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Tuesday, October 27, 2026
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एनएच-343 को फोरलेन बनाने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा, 450 करोड़ रुपए की स्वीकृति

गढ़वा से अंबिकापुर तक एनएच-343 फोरलेन बनेगा, केंद्रीय मंत्री गडकरी ने दी 450 करोड़ की मंजूरी।विकास के क्षेत्र में मंत्री की सौगात से एनएच को फोरलेन बनाने मिली स्वीकृति।यह सड़क मार्ग दो राज्य झारखंड-छत्तीसगढ़ को जोड़ेगा।

गढ़वा/अंबिकापुर।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 343 (एनएच-343) अब फोरलेन होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस मार्ग को चौड़ा करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने 450 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। यह घोषणा झारखंड के गढ़वा में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लोकार्पण समारोह के दौरान की गई।
गडकरी ने कार्यक्रम में गढ़वा के विधायक और स्थानीय सांसद की मांग पर गढ़वा से अंबिकापुर तक फोरलेन सड़क निर्माण की मंजूरी देते हुए यह बड़ी सौगात दी। इससे न केवल झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच संपर्क बेहतर होगा, बल्कि इस क्षेत्र में आवागमन, व्यापार और पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।
इससे पहले भी अंबिकापुर से रामानुजगंज तक एनएच-343 पर 597 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिसका निर्माण कार्य फिलहाल प्रगति पर है। अब इस नई घोषणा से पूरे मार्ग के फोरलेन बनने का रास्ता साफ हो गया है।
केंद्रीय मंत्री की इस घोषणा का क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने स्वागत किया है। इससे झारखंड और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती जिलों को विकास की नई रफ्तार मिलेगी।

5_✨ “भगवान की माया/_ एक श्रृंखला पूर्ण हुई,जहां से चला था, वहीं पहुँचा – माया की पूर्णता

“क्या आज हम भी किसी माया में फँसे हैं?”
“क्या हम भी अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं?”
“क्या हमें भी किसी एक झटके की जरूरत है… प्रभु की याद में लौट आने की?”

भगवान की माया अंतिम भाग,प्रभु के चरणों में नारद जी निष्प्राण-से गिरे पड़े थे।
शरीर कांप रहा था, आंखों से अश्रु थम नहीं रहे थे।
जिन्होंने संसार बसाया, वही अब उसकी राख में खड़े थे।
वर्षों का जीवन — पत्नी, बच्चे, खेत, घर, श्रम, सुख-दुख —
एक स्वप्न की तरह बीत गया था।
और अब, प्रभु मुस्कराते हुए कह रहे थे —
“तुम अभी तो गए थे, नारद! कुछ ही क्षण बीते हैं। पानी लाए या नहीं?”
नारद जी स्तब्ध हो उठे।
“क्या? यह सब… बस क्षण मात्र था?”
उन्हें अब समझ में आया — यह सब माया की लीला थी।
उन्हें याद आया उनका संकल्प, प्रभु की प्यास, जल की खोज…
और फिर सब कुछ कैसे भुलाकर वे मोह-माया में फँस गए।
🔱 भगवान बोले:
“नारद, तुम कहते थे कि तुम सबसे बड़े भक्त हो।
तुम अभिमान करने लगे थे कि तुम्हें कोई डिगा नहीं सकता।
मैंने तो केवल एक प्यास लगाई… और तुम वर्षों बहक गए।”
“माया का यही स्वरूप है — वह सत्य का भ्रम बना देती है और भ्रम को सत्य दिखाती है।”
नारद जी कुछ कह नहीं सके।
अब उनके पास कोई उत्तर नहीं था, कोई तर्क नहीं।
वे समझ चुके थे —
ज्ञान, भक्ति और विवेक का सबसे बड़ा शत्रु ‘अहंकार’ है।
🌿 अंतिम आत्मबोध
नारद जी ने अब अपनी वीणा उठाई।
उस पर धीरे-धीरे उंगलियाँ फिराई —
और वह गूंज उठी:
“नारायण… नारायण…”
अब यह उच्चारण साधारण नहीं था —
यह था माया से मुक्त आत्मा का स्तवन।
नारद जी ने प्रभु से क्षमा मांगी।
और उन्होंने फिर कभी अपने भक्ति-पथ से न विचलित न होने का संकल्प लिया।
🕊️ इस कथा से शिक्षा:
माया का स्वरूप बहुत आकर्षक होता है — परंतु वह सत्य नहीं होती।
अहंकार चाहे भक्त में हो या ज्ञानी में — वह विनाश का कारण बनता है।
संसार में सब क्षणभंगुर है — जो आज है, वह कल नहीं रहेगा।
सच्चा सुख प्रभु की भक्ति में ही है, जो कभी नष्ट नहीं होता।
🌀 अंतिम चिंतन (भाग 5 पर):
“क्या आज हम भी किसी माया में फँसे हैं?”
“क्या हम भी अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं?”
“क्या हमें भी किसी एक झटके की जरूरत है… प्रभु की याद में लौट आने की?”
✨ “भगवान की माया” – एक श्रृंखला पूर्ण हुई

एसी कोच में सफर कर रहे ‘जेंटलमैन’ ले जा रहे रेलवे का सामान, रेलवे को 73 लाख का नुकसान

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रेलवे ने यात्रियों से की अपील – “यात्री सुविधाओं की रक्षा करें”
रेलवे में सफर को सुगम और आरामदायक बनाने के लिए एसी कोच में बेडशीट, तकिया, कंबल और अन्य सुविधाएं यात्रियों को उपलब्ध कराई जाती हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले ढाई सालों में एसी कोच से करीब 73 लाख रुपये का रेलवे संपत्ति यात्रियों द्वारा चुरा ली गई।
आम धारणा है कि एसी कोच में यात्रा करने वाले लोग जिम्मेदार और सभ्य होते हैं, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, चोरी हुए सामानों में बेडशीट, तौलिया, तकिया, कंबल, पर्दे, हेडफोन, मग और यहां तक कि परदे के हैंगर तक शामिल हैं।
इस नुकसान की भरपाई के लिए रेलवे ने कोच अटेंडेंट की सैलरी से पैसे काटना शुरू कर दिया है। इससे अटेंडेंट में नाराजगी का माहौल है क्योंकि उनकी जिम्मेदारी यात्रियों की सेवा करना है, न कि सामान की सुरक्षा करना।
रेलवे प्रशासन अब यात्रियों से जन/जागरूकता की अपील कर रहा है कि वे सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझें और उसे नुकसान न पहुंचाएं। भारतीय रेलवे देश की धरोहर है और इसकी संपत्ति की रक्षा हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
रेलवे ने कहा है कि वह जल्द ही सीसीटीवी निगरानी, RFID टैगिंग और कोच अटेंडेंट के प्रशिक्षण जैसे उपायों के जरिए चोरी पर अंकुश लगाने की योजना बना रहा है।
✍️ जनजागरण का समय है
अगर यात्री खुद जागरूक नहीं होंगे, तो रेलवे को मजबूरी में कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। इससे यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम सब मिलकर जिम्मेदार यात्री बनें और ट्रेन को भी अपने घर की तरह सम्मान दें।

रायगढ़: ट्रक चालक ने की अंग्रेजी शराब और बीयर की हेराफेरी, पुलिस ने दर्ज किया अपराध

रायगढ़, छत्तीसगढ़ | रायगढ़ जिले में शराब हेराफेरी से जुड़ा एक नया मामला सामने आया है। अंग्रेजी शराब और बीयर की हेराफेरी की यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है, जिसे एक ट्रक चालक द्वारा अंजाम दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिलासपुर के यदुनंदन नगर घुरू रोड, तिफरा निवासी जयकरन सिंह (37), जो एक अशोक लीलैंड ट्रक के मालिक हैं, ने 27 जून को कोतवाली थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया उसकी वाहन को मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला के ग्राम कोटमी का रहने वाला रामनाथ यादव चलाता है। 9 जून की रात को रामनाथ यादव को सिरगिट्टी अंग्रेजी शराब डिपो से 15 लाख 12 हजार 689 रुपए का अंग्रेजी शराब व बीयर को लोड कर रायगढ़ के केवड़बाड़ी स्थित शराब दुकान के लिए रवाना किया गया था।10 जून की शाम को रामनाथ रायगढ़ पहुंचा और केवड़ाबाड़ी स्थित शराब दुकान के पास वाहन खड़ी कर कहीं भाग गया।
जब इस बात की भनक संबंधित अधिकारियों को लगी, तो मामले की सूचना ट्रक मालिक को दी गई ट्रक मालिक द्वारा इसकी सूचना तुरंत कोतवाली पुलिस को दी गई।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ट्रक की तलाशी ली और मामले में शराब और बीयर की मात्रा में गड़बड़ी पाए जाने पर अपराध दर्ज कर लिया है।आबकारी निरीक्षक ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया लगभग 1 लाख 3 हजार 950 रु शराब के ब्रांड और बीयर कम पाई गई है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है, और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि
कैसे बीच रास्ते में चालक ने माल में हेराफेरी कर दी।
चालक के साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।
शराब की तस्करी और हेराफेरी के ऐसे मामलों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, ताकि अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सके।

“बच्चों की रुचि व कौशल आधारित शिक्षा ही आत्मनिर्भर भारत का आधार – विधायक दीपेश साहू”

शाला प्रवेश उत्सव में बोले विधायक दीपेश साहू – “शिक्षा में ऐतिहासिक परिवर्तन का दौर जारी है”

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बेमेतरा, 5 जुलाई 2025 –

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, सिंघौरी में आज शाला प्रवेश उत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बेमेतरा विधायक दीपेश साहू बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुई। विद्यालय प्राचार्य रामगोपाल चंद्राकर ने स्वागत भाषण में विद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया।
मुख्य अतिथि दीपेश साहू ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा,
“वर्षा के बावजूद इस प्रकार के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विद्यालय परिवार बधाई के पात्र हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव हो रहे हैं। नई शिक्षा नीति बच्चों की रुचियों और कौशल को केंद्र में रखकर उन्हें आत्मनिर्भर भारत का निर्माता बना रही है।”
उन्होंने छात्रों से संवाद करते हुए प्रेरणास्पद संदेश दिया –
“लक्ष्य तय करो और उसी दिशा में आगे बढ़ो, क्योंकि शिक्षा ही प्रगति का माध्यम है। गरीब पैदा होना अपराध नहीं, लेकिन गरीब ही मर जाना जीवन की सबसे बड़ी विफलता है।”
साथ ही उन्होंने विद्यालय के लिए बाउंड्री वॉल, किचन निर्माण, साइकिल स्टैंड जैसी सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
कार्यक्रम में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
अध्यक्ष विजय सिन्हा ने अपने उद्बोधन में शिक्षा के महत्व और अभिभावकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि
“शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा शुरू किए गए आंगनबाड़ी केंद्र आज भी प्रासंगिक हैं।”
उन्होंने आगामी “नालंदा परिसर” के भूमि पूजन की जानकारी देते हुए विधायक दीपेश साहू का आभार भी जताया।
उपस्थित गणमान्य अतिथि
कार्यक्रम में भाजपा शहर मण्डल अध्यक्ष युगल किशोर देवांगन, हर्षवर्धन तिवारी, महेश साहू, शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष डी. टी. मानिकपुरी, पार्षद विकास तंबोली, गौरव साहू, नीतू कोठारी, निखिल साहू, दोहई लाल वर्मा, कमलेश वर्मा, राकेश वर्मा, डॉ. विनय साहू, ओंकार साहू, राजीव तंबोली, सुरेंद्र साहू, चंद्रशेखर वर्मा सहित विद्यालय के सभी शिक्षक गण उपस्थित रहे।


दुर्ग पुलिस का ‘ऑपरेशन तलाश’ सफल: एक महीने में 807 गुमशुदा लोग मिले, परिजनों से कराई गई मुलाकात

दुर्ग, छत्तीसगढ़ |
दुर्ग पुलिस ने एक विशेष अभियान ‘ऑपरेशन तलाश’ चलाकर एक महीने के भीतर 807 गुमशुदा लोगों को ढूंढ निकाला है। यह अभियान पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देशन में संचालित हुआ, जिसमें जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी रही।
इस अभियान की सफलता की दर लगभग 80% रही। पुलिस ने न केवल जिले के भीतर से बल्कि अन्य राज्यों से भी लापता हुए लोगों को तलाश कर परिजनों से मिलाया। थाना स्तर पर सर्वाधिक सफलता थाना जामुल, सुपेला और दुर्ग क्षेत्रों में दर्ज की गई, जहां क्रमशः 62, 60 और 58 लोगों को सकुशल उनके घरों तक पहुंचाया गया।
थाना वार आँकड़े इस प्रकार हैं:
पुलगांव – 33
पाटन – 23
मोहन नगर – 21
कुम्हारी – 12
बोरी – 13
धमचा – 14
कुर्सीपार – 12
छावनी – 14
वैशाली नगर – 10
जामुल – 24
जामगांव आर – 13
नवागांव – 13
इनमें से कल (अभियान के अंतिम दिन) ही 277 गुमशुदा लोगों को पुलिस ने तलाशकर उनके परिवारजनों से मिलाया। कई मामलों में गुमशुदा व्यक्ति अन्य राज्यों में चले गए थे या जानबूझकर लापता हुए थे, जिनमें भी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें ढूंढ निकाला।
एसपी विजय अग्रवाल ने अभियान की सफलता पर जिले की पुलिस टीम को बधाई दी और बताया कि –
“ऑपरेशन तलाश के माध्यम से हम न केवल गुमशुदा लोगों को खोज पा रहे हैं, बल्कि उनके परिजनों की चिंता और मानसिक तनाव को भी समाप्त कर रहे हैं। यह पुलिस की मानवीय और जवाबदेह भूमिका का परिचायक है।”
इस अभियान में साइबर सेल, महिला थाना, बाल संरक्षण इकाई, और स्थानीय थानों के स्टाफ ने मिलकर कार्य किया। दुर्ग पुलिस का यह अभियान राज्य भर में एक आदर्श मॉडल के रूप में सामने आया है।

भावुक अनुभवों ने भरी आंखें, परिजनों ने कहा- पुलिस बनी हमारे लिए भगवान
जब दुर्ग पुलिस ने ऑपरेशन तलाश के तहत गुम हुए बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं को उनके परिवार से मिलाया, तो थानों के बाहर का दृश्य किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं था। रोते हुए माता-पिता, गले लगते भाई-बहन, और वर्षों बाद लौटे बुजुर्गों की आंखों से बहते आंसुओं ने पुलिस कर्मियों को भी भावुक कर दिया।



4था भाग /भगवान की माया_ बाढ़ की त्रासदी और आत्मबोध_

“क्या जो कुछ हम वर्षों में कमाते हैं, वह एक क्षण में माया बनकर बह नहीं सकता?”
“क्या हमारी संपूर्ण यात्रा केवल एक परीक्षा है?”
“क्या सत्य वहीं खड़ा रहता है, जबकि हम भ्रम में भटकते हैं

भाग 3 की कहानी के आगे भगवान की माया” कथा का भाग 4, जो सबसे भावनात्मक, विस्फोटक और आत्मबोध से भरा भाग है। यहाँ पाठक केवल नारद जी ही नहीं, अपने जीवन के सच को भी अनुभव करेंगे।

🌱🌿हरियाली लहलहा रही थी।
खेतों में फसलें झूम रही थीं।
बच्चों की हँसी, पत्नी की ममता और घर की सम्पन्नता — नारद जी को लगता था अब जीवन में क्या शेष है?
परंतु…
संसार का यह सुख स्थायी नहीं होता।
जो सबसे सुंदर लगता है, अक्सर वहीं से विछोह आरंभ होता है।
🌩️ एक दिन वर्षा शुरू हुई… और रुकने का नाम नहीं लिया।
तीन दिन, चार दिन, फिर सात दिन…
बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, और मूसलाधार वर्षा ने ग्रामवासियों को डरा दिया।
गांव के पास की नदी अब उफान पर थी।
धीरे-धीरे उसका पानी किनारों को तोड़कर गांव में घुस आया।
कच्चे-पक्के घर ढहने लगे।
लोगों की चीख-पुकार, पशुओं का बह जाना, बच्चों का रोना —
गांव अब त्रासदी का मैदान बन चुका था।

🏚️ नारद जी का टूटता संसार

नारद जी ने अपने घर के बचे-खुचे सामान को एक गठरी में बाँधा।
एक हाथ में पत्नी का हाथ, दूसरे में बच्चे को थामा।
पत्नी ने एक बच्चे को गोद में लिया, एक का हाथ पकड़ा।
वे पानी से भरे रास्तों में धीरे-धीरे बढ़ने लगे —
पानी गहराता जा रहा था, बहाव तेज हो रहा था।
फिर…
🌀 एक गड्ढे में पैर फिसला —
गठरी बह गई।

नारद ने कहा – “कोई बात नहीं, फिर से कमा लेंगे।”
थोड़ा और आगे बढ़े, पत्नी गड्ढे में फिसली —
गोद का बच्चा बह गया…
पत्नी बिलखने लगी।
पर क्या हो सकता था?
आगे बढ़े — एक और बच्चा बह गया…
फिर एक और…
अब नारद जी और उनकी पत्नी केवल एक-दूसरे का हाथ थामे बचे थे।
रोते-कलपते, वे किसी ऊँचे स्थान की ओर बढ़ रहे थे।
फिर…

💔 एक और गड्ढा… और पत्नी भी बह गई।

नारद जी किसी तरह बाहर निकले,
लेकिन… वह अब अकेले थे।
उनकी आँखों के सामने —
पूरा जीवन, पूरा परिवार, सबकुछ… बह चुका था।

😭 मौन, शोक और माया का अंत

वह रो रहे थे।
धारा के बीच अकेले, थके हुए, टूटी हुई सांसों के साथ।
उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।
किसे कोसें? भाग्य को? प्रकृति को? भगवान को?
पर तभी…

एक प्रकाश उनके मस्तिष्क में चमका।

“अरे! मैं क्यों आया था? किसके लिए जल लेने गया था?”

“प्रभु! विष्णु! वे तो मेरी प्रतीक्षा कर रहे होंगे!”
“मैं जल लेने आया था, और वर्षों इस माया में फंस गया!”
यह सोचते ही —
बाढ़ समाप्त हो गई।
गांव अदृश्य हो गया।
सब कुछ लौट गया।
वे अकेले — उसी वन में खड़े थे — उसी वृक्ष के पास…

🌳 वहां… प्रभु बैठे थे। मुस्कराते हुए।

“अरे भाई नारद! कहां चले गए थे? पानी लाए कि नहीं?”
नारद जी उनके चरणों में गिर पड़े।
रोते रहे…
कुछ बोल ही नहीं पाए…
वो वर्षों की कथा — प्रभु के लिए क्षण मात्र थी।

शेष अंतिम भाग कल

सोते समय मोबाइल को खुद से दूर रखें, वरना पड़ सकते हैं भारी स्वास्थ्य संकट में!

जन चौपाल डिजिटल हेल्थ डेस्क |🧖

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन रात के समय, जब हमारा शरीर विश्राम की अवस्था में होता है, उसी वक्त हम एक ऐसी गलती करते हैं जो हमारी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है —

मोबाइल को सिरहाने या तकिए के पास रखना।

99% लोग करते हैं ये आम लेकिन गंभीर गलती
आजकल लगभग 99% लोग रात को सोते समय मोबाइल फोन को अपने तकिए के नीचे या सिर के पास रखकर सोते हैं। उन्हें यह लगता है कि मोबाइल पास रहेगा तो अलार्म, मैसेज या कॉल तुरंत सुनाई देगा, लेकिन असल में यह आदत धीरे-धीरे शरीर में कई तरह की बीमारियों की जड़ बन सकती है।

मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन है खतरे की घंटी
मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी (RF) रेडिएशन आपके मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकती है। यह रेडिएशन दीर्घकालीन संपर्क में आने से नींद में बाधा, माइग्रेन, थकान, मानसिक तनाव और यहां तक कि ट्यूमर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

क्या है SAR वैल्यू और क्यों है जरूरी जानना
मोबाइल फोन की रेडिएशन को मापने के लिए एक मानक है जिसे SAR (Specific Absorption Rate) कहा जाता है। यह दर्शाता है कि आपका शरीर मोबाइल से निकलने वाली कितनी RF ऊर्जा को अवशोषित करता है।
भारत में SAR वैल्यू की अधिकतम सीमा 1.6 W/kg निर्धारित की गई है। यदि आपके फोन की SAR वैल्यू इससे अधिक है, तो वह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

📱अपने फोन की SAR वैल्यू ऐसे चेक करें
👉 मोबाइल कीपैड खोलें
👉 *#07# डायल करें
👉 स्क्रीन पर आपके फोन की SAR वैल्यू दिख जाएगी
यदि यह 1.6 से अधिक है, तो यह आपके लिए खतरे की घंटी है। ऐसे में आपको या तो मोबाइल बदलने की सलाह दी जाती है या फिर सोते समय मोबाइल को कम से कम 3 फीट दूर रखने की आदत डालनी चाहिए।
🥱 स्वस्थ नींद के लिए अपनाएं ये उपाय
सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल को दूर रखें।
मोबाइल को✈️ ‘एयरप्लेन मोड’ में डाल दें
तकिए के नीचे या सिर के पास मोबाइल बिल्कुल न रखें
अलार्म🕰️ के लिए अलग घड़ी का प्रयोग करें

📢 आपका स्वास्थ्य, आपकी जिम्मेदारी! मोबाइल की लत न बनाएं मौत की वजह।

🧑‍🔬 रिपोर्ट: जन चौपाल 36 | डिजिटल स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के अंतर्गत विशेष लेख
यदि चाहें तो इसे हम “डिजिटल डिटॉक्स” सीरीज़ के तहत नियमित हेल्थ टॉपिक में भी बदल सकते हैं।

GST को 8 वर्ष पूरे: देशभर में कर व्यवस्था में आई सरलता और पारदर्शिता

जन चौपाल डेस्क | बेमेतरा | 04 जुलाई 2025
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली को लागू हुए आठ वर्ष पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को शुरू हुई इस कर प्रणाली ने देश की कर व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव लाया। GST के माध्यम से पूरे देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार किया गया।

रिकॉर्ड कर संग्रह: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती

भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली को लागू हुए आठ वर्ष पूरे हो गए हैं। 1 जुलाई 2017 को शुरू हुई इस कर प्रणाली ने देश की कर व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव लाया। GST के माध्यम से पूरे देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा को साकार किया गया।
रिकॉर्ड कर संग्रह: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती
GST लागू होने के आठ वर्षों में कर संग्रह लगातार बढ़ता गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल GST संग्रह ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2024-25 में मासिक औसत संग्रह ₹1.84 लाख करोड़ रहा, जो आर्थिक मजबूती और करदाताओं के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
उद्योग जगत की सकारात्मक प्रतिक्रिया
हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में देश के 85% से अधिक उद्योगपतियों और व्यापारियों ने GST प्रणाली को पारदर्शी, सरल और विकासोन्मुख बताया है। व्यापारियों का मानना है कि GST से कर प्रक्रिया में जटिलताएं कम हुई हैं और अनुपालन आसान हुआ है।
सरकार का सरलीकरण पर जोर
वित्त मंत्रालय का कहना है कि GST प्रणाली को और सरल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। छोटे व्यवसायों के लिए ई-इनवॉयसिंग, कंपोजीशन स्कीम और त्वरित रिफंड जैसी सुविधाएं GST प्रणाली को अधिक सहज बना रही हैं।
अर्थशास्त्रियों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि GST ने भारत को एकीकृत बाजार में बदल दिया है, जिससे व्यापार में आसानी और निवेश के नए अवसर खुले हैं। आने वाले वर्षों में GST प्रणाली से डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को भी बल मिलेगा।
निष्कर्ष: GST बना भारत की आर्थिक मजबूती का आधार
GST के आठ वर्षों के सफर ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक समान कर प्रणाली से न केवल कर संग्रह बढ़ता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। GST आज भारतीय व्यापार जगत के लिए एक स्थायी और विकासशील आधार बन चुका है।
✍️ रिपोर्ट: जन चौपाल टीम

महासमुंद में गांजा तस्करी का बड़ा खुलासा, 75 लाख रुपये कीमत का 500 किलो गांजा जब्त

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महासमुंद, छत्तीसगढ़ | 4 जुलाई 2025: महासमुंद जिले की पुलिस ने एक बार फिर नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय तस्करी का खुलासा किया है। जिले के कोमाखान थाना क्षेत्र अंतर्गत टेमरी नाका पर मंगलवार को चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक ट्रक से भारी मात्रा में मादक पदार्थ गांजा बरामद किया। जब्त किए गए गांजे का वजन करीब 500 किलो है जिसकी अनुमानित कीमत 75 लाख रुपये बताई जा रही है।
गुप्त सूचना पर की गई कार्रवाई
पुलिस को गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि उड़ीसा से छत्तीसगढ़ में एक ट्रक के माध्यम से गांजा की बड़ी खेप भेजी जा रही है। सूचना की पुष्टि होते ही कोमाखान थाना प्रभारी के नेतृत्व में टीम ने तुरंत कार्रवाई की और टेमरी नाका पर चेकिंग प्वाइंट स्थापित कर सभी आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच शुरू की।
ट्रक से मिला गांजा, चालक गिरफ्तार
कुछ ही देर में एक संदिग्ध ट्रक को रोका गया, जिसकी तलाशी लेने पर पुलिस को ट्रक में छिपाकर रखा गया 500 किलो गांजा मिला। पुलिस ने मौके से ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक चालक ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पूछने पर बताया कि फल अनानास भरा है जो उड़ीसा से हम उत्तर प्रदेश ले जा रहे हैं पुलिस को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ और पुलिस ने उस ट्रक की तलाशी ली अनानास के नीचे दबे हुए गांजे की पैकेट देख पुलिस सकते में आ गई।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गांजे की सप्लाई कहां की जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई
महासमुंद पुलिस की यह कार्रवाई नशा तस्करों के लिए एक बड़ा झटका है। पुलिस अधीक्षक ने टीम को इस सफल ऑपरेशन के लिए बधाई दी है और यह संदेश दिया है कि जिले में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोमाखान थाना बना नशा विरोधी कार्रवाई का केंद्र
इससे पहले भी कोमाखान थाना क्षेत्र में कई बार गांजा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उड़ीसा से लगे सीमावर्ती इलाके में यह थाना मादक पदार्थों की तस्करी रोकने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
रिपोर्ट: जन चौपाल 36 न्यूज (मीडिया सोर्सेज)