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Sunday, October 25, 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता.?!सड़क दुर्घटनाएं भारत के लिए चुनौती साबित हो रही है केंद्र और राज्य सरकार फौरी राहत देने में पीछे

Janchoupal36
सड़कें जितनी चौड़ी होगी दुर्घटनाएं उतनी ही बढ़ेंगी क्योंकि सड़के “six lane” हो गई पर हमारे नीति नियम और मानसिकता आज भी “narrow lane” पर है।

सड़क दुर्घटना :_
आज आदमी की जिंदगी घरों में कम सड़कों पर ज्यादा है ।किसी ना किसी कारण हर आदमी सड़क ही जा रहा है।भारत में सड़के चमचमाती हुई बन रही हैं पर क्या.?सड़क पर सुरक्षा नियम इसी स्तर पर पालन किया जा रहा है ।भारत में ट्रैफिक नियम सबसे बदहाल स्थिति में है यहां गाड़ियां तो बेतरतीब बढ़ गईं है लेकिन यातायात नियमों पर काफी लापरवाही बरती जा रही है।यूं तो अपने देश में सभी सुविधाओं में भारी कमी है
जिसमें आपातकालीन सुविधाएं तो भगवान भरोसे है।
देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के बीच समय पर चिकित्सा सहायता की कमी पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है।सर्वोच्च अदालत ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फौरी प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल विकसित करने का निर्देश दिया है।
हमारे देश में पिछले कुछ सालों में सड़क, रेल और हवाई दुर्घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी देखने को मिली है।
सीधी बात कहें तो 135 करोड़ आम भारतीय न तो ट्रेनों में सुरक्षित हैं, न सड़कों पर, न ही किसी पुल या फ्लाई ओवर पर। हम कह सकते हैं जैसे-जैसे विज्ञान तरक्की कर रहा है, साथ ही नए ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ (निर्माण कार्य) भी बनते जा रहे हैं, जो कि आम आदमी के जीवन को कहीं न कहीं आसान बना रहे हैं।

लेकिन,इसके बावजूद हमारे देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं इस तरफ इशारा कर रही हैं कि हम अभी भी सड़क सुरक्षा को लेकर सजग नहीं हुए हैं। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।
वर्ष 2000 में ही भारत में कुल 3 लाख 66 हजार सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 1 लाख 20 हजार ऐसी दुर्घटनाएं थीं।जिनमें 1 या उसे ज्यादा लोग मारे गए थे। वर्ष 2020 में हर 100 गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में 36 लोग मारे गए थे, जबकि वर्ष 2019 में ये आंकड़ा 33 था। 2020 वही वर्ष था जब कोविड के कारण अधिकतर लोग अपने घरों में ही थे, इसके बावजूद जहां कोविड से 1.5 लाख मौतें हुई, वहीं सड़क हादसों में 1.31 लाख लोगों की मृत्यु हुई।
आए दिन सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाएं भारत के लिये एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
आवश्यक है कि लोगों के व्यवहार में परिवर्तन का प्रयास किया जाए। हेलमेट और सीट-बेल्ट के प्रयोग को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं इन्हीं कारणों के चलते होती हैं। लोगों को शराब पीकर गाड़ी न चलाने के प्रति भी जागरूक किया जाना चाहिए।

हिंसा, पलायन, गिरफ्तारी के बीच मुर्शिदाबाद में राजनीतिक वार पलटवार,राष्ट्रीयता दरकिनार, ममता उलझी वक्फ कानून और मुस्लिम वोट बैंक में..

(खबर पर एक नजर)
बंगाल में हिंसा के बीच राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की गई है। भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल के ताजा माहौल पर सेना डिप्लॉय करने की मांग कर चुके हैं।

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को मुर्शिदाबाद हिंसा पर लेना चाहिए संज्ञान’

कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर चिंता जताई।उन्होंने पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले का संज्ञान लेने की मांग की है।

मुर्शिदाबाद की घटना के विरोध में विहिप ने दिया धरना

Janchoupal36 चर्चा
:_मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद घटना को लेकर जांच की जा रही है। इस बीच पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुर्शिदाबाद हिंसा मामलों में अब तक 100 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।पुलिस ने अब तक इन मामलों में 276 लोगों को गिरफ्तार भी किया है

पश्चिम बंगाल के हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले में एक व्यक्ति और उसके बेटे की हत्या मुख्य आरोपियों में से एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस गिरफ्तारी को लेकर बताया कि शमशेरगंज के जाफराबाद में 2 लोगों की हत्या के मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है। वहीं मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर धरपकड़ जारी है और करीब 300 लोगों को पकड़ लिया गया है जबकि 100 से अधिक एफआईआई भी कराई जा चुकी है।
राष्ट्रीय कानून का विरोध क्यों और कैसे होनी चाहिए
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की आवाज उठने लगी है। ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी राज्यपाल पर अनाप-शनाप बयान दे रही है तो वहीं बीजेपी मुर्शिदाबाद की घटना और हिंदुओं के पलायन पर ममता सरकार को घेर रही है। क्या ममता सरकार वक्फ कानून और मुस्लिम वोट बैंक के बीच फंस चुकी है? क्या मुर्शिदाबाद की हिंसा अचानक हुई या एक गहरी रणनीति का हिस्सा है?
लोकतंत्र में विरोध के लिए उपद्रव ठीक नहीं !
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के धूलियान शहर का बेदवना, जहां उपद्रवियों ने 190 घरों में से 113 को जला दिया। हिंसा के बाद लोगों ने यहां से पलायन कर लिया है। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने करीब आठ घंटे चले उपद्रव के दौरान खूंटी में बंधे पशुओं को भी नहीं छोड़ा। उपद्रवियों ने उन्हें भी जिंदा जला दिया।
हिंसा के बाद सिसकी हुई हालात
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद की हवाओं में कभी बांग्ला, उर्दू और हिंदी की खुशबू थी, आज वहां सिर्फ जलती हुई सियासी रोटियां और उजड़े घरों की राख है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में आज सन्नाटा और सिसकियां हैं। इस धरती पर आज लहू की लकीरें खिंची हुई हैं। इसी बदनसीब जमीन के जख्मों पर मरहम लगाने शनिवार को राज्यपाल पहुंचे। शुक्रवार वो मालदा के दौरे पर थे, जहां मुर्शिदाबाद से पलायन कर लोग अपनी जान बचाने के लिए भागकर पहुंचे थे। लेकिन राज्यपाल के दौरे पर भी राजनीति का ठप्पा लग गया। 

मुर्शिदाबाद में हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में फैले तनाव के बीच सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में शांति की अपील की है।

शरणार्थियों की स्थिति ही कैदियों जैसी थी

मीडिया को अंदर जाने से रोका, शरणार्थी ने कहा क्या हिंदू होना ही हमारा गुनाह है!!
सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब मीडिया को अंदर जाने से रोका गया। आईपीएस फैसल रज़ा ने माननीय कोर्ट के आदेश का हवाला देकर कवरेज पर रोक लगाई, जबकि ऐसा कोई आदेश था ही नहीं। जब उनसे आदेश दिखाने को कहा गया तो वह धमकियों पर उतर आए। शिविरों में रह रहे तपन (परिवर्तित नाम) ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि एक लोकतांत्रिक देश में अपने ही देश की पुलिस हमें कैद करेगी। हम तो बस जीना चाहते हैं, लेकिन क्या हिंदू होना ही हमारा गुनाह है

भाजपा-कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इन शिविरों को ‘डिटेंशन कैंप’ बताते हुए कहा था कि सरकार ने इन्हें संवेदनशील शरणस्थल की जगह जेलखाना बना दिया है। उन्होंने कहा, “करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर भागे और अब उन्हें कैद कर रखा गया है…।
मुर्शिदाबाद के माहौल शांत होने के बाद
अब पलायन कर चुके लोग घर वापसी कर रहे हैं…



क्या चार्ल्स कर रहे धर्म परिवर्तन!?,,किंग चार्ल्स पर उठे सवाल ईस्टर पर किया इस्लाम की तारीफ

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने ईस्टर संदेश में इस्लाम की प्रशंसा की, सोशल मीडिया पर भारी विरोध शुरू। यूज़र्स ने उनकी निष्ठा पर खड़े किए सवाल

तुष्टिकरण का सीधा अर्थ है रणनीतिक वोटबैंक ।राजनीतिक फायदा लेकर किसी वर्ग विशेष को संतुष्ट करना या उनके रजामंदी से शासन चलाना।इससे यह होता है अल्पसंख्यक होते भी बहुसंख्यक का लगाम थामे रखना,ये शब्द है तुष्टिकरण। तुष्टिकरण का मतलब होता है, किसी एक खास वर्ग को संतुष्ट करना या खुश करना। तुष्टिकरण शब्द का इस्तेमाल भारत में मुसलमानों से जोड़कर किया जाता है।लेकिन ऐसी ही कुछ आवाज़ ब्रिटेन (UK) से भी सुनने में आ रही है।इंग्लैंड में भी नेताओं, पार्टियों और यहां तक कि किंग चार्ल्स की तरफ से मुस्लिम समुदाय को खुश करने की कोशिश होती दिख रही है। पॉलिटिकल पार्टियां, मुस्लिम वोटों के लिए तुष्टिकरण की कोशिश करें तो बात समझ में आती है..

किंग चार्ल्स पर उठे सवाल ईस्टर पर किया इस्लाम की तारीफ

लेकिन किंग चार्ल्स इस्लाम की प्रशंसा कर घिर गए हैं। इंग्लैंड के किंग चार्ल्स ने ईस्टर के अवसर पर एक संदेश दिया है। इस तरह का संदेश ईस्टर के मौके पर हमेशा इंग्लैंड का शाही परिवार जारी करता है। इस संदेश में दूसरी बातों के अलावा इस्लाम की प्रशंसा की गई है।किंग चार्ल्स के ईस्टर वाले संदेश में इस्लाम का जिक्र होने पर लोग भडक गए हैं। वो सोशल मीडिया पर किंग चार्ल्स के संदेश पर सवाल उठा रहे हैं।वो पूछ रहे हैं कि ईस्टर पर इस्लाम का जिक्र क्यों किया गया?

कुछ लोग तो तंज़ कर रहे हैं कि क्या किंग चार्ल्स ने धर्म परिवर्तन कर लिया है? ब्रिटेन के किंग को ईसाईयत का रक्षक माना जाता है. माना जाता है कि इस्लाम के खिलाफ क्रूसेड का नेतृत्व इंग्लैंड ने ही किया था. ऐसे में कैथोलिक ईसाई सवाल पूछ रहे हैं कि क्या चार्ल्स अपनी उस भूमिका को अनदेखा कर रहे हैं.

जेलों का इस्लामीकरण!

लेकिन लगता है कि ब्रिटेन में सिर्फ किंग ही नहीं बल्कि वहां की जेलों का भी इस्लामीकरण हो गया है। लंदन के एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन की जेलों में मुस्लिमों के क्रिमिनल गैंग ने एक तरह से कब्जा कर लिया है। वहां शरिया कानून चल रहा है। अफसर बेबस हैं। ब्रिटिश प्रिजन ऑफिसर्स एसोसिएशन का दावा है –

2002 मे ब्रिटिश जेलों में मुस्लिम कैदियों की संख्या 5500 थी.
वो 2024 में बढ़कर 16,000 तक पहुंच गई
।
ब्रिटिश जेलों में मुस्लिम ब्रदरहुड नाम से गिरोह एक्टिव हैं।
जो आतंकियों की भर्ती और ब्रेनवॉश तक कर रहे हैं।
ये गिरोह ब्रिटिश जेलों में ड्रग्स और ब्लैकमनी के रैकेट चला रहे हैं
।

सिर्फ ब्रिटिश जेलों में ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रिटेन में पिछले कुछ दशकों में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ी है। ब्रिटेन में इस समय 1825 से ज्यादा मस्जिदें हैं। ब्रिटेन की धरती पर 30 से ज्यादा शरिया काउंसिल एक्टिव हैं। ब्रिटेन में दूसरी सबसे बड़ी धार्मिक आबादी मुस्लिमों की हो गई है। जिनमें पाकिस्तानियों के अलावा, ईरान, इराक, अफगानिस्तान और सीरिया से आए शरणार्थी भी हैं।

हिंदू सिर्फ 5 परसेंट

ब्रिटेन में 2011 में 27 लाख मुस्लिम थे. जो 2021 में बढ़कर 39 लाख हो गए।
ब्रिटेन की आबादी का कुल साढ़े 6 फीसदी मुस्लिम हैं।
जिस लंदन से ब्रिटेन की सरकार चलती है। वहां भी मुस्लिम अच्छी खासी संख्या में हैं।
लंदन में 40 ईसाई हैं तो 15 फीसदी मुस्लिम हैं. हिंदू सिर्फ 5 परसेंट हैं।

आबादी बढ़ी तो उन्होंने सियासत में भी दखल देना शुरू कर दिया है।ब्रिटेन के कई शहरों में मेयर पद पर लंबे समय से मुस्लिम काबिज हैं। लंदन में लगातार तीसरी बार पाकिस्तानी मूल के सादिक खान चुनाव जीतकर मेयर बने हैं।

– इसके साथ ही LB न्यूहैम काउंटी में भी लेबर पार्टी की रुखसाना फयाज मेयर चुनी गई हैं।
– LB टावर हैमलेट में लुत्फुर रहमान मेयर हैं।
– पिछले साल ऑक्सफोर्ड के लॉर्ड मेयर पद पर लुबना अरशद को चुना गया था।

2021 में जनगणना के मुस्लिम आबादी के बढ़े नतीजे

ब्रिटेन में वर्ष 2021 में जनगणना हुई थी। इसकी रिपोर्ट में पता चला कि ब्रिटेन में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है।जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक ग्रेटर लंदन में मुस्लिम आबादी दस लाख से ज्यादा मुस्लिम आबादी हो गई है। यार्कशायर और हंबर में दस फीसदी हो गई है। मुस्लिमों की आबादी, ब्रिटेन में इसी तरह की बढोतरी जारी रही तो वर्ष 2050 में मुस्लिमों की आबाद 6.5 से बढ़कर 11 फीसदी हो जाएगी, जबकि ईसाईयों की आबादी 64 फीसदी से गिरकर सिर्फ 45 प्रतिशत तक रह जाएगी।

नफरत का माहौल

ब्रिटेन में बढ़ती मुस्लिम आबादी के साथ ही कट्टरपंथ, नफरत और सांप्रदायिक दंगों में बढोतरी दर्ज की गई है। इस्लामोफोबिया में इज़ाफा दर्ज किया गया है. निगरानी समूह टेलमामा, की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा में इज़रायली हमले के बाद, ब्रिटेन में मुस्लिम विरोधी नफरत में वृद्धि देखी गई है। ये रिपोर्ट बताता है कि वर्ष 2024 में इस्लामोफोबिया की 5,837 घटनाएं दर्ज की गईं, जो वर्ष 2023 में 3767 थीं।

ऐसा माना जाता है कि ब्रिटेन में मुसलमानों का पहला बड़ा समूह भारत से पहुंचा था ये बात करीब चार सौ साल पुरानी है।उस समय ये मुसलमान नाविक हुआ करते थे, जो ईस्ट इंडिया कंपनी में नाविक के तौर पर काम करते हुए भारत से ब्रिटेन चले गए। फिर मुसलमानों की आबादी ब्रिटेन में बढ़ती चली गई।

एयर होस्टेस ने लिखाई रिपोर्ट, आरोपी गिरफ्तार,पुलिस को पीड़िता ने कहा” मेदांता(गुरुग्राम)हॉस्पिटल में हुआ उसका डिजिटल रेप :_

डिजिटल रेप के मामले में अगर आपको लग रहा है कि इसका मतलब ऑनलाइन पॉर्न देखना या फिर महिला के खिलाफ किसी तरह के ऑनलाइन अपराध से है।लेकिन ऐसा नहीं होता है।डिजिटल रेप का अर्थ है जब आरोपी पीड़िता का सेक्सुअल असॉल्ट अपने हाथ या फिर पैरों की उंगलियों से करता है।

आसान भाषा में समझें में जब कोई आरोपी किसी महिला के निजी अंगों को बिना उसकी इजाजत के अपनी उंगलियों के जरिए छूता है, तो उसे डिजिटल रेप कहा जाता है।

हरियाणा में गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एयर होस्टेस से डिजिटल रेप के मामले की पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले में गुरुग्राम पुलिस ने अस्पताल में कथित तौर पर काम करने वाले एक तकनीशियन को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि इस व्यक्ति पर आरोप है कि उसने कथित तौर पर उस समय Digital Rape किया, जब महिला आईसीयू में वेंटिलेटर पर थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी दीपक के रूप में हुई है, जो कुछ समय से गुरुग्राम में रह रहा था।

यह मामला तब उजागर हुआ जब पीड़िता ने होश में आने के बाद 14 अप्रैल को सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में आरोपी दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दीपक बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और हाल ही में ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी में डिग्री लेकर मेदांता अस्पताल में ICU टेक्नीशियन के तौर पर काम कर रहा था। आइए समझते हैं कि डिजिटल रेप क्या होता है?

डिजिटल रेप क्या है?
यह एक गंभीर यौन अपराध है जिसमें बिना सहमति के किसी व्यक्ति के प्राइवेट पार्ट में उंगलियां या किसी वस्तु का इस्तेमाल कर प्रवेश कराया जाता है। डिजिटल शब्द का मतलब यहां यही ना कि इंटरनेट या डिजिटल तकनीक से।

यह अपराध 2012 के निर्भया कांड के बाद भारतीय दंड संहिता आईपीसी के तहत बलात्कार की श्रेणी में शामिल किया गया। हालांकि अब इसे भारत के नए कानून भारतीय न्याय संहिता BNS में भी गंभीर अपराध माना गया है।

कानून और सजा का प्रावधान
भारत में डिजिटल रेप को गंभीर अपराध मानते हुए कठोर सजा का प्रावधान है।पहले आईपीसी की धारा 375-376 के तहत दोषी के लिए सजा का प्रावधान था. जिसमें कम से कम 7 साल की सजा हो सकती है जो कुछ मामलों में 10 साल तक या आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है। अगर पीड़ित नाबालिग है तो पॉक्सो एक्ट के तहत सजा और सख्त होती है जिसमें 10 से 20 साल तक की जेल या उम्रकैद भी हो सकती है।अब नए कानून के तहत इसे बलात्कार की श्रेणी में रखा गया है। इसमें पीड़िता की सहमति के बिना कोई भी ऐसा कृत्य अपराध माना जाएगा और दोषी पाए जाने पर आरोपी को 10 साल तक की जेल या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

डिजिटल रेप के मामले देश में बढ़ रहे हैं लेकिन कई लोग इस अपराध के बारे में नहीं जानते। खासकर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण पीड़ित चुप रह जाते हैं।एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोगों को इस अपराध के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है। इस तरह के मामलों में अक्सर पीड़ित महिलाएं सामने आने से कतराती हैं इसलिए समाज में जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है।

बुक बैंक ब्लड बैंक की तरह अब होगा “हेलमेट बैंक” विधायक रिकेश सेन मई से नेहरू नगर भिलाई से करेंगे शुभारंभ..

छत्तीसगढ़ के भिलाई नेहरू नगर में सिर्फ 1 रुपये में मिलेगा हेलमेट: प्रदेश में खुलेगा पहला हेलमेट बैंक, बस दिखाना होगा ये दस्तावेज बिना कोई लंबी प्रक्रिया के केवल अपना आधार कार्ड दिखाकर हेलमेट ले सकेंगे।
भिलाई:_ छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी भिलाई में अब सड़क सुरक्षा को लेकर एक बेहद सराहनीय और क्रांतिकारी पहल होने जा रही है। क्षेत्रीय विधायक रिकेश सेन मई महीने से ‘हेलमेट बैंक’ (Helmet Bank) की शुरुआत करने जा रहे हैं, जहां मात्र 1 रुपये में हेलमेट किराए पर मिलेगा।यह सुविधा भिलाई के नेहरू नगर चौक में उपलब्ध होगी, जहां से लोग बिना कोई लंबी प्रक्रिया के केवल अपना आधार कार्ड दिखाकर हेलमेट ले सकेंगे।
विधायक रिकेश सेन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह पहल भिलाई वासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सोच से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि,“जनप्रतिनिधि होने के नाते क्षेत्र की जनता की सुरक्षा मेरी प्राथमिकता है।
हेलमेट पहनने से लोगों की जान बच सकता है, लेकिन कई लोग इसे खरीदने से कतराते हैं या भूल जाते हैं। इसीलिए हमने तय किया कि उन्हें सिर्फ 1 रुपये में किराए पर हेलमेट उपलब्ध कराया जाएगा।”
आधार कार्ड दिखाने से मिलेगा हेलमेट
हेलमेट बैंक से हेलमेट प्राप्त करने के लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी, केवल आधार कार्ड (Aadhaar Card) दिखाने से ही हेलमेट मिल जाएगा। इस योजना का उद्देश्य यह है कि किसी को भी हेलमेट के बिना सड़क पर न चलना पड़े।
नेहरू नगर चौक को इस पहल की शुरुआत के लिए चुना गया है, जहां से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन गुजरते हैं। धीरे-धीरे इस योजना को पूरे भिलाई में फैलाने का लक्ष्य रखा गया है।
युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ
यह योजना खासकर उन युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है जो कभी-कभी जल्दबाजी में हेलमेट पहनना भूल जाते हैं या आर्थिक कारणों से इसे खरीद नहीं पाते। अब ऐसे युवा सड़क पर सुरक्षित चल सकेंगे और यातायात नियमों का पालन भी सुनिश्चित होगा।
एक उदाहरण बन सकता है यह मॉडल
भिलाई की यह पहल अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। जैसे “बुक बैंक” (Book Bank) या “ब्लड बैंक” (Blood Bank) होते हैं, उसी तरह हेलमेट बैंक भी समाज में सुरक्षा का प्रतीक बन सकता है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में इसे लागू किया जा सकता है।

“_ग्रामीण शिक्षा में सुधार_” उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 28 स्कूलों में डिजिटल स्मार्ट क्लास रूम का किया शुभारंभ.

छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज मुंगेली के लोरमी विकासखंड के 28 शासकीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास-रूम का शुभारंभ किया

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज मुंगेली के लोरमी विकासखंड के 28 शासकीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम का शुभारंभ किया। उन्होंने लोरमी विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैगाकापा में आयोजित कार्यक्रम में सभी स्मार्ट क्लास रूम का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने स्मार्ट क्लास-रूम में अध्ययन-अध्यापन की सुविधाओं को देखा और इसके लिए स्थापित किए गए तकनीकी उपकरणों
की सराहना की।
एचडीएफसी बैंक और एआरओ फाउंडेशन के सहयोग से स्कूलों में ये स्मार्ट क्लास रूम बनाए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्मार्ट क्लास-रूम का शुभारंभ करते हुए कहा कि स्मार्ट क्लास रूम से बच्चों की पढ़ाई में रुचि और सीखने की क्षमता बढ़ेगी। इसके जरिए वे अपने विषयों को और अधिक अच्छे से समझ सकेंगे।

वर्तमान समय में ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को भी अध्ययन-अध्यापन की नई और प्रभावी तकनीकों से जोड़ना आवश्यक है।उन्होंने स्कूल के बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यह स्मार्ट क्लास रूम आप लोगों के लिए बना है।
सभी विद्यार्थी इसका सदुपयोग करते हुए विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत करें। उन्होंने स्मार्ट क्लास रूम के शुभारंभ पर बधाई और शुभकामना दी।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैगा कांपा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों आप सभी को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए स्कूलों में डिजिटल तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
एचडीएफसी बैंक और एआरओ फाउंडेशन के सहयोग से स्मार्ट क्लास रूम की यह पहल विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होगी। उन्होंने दोनों संस्थाओं को इसके लिए धन्यवाद दिया ।
लोरमी नगर पालिका के अध्यक्ष सुजीत वर्मा, मुंगेली जिला पंचायत की सदस्य श्रीमती अनिता साहू और लोरमी जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती वर्षा विक्रम सिंह ठाकुर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में भी सुशासन तिहार के मद्देनजर 31 मई तक कोई छुट्टी नहीं

शिक्षा विभाग में छुट्टी पर प्रतिबंध: शिक्षा विभाग के लिए स्पष्ट आदेश हुआ जारी, 31 मई तक नहीं मिलेगी छुट्टी।
31 मई तक शिक्षा विभाग में भी छुट्टी पर भी प्रतिबंध रहेगा।

पहले जो आदेश अलग-अलग जिलों के लिए जारी किया गया था, उसके आधार पर शिक्षकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
आदेश की व्याख्या कई शिक्षक इस आधार पर कर रहे थे, कि 31 मई तक अवकाश पर प्रतिबंध का जो आदेश निर्गत हुआ है, वो सिर्फ अन्य विभाग के कर्मचारी व अधिकारी पर होगा।
लेकिन अब शिक्षा विभाग के इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर दिया गया है। सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट आदेश जारी किया है, जिसमें शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों पर छुट्टी के प्रतिबंधित होने की बात कही गयी है। आदेश में साफ है कि  सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
31 मई तक किसी भी तरह की छुट्टी अधिकारियों और कर्मचारियों को नहीं दी जायेगी। विशेष परिस्थिति में अवकाश सिर्फ कलेक्टर के आदेश पर ही मिल पायेगी। ये आदेश सरगुजा से पहले ही जारी हो चुका था, अब सूरजपुर से भी जारी कर दिया गया है।
जानकारी मिल रही है कि अन्य जिलों से भी इसी तरह की आदेश जल्द ही निकलने वाला है।
जारी आदेश के मुताबिक 8 अप्रैल से 31 मई तक सुशासन तिहार का आयोजन किया जाना है। तीन चरणों में सुशासन तिहार मनाया जाने वाला है। पहला चरण 11 अप्रैल तक चलेगा, जबकि तीसरा और अंतिम चरण 5 मई से 31 मई तक संचालित होगा। डीईओ ने निर्देश दिया है कि तीन चरणों के दौरान जिले में पदस्थ सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टी पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। विशेष परिस्थिति में अवकाश की स्वीकृति और अनुमति कलेक्टर के निर्देश पर ही मिल सकेगा।

दीगर राज्यों के डॉक्टर जो छत्तीसगढ़ में बिना पंजीयन चिकित्सा कार्य में लगें हैं,निजी अस्पताल जानकारी मुहैया कराए:_सीएमएचओ रायपुर

राज्य स्तरीय मेडिकल कौंसिल में पंजीयन आवश्यक

हर राज्य की मेडिकल काउंसिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि चिकित्सा सेवाएं कानूनी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से दी जाएं। बिना रजिस्ट्रेशन के इलाज करना न केवल मरीजों के लिए जोखिमभरा हो सकता है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है।

बिना पंजीयन कराए डॉक्टरों की मांगी गई लिस्ट

छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के बिना पंजीयन चिकित्सा प्रैक्टिस किए जाने का मामला सामने आया है। इसे लेकर रायपुर के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO) ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी निजी अस्पतालों को पत्र जारी किया है। पत्र में तीन दिन के भीतर ऐसे डॉक्टरों की जानकारी मांगी गई है, जो बिना छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परिषद में पंजीयन के कार्यरत हैं।

छत्तीसगढ़ में विधिवत पंजीयन कराना अनिवार्य इसके बगैर अनुमति नहीं

जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में किसी भी बाहरी डॉक्टर को तब तक प्रैक्टिस की अनुमति नहीं है, जब तक वह छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान परिषद में विधिवत पंजीकृत न हो. इसके बावजूद कुछ डॉक्टर अन्य राज्यों से आकर न सिर्फ निजी अस्पतालों में बल्कि होटलों और ओपीडी के माध्यम से भी इलाज कर रहे हैं, जो कि नर्सिंग होम एक्ट और परिषद के नियमों का उल्लंघन है.

निजी अस्पताल ऐसी गतिविधियों पर गंभीरता से रोक लगाएं

निर्देशों के अनुसार, जिन अस्पतालों में ऐसे डॉक्टर कार्यरत हैं, उन्हें तुरंत जानकारी साझा करनी होगी. साथ ही, भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया गया है.

बस्तर पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं,नए भारत की संभावनाओं का बनेगा प्रवेश द्वार :_सीएम साय ने समीक्षा बैठक में कहा

नक्सलवाद के समूल उन्मूलन हेतु केंद्र सरकार से मिलकर पूरी ताक़त और समर्पण के साथ काम होगा

युवाओं को कौशल शिक्षा देकर स्वाभिमानी बनाएंगे
हमने अब यह ठाना है बस्तर को स्वर्ग बनाना है के विचार से सीएम विष्णुदेव साय ने की बस्तर संभाग में विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा, नक्सलवाद के समूल उन्मूलन हेतु सरकार पूरी ताक़त और समर्पण के साथ काम कर रही ।
अंतिम छोर तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और हर हितग्राही तक शासन की पहुंच सुनिश्चित करना है।

रायपुर/बस्तर :_ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज बस्तर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष ‘प्रेरणा’ में संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा कर अधिकारियों को हितग्राहीमूलक योजनाओं का सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित करते हुए प्राथमिकता से निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के विकास की यात्रा अब ठहराव नहीं, निरंतर गति की मांग कर रही है।

साय ने कहा कि बस्तर अब पिछड़ेपन का प्रतीक नहीं, नए भारत की संभावनाओं का प्रवेश द्वार बन रहा है।नए भारत की संभावनाओं का प्रवेश द्वार बन रहा है। यहां का हर गाँव, हर परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े — यही हमारा लक्ष्य है। आयुष्मान, आधार, आवास और विद्युतीकरण जैसी योजनाएं केवल सरकारी परियोजनाएं नहीं, बल्कि आम जन की गरिमा और सुरक्षा की गारंटी हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं। हम उन्हें सिर्फ कौशल नहीं, स्वाभिमान देना चाहते हैं। अब हमारा मंत्र है — हर घर में उजाला, हर हाथ में रोजगार और हर दिल में विश्वास। यही बस्तर की नई पहचान होगी, और यहीं से छत्तीसगढ़ की विकास गाथा को नई ऊँचाई मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज की बैठक अत्यंत उपयोगी रही और इसमें बस्तर संभाग के विकास, शांति स्थापना और योजनाओं की प्रगति को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। यह देखकर संतोष होता है कि बस्तर संभाग में शासन और प्रशासन की टीम युवा, ऊर्जावान और संकल्पबद्ध दिख रही है। जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और समस्त अधिकारियों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि हम सब विकास के प्रति गंभीर हैं और बस्तर में शांति स्थापना के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश के साथ कहा कि नक्सलवाद के समूल उन्मूलन हेतु सरकार पूरी ताक़त और समर्पण के साथ काम कर रही है। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में नक्सल उन्मूलन का कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है और यह लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक पूर्ण करने का संकल्प है। हमारे सुरक्षा बलों का साहस, समर्पण और रणनीति के साथ काम करना इस दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा सत्र प्रारंभ होने जा रहा है, जाति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को समयबद्ध और सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि बच्चों को कोई कठिनाई न हो। उन्होंने कहा कि गर्मी और बारिश के मौसम में बीमारियों की आशंका रहती है, ऐसे में सीएससी स्तर और स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयों की उपलब्धता और चिकित्सकीय व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखें।
उन्होंने कहा कि बस्तर में उद्योग की स्थापना को लेकर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। अनुसूचित जाति, महिलाओं और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देते हुए उद्योग नीति में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिनसे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कहा कि बस्तर में अपूर्ण योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जगदलपुर एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें प्रारंभ करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। राष्ट्रीय राजमार्गों सहित अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं पर भी गति लाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बात की आवश्यकता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण यह और भी आवश्यक हो जाता है कि हम व्यक्तिगत लाभ आधारित योजनाओं को प्राथमिकता दें और प्रत्येक परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त करें।
मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं के कारण कई बार आधार, राशन, बैंकिंग जैसी सेवाएं बाधित होती हैं। संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर इसका शीघ्र समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और संचार उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के सम्बन्ध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित बसें चलाने की आवश्यकता है ताकि जनता को सुरक्षित व सुलभ आवागमन का साधन मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों में जनता की जबरदस्त भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि लोग विकास से जुड़ना चाहते हैं और नक्सलवाद की विचारधारा से दूर होना चाहते हैं। हमें इसी विश्वास को और मजबूत करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से लें, उन्हें सम्मान दें, और धैर्यपूर्वक उनकी बातों को सुनें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों में प्रशासनिक कुशलता के साथ मानवीय संवेदनशीलता भी आवश्यक है। बस्तर संभाग की जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और हमें पूरी निष्ठा के साथ उनके कल्याण के लिए कार्य करना है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समूचा बस्तर अलग ही परिदृश्य में दिखाई दे रहा है, बस्तर उन्नति की कहानी लिख रहा है। यह सभी के परिश्रम का परिणाम है। बस्तर की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी निर्माण कार्यो को समयावधि में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।कहा कि बारिश के पहले ही निर्माण कार्य पूर्ण हो।
बैठक के दौरान बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह ने क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 87.24 प्रतिशत और आधार कार्ड निर्माण में 96.37 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड में शतप्रतिशत लक्ष्यपूर्ति के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।
बैठक में अंदरूनी क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के समाधान के लिए मोबाइल टावर लगाने की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 93.37 प्रतिशत प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र हितग्राही आवास से वंचित न रहे, और सभी निर्माण कार्य आगामी दिसंबर माह तक पूर्ण कर लिए जाएँ। आवश्यक निर्माण सामग्री की आपूर्ति पंचायतों के माध्यम से एकसाथ करने की रणनीति पर भी जोर दिया गया।
बैठक में जानकारी दी गई कि बस्तर संभाग ने विद्युतीकरण के क्षेत्र में अब तक 95.89 प्रतिशत घरों में बिजली पहुंचा चुकी है। कांकेर जिले में शत-प्रतिशत वहीं बस्तर और कोंडागांव में 99 प्रतिशत के पार पहुँच गया है। शेष जिलों में दिसंबर 2025 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना में 91.55 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे जिलों में गति लाने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 82.88 प्रतिशत किसानों को लाभ मिल रहा है।
जनधन खातों में 90.79 प्रतिशत पात्र हितग्राही पंजीकृत हैं।
राजस्व संबंधी प्रकरणों जैसे नामांतरण, सीमांकन, त्रुटि सुधार के मामलों में तत्काल समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने स्थानीय युवाओं को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने प्रशिक्षित युवाओं को शतप्रतिशत प्लेसमेंट दिलाने और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, डीजीपी  अरूण देव गौतम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, पीसीसीएफ श्रीनिवास राव, बस्तर संभाग के आयुक्त, आईजी पुलिस, सभी जिलों के कलेक्टर्स, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ, जिला पंचायत सीईओ, नगर निगम आयुक्त सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम विष्णु देव साय से मुलाकात के पश्चात,B.Ed प्रशिक्षित बर्खास्त सहायक शिक्षकों ने की आंदोलन वापसी

4 माह से आंदोलन रत बीएड प्रशिक्षित बर्खास्त शिक्षकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात पश्चात हड़ताल समाप्त कर दिया।

सीएम ने कहा सरकार समस्याओं पर सहानुभति रखकर गंभीरता से करेगी विचार

शिक्षक परिवारों ने ली राहत की सांस
चार महीने से चल रहे इस आंदोलन से कई शिक्षकों और उनके परिवारों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हुए थे। अब जब आंदोलन स्थगित हुआ है और समाधान और संयोजन की उम्मीद जगी , तो उनके परिवारों ने भी राहत की सांस ली है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में बीएड प्रशिक्षित बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। यह प्रतिनिधिमंडल 126 दिनों से लगातार आंदोलनरत था और आज की आत्मीय मुलाकात और चर्चा के बाद उन्होंने अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आप सब हमारे परिवार के सदस्य हैं। आपकी पीड़ा हमारी पीड़ा है। आपकी समस्याओं को समझते हुए सरकार सहानुभूति के साथ इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले के समाधान के लिए शासन स्तर पर हरसंभव सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय से भेंट के पश्चात शिक्षकों ने सरकार की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस मौजूद रहे।