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Sunday, October 25, 2026
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सोशल मीडिया पर दोस्ती कर युवती को बनाया शिकार, दुष्कर्म के बाद निजी वीडियो से ब्लैकमेलिंग, कैंसर का बहाना बनाकर 2.19 लाख रुपये ठगे

राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में इंस्टाग्राम के जरिए युवती से संपर्क बढ़ाकर कथित तौर पर दुष्कर्म, धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में गुजरात के सूरत से 19 वर्षीय युवक रौनक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि युवक ने कैंसर से पीड़ित होने की बात कहकर युवती से 2 लाख 19 हजार 500 रुपये ऐंठे। इसके बाद रकम वापस मांगने पर वह निजी तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी देने लगा।

इंस्टाग्राम पर संपर्क के बाद शुरू हुआ ठगी का खेल

पुलिस के अनुसार, आरोपी रौनक सूरत के वराछा इलाके में खोडियार नगर रोड स्थित अश्विन सोसायटी-2 का रहने वाला है। उसकी युवती से पहचान इंस्टाग्राम पर हुई थी। बातचीत के दौरान उसने युवती का भरोसा हासिल किया। आरोप है कि इसके बाद कैंसर से पीड़ित होने का हवाला देकर उसने युवती से आर्थिक सहायता मांगी और अलग-अलग माध्यमों से कुल 2,19,500 रुपये प्राप्त कर लिए।

होटल में बुलाकर दुष्कर्म करने और वीडियो बनाने का आरोप

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी सूरत से राजनांदगांव पहुंचा और एक निजी होटल में कमरा लिया। इसके बाद उसने युवती को मुलाकात के बहाने वहां बुलाया। आरोप है कि होटल में आरोपी ने युवती के साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसी दौरान उसने मोबाइल फोन से युवती की निजी तस्वीरें और अश्लील वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिए।

रकम लौटाने के बजाय वायरल करने की धमकी

युवती को जब कथित धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तो उसने आरोपी से अपने पैसे वापस मांगे। आरोप है कि युवक ने रकम लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह मोबाइल में मौजूद निजी तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाने लगा। इस घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की।

सूरत में दबिश देकर आरोपी को पकड़ा

पीड़िता की लिखित शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। उसके बयान के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 351(1) भी मामले में जोड़ी गईं। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन में आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई।तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन की जानकारी के आधार पर पुलिस टीम गुजरात के सूरत पहुंची, जहां आरोपी को हिरासत में लिया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अपराध स्वीकार करने की बात सामने आने के बाद आरोपी का मोबाइल फोन, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड जब्त किया गया।

ट्रांजिट रिमांड पर राजनांदगांव लाया गया आरोपी

पुलिस ने सूरत की अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल कर आरोपी को राजनांदगांव पहुंचाया है। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा: अंबिकापुर के संजय पार्क में खुलेगा अत्याधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर

रायपुर- छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और वनांचल के ग्रामीणों की सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। वन मंत्री  केदार कश्यप की अध्यक्षता में शनिवार को नवा रायपुर स्थित उनके निवास कार्यालय में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक हुई। इसमें अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक वन्यजीव ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने को मंजूरी दी गई। साथ ही संरक्षित वन क्षेत्रों की 18 ग्रामीण सड़कों के उन्नयन संबंधी प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने की अनुशंसा की गई।

वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण के साथ वनांचल के ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, घायल वन्यप्राणियों के त्वरित उपचार और वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। 

अंबिकापुर में प्रस्तावित उपचार केंद्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और दुर्घटनाओं में घायल वन्यप्राणियों के त्वरित बचाव, प्राथमिक उपचार और अल्पकालिक देखरेख की सुविधा उपलब्ध होगी। वहीं, पीएम जनमन योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भोरमदेव अभयारण्य की 3, इंद्रावती टाइगर रिजर्व की 14 और जशपुर के बादलखोल अभयारण्य की एक सड़क के उन्नयन की अनुशंसा की गई। इन सड़कों के उन्नयन से बैगा सहित अन्य विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों की बस्तियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच बेहतर हो सकेगी।

बैठक में जनभागीदारी के आधार पर चयनित ‘ऑरेंज ओकलीफ’ को छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली घोषित करने के प्रस्ताव का परीक्षण पूर्ण कर आगे की कार्यवाही करने की मंजूरी दी गई। बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों के सफल संरक्षण के बाद गोमर्डा अभयारण्य में 50 काले हिरणों के स्थानांतरण को भी स्वीकृति दी गई। 

समिति ने हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों से फसल क्षति के मुआवजे की दरों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जिलावार एवं फसलवार बीमित राशि के आधार पर अद्यतन करने के प्रस्ताव पर आगे विचार करने का निर्णय लिया। हाथी प्रभावित क्षेत्रों में कच्चे मकानों को पक्का करने के लिए विशेष मुख्यमंत्री आवास योजना के प्रस्ताव को उच्चस्तरीय बैठक में विचारार्थ रखने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विधायक  धर्मजीत सिंह,  गोमती साय और  चैतराम अटामी, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव  अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक  ओ.पी. यादव सहित समिति के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के चार शहरों में दौड़ेंगी 240 इलेक्ट्रिक बसें, आज होगा समझौता, यात्रियों को मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं

रायपुर- छत्तीसगढ़ के चार बड़े शहरों में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए 11 अक्टूबर को कंसेशन एग्रीमेंट किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव की मौजूदगी में रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और कोरबा नगर निगम का चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के साथ कंसेशन एग्रीमेंट होगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत होने वाले इस समझौते से चारों शहरों में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने का रास्ता साफ होगा। 

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में प्रदेश के आठ नगरीय निकायों के महापौर और आयुक्त शामिल होंगे। इनमें रायपुर की महापौर मती मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर मती पूजा विधानी, कोरबा की महापौर मती संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर मती अलका बाघमार, रिसाली की महापौर मती शशि सिन्हा, भिलाई के महापौर  नीरज पाल, बीरगांव के महापौर  नंदलाल देवांगन तथा भिलाई-चरोदा के महापौर  निर्मल कोसरे शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, संचालक  नीलेश क्षीरसागर और सूडा के सीईओ  सुमीत अग्रवाल भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने की योजना है। इनमें सबसे अधिक 100 बसें रायपुर में चलेंगी। दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिलेंगी। बसों के संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर और भिलाई में 1 नवम्बर 2026 तक प्रतीकात्मक रूप से 20-20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख सचिव  बोरा ने बताया कि ई-बसों में यात्रियों की सुविधा के साथ सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसें आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस होंगी। यात्रियों को मोबाइल स्कैनर के माध्यम से किराए का भुगतान करने और ऑनलाइन टिकट लेने की सुविधा मिलेगी। सुरक्षा के लिए प्रत्येक बस में छह कैमरे लगाए जाएंगे। यात्री मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

 बोरा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य शहरी सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। इससे नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ शहरों की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ को मिल सकती हैं दो स्पेशल ट्रेनें, सांसद संतोष पांडेय ने GM को लिखा पत्र

रायपुर- आगामी त्योहारी मौसम में ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़, लंबी प्रतीक्षा सूची और यात्रियों की दिक्कतों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से विशेष प्रबंध करने का आग्रह शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के महाप्रबंधक को पत्र प्रेषित किया है। सांसद ने पत्र में नवरात्र, दीपावली, छठ पूजा और क्रिसमस पर्व के दौरान छत्तीसगढ़ के यात्रियों की सुविधा के लिए दो महत्वपूर्ण मार्गों पर नई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है।

सांसद संतोष पांडेय ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि त्योहारी सीजन में छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और दर्शन के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार तथा ऋषिकेश की यात्रा करते हैं। वर्तमान में इस मार्ग पर नियमित ट्रेनों में भारी वेटिंग चल रही है। अत: दुर्ग से हरिद्वार के बीच एक सीधी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन का परिचालन तत्काल शुरू किया जाना चाहिए। इससे नियमित ट्रेनों पर यात्रियों का अत्यधिक दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं को कंफर्म टिकट के साथ सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा।

गोंदिया-माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग के लिए मांग
सांसद ने दूसरी महत्वपूर्ण मांग जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम जाने वाले यात्रियों के लिए रखी है। उन्होंने गोंदिया से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने की जरूरत जताई है। इस ट्रेन का मार्ग गोंदिया से प्रारंभ होकर राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, उसलापुर और कटनी मुड़वारा होते हुए निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस मार्ग से उत्तर भारत जाने वाले हजारों यात्रियों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

रेल विकास संगठन का भी मिला समर्थन
सांसद ने अपने पत्र के साथ छत्तीसगढ़ रेल विकास संगठन द्वारा प्राप्त मांग पत्र को भी संलग्न किया है। उन्होंने महाप्रबंधक से कहा कि जनभावनाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन दोनों ट्रेनों के संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इन ट्रेनों के चलने से न केवल आम यात्रियों को दलालों और भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होगी।

विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं से तैयार होंगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी : मुख्यमंत्री साय

00 सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री
00 नवा रायपुर में बैडमिंटन अकादमी शुरू करेंगे पद्म भूषण पुलेला गोपीचंद, प्रदेश की प्रतिभाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण

00 खेल प्रतिभाओं को अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता, खेल विकास के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान
00 बस्तर ओलंपिक से सामने आ रही दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाएं, दूसरे वर्ष लगभग 3.91 लाख खिलाडिय़ों ने लिया हिस्सा

00 खेल उत्कृष्टता, आधुनिक सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के राज्य सरकार के प्रयासों की गोपीचंद ने की सराहना
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार इसी दिशा में योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के जोरा में आयोजित सेंध लेक सिटी और इलेशियम क्लब्स की साझेदारी घोषणा एवं अनुबंध हस्ताक्षर समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में प्रस्तावित विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स क्लब की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में खेल संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्लब के संस्थापकों और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक श्री पुलेला गोपीचंद का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय बैडमिंटन को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके मार्गदर्शन में अनेक खिलाडिय़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया है। नवा रायपुर में उनकी बैडमिंटन अकादमी की शुरुआत प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी। साय ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता का निर्माण भी करते हैं। खेलों में निवेश वास्तव में हमारी युवा पीढ़ी और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास और प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दे रही है।

बस्तर ओलंपिक ने बदली तस्वीर, गांवों से निकलकर मैदान तक पहुंच रहे युवा
साय ने बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढऩे का अवसर देने का सशक्त मंच बना है। बस्तर ओलंपिक के पहले वर्ष में लगभग एक लाख 65 हजार खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग तीन लाख 91 हजार हो गई। खिलाडिय़ों की बढ़ती भागीदारी बताती है कि बस्तर के युवाओं में खेलों को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है और क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में आज युवा बंदूक और हिंसा से दूर होकर खेल, शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि सुदूर गांव की प्रतिभा को भी वही अवसर और मंच मिले, जो बड़े शहरों के खिलाडिय़ों को उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया के अंतर्गत राष्ट्रीय जनजातीय खेलों का सफल आयोजन किया गया है। प्रदेश के खिलाड़ी भी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव तथा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां अपने परिश्रम और प्रतिभा से प्रदेश का मान बढ़ा रही हैं।
खेल अधोसंरचना के विस्तार के लिए 100 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने खेलों के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष के बजट में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया सहित विभिन्न योजनाओं के समन्वय से प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित की जा रही है। खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण, आवश्यक सुविधाएं और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी, चाहे वह किसी शहर से हो या सुदूर वनांचल से, संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे। प्रतिभा को अवसर से जोडऩा और खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।
नक्सलवाद से मुक्ति के साथ बस्तर में खुल रहे विकास के नए द्वार
साय ने कहा कि प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता उनकी सरकार के लगभग पौने तीन वर्ष के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद ने बस्तर सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के विकास को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक दिशा मिली है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि इस परिवर्तन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जनता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोगों के विश्वास और सहयोग से आज उन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, खेल और रोजगार की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मोदी की गारंटी के अंतर्गत प्रदेशवासियों से किए गए वादों को पूरा करने के साथ सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए राज्य की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक सामर्थ्य के साथ नई तकनीक, आधुनिक उद्योग, सेवा क्षेत्र और मानव संसाधन के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा, वनोपज, जल संसाधन और ऊर्जा के क्षेत्र में समृद्ध है। प्रदेश के मेहनतकश लोग हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इन सभी संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए रोजगार, उद्यमिता और निवेश के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति को देश और विदेश के निवेशकों से उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। हाल ही में सिंगापुर प्रवास के दौरान डेटा सेंटर, कृषि प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। लगभग 15 बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ आयोजित राउंड टेबल बैठक में निवेशकों ने छत्तीसगढ़ में उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि निवेश बढऩे से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सुशासन और तकनीक से बदल रही प्रशासनिक कार्यसंस्कृति
साय ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित प्रशासन के लिए लगातार सुधार कर रही है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने के साथ शासकीय सेवाओं के डिजिटलीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि तकनीक के माध्यम से सेवाएं अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनें तथा उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक, सशक्त युवा, आधुनिक अधोसंरचना और सुशासन विकसित छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से स्वस्थ, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओम प्रकाश चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल खनिज और भारी उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य में सेवा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और आधुनिक शहरी अधोसंरचना का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। नवा रायपुर इस बदलते छत्तीसगढ़ की नई संभावनाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के लिए लगातार प्रतिष्ठित संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी और नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान स्थापित हो रहे हैं, जबकि आईआईटी, आईआईएम, एम्स और सीपेट जैसे राष्ट्रीय संस्थान पहले से प्रदेश में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
चौधरी ने कहा कि अमरावती और हैदराबाद के बाद श्री पुलेला गोपीचंद द्वारा छत्तीसगढ़ में बैडमिंटन अकादमी प्रारंभ किया जाना प्रदेश के खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों को अपने ही प्रदेश में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नवा रायपुर में डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर इकाई की स्थापना की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार अंजोर विजन दस्तावेज को आधार बनाकर दीर्घकालिक योजना के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ और सशक्त युवा पीढ़ी जरूरी : गोपीचंद
पद्म भूषण श्री पुलेला गोपीचंद ने छत्तीसगढ़ में मिले आत्मीय स्वागत के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर के सुव्यवस्थित और सुंदर विकास को देखकर छत्तीसगढ़ के प्रति उनकी धारणा को नई दिशा मिली है। उन्होंने इलेशियम क्लब्स की पहल को खेल, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। गोपीचंद ने कहा कि पिछले दस-बारह वर्षों में देश में खेलों के प्रति दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने वर्ष 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी राष्ट्र की प्रगति में गौरव और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब कोई भारतीय खिलाड़ी विजय प्राप्त करता है और तिरंगा ऊंचा होता है, तो इससे पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और साक्षरता के साथ उनके शारीरिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। बच्चों को दौडऩे, कूदने, चढऩे और विभिन्न खेल गतिविधियों में भाग लेने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। खेलों में किया गया निवेश केवल खिलाडिय़ों के निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी समाज के निर्माण में योगदान देता है। गोपीचंद ने खेल उत्कृष्टता से जुड़ी योजनाओं, सुविधाओं और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए ऐसी युवा पीढ़ी की आवश्यकता है, जो शिक्षित होने के साथ स्वस्थ, सक्रिय, अनुशासित और शारीरिक रूप से सक्षम भी हो। इसलिए खेल और स्वास्थ्य को विकास की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया जाना आवश्यक है। इस अवसर पर प्रह्लाद राय अग्रवाल, दीपचंद राजलीवाल, पवित्र कुमार, डॉ. हिमांशु द्विवेदी सहित अन्य अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

सीएम विष्णुदेव साय ने कर्मवीर सिंह से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ बीजेपी के संगठनात्मक मुद्दों पर हुई चर्चा

 छत्तीसगढ़:  भारतीय जनता पार्टी के संगठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री संगठन कर्मवीर सिंह से मुलाकात की। इस दौरान पार्टी से जुड़े विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस मुलाकात की जानकारी साझा की।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कर्मवीर सिंह के साथ हुई भेंट के दौरान संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस मुलाकात के समय झारखंड बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन पवन साय और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल भी मौजूद रहे।

11 अक्टूबर को नई जिम्मेदारी संभालेंगे कर्मवीर सिंह

बीजेपी ने 24 सितंबर 2026 को कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ में प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी सौंपी थी। वह 11 अक्टूबर को औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे। खास बात यह है कि वह नवरात्र के पहले दिन संगठन की नई जिम्मेदारी शुरू करेंगे।प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कौन हैं कर्मवीर सिंह? जानिए उनका संगठनात्मक सफर

कर्मवीर सिंह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। संगठनात्मक कामकाज का उन्हें व्यापक अनुभव है।

संघ में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

कर्मवीर सिंह अपने शुरुआती संगठनात्मक सफर में तहसील, जिला और विभाग प्रचारक के रूप में काम कर चुके हैं। वर्ष 2015 में उन्हें मेरठ का दायित्व मिला, जबकि 2019 में उन्होंने ब्रज प्रांत के सह प्रांत प्रचारक के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

2020 में बीजेपी में मिली भूमिका

वर्ष 2020 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उन्हें बीजेपी में संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए भेजा गया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश बीजेपी के सह संगठन महामंत्री के रूप में काम किया। इस भूमिका में उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में योगदान दिया।

झारखंड में चार साल तक संभाला संगठन का काम

वर्ष 2022 में कर्मवीर सिंह को झारखंड बीजेपी का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने करीब चार वर्षों तक वहां पार्टी के संगठन की जिम्मेदारी संभाली। अब उन्हें छत्तीसगढ़ में यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।

छत्तीसगढ़ बीजेपी के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?

प्रदेश महामंत्री संगठन का पद पार्टी के सांगठनिक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस जिम्मेदारी के तहत संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, पार्टी की गतिविधियों का संचालन तथा विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक व्यवस्थाओं को मजबूत करने जैसे कार्य प्रमुख होते हैं।कर्मवीर सिंह के अनुभव को देखते हुए छत्तीसगढ़ में पार्टी संगठन के कामकाज को नई दिशा देने की उम्मीद की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ उनकी मुलाकात को भी इसी संगठनात्मक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

​अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में ‘स्कूल केईन्ता’ से जगी उम्मीद

 रायपुर- जब हौसले मजबूत हों, तो दुर्गम से दुर्गम रास्ते भी सुगम हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर अंचलों में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘स्कूल केईन्ता अभियान’ ने इस बात को सच कर दिखाया है। भौगोलिक विषमताओं और दूरी के कारण जो बच्चे कभी शिक्षा से दूर थे, आज वे अपने ही गाँव में अक्षर ज्ञान प्राप्त कर अपने स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रहे हैं।

 ​इस संवेदनशील पहल के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है, वहीं अत्यंत पहुँचविहीन क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक प्राथमिक शालाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।

​अब 10 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर बना बीती बात

संकुल केंद्र गारपा के अंतर्गत आने वाले गाँव घमंडी की कहानी इस बदलाव का जीवंत उदाहरण है। कभी यहाँ के मासूम बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए कोड़ेनार तक लगभग 10 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता था। घने जंगलों, पथरीले रास्तों और लंबी दूरी के कारण बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पाते थे।
बच्चों और अभिभावकों की इस पीढ़ियों पुरानी समस्या को समझते हुए ज़िला प्रशासन ने गाँव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी की शुरुआत की। वर्तमान में इस विद्यालय में 30 बच्चे पंजीकृत हैं।

स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे गाँव के ही बच्चों को नियमित अध्ययन से जोड़कर इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में एक नायक की भूमिका निभा रहे हैं। अब बच्चों को शिक्षा पाने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। बच्चों को ​शिक्षा के साथ अधिकारों का उपहार मिला। ​गाँव में स्कूल खोलने के साथ-साथ प्रशासन बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रशासनिक सुविधाओं को भी उनके द्वार तक पहुँचा रहा है। हाल ही में वैकल्पिक शाला घमंडी के गत वर्ष नामांकित 22 बच्चों को उनके जाति प्रमाण पत्र तैयार कर वितरित किए गए। ​इन आवश्यक दस्तावेजों के मिल जाने से न केवल बच्चों और अभिभावकों में अपार हर्ष है, बल्कि भविष्य में मिलने वाली विभिन्न शासकीय छात्रवृत्तियों, शैक्षणिक योजनाओं और नागरिक सुविधाओं का लाभ उठाने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है।

इस अभियान के माध्यम से 2,000 से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ चुके है। दूरस्थ क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाओं का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। अपने गाँव में पढ़ाई की सुविधा मिलने से अब बच्चों को 10 किमी की थकाऊ यात्रा से मुक्ति मिल गई है।
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​एक मिसाल बनता ‘स्कूल केईन्ता अभियान’

ज़िला प्रशासन का यह सतत प्रयास साबित करता है कि यदि प्रतिबद्धता हो, तो अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक भी विकास की किरण पहुँचाई जा सकती है। ‘स्कूल केईन्ता अभियान’ न केवल बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर शिक्षण व्यवस्था और आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाकर राज्य के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

डिजिटल क्रॉप सर्वे का बाकी काम 10 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश, मुख्य सचिव ने की समीक्षा

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य 10 नवम्बर तक पूरा करें

कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में डिजिटल क्रॉप सर्वे के संबंध में कलेक्टरों को दिए निर्देश

डिजिटल क्रॉप सर्वे की मॉनिटरिंग, त्रुटियों के सुधार और डेटा के क्रॉस वेरिफिकेशन पर जोर

रायपुर,मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति, खसरों की जियो-रेफरेंसिंग, पॉलीगॉन निर्माण, फसल की वास्तविक स्थिति के सत्यापन तथा सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
राजस्व सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में अब तक 93.84 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव ने शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य प्रत्येक खसरे में बोई गई फसल के क्षेत्रफल को वास्तविक स्थिति के आधार पर दर्ज करना है। इसके लिए फसल का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, पॉलीगॉन निर्माण तथा संबंधित जानकारी को डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए।

10 नवंबर तक पूरा करें सर्वे का शेष कार्य
मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कलेक्टरों को निर्देश दिए कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का शेष कार्य हर हाल में 10 नवंबर तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन खसरों का नक्शा उपलब्ध नहीं है या जिनकी जियो-रेफरेंसिंग नहीं हुई है, उनकी पहचान कर पॉलीगॉन तैयार किए जाएं और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज कर अपलोड की जाए। इसके लिए जिलों में उपलब्ध ग्रामवार डेटा का उपयोग करते हुए शेष खसरों में धान अथवा अन्य फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए। पिछले वर्ष के फसल संबंधी रिकॉर्ड का भी आवश्यकतानुसार संदर्भ लिया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सर्वे का कार्य 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, वहां शेष कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। सर्वेयर, पटवारी और राजस्व विभाग के अन्य मैदानी अमले को सक्रिय कर ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे का कार्य केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक फसल स्थिति के आधार पर पूरा होना चाहिए।

ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं का होगा निराकरण
मुख्य सचिव ने बताया कि 1 नवंबर से ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में डिजिटल क्रॉप सर्वे से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन कर उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाए। किसानों को ग्राम सभाओं के आयोजन की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि वे अपनी फसल संबंधी जानकारी में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विसंगति होने पर अपनी आपत्ति और समस्या प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि ग्रामवार ऐसे किसानों की सूची तैयार की जाए, जिनकी फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन या सुधार किया जाना है। ग्राम सभाओं में किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया जाए और आवश्यक सुधारों को रिकॉर्ड में अद्यतन किया जाए। कलेक्टर ग्रामसभा सहित सर्वे की आगे की कार्ययोजना तैयार करें तथा सुधार के लिए प्राप्त आवेदनों और प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

डेटा की गुणवत्ता और क्रॉस वेरिफिकेशन पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे में किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधार किया जाए। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड अंतिम रूप से फ्रीज होने के बाद त्रुटियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। प्रत्येक जिले में सर्वे की प्रगति के साथ उसकी गुणवत्ता की भी नियमित जांच की जाए। उन्होंने विशेष रूप से धान सहित सभी फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी पात्र फसल क्षेत्र सर्वे से छूटने न पाए।

विशेष श्रेणी के किसानों का भी होगा पंजीयन
मुख्य सचिव ने विशेष श्रेणी के किसानों का अलग से पंजीयन कर उनकी जानकारी डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक में अपलोड करने के निर्देश दिए। इसमें वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत आने वाले किसान, वन क्षेत्रों के ग्रामों से संबंधित किसान, ग्राम कोटवार तथा शासकीय पट्टाधारी किसानों की जानकारी शामिल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों के किसानों का सर्वे और पंजीयन भी निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर 10 नवंबर तक संबंधित रिपोर्ट अपलोड की जाए। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय जिलों और एफआरए क्षेत्रों में कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पात्र किसानों का पंजीयन और फसल संबंधी विवरण सही तरीके से दर्ज हो। मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे की सफलता के लिए सही डेटा, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सर्वे का कार्य वास्तविक स्थिति के आधार पर पूरा हो तथा किसानों को अपनी समस्याएं रखने और उनमें सुधार कराने का अवसर मिले।बैठक में मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को जल जीवन मिशन के कार्यों की भी समीक्षा करने और संबंधित प्रगति पर आवश्यक ध्यान देने के निर्देश दिए। 

बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग  श्रीमती फरिया आलम सिद्दीकी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सरगुजा ओलंपिक से निखर रही ग्रामीण खेल प्रतिभाएं, युवा खिलाड़ियों के सपनों को मिल रही नई उड़ान : पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

रायपुर- सरगुजा की धरती खेल प्रतिभाओं से समृद्ध है। यहां के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है उन्हें उचित अवसर, प्रोत्साहन और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने की। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को नई पहचान देने के साथ युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उक्त बातें पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने शनिवार को पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 के समापन समारोह में कही। इस अवसर पर लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

समापन समारोह में शामिल होकर पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके खेल कौशल, जोश और जीत के जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने, युवाओं को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और खेलों के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ने के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सद्भाव की भावना भी मजबूत होती है।

सरगुजा की प्रतिभाएं प्रदेश और देश का नाम करेंगी रोशन

पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि सरगुजा अंचल के युवाओं में प्रतिभा, परिश्रम और संघर्ष की अद्भुत क्षमता है। यहां के खिलाड़ी यदि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और नियमित अभ्यास के साथ आगे बढ़ें, तो निश्चित रूप से राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते। सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ऐसे खिलाड़ियों को आगे आने, अपनी प्रतिभा निखारने और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास और संकल्प है कि सरगुजा की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिले, युवा खेलों के प्रति प्रोत्साहित हों और अपनी उपलब्धियों से सरगुजा सहित पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करें। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में परिवार, समाज, शिक्षकों और खेल प्रशिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण अंचलों में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

खेलों से विकसित होता है अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व का गुण

मंत्री  अग्रवाल ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि खेल जीवन में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की सीख देते हैं। खेल के मैदान में मिली जीत आत्मविश्वास बढ़ाती है, वहीं हार हमें अपनी कमियों को पहचानकर और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में केवल विजेता बनना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पूरे समर्पण, मेहनत और खेल भावना के साथ भाग लेना भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। प्रत्येक खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखते हुए निरंतर अभ्यास करना चाहिए। आज ब्लॉक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी भविष्य में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सरगुजा का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में खेल संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा

पर्यटन मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को बढ़ावा देने और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों ने देश के युवाओं में खेलकूद, स्वास्थ्य और शारीरिक दक्षता के प्रति नई जागरूकता पैदा की है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने तथा खेल सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य कर रही है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित अवसर उपलब्ध कराना खेलों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, ऊर्जावान और अनुशासित युवा ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

लखनपुर में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम, खेल भावना और उत्साह का शानदार प्रदर्शन

पीएम  विद्यालय, लखनपुर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय सरगुजा ओलंपिक के दौरान खिलाड़ियों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा का वातावरण रहा। विभिन्न खेल विधाओं में प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक दक्षता, खेल कौशल और जीत के जज्बे का प्रदर्शन किया। ग्रामीण अंचलों से आए खिलाड़ियों की सहभागिता ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया।

खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं को परखने, प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और खेलों के प्रति अपनी रुचि को नई दिशा देने का अवसर मिला। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें केवल उचित मंच और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।

खिलाड़ियों की सफलता में अभिभावकों और प्रशिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण

मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलकूद भी अत्यंत आवश्यक है। खेल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के प्रति बढ़ता उत्साह आने वाले समय में सरगुजा को खेल प्रतिभाओं के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

सभी प्रतिभागी खिलाड़ी बधाई के पात्र, निरंतर मेहनत से हासिल करें नई ऊंचाइयां

समापन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने सरगुजा ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में उतरने वाला प्रत्येक खिलाड़ी सम्मान और प्रोत्साहन का पात्र है। प्रतियोगिता में जीत हासिल करने वाले खिलाड़ी अपनी सफलता को आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं और जो खिलाड़ी इस बार विजयी नहीं हो सके, वे निराश होने के बजाय और अधिक मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अगली प्रतियोगिता की तैयारी करें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं आने वाले समय में प्रदेश और देश के विभिन्न खेल मंचों पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगी। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों, शिक्षकों, खेल प्रशिक्षकों और सहयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

समापन समारोह में लुण्ड्रा विधायक  प्रमोद मिंज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, आयोजन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, खेल प्रशिक्षक, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे।

सौ रुपए की बचत से लिखी सफलता की इबारत

कभी परिवार की सीमित आमदनी और तंगहाली के बीच घर का खर्च चलाना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मती अहिल्या निषाद के लिए एक बड़ी चुनौती थी। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ (अ) की रहने वाली अहिल्या का जीवन सामान्य गृहिणियों की तरह ही आर्थिक संघर्षों से घिरा हुआ था। लेकिन कहते हैं कि मजबूत इरादे और सही दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम भी तकदीर बदल सकता है।     

अहिल्या की यह प्रेरक कहानी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) और उनकी खुद की कड़ी मेहनत का एक बेहतरीन उदाहरण है।

​बिहान योजना और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली तकदीर

अहिल्या निषाद के जीवन में वास्तविक बदलाव 15 मार्च 2018 को आया, जब वे बिहान योजना के अंतर्गत लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। इस जुड़ाव के साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए हर महीने मात्र 100 रुपए की बचत करने की शुरुआत की।
       ​समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल वित्तीय अनुशासन का पाठ मिला, बल्कि आगे बढ़ने का एक नया मंच भी प्राप्त हुआ। समूह की मदद से उन्होंने बैंक से 1 लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया और अपने गांव की मुख्य सड़क पर ‘निषाद होटल’ के नाम से नाश्ते की दुकान की शुरुआत की।

​आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: ‘लखपति दीदी’ तक का सफर

पति  किर्तीलाल निषाद के सहयोग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर अहिल्या का यह व्यवसाय धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगा। आज स्थिति यह है कि उनके होटल से प्रतिदिन लगभग 500 से 800 रुपए की आमदनी हो रही है, जिससे उनकी मासिक आय 15,000 से 24,000 रुपए तक पहुंच चुकी है।
 ​इस नियमित आय ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और बेहतर शिक्षा की राह को भी आसान बना दिया है। आज वे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं और गर्व से ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाती हैं।मती अहिल्या निषाद कहती है कि ​मैं बिहान योजना को दिल से धन्यवाद देती हूं, जिसकी बदौलत आज मैं आत्मनिर्भर बन पाई हूं और अपने परिवार को एक बेहतर जीवन दे रही हूं।

यह कहानी राज्य स्तर पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, महिला स्व-सहायता समूहों की ताकत और ‘बिहान’ योजना के जरिए आजीविका संवर्धन की सफलता का एक जीवंत प्रमाण है।