रखकर अगले वर्ष के लिए सुरक्षित नहीं किया जाएगा। चयन सूची में निर्धारित प्रावीण्य के आधार पर गैर-भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थियों से पद भरे जा सकेंगे।

सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को फायदा

इस व्यवस्था से सीधी भर्ती में उपलब्ध पदों का इस्तेमाल उसी भर्ती प्रक्रिया में किए जाने का रास्ता साफ होगा। इससे ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकेगा, जो चयन प्रक्रिया में प्रावीण्य सूची में स्थान हासिल करते हैं।साथ ही आरक्षित कोटे में पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक अटके रहने की स्थिति से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

NOC की औपचारिकता भी खत्म

सरकार ने गैर-भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थियों से इन पदों को भरने की प्रक्रिया को लेकर एक और महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। आदेश के मुताबिक, ऐसे पदों को सामान्य अभ्यर्थियों से भरने के लिए राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड या किसी अन्य संबंधित कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेने की जरूरत नहीं होगी।पहले इस तरह की औपचारिकताओं के कारण भर्ती प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता था। नई व्यवस्था से इस चरण को हटाए जाने के बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।

पहाड़ी कोरवा आश्रम में बदहाली का आलम, 3 दिन से बिजली गुल और 2 साल से खराब हैंडपंप…एक किमी दूर से पानी ला रहे बच्चे

 सरगुजा : मैनपाट क्षेत्र में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए संचालित आश्रम में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मामला सामने आया है। बरिमा पंचायत स्थित इस आश्रम में पिछले तीन दिनों से बिजली नहीं है। बिजली बंद होने के कारण पानी का मोटर भी काम नहीं कर रहा है और आश्रम की पानी की टंकी नहीं भर पा रही है।स्थिति यह है कि बच्चों को पीने के पानी के लिए रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। बच्चे खुद बर्तन और डिब्बों में पानी भरकर आश्रम तक ला रहे हैं। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से नहाने और रोजमर्रा के दूसरे कामों में भी उन्हें परेशानी हो रही है।

दो साल से खराब पड़ा है आश्रम का इकलौता हैंडपंप

आश्रम परिसर में पानी की व्यवस्था के लिए लगा इकलौता हैंडपंप भी लंबे समय से बंद है। बताया गया है कि यह हैंडपंप करीब दो साल से खराब पड़ा है। ऐसे में बिजली गुल होने के बाद बच्चों के सामने पानी का संकट और गहरा गया है।आश्रम प्रबंधन के मुताबिक, हैंडपंप से पहले लाल रंग का पानी निकलता था, जिसे पीने योग्य नहीं माना जाता था। बाद में हैंडपंप पूरी तरह खराब हो गया। इसकी जानकारी विभाग को कई बार दिए जाने के बावजूद अब तक इसे दुरुस्त नहीं कराया गया है।

बिजली नहीं होने से पानी की सप्लाई भी ठप

आश्रम की अधीक्षिका के अनुसार मैनपाट क्षेत्र में पिछले तीन से चार दिनों से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। बिजली नहीं होने के कारण पानी का मोटर नहीं चल पा रहा है और टंकी तक पानी नहीं पहुंच रहा है।इसी वजह से बच्चों को पानी जुटाने के लिए आश्रम से बाहर जाना पड़ रहा है। पानी की इस समस्या का सीधा असर बच्चों की दैनिक दिनचर्या पर पड़ रहा है।

सोलर सिस्टम लगा, लेकिन मोटर नहीं चलती

आश्रम में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सोलर सिस्टम भी लगाया गया है। हालांकि, इससे पानी का मोटर संचालित नहीं हो पा रहा है। बरसात के मौसम में मैनपाट में कई दिनों तक बादल छाए रहने से सोलर सिस्टम की क्षमता भी प्रभावित होती है।ऐसे में बिजली कटौती के दौरान आश्रम में पानी और रोशनी दोनों की समस्या खड़ी हो जाती है। रात के समय कई बार पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है।

पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

बिजली की समस्या का असर आश्रम में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर पानी की व्यवस्था के लिए उन्हें रोजाना करीब एक किलोमीटर तक जाना पड़ रहा है।विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए संचालित इस आश्रम में बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग पानी, बिजली और हैंडपंप की समस्या को दूर करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।

कपड़ों के गट्ठों के नीचे छिपा रखा था करोड़ों का गांजा, बॉर्डर से पहले पुलिस ने दबोचे 6 तस्कर

 छत्तीसगढ़ :  मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में पुलिस ने नशे की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पिकअप वाहनों से भारी मात्रा में गांजा जब्त किया है। दोनों वाहनों से कुल 9 क्विंटल 19 किलो गांजा बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 4 करोड़ 59 लाख रुपए बताई गई है। तस्कर गांजे को ओडिशा से मध्यप्रदेश के कटनी ले जा रहे थे और पुलिस से बचने के लिए इसे कपड़ों के गट्ठों के नीचे छिपाया गया था।

चेकिंग के दौरान खुला करोड़ों की तस्करी का राज

पूरा मामला नागपुर चौकी क्षेत्र का है। पुलिस रविवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे चौकी के सामने वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान ओडिशा नंबर की दो पिकअप गाड़ियां वहां पहुंचीं।पुलिस ने दोनों वाहनों को रोककर तलाशी शुरू की। बाहर से दोनों गाड़ियों में कपड़ों के बड़े-बड़े गट्ठर दिखाई दे रहे थे। पुलिस को संदेह होने पर जब इन गट्ठरों को हटाकर नीचे जांच की गई तो प्लास्टिक के पैकेटों में गांजा भरा मिला।

200 से ज्यादा पैकेट में भरा था गांजा

तस्करों ने गांजे को बोरियों और प्लास्टिक के पैकेटों में भरकर कपड़ों के बीच इस तरह छिपाया था कि पहली नजर में किसी को शक न हो। पुलिस ने दोनों पिकअप से 200 से अधिक पैकेट बरामद किए।नागपुर चौकी प्रभारी शेष नारायण सिंह के मुताबिक, जब्त गांजे का कुल वजन 9 क्विंटल 19 किलो है। इसकी अनुमानित कीमत 4 करोड़ 59 लाख रुपए बताई गई है।

दो महिलाओं समेत 6 आरोपी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल हैं। गिरफ्तार दोनों महिलाएं मध्यप्रदेश के कटनी की रहने वाली हैं, जबकि चारों पुरुष आरोपी ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के निवासी बताए गए हैं।पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि गांजे की खेप ओडिशा से लेकर कटनी जानी थी।

जशपुर से लेकर नागपुर तक पार कर चुके थे कई थाना क्षेत्र

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ओडिशा से गांजा लोड करने के बाद जशपुर के रास्ते छत्तीसगढ़ में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे नेशनल हाईवे 43 के जरिए आगे बढ़ते हुए कई थाना क्षेत्रों को पार कर चुके थे।आरोपियों ने सरगुजा जिले के 5 थाना क्षेत्रों, सूरजपुर के 3 थाना क्षेत्रों और कोरिया जिले के 3 थाना क्षेत्रों को पार किया। इसके बाद वे नागपुर तक पहुंच गए थे।

MP बॉर्डर से कुछ किलोमीटर पहले पकड़े गए

तस्करों की योजना गांजे की खेप को मध्यप्रदेश की सीमा पार कर कटनी पहुंचाने की थी। लेकिन बॉर्डर से कुछ किलोमीटर पहले ही नागपुर चौकी के सामने पुलिस की चेकिंग में दोनों वाहन पकड़े गए।पुलिस ने दोनों पिकअप को जब्त कर लिया है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए गांजा तस्करी से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

CG Weather Today: छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई के संकेत, प्रदेश में सामान्य से 5.6 फीसदी ज्यादा बारिश…इन जिलों में अब भी कमी

 छत्तीसगढ़ :  मानसून की गतिविधियां अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं। मौसम विभाग के 26 सितंबर के अपडेट के अनुसार उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश और उससे लगे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बना डिप्रेशन कमजोर होने लगा है। इसके प्रभाव से पिछले दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई, लेकिन अब आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है।

प्रदेश में सामान्य से 5.6 फीसदी अधिक बारिश

एक जून से 26 सितंबर तक छत्तीसगढ़ में कुल 1150.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 1089.6 मिमी रहता है। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से 5.6 फीसदी अधिक बारिश हुई है।आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 14 जिलों में बारिश सामान्य से ज्यादा रही। बलरामपुर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। यहां 1551.6 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 71.1 फीसदी अधिक है।इसके अलावा नारायणपुर में 1720.2 मिमी, गरियाबंद में 1462.1 मिमी, बालोद में 1311.8 मिमी, रायपुर में 1303.6 मिमी और धमतरी में 1301.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

रायपुर में सामान्य से 41.6 फीसदी ज्यादा पानी बरसा

राजधानी रायपुर में भी इस मानसून सीजन बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी ऊपर रहा है। 26 सितंबर तक रायपुर में 1303.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 41.6 फीसदी अधिक है।गरियाबंद में सामान्य से 35.6 फीसदी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 35 फीसदी और महासमुंद में 24.7 फीसदी अधिक बारिश हुई है। वहीं बालोद में सामान्य से 25.7 फीसदी और धमतरी में 22.2 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।दुर्ग जिले में अब तक 963.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य आंकड़े से 17.6 फीसदी अधिक है।

इन जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है

प्रदेश के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं, जहां मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सामान्य से 20.3 फीसदी कम बारिश हुई है। बीजापुर में यह कमी 19.1 फीसदी रही।सुकमा और बेमेतरा में सामान्य से 17.3 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जबकि कांकेर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 16.9 फीसदी नीचे रहा।

सबसे कम बारिश वाले जिलों की स्थिति

  • मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: सामान्य से 20.3 फीसदी कम
  • बीजापुर: 19.1 फीसदी कम
  • सुकमा: 17.3 फीसदी कम
  • बेमेतरा: 17.3 फीसदी कम
  • कांकेर: 16.9 फीसदी कम

मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने के साथ प्रदेश में बारिश का दौर आने वाले दिनों में और कम होने की संभावना है। हालांकि जिन जिलों में अब तक बारिश सामान्य से कम रही है, वहां मौसम में होने वाला बदलाव किसानों और स्थानीय जल स्रोतों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही को मिला बड़ा सम्मान, ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से नवाजा गया; धनपुर पर खास कॉफी टेबल बुक भी लॉन्च

 गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही : पर्यटन के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। जिले की प्राकृतिक खूबसूरती, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को पर्यटन के तौर पर बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने GPM को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है। सम्मान के साथ जिले की प्रमुख पुरातात्विक धरोहर धनपुर पर तैयार की गई विशेष कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया।

विश्व पर्यटन दिवस पर राजधानी में मिला सम्मान

यह पुरस्कार 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर रायपुर में आयोजित ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस’ कार्यक्रम में प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के संयुक्त सहयोग से किया गया था।जिले को मिले इस सम्मान को स्थानीय पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार और उन्हें व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

धनपुर की विरासत को समर्पित कॉफी टेबल बुक का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान धनपुर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत पर केंद्रित कॉफी टेबल बुक भी जारी की गई। इस पुस्तक में धनपुर की पुरातात्विक विशेषताओं, इतिहास और पर्यटन की संभावनाओं को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।कॉफी टेबल बुक का विमोचन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, GPM कलेक्टर विजय दयाराम के. और जिला पंचायत CEO मुकेश रावटे ने किया।

धनपुर को पर्यटन मानचित्र पर मिलेगी नई पहचान

धनपुर अपनी पुरातात्विक विरासत के लिए जाना जाता है। कॉफी टेबल बुक के जरिए यहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन की संभावनाओं को प्रदेश के साथ देशभर के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से धनपुर को व्यापक पर्यटन पहचान मिल सकती है। इसके साथ ही जिले में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को गति देने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन स्थलों के प्रचार को प्रशासन ने बनाया फोकस

GPM जिला प्राकृतिक संसाधनों के साथ धार्मिक और पुरातात्विक स्थलों के लिए भी जाना जाता है। जिला प्रशासन की ओर से पर्यटन स्थलों के संरक्षण, उनकी पहचान मजबूत करने और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ को इन्हीं प्रयासों को मिली मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। सम्मान मिलने के बाद जिले में पर्यटन विकास की योजनाओं और स्थानीय विरासत को नई पहचान देने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में उम्मीदें बढ़ी हैं।

Bank Strike Postponed: ग्राहकों को बड़ी राहत, 28 से 30 सितंबर की बैंक हड़ताल टली…अब आगे क्या होगा?

0

Bank Strike Postponed:  देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर के बीच प्रस्तावित हड़ताल को फिलहाल टाल दिया है। यह फैसला इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बीच रविवार रात हुई बैठक के बाद लिया गया।हड़ताल टलने के बाद बैंकिंग सेवाओं से जुड़े ग्राहकों को फिलहाल लगातार तीन दिनों तक कामकाज प्रभावित होने की चिंता नहीं रहेगी। हालांकि, कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

रविवार रात हुई बैठक में बनी सहमति

IBA और UFBU के प्रतिनिधियों के बीच रविवार रात करीब 9:30 बजे बैठक हुई। इसमें बैंक कर्मचारियों की मांगों और कामकाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने हड़ताल को आगे टालने पर सहमति जताई।बैठक में शनिवार को साप्ताहिक अवकाश से जुड़े मुद्दे पर एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का फैसला भी लिया गया है। यह कमेटी अलग-अलग विकल्पों पर विचार करेगी और संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश करेगी, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।

5 डे वर्किंग को लेकर क्या है बैंक कर्मचारियों की मांग

बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन काम करने की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके तहत शनिवार और रविवार को बैंक शाखाओं में अवकाश रखने का प्रस्ताव है।यूनियनों की ओर से यह विकल्प भी रखा गया है कि सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम किया जा सकता है, ताकि पांच दिन की कार्य व्यवस्था लागू होने पर कामकाज प्रभावित न हो।

PLI को लेकर भी सरकार को भेजे जाएंगे सुझाव

बैठक में स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन यानी PLI स्कीम पर भी चर्चा हुई। यूनियनों और एसोसिएशनों की ओर से इस व्यवस्था को लेकर जो आपत्तियां और सुझाव दिए गए हैं, उन्हें सरकार के समक्ष रखा जाएगा।इसके बाद इस मुद्दे पर IBA की ओर से आगे चर्चा की जाएगी।

26 अक्टूबर से फिर हड़ताल की चेतावनी

फिलहाल सितंबर के आखिरी दिनों में प्रस्तावित हड़ताल टाल दी गई है, लेकिन कर्मचारियों की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यूनियनों ने 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।सरकार की ओर से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह के प्रस्ताव पर विचार करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही गई है। वहीं, बैंकिंग सेवाओं और ग्राहकों की सुविधा को लेकर भी व्यवस्था पर असर नहीं पड़ने की चिंता बनी हुई है।

आज शाम निकलेंगे गणेश झांकियां, 8 प्रमुख रास्तों पर रहेगी नो-एंट्री; घर से निकलने से पहले जान लें ट्रैफिक प्लान

 रायपुर :  गणेश उत्सव के समापन के मौके पर 28 सितंबर को भव्य गणेश झांकी चल समारोह निकाला जाएगा। शाम 6 बजे शारदा चौक से शुरू होने वाला यह जुलूस महादेव घाट स्थित विसर्जन स्थल तक पहुंचेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए यातायात पुलिस ने शहर में ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की व्यवस्था की है।

शाम 6 बजे से झांकी मार्ग पर वाहनों की एंट्री बंद

गणेश झांकी के दौरान शारदा चौक से महादेव घाट तक जाने वाले निर्धारित मार्ग पर शाम 6 बजे से छोटे-बड़े सभी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। यह व्यवस्था झांकी समाप्त होने तक लागू रहेगी।यातायात पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस दौरान झांकी वाले रास्तों पर जाने से बचें और जरूरी होने पर पहले से वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करें।

इन 8 रास्तों पर सबसे ज्यादा रहेगा ट्रैफिक असर

गणेश झांकी के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होगी। इनमें मुख्य रूप से ये रास्ते शामिल हैं:

  • शारदा चौक
  • जयस्तंभ चौक
  • मालवीय रोड
  • कोतवाली चौक
  • सदर बाजार
  • पुरानी बस्ती
  • लाखेनगर चौक
  • रायपुरा चौक से महादेव घाट मार्ग

इन रास्तों पर झांकी के गुजरने के दौरान सामान्य वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी।

महादेव घाट जाने वालों के लिए ये होंगे वैकल्पिक रास्ते

यातायात पुलिस के मुताबिक शारदा चौक से महादेव घाट की ओर जाने वाले वाहन चालक रिंग रोड समेत दूसरे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। जाम को नियंत्रित करने के लिए भारी वाहनों को शहर के बाहरी हिस्सों में ही रोकने की व्यवस्था की गई है।

श्रद्धालुओं के लिए 6 जगह पार्किंग की व्यवस्था

झांकी और गणेश विसर्जन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए यातायात पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की है। वाहन चालक इन निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल कर सकेंगे:

  • मल्टीलेवल पार्किंग
  • रजबंधा मैदान
  • सप्रे शाला मैदान
  • इंडोर स्टेडियम परिसर
  • गांधी मैदान
  • महादेव घाट के पास निर्धारित पार्किंग स्थल

झांकी मार्ग पर गाड़ी खड़ी की तो होगी कार्रवाई

यातायात पुलिस ने लोगों को झांकी मार्ग पर वाहन खड़ा नहीं करने की चेतावनी दी है। प्रतिबंधित स्थान पर पार्क किए गए वाहनों को क्रेन की मदद से हटाया जा सकता है।पुलिस ने श्रद्धालुओं और शहरवासियों से अपील की है कि गणेश झांकी के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन और निर्धारित पार्किंग व्यवस्था का पालन करें, ताकि समारोह के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

बाढ़ प्रभावित सुकमा-बस्तर का आज CM साय करेंगे दौरा, राहत शिविरों में पहुंचकर जानेंगे लोगों का हाल

 छत्तीसगढ़ : कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। सुकमा और बस्तर के कई गांवों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। इस स्थिति के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति देखेंगे।मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रभावित लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी लेने के साथ राहत शिविरों में उपलब्ध सुविधाओं का भी जायजा लिया जाएगा।

सुबह सुकमा पहुंचेंगे सीएम साय, प्रभावित इलाकों का लेंगे जायजा

मुख्यमंत्री कार्यालय के कार्यक्रम के अनुसार विष्णुदेव साय सुबह 10:20 बजे सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास से कार के जरिए पुलिस ग्राउंड हेलीपैड के लिए रवाना होंगे। इसके बाद सुबह 10:30 बजे हेलीकॉप्टर से सुकमा के लिए प्रस्थान करेंगे।मुख्यमंत्री करीब 11:50 बजे सुकमा पहुंचेंगे। यहां वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी निरीक्षण करेंगे। इसके बाद राहत शिविरों में पहुंचकर वहां रह रहे प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे।

राहत शिविरों में भोजन-पानी और दवाओं की व्यवस्था देखेंगे

सुकमा में मुख्यमंत्री राहत शिविरों में लोगों के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी लेंगे। इस दौरान भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता की समीक्षा की जाएगी।मुख्यमंत्री प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी परेशानियां भी जानेंगे। इसके साथ ही अधिकारियों से राहत और बचाव कार्यों की जानकारी लेकर जरूरत के मुताबिक जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

जगदलपुर में भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का करेंगे निरीक्षण

सुकमा के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:40 बजे जगदलपुर पहुंचेंगे। यहां दोपहर 1:50 बजे से 3 बजे तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों का निरीक्षण प्रस्तावित है।जगदलपुर में मुख्यमंत्री जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में जारी व्यवस्थाओं और आगे की तैयारियों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी।

शाम को रायपुर लौटेंगे मुख्यमंत्री

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के बाद मुख्यमंत्री शाम को रायपुर लौटेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक उनका हेलीकॉप्टर शाम 5:15 बजे रायपुर पुलिस ग्राउंड हेलीपैड पर पहुंचेगा। इसके बाद शाम 5:25 बजे वे मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।

राहुल गांधी को चुनाव आयोग और देश से भी माफी मांगनी चाहिए : मुख्यमंत्री साय

00 बार-बार जनता से ठुकरायी जा रही कांग्रेस अब देश के संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने पर आमादा
00 चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इण्डी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश, भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि लगभग सौ बार चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब बौखलाहट में लगातार देशद्रोही आचरण पर उतारू हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुआई में कांग्रेस अब देश की तमाम संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने, लगातार झूठ और फरेब के राजनीति कर देश को बदनाम करने में जुटी हुई है।  साय रविवार को यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आहूत पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त द्वय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह साबित हो गया है कि आयोग में मतभेद संबंधी कांग्रेस के तमाम दावे न केवल खोखले हैं, बल्कि जान-बूझ कर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने और भारत की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की राहुल गांधी की सोची-समझी साजिश है। केंद्रीय चुनाव आयोग की संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। यह फिर से साबित हो गया है कि कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रही है। उसका झूठ फिर से बेनकाब हो गया है।  साय ने कहा कि अपने संयुक्त बयान में आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि एसआईआर समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए। भारत के चुनाव आयोग की दुनियाभर में साख है। उसकी निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। कांग्रेस को ऐसी हरकतों से बाज आना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस संबंध में अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट भी कोरी कल्पना के अलावा कुछ नहीं है। समाचार में कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखे जिस पत्र का जिक्र है, वह न तो किसी किसी नीतिगत विषय से संबंधित है, न ही एसआईआर से संबंधित। वह सामान्य प्रशासकीय विषय था। वैसे भी चुनाव आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रति जिम्मेदार है, इसलिए कैबिनेट सचिव को किसी नीतिगत मामले पर पत्र लिखने का कोई तुक ही नहीं है, न ही आयुक्तों ने ऐसा कोई पत्र लिखा है। श्री साय ने इस बात पर अफसोस जताया कि जिन विषयों को सुप्रीम कोर्ट तक सही ठहरा चुका है, उसके खिलाफ भी कांग्रेस झूठ फैला रही है। फॉर्म-6 के घोषणापत्र समेत अनेक विषयों पर सर्वोच्च न्यायालय से पहले ही पक्ष में निर्णय आ चुका है, फिर भी कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की नाकाम कोशिश करती रहती है। कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब भी कांग्रेस जनता की अदालत में पराजित होती है, वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढऩे लगती है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी झूठ और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस. एस. संधू एवं डॉ. विवेक जोशी ने शनिवार को बैठक कर एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देशभर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई, 2026 को इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया है। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा था। श्री साय ने कहा कि देश की जनता भली-भाँति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते हैं। चुनाव आयोग के इस पूर्ण और सर्वसम्मत बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व को देश और संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक आदतन अपराधी की तरह राहुल गांधी लगातार संविधान का निरादर कर रहे हैं। संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं। हर बार और हर मंच पर मुंह की खाते हैं, बार-बार माफी मांगते हैं और फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। इसकी जितनी निंदा की जाय वह कम है। इससे पहले ईवीएम पर सवाल उठाते थे। उसे ब्लैक बॉक्स कहते थे लेकिन उसी ईवीएम से जीत कर स्वयं भी सांसद हैं। और अनेक राज्यों में उनकी न केवल सरकार है बल्कि 600 से अधिक विधायक और 99 लोकसभा सदस्य हैं, जो इसी चुनाव प्रक्रिया और इसी ईवीएम से चुन कर आए हैं। जीत जाने पर सरकार भी बनाना, विधायक और सांसद आदि भी बनना, इसी चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेकर राजनीति करना और उसी पर लगातार प्रहार करना। साय ने कहा कि वास्तव में कांग्रेस आज राहुल गांधी की अज्ञानता का शिकार होकर पेड़ की उसी डाली को काट रही है जिस पर वह बैठी है। दु:खद यह है कि जिस थाली में खाती है, उसी में लगातार छेद करने की कांग्रेस करती है।
साय ने कहा कि राहुल गांधी भारत को बदनाम करने का कोई मौ$का नहीं छोड़ते हैं। यहाँ तक कि अमेरिका के दौरों में भी राहुल गांधी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कहा कि भारत में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है और उस पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है। राहुल गांधी उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा सीमा पार की गई ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक को भी खून के दलाली कह देने जैसा शर्मनाक बयान दे दिया था। उनके द्वारा की गई ऐसी हरकतों की एक लंबी सूची है। श्री साय ने कहा कि बात चाहे ईवीएम की हो या कैग की, जाँच एजेंसियों की या फिर कोर्ट की। सबकी अवमानना करने, रंगे हाथ पकड़े जाने पर माफी मांग कर भाग खड़े होने और फिर अगले दिन से वही ऊल-जुलूल कहते रहने को कांग्रेस ने अपनी नीति बना ली है। दशकों तक देश पर एकछत्र शासन करने वाली कांग्रेस की ऐसी दुर्गति वास्तव में शर्मिंदा करती है। साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस को 2018 में इकतरफा और ऐतिहासिक बहुमत मिला था। वह इसी चुनाव प्रक्रिया द्वारा ईवीएम से ही मिला था। वह तब तीनों राज्य जीत गई थी। अभी भी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 35 विधायक हैं। क्या वे सभी यह मानते हैं कि गलत प्रक्रिया से चुनकर आए हैं? अगर वे यह मानते हैं कि उनके निर्वाचन की प्रक्रिया सही नहीं है तो क्या उन्हें विधायक रहने का नैतिक अधिकार है? कांग्रेस के हर जन प्रतिनिधि को यह सवाल स्वयं से पूछना चाहिए। जीत गए तो प्रक्रिया अच्छी और हारे तो गलत, ऐसा नहीं होता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता का$फी समझदार है। कांग्रेस की ऐसी हरकतों की वजह से उसका रहा-सहा जनाधार भी समाप्त हो जायेगा। वास्तव में राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब सौ चुनाव हार चुकी कांग्रेस ने अब खुद को इतिहास के कूड़ेदान में फेके जाने लायक बना लिया है। इस दौरान पत्रकार वार्ता में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद संतोष पांडेय, प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, डॉ. नवीन मार्कंडेय, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज, प्रदेश मीडिया संयोजक हेमंत पाणिग्रही मौजूद रहे।

ग्रामीणों की मांग पर बना सकालो मुरना बांध, जल संकट से मिली राहत और 45 हेक्टेयर खेती को मिला पानी

 00 374.96 लाख की लागत से तैयार जल संरचना बनी सिंचाई, निस्तारी और मवेशियों के पेयजल का आधार

रायपुर। ग्रामीणों की एक मांग ने आज सरगुजा जिले के सकालो और आसपास के क्षेत्र में जल उपलब्धता की तस्वीर बदल दी है। मवेशियों के लिए पेयजल और निस्तारी की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों की मांग पर निर्मित सकालो मुरना बांध अब सिंचाई, निस्तारी और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बन गया है। बांध से खरीफ की 30 हेक्टेयर और रबी की 15 हेक्टेयर फसल को पानी मिल रहा है। इस तरह कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को खेती में सहूलियत मिली है।
ग्रामीणों की जरूरत बनी बांध निर्माण की पहल का आधार
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो में ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए पेयजल संकट और निस्तारी की समस्या को देखते हुए जल संसाधन विभाग से सकालो मुरना में बांध निर्माण की मांग की थी। ग्रामीणों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने स्थल का मुआयना किया और बांध निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा। सकालो मुरना बांध निर्माण योजना को 30 जनवरी 2023 को 374.96 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली। इसके बाद निविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू किया गया और 15 जून 2024 को बांध का निर्माण पूर्ण हुआ।

रायपुर : सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी: ग्रामीणों की मांग पर बना सकालो मुरना बांध, जल संकट से मिली राहत और 45 हेक्टेयर खेती को मिला पानी


पूरी क्षमता से भरा बांध, आसपास के क्षेत्र में बढ़ा जलस्तर
वर्तमान में सकालो मुरना बांध पूरी क्षमता से भरा हुआ है। बांध में पर्याप्त जलभराव होने से सकालो मुरना के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ा है। इससे निस्तारी और जल संकट की समस्या से राहत मिलने के साथ मवेशियों के लिए भी पेयजल की उपलब्धता बेहतर हुई है। स्थानीय स्तर पर जल संग्रहण की सुविधा विकसित होने से ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है और क्षेत्र में जल संरक्षण को भी मजबूती मिली है।
45 हेक्टेयर खेती को मिला सिंचाई का सहारा
बांध का बड़ा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है। इससे लगभग 30 हेक्टेयर खरीफ और 15 हेक्टेयर रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध हो रहा है। कुल 45 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में पानी की सुविधा मिलने से किसानों के लिए खेती करना आसान हुआ है। रबी सीजन में भी पानी की उपलब्धता ने किसानों के लिए खेती की संभावनाओं को मजबूत किया है। सिंचाई का स्थानीय स्रोत उपलब्ध होने से खेती को सहारा मिलने के साथ किसानों की आजीविका को भी संबल मिला है।
जल संरक्षण के साथ आवागमन की भी मिली सुविधा
सकालो मुरना बांध का लाभ केवल जल संग्रहण और सिंचाई तक सीमित नहीं है। बांध निर्माण के बाद आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में भी सुविधा मिली है। इस प्रकार ग्रामीणों की मांग पर तैयार हुई यह जल संरचना सिंचाई, निस्तारी, मवेशियों के पेयजल और आवागमन जैसी कई जरूरतों को पूरा कर रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सकालो मुरना बांध की यह सेवा की कहानी बताती है कि स्थानीय जरूरत के अनुरूप तैयार जल संरचना किस तरह पूरे क्षेत्र में बदलाव का आधार बन सकती है। जल संसाधन संभाग क्रमांक-01, अम्बिकापुर द्वारा निर्मित यह बांध आज जल संरक्षण के साथ किसानों की खेती और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों को सहारा देने वाली महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बन गया है।