19.4 C
Raipur
Sunday, October 25, 2026
Home Blog Page 289

पहलगाम के टूरिस्ट स्पॉट में आतंकी हमला आतंकियों ने धर्म पूछकर गोली चलाई

आज आतंकियों ने कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम टूरिस्ट स्पॉट पर गोलीबारी की जिसमें 26 से अधिक लोगों की मौत ।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हमला हुआ है।अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि पर्यटकों पर बंदूकधारियों ने फ़ायरिंग की, जिसमें 20 से अधिक लोगों की मौत हुई है।
हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा ने ली है।
प्रशासन ने आतंकी हमले में एक मौत की बात कही थी, लेकिन करीब 4 घंटे बाद न्यूज एजेंसी ने 26 मौतों की जानकारी दी। घटना में 20 से ज्यादा लोग घायल हैं। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने पहलगाम में हमले वाले इलाके को घेर लिया है। हेलिकॉप्टर से भी नजर रखी जा रही है।

पहलगाम घटना जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में हुई एक आतंकी हमला है, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों पर गोलीबारी की। ध्यान देने की बात है कि आतंकी धर्म पूछकर गोली चला रहे थे पहले नाम पूछते थे फिर गोली मारते थे। घायलों में से एक महिला ने बताया कि उसके पति को सिर में गोली लगी है और सात अन्य लोग भी घायल हुए हैं।

घटना के विवरण:
आतंकी हमला: पहलगाम के बैसरन घाटी में हुआ, जो पर्यटकों के लिए एक खूबसूरत इलाका है।
गोलीबारी: आतंकियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें कई पर्यटक घायल हुए।
– सेना का सर्च ऑपरेशन: घटना की खबर मिलते ही सुरक्षा बल और पुलिसकर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

प्रतिक्रिया:
– पीएम मोदी की प्रतिक्रिया: पहलगाम आंतकी हमले के बाद पीएम मोदी ने UAE से शाह को दिए निर्देश।
गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर पहुंच चुके हैं। इससे पहले अमित शाह आईबी चीफ, जम्‍मू-कश्‍मीर के डीजी और सेना व सीआरपीएफ के आला अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग भी की। पीएम मोदी इस मीटिंग में वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग से उपलब्‍ध रहे।
अमेरिकन राष्ट्रपति ने डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक्‍स पर लिखा, “कश्मीर से बहुत परेशान करने वाली खबर आई है। आतंकवाद के खिलाफ़ भारत के साथ अमेरिका मजबूती से खड़ा है। हम मारे गए लोगों की आत्मा की शांति और घायलों के स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं।
– स्थानीय प्रशासन: घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी स्थिति की निगरानी की जा रही है।
यह घटना 22 अप्रैल 2025 को हुई थी, और अभी तक इसकी विस्तृत जानकारी सामने आ रही है

डिनर में चावल खाना सही है क्या ? चावल के साथ क्या खाएं क्या नहीं.??

रात में चावल खाने से वजन बढ़ना, पाचन संबंधी समस्याएं, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और नींद में खलल जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जिससे रात में मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा, चावल को पचाने में भी अधिक समय लगता है, जिससे पेट में भारीपन और गैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
विशेषज्ञ चावल और रोटी साथ खाने की सलाह नहीं देते
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक चावल और रोटी को कभी भी साथ-साथ नहीं खाना चाहिए। दरअसल इन दोनों का ही ग्लाइसीमिक इंडेक्स काफी ज्यादा हाई होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को तेजी से स्पाइक करता है। इससे डायबिटीज से ले कर मोटापे तक का खतरा हो सकता है। वहीं इन दोनों को साथ में पचाना भी काफी मुश्किल होता है, जिससे पेट फूलने, गैस बनने और कब्ज जैसी पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।चावल के साथ आलू ,फल, चाय और सलाद भी देख कर लें कमजोर पाचन तंत्र में उचित नहीं होता।

भोजन में दोनों समय चावल उपयोग होता है
दोपहर का खाना या रात के खाने में ज्यादातर लोग चावल खाना पसंद करते हैं।लेकिन ये सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि “रात में चावल खाना सही है या नहीं?” कुछ लोग मानते हैं कि रात में चावल खाने से मोटापा बढ़ता है, तो कुछ लोग चावल को अनहेल्दी मानते हैं। इस खबर में हम आपको बताएंगे कि रात में चावल खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है।
रात में चावल खाने से क्या?
चावल में सरल कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो पाचन को धीमा कर सकते हैं, खासकर जब भारी डिनर के साथ खाया जाए। सेंसिटिव पाचन वाले लोगों को रात के खाने में चावल खाने से एसिडिटी, गैस या सुस्त पाचन हो सकता है, जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

शुगर लेबल बढ़ सकता है
यानी चावल खाने पर ये जल्दी पच जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में अगर आप रात के समय चावल खाते हैं, तो इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।
जिससे वजन तेजी से बढ़ सकता है।
आसान भाषा में कहें, तो रात में चावल खाने से मोटापा और वजन बढ़ सकता है
लोग सोचते होंगे कि चावल रात के खाने के लिए एक अच्छा विकल्प है क्योंकि यह हल्का होता है लेकिन उच्च फाइबर युक्त चावल रात के खाने के लिए एक अच्छा विकल्प है। चपाती को पचने और टूटने में समय लगता है, इसलिए रात में जब आपके शरीर को इसकी ज़रूरत होती है तो यह बहुत ज़्यादा ऊर्जा नहीं देता है।

रात के खाने में चावल की जगह क्या खाएं?
रात के खाने में चावल के बजाय कई स्वस्थ विकल्प हैं, जो अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट की कमियों के बिना आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर सकते हैं। रात के खाने में साबुत गेहूं या मल्टीग्रेन चपाती खा सकते हैं। ये फाइबर का एक बड़ा स्रोत है और पेट को लंबे समय तक भरा रखती हैं। इसके अलावा रात के खाने में क्विनोआ खाना भी फायदेमंद हो सकता है। क्विनोआ एक प्रोटीन युक्त अनाज जो चावल का एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है और मांसपेशियों की मरम्मत और वजन प्रबंधन में मदद करता है।

अगर आप वेट घटाने की कोशिश कर रहे हैं
तो रात में चावल खाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर तब, जब आप इसे घी, आलू या हेवी फैट वाली चीजों के साथ खाते हैं और बिना किसी फिजिकल एक्टिविटी के सो जाते हैं। चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए इसे खाकर तुरंत सोने से यह फैट में बदल सकता है।

नींद अच्छी हो सकती है
यह बात हैरान कर देगी कर देगी, लेकिन चावल खाने से रात में अच्छी नींद आ सकती है।ऐसा इसलिए होता है, क्यों चावल में ट्रिप्टोफैन नाम का एक एमिनो एसिड पाया जाता है, जो ब्रेन में सेरोटोनिन लेवल को बढ़ाता है और नींद लाने में मदद करता है। इसलिए कई लोगों को चावल खाने के बाद रात में जल्दी और अच्छी नींद आती है।

रात में कैसे खाना चाहिए चावल
रात में चावल खाना पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसे लेकर कुछ सावधानियां रखी जा सकती है। रात में कम मात्रा में ही चावल खाएं। साथ ही सफेद चावल की जगह ब्राउन या रेशेदार चावल खाएं। चावल के साथ प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीजें खाएं। खाने के बाद थोड़ी देर टहलें।
अनुरोध:_
प्रिय पाठक यह सामग्री सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है यह सबके लिए आहार विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अमल करें।

पॉलिमोरी यंगस्टर्स के बीच रिश्तों का नया ट्रेंड ,इस रिश्ते को क्या नाम दूं ,,,!!

पॉलीमोरी एक ही समय में एक से अधिक पार्टनर के साथ रोमांटिक संबंध बनाने की प्रथा या इच्छा है, जिसमें शामिल सभी पार्टनर की सहमति हो।
रिलेशनशिप को लेकर दुनियां बदल रही है
जब जिंदगी ही समझौते पर टिकी है तो सम्बन्ध का आधार क्या होगा आपसी समझौता ही ना।जब समझौता करना ही है तो एक से क्यों बहुतों से किया जा सकता है।पहले लोग करार तलाशते थे तो किसी के प्रति बेकरार होते थे,अब ना कोई बेकरार है ना किसी का इंतजार।
अब गांव में भी चांद नहीं निकलता न पैरों में रुनझुन पायल होती है,अब ना मेहबूब चांद होते न बिंदियां सितारे होते। लिव इन रिलेशनशिप का जमाना है।जहां पहले रिश्तों का मतलब सिर्फ दो लोगों के बीच प्यार और कमिटमेंट होता था। वहीं अब नए जमाने के यंगस्टर्स रिश्तों को लेकर ज्यादा ओपन और एक्सप्लोरेटिव हो रहे हैं।

आखिर क्या है पॉलीमोरस रिलेशनशिप? युवाओं के बीच जमकर कर रहा ट्रेंड, आइए जानते हैं क्या पूरा माजरा
पॉलीमोरी एक ऐसे रिश्ते को दर्शाता है जिसमें एक व्यक्ति एकाधिक लोगों से सहमति और पारदर्शिता के साथ प्यार करता है। Gen Z इसे एक नई व्यक्तिगत आज़ादी के रूप में अपनाने लगा है, हालांकि रिश्ते की सफलता के लिए ट्रस्ट और इमोशनल परिपक्वता आवश्यक है।
पॉलीमोरी की परिभाषा
पॉलीमोरी एक ऐसा रिश्ता है जिसमें एक व्यक्ति एक से अधिक लोगों के साथ प्रेम और संबंध रखता है। यह धोखे से मुक्त होता है और सभी पार्टनर्स की सहमति से संचालित होता है।

Gen Z की सोच
आज की युवा पीढ़ी, जिसे Gen Z कहा जाता है, रिश्तों में पारंपरिक बंधनों से मुक्त रहने की कोशिश कर रही है।
उनका मंत्र है “My Life, My Rules,” जिसमें वे खुद की इच्छाओं को प्राथमिकता देते हैं।

सहमति और पारदर्शिता
पॉलीमोरस रिलेशनशिप की सफलता के लिए ट्रस्ट, कम्युनिकेशन और ईमानदारी जरूरी हैं। हर पार्टनर को रिश्ते की स्थिति की पूरी जानकारी होनी चाहिए, जिससे किसी प्रकार की गलतफहमी या जलन न हो।

भावनात्मक परिपक्वता
इस तरह के रिश्तों में केवल वही लोग सफल हो सकते हैं जो इमोशनली मैच्योर हैं। यदि किसी को असुरक्षा या जलन महसूस होती है, तो यह रिश्ता टिकाऊ नहीं रह पाता।

नए रिश्तों का ट्रेंड
पॉलीमोरी, भारत के यंगस्टर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह एक नया संबंध का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो व्यक्तिगत आज़ादी और नए अनुभवों के लिए दरवाजे खोलता है।

वाहनों के कर्कश हॉर्न से मिलेगी छुट्टी,अब बजेगा भारतीय वाद्य यंत्रों का धुन

नितिन गडकरी ने हॉर्न की आवाज पर जताई नाराजगी 

देश की जनता को जल्द गाड़ियों के हॉर्न की कर्कश आवाज से निजात मिलने वाली है। बेसुरा धुन बेमतलब की चिल्लपों तेज आवाज लगे गाडियां दौड़ने से आम जनता को काफी परेशानी होती है। यातायात नियमों का धज्जियां उड़ाते लोग कई प्रकार से हॉर्न यूज करते हैं।अब ऐसा नहीं होने वाला केंद्रीय परिवहन मंत्रालय इस पर सुधार करने जा रही है।हॉर्न की तेज आवाज की जगह भारतीय वाद्य यंत्र की मधुर ध्वनि सुनाई देगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वह एक ऐसे कानून पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत वाहनों के हॉर्न में ढोलक, तबला और बांसुरी जैसे भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों की ध्वनि का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा. हो सकता है कि आने वाले दिनों में आपकी गाड़ी के हार्न से ढोलक या बांसुरी की धुन सुनाई दे।

कानून बनाने पर हो रहा है विचार

उन्होंने कहा कि वह एक ऐसा कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत वाहनों के हॉर्न में केवल भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों की ध्वनि का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

देश का वाहन बाजार विश्व के तीसरे नंबर पर है

उन्होंने बताया कि भारत इस समय दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाजार है और उन्होंने बताया कि 2014 में भारत का वाहन क्षेत्र का 14 लाख करोड़ रुपये का था, ये अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। भारत से आगे केवल अमेरिका और चीन ही हैं।

क्या बोले गडकरी?

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि वह एक ऐसा कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं, जिसके तहत वाहनों के हॉर्न में केवल भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों की ध्वनि का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। गडकरी ने एक समारोह में कहा, ”मैं एक ऐसा कानून बनाने की योजना बना रहा हूं कि सभी वाहनों के हॉर्न भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों पर आधारित हों, ताकि उन्हें सुनना सुखद हो। बांसुरी, तबला, वायलिन, हारमोनियम।”

वायु प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 40 प्रतिशत

उन्होंने कहा कि देश में वायु प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 40 प्रतिशत है। नरेन्द्र मोदी सरकार मेथनॉल, एथनॉल सहित हरित और जैव ईंधन पर चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दे रही है। गडकरी ने कहा कि भारत को दोपहिया वाहनों और कारों के निर्यात से अधिकतम राजस्व मिलता है। उन्होंने बताया कि 2014 में भारतीय वाहन क्षेत्र का मूल्य 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। गडकरी ने कहा कि भारत, जापान को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाजार बन गया है।

“छग का कश्मीर” प्राकृतिक सौंदर्य प्राचीन विरासत का इतिहास समेटे ऊंचाई पर बसा गर्मी का पिकनिक स्पॉट…!!

कोरबा: कोरबा जिले की पहचान आमतौर पर कोयला और बिजली उत्पादन से जुड़ी होती है, लेकिन इसी ऊर्जा नगरी की गोद में छुपा है एक और अद्भुत खजाना – चैतुरगढ़। समुद्र तल से लगभग 3060 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह स्थान सिर्फ अपनी बर्फीली ठंडक के कारण ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन इतिहास, समृद्ध जैव विविधता और गहन आस्था के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यही वजह है कि इसे ‘छत्तीसगढ़ का कश्मीर’ कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ का इतिहास बहुत पुराना है त्रेता युग में रामायण के समय से

चैतुरगढ़, जिसे लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है, कोरबा से लगभग 70 किलोमीटर और पाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कलचुरी वंश के शासकों द्वारा बसाई गई इस गढ़ नुमा संरचना को देखकर अंदाजा हो जाता है कि यह कोई साधारण स्थल नहीं है। चारों ओर मोटी दीवारों और प्राकृतिक खाइयों से घिरा यह क्षेत्र न सिर्फ सुरक्षा की मिसाल बल्कि यहाँ की भौगोलिक स्थिति इसे एक अनुपम सौंदर्य भी प्रदान करती है। गर्मियों में भी यहां का मौसम इतना ठंडा रहता है कि तापमान 5 से 10 डिग्री तक नीचे चला जाता है।सुदूर तक फैला समतल मैदान, हरे-भरे जंगल, और रहस्यमयी गुफाएं चैतुरगढ़ को प्रकृति प्रेमियों के साथ इतिहासकारों के लिए रहस्य और रोमांचक स्थल बना देती हैं।

महिषासुर मर्दिनी का प्राचीन मंदिर,

चैतुरगढ़ का प्रमुख आकर्षण है मां महिषासुर मर्दिनी का प्राचीन मंदिर, जिसे आठवीं सदी में कलचुरी वंशिय राजाओं ने बनवाया था। गर्भगृह में देवी महिषासुर मर्दिनी की 12 भुजाओं वाली प्रतिमा से सुसज्जित है, जो श्रद्धा और साहस का प्रतीक मानी जाती है। साल के दोनों नवरात्रों में हजारों श्रद्धालु मंदिर आकर मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करते हैं। मंदिर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित शंकर गुफा एक रहस्यमय और रोमांचक स्थल है। यह गुफा करीब 25 फीट लंबी है और इसका प्रवेश थोड़ा कठिन है।

लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट

चैतुरगढ़ अब केवल धार्मिक स्थल नहीं रहा। इसकी पहाड़ियों, जंगलों और ठंडी हवाओं ने इसे एक लोकप्रिय पिकनिक और ट्रैकिंग स्पॉट बना दिया है। आगंतुको को एक अलग ही आनंद प्रदान करता है।

मध्य भारत का ग्रीन लंग्स

चैतुरगढ़ में प्रवेश के लिए आपको मेनका, हुंकरा और सिंहद्वार मिलेगा।जिसमें वास्तुशिल्प का अद्भुत मिसाल हैं,साथ ही प्राचीन काल में किले निर्माण की सोच को भी उद्धृत करते हैं। किले के भीतर स्थित पाँच तालाबों में से तीन आज भी पानी से लबालब भरे हुए हैं। यह जल संरचनाएं उस समय के जल प्रबंधन की साक्षी हैं।

चैतुरगढ़ की पहाड़ियाँ हसदेव अरण्य के जंगलों से जुड़ी हुई हैं, जिसे मध्य भारत का “ग्रीन लंग्स” कहा जाता है। यहाँ की जैव विविधता अद्भुत है – चीतल, भालू, तेंदुआ और हाथियों के साथ-साथ अनेक प्रकार के औषधीय पौधों की प्रजातियां यहां देखी जाती हैं। इलाका केवल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण नही है, बल्कि प्रकृति की विविधता को भी संरक्षित रखने का संदेश देता है। चैतुरगढ़ पहाड़ों से चामादरहा, तिनधारी और श्रंगी झरना बहता है। बता दें, हसदेव नदी की सहायक नदी जटाशंकरी नदी का उद्गम मैकाल पर्वत श्रेणी के चैतुरगढ़ के पहाड़ो से हुआ है। यहां नज़ारा अगर कोई एक बार देख ले तो वह इससे बंध जाता है।

इतिहास की गूंज, प्रकृति की सुंदरता और आस्था की शक्ति एक साथ समाहित

चैतुरगढ़ किले को राजा पृथ्वी देव ने बनवाया था। किले का निर्माण कल्चुरी संवत 821 यानी 1069 ईस्वी में हुआ। किले के अंदर जाने के लिए तीन द्वार यानी रास्ते हैं, मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार। दिलचस्प बात यह है कि किले की अधिकांश दीवारें प्राकृतिक रूप से निर्मित हैं, जबकि कुछ हिस्सों में मानव निर्मित दीवारों का निर्माण किया गया है। यहां इतिहास की गूंज, प्रकृति की सुंदरता और आस्था की शक्ति एक साथ समाहित होती है।

चैतुरगढ़ किले में नामजद पांच तालाब है

चैतुरगढ़ किले में पांच तालाब है। यह तालाब किले के ऊपर हैं। पांच तालाबों में से तीन तलाब हमेशा सदाबहार रहते हैं यानी इन तालाबों में हमेशा पानी भरा रहता है। यह किले की खासियत को और भी बढ़ाने का काम करते हैं।गर्गज तालाब, सूखी तालाब और केकड़ा तालाब, ऐसे तालाब हैं जिसमें हमेशा पानी भरा रहता है। बता दें, गर्गज तालाब, गर्गज पहाड़ के नीचे बसा हुआ है जहां आप घूम भी सकते हैं।

ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने दुनियां को कहा अलविदा(Goodbye)”पीएम मोदी सहित भारत ने जताया शोक..

(media sources)वेटिकन ने जानकारी दी है कि पोप फ्रांसिस का निधन हो गया है। कार्डिनल केविन फेरेल ने यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि पोप फ्रांसिस ने सोमवार सुबह 7:35 बजे अंतिम सांस ली। कार्डिनल फेरेल ने कहा कि पोप फ्रांसिस का जीवन भगवान और चर्च की सेवा में समर्पित था।

पोप फ्रांसिस अपने सरल स्वभाव, दया भाव और सभी धर्मों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए विश्व विख्यात थे।

करुणा और विनम्रता के प्रतीक थे पोप, उनके प्रति गहरी संवेदना, PM मोदी से लेकर राहुल गांधी तक ने जताया दुख दुनियां के डेढ़ अरब लोगों ने उनके आत्मा की शांति के प्रार्थना किए।

पीएम मोदी ने जताया शोक..

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोप फ्रांसिस के निधन पर गहरा दुख जताया है और इस घड़ी में कैथोलिक समुदाय के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की है।

पोप फ्रांसिस और पीएम मोदी की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली के अपुलिया में जी7 शिखर सम्मेलन के इतर पोप फ्रांसिस से मुलाकात की थी. मुलाकात की तस्वीरों में पीएम मोदी और पोप गर्मजोशी से गले मिलते हुए दिखाई दे रहे थे।पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘पोप फ्रांसिस के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। दुख और स्मरण की इस घड़ी में, वैश्विक कैथोलिक समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। पोप फ्रांसिस को दुनिया भर के लाखों लोग हमेशा करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में याद रखेंगे।

उनकी आत्मा को ईश्वर की गोद में शांति मिले- पीएम मोदी ने आगे लिखा, ‘छोटी उम्र से ही पोप फ्रांसिस प्रभु ईसा मसीह के आदर्शों को साकार करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया था। उन्होंने गरीबों और वंचितों की लगन से सेवा की, जो लोग पीड़ित थे, उनके लिए उन्होंने आशा की भावना जगाई। मैं उनके साथ अपनी मुलाकातों को याद करता हूं और समावेशी और सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से बहुत प्रेरित हुआ। भारत के लोगों के प्रति उनका स्नेह हमेशा संजोया जाएगा. उनकी आत्मा को ईश्वर की गोद में शांति मिले’।

कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि पोप फ्रांसिस के निधन से आज पूरा विश्व दुखी है।वे वास्तव में एक उत्कृष्ट मानवतावादी थे- कांग्रेस

कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से X पर पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक संदेश जारी किया। इसमें लिखा है, ‘पोप फ्रांसिस के निधन से पूरा विश्व दुखी है, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में देखेंगी। वे अंतर-धार्मिक समझ और जुड़ाव के लगातार समर्थक थे. वैश्विक शांति और सद्भाव के लिए भी एक बहुत प्रभावशाली शक्ति थे।वे वास्तव में एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व, एक उत्कृष्ट मानवतावादी थे, जिन्होंने अपने पीछे एक बहुत ही मूल्यवान विरासत छोड़ी है।’

वे दलितों के साथ खड़े रहे- लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘करुणा, न्याय और शांति की वैश्विक आवाज पोप फ्रांसिस के निधन से बहुत दुखी हूं।वे दलितों और हाशिए पर पड़े लोगों के साथ खड़े रहे, असमानता के खिलाफ निडरता से बोले और प्रेम और मानवता के अपने संदेश से विभिन्न धर्मों के लाखों लोगों को प्रेरित किया। मेरी संवेदनाएं भारत और दुनिया भर के कैथोलिक समुदाय के साथ हैं.’।

वे आध्यात्मिक शक्ति के सच्चे प्रतीक थे- केजरीवाल आप पार्टी संयोजक

वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एक्स पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने लिखा, ‘पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए – जो विनम्रता और आध्यात्मिक शक्ति के सच्चे प्रतीक थे. इस अपार क्षति पर शोक व्यक्त करने वाले सभी लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना.’।

भारत के बड़े बड़े राजनेताओं ने धर्मगुरु के प्रति आदर सम्मान प्रकट करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर शोक संवेदना प्रेषित किए है।

पोप फ्रांसिस ने रविवार को सेंट पीटर बेसिलिका की बालकनी से वेटिकन स्क्वायर में एकत्रित हज़ारों लोगों को ईस्टर मैसेज दिया था।

प्रेमी संग मिलकर रची मंगेतर का अपहरण की साज़िश..

दुर्ग। जिले के जामुल थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक युवती ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही मंगेतर का अपहरण कराने की साजिश रच डाली। हालांकि मंगेतर मौका मिलते ही अपहरणकर्ताओं की गिरफ्त से भाग निकला। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती सहित तीन आरोपियों को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।घटना 18 अप्रैल की रात की है, जब टोकेश साहू अपने दोस्त भूपेंद्र यादव के साथ भिलाई से जामुल की ओर मोटरसाइकिल से जा रहा था। जैसे ही दोनों बोगदा पुलिया के पास पहुंचे, तभी एक कार में सवार 3-4 युवक उनकी बाइक के पास आकर रुके। इन युवकों ने टोकेश साहू के साथ गाली-गलौज कर हाथ, मुक्के और डंडों से मारपीट की और जबरन उसे कार में बैठाकर बेमेतरा की ओर रवाना हो गए। हालांकि, बेमेतरा पहुंचने पर टोकेश किसी तरह उनके चंगुल से भाग निकला।घटना के बाद भूपेंद्र यादव की शिकायत पर जामुल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर अपहरण में इस्तेमाल हुई कार की पहचान की गई और मुख्य आरोपी दुर्गेश साहू को नागपुर से गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में उसने बताया कि वह हेमकुमारी साहू उर्फ हेमा से प्रेम करता है, जिसकी शादी टोकेश साहू से तय हुई थी। हेमा इस शादी से खुश नहीं थी और उसने अपने मंगेतर टोकेश का बायोडाटा और फोटो अपने प्रेमी दुर्गेश को भेज दिए।

इसके बाद दुर्गेश ने अपने सहयोगी अमित वर्मा उर्फ राजा और बंटी के साथ नागपुर से क्रेटा कार में जामुल पहुंचकर अपहरण की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस साजिश में शामिल तीनों आरोपियों हेमकुमारी साहू, दुर्गेश साहू और अमित वर्मा उर्फ राजा को नागपुर से गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। चौथा आरोपी बंटी अभी भी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।

पुलिस का कहना है कि यह मामला प्रेम संबंधों के कारण हुई साजिश का है, जिसमें युवती ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही मंगेतर के अपहरण की योजना बनाई थी। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन करेंगे हड़ताल,होम डिलीवरी रहेगी बंद..

भोपाल 20 अप्रैल (मीडिया सूत्र) भोपाल में देश भर के गैस वितरक एकत्र हुए क्योंकि यहां देश भर के गैस वितरकों का राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया था।रविवार अधिवेशन में वितरण संघ ने चेतावनी दी कि अगर तीन महीने में अधिक कमीशन सहित उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल पर चले जाएंगे।

वितरक।समस्याओं पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन

अधिवेशन के दौरान संगठन द्वारा वितरकों की समस्याओं पर आधारित एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इसमें मौजूदा प्रणाली में वितरकों को होने वाली दिक्कतों, लागत और जिम्मेदारियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। 

अप्रैल में ही सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत में 50 रुपये की वृद्धि की है। इसके बाद, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स यूनियन ने सरकार को हड़ताल की चेतावनी दी है।

कमीशन बढ़ाने की मांग केंद्र सरकार को लिखे पत्र

संघ ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि एलपीजी वितरण पर कमीशन को बढ़ाकर कम से कम 150 रुपये किया जाए। पत्र में कहा गया है कि एलपीजी की आपूर्ति मांग और पूर्ति पर आधारित होनी चाहिए। लेकिन, तेल कंपनियां बिना किसी मांग के वितरकों को गैर-घरेलू सिलेंडर भेज रही हैं, जो कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडरों के वितरण में भी समस्याएं आ रही हैं।

मांग पूरी नहीं हुई तो करेंगे लंबी हड़ताल

एसोसिएशन के अध्यक्ष बी एस शर्मा ने एक बयान में बताया कि यह निर्णय शनिवार को भोपाल में एसोसिएशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में लिया गया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों से आए सदस्यों द्वारा मांग पत्र के बारे में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। हमने एलपीजी वितरकों की मांगों के बारे में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भी लिखा है। एलपीजी वितरकों को दिया जा रहा वर्तमान कमीशन बहुत कम है और यह परिचालन लागत के अनुरूप नहीं है।संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें तीन महीने के भीतर पूरी नहीं की गईं, तो वे लंबी हड़ताल पर जाएंगे।

आटे की रोटी में ये मिलाए, खाने में शक्कर की मात्रा ऐसे करें कम,

स्वास्थ्य/लाइफ स्टाइल

  • गेहूं की रोटी खाने के कई फायदे और कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। फायदे में, यह ऊर्जा प्रदान करता है, पाचन में मदद करता है, और कुछ महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का स्रोत है. हालांकि, ज्यादा मात्रा में सेवन करने से वजन बढ़ सकता है, गैस और ब्लोटिंग हो सकती है, और कुछ लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी हो सकती है।
  • बीमारी से बचने का एक कारगार उपाय है खानपान में ध्यान। शुगर पीड़ित को गेहूं का आटा भी बढ़ा सकता है शुगर की मात्रा।आजकल शुगर की समस्या कामन रूप से लाइफ में हैं।हमारा आज का लाईफ स्टाइल इस कदर बदल गया है कि हम प्राकृतिक चीजों से ज्यादा कृत्रिम चीजों का इस्तेमाल करने लग गए है।जिस कारण अब हम शुद्ध प्राकृत उत्पाद पर भी अपना पाचन तंत्र को कमजोर कर डाले हैं।
  • अब गेहूं का आटा भी ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है, खासकर डायबिटीज पेशेंट्स के लिए गेंहू का आटा खाना नुकसानदायक हो सकता है। गेहूं के आटे में कार्बोहाइड्रेट लेवल हाई होता है, जो बॉडी में जाते ही ग्लूकोज में बदला जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है।
  • साथ ही इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) भी ज्यादा होता है, यह एक मेजरमेंट है जो दिखाता है कि कोई फूड प्रोडक्ट्स ब्लड शुगर लेवल को कितना तेजी से बढ़ाता है और गेहूं में GI लेवल हाई होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है।
  • इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट को कंट्रोल करने और हाई GI वाले फूड प्रॉडक्ट्स से बचने की सलाह दी जाती है.
  • शुगर पेशेंट्स के लिए डाइट सिस्टम
  • शुगर के मरीजों को बालेंसड डाइट लेने की सलाह दी जाती है, उन्हें तरह-तरह के फल,सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन और हेल्दी फैट अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। साथ ही आलू, मीठे फल, चावल कम से कम खाना चाहिए। आपको पता है कि गेहूं का आटा ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इसलिए इस खबर में हम आपको उन चीजों के बारे में बताएंगे, जिन्हें गेंहू के आटे में मिलाकर रोटी बनाने से ब्लड शुगर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
  • अलसी के बीज मिला सकते है
  • गेहूं के आटे में अलसी के बीज मिलाकर रोटी बनाना डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है। फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर अलसी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। यह हार्ट हेल्थ के लिए भी अच्छा होता है और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है। साथ ही फाइबर से भरपूर होने के कारण डाइजेशन में भी मददगार है। अलसी के बीज इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
  • जौ का आटा फायदा पहुंचा सकता है
  • गेहूं के आटे में जौ का आटा मिला कर रोटी बनाना डायबिटीक पेशेंट्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। जौ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। फाइबर से भरपूर जौ, ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। साथ ही जौ प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशिया का भी अच्छा स्रोत है।
  • मेथी दाना सेहत के लिए लाभदायक
  • औषधीय गुणों से भरपूर मेथी दाना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को इंप्रूव करते हैं, जिससे बॉडी इंसुलिन को अच्छी तरह से यूटिलाइज कर पाती है, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मददगार साबित होता है। फाइबर से भरपूर मेथी कार्बोहाइड्रेट को धीरे-धीरे ऑब्जर्व करते हैं। इसलिए इसकी इसे गेंहू के आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाना डाइबिटीज पेशेंट्स के लिए फायदेमंद साबित होता है।
  • यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है इस सम्बन्ध में आहार विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही चलें।सबका तासीर अलग अलग होता है।

नेपाल में उठ रही आवाज देश को हिंदुराष्ट्र बनाओ, प्रदर्शन कर्ताओं ने निषेधाज्ञा का किया उल्लंघन..

२८ मई २००८ तक नेपाल एक संवैधानिक राजतंत्र था। उसी दिन नेपाली संविधान सभा द्वारा नेपाल को गणतांत्रिक राज्य बनाने के लिए संविधान बदल दिया गया।


काठमांडू:_ नेपाल में राजशाही समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रविवार को राजशाही की पुनर्स्थापना और नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास और संसद भवन को घेर लिया और सरकार विरोधी नारे लगाए। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्रों में यह प्रदर्शन किया।
लगभग 1,500 प्रदर्शनकारी बिजुलीबाजार-बनेश्वर इलाके में एकत्रित हुए और “गणतंत्र मुर्दाबाद”, “हमें राजशाही चाहिए”, “भ्रष्ट सरकार मुर्दाबाद”, और “नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करो” जैसे नारे लगाए। उनके हाथों में इन नारों के साथ बैनर और पोस्टर थे। प्रदर्शन का नेतृत्व आरपीपी अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन, वरिष्ठ नेता पशुपति शमशेर राणा, और नेपाल के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक ध्रुव बहादुर प्रधान सहित कई नेताओं ने किया।
पुलिस के हजारों कर्मियों को तैनात किया गया
प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने का ऐलान किया था, जिसके बाद काठमांडू के नयां बनेश्वर, बिजुलीबाजार, मैतीघर, भद्रकाली और बालुवाटार क्षेत्रों में दंगा नियंत्रण पुलिस के हजारों कर्मियों को तैनात किया गया था।
रविवार सुबह काठमांडू के नया बनेश्वर क्षेत्र में हजारों स्कूली शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। वे शिक्षा क्षेत्र में सुधार और वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। राजशाही समर्थक एकत्र होकर काठमांडू के तीन अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन करने पहुंचे और पुलिस की सुरक्षा घेराबंदी को तोड़ते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की कोशिश की। सैकड़ों प्रदर्शनकारी भद्रकाली क्षेत्र में एकत्र हुए, जहां सचिवालय भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय स्थित हैं। एक और समूह संसद भवन के सामने प्रदर्शन कर रहा था। राजपा (आरपीपी) ने यह घोषणा की कि वे अपनी मांगों के साथ अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखेंगे, जिसका उद्देश्य देश में राजशाही की पुन: स्थापना है।
हिन्दू राष्ट्र का स्वरूप अधिक उपयुक्त
बता दें कि पिछले करीब तीन दशकों से अस्थिरता का सामना कर रहे नेपाल में अब बड़ी संख्या में लोग एक बार फिर से हिन्दू राजशाही की बहाली और देश को पुनः हिन्दू राष्ट्र घोषित किए जाने की माँग कर रहे हैं। लगभग पंद्रह वर्षों के लोकतांत्रिक अनुभव के बाद नेपाल आज फिर उसी स्थिति की ओर लौटता दिख रहा है, जहाँ वह 1980 के दशक के अंत में था।
इस अस्थिरता के दौर का लाभ चीन, अमेरिका, ईसाई मिशनरियों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों को मिला है, जिन्हें पाकिस्तान जैसे देशों का भी समर्थन प्राप्त रहा। इन तत्वों ने नेपाल को उसकी पारंपरिक हिन्दू पहचान से दूर करने का प्रयास किया।
भारत के कुछ राजनेताओं की भूमिका भी इस संकट को बढ़ाने में मानी जा रही है। अब नेपाल की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी का यह मानना है कि लोकतंत्र के बजाय हिन्दू राजशाही और हिन्दू राष्ट्र का स्वरूप उनके लिए अधिक उपयुक्त था। यही कारण है कि अब इस दिशा में पुनः स्थापना की मांग ज़ोर पकड़ रही है। (साभार मीडिया सूत्र)