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गर्भवती आदिवासी छात्रा की संदिग्ध मौत, आत्महत्या या रहस्य? – सुकमा जिले के चिंताकोन्टा गांव की घटना

📍सुकमा | 9 जुलाई 2025 | Janchoupal36 डेस्क
सुकमा जिले के अति संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र कोंटा विकासखंड के ग्राम चिंताकोन्टा (ढोढरा ग्राम पंचायत) में एक 24 वर्षीय आदिवासी छात्रा पूनम राजे की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि वह 8 माह की गर्भवती थी और 6 जुलाई 2025 को इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। साथ ही गर्भस्थ शिशु की भी मृत्यु हो गई।
पुलिस इस घटना को आत्महत्या का मामला बता रही है, जबकि मृतका के परिजन कई पहलुओं पर संदेह जता रहे हैं।
परिवार को नहीं थी जानकारी
आज मृतका के परिजनों से मुलाकात के बाद सामने आया कि पूनम सुकमा में रहकर पढ़ाई कर रही थी और कभी-कभी ही घर आती थी। उसके पास मोबाइल फोन भी था, लेकिन वह फोन पर अधिक बातचीत नहीं करती थी। न ही उसने कभी गर्भावस्था के बारे में या किसी अन्य व्यक्ति की जानकारी परिवार को दी।
बुजुर्ग माता-पिता, बड़ी बहन और दो भाइयों ने साफ शब्दों में कहा —
“हमें नहीं पता कि वह गर्भवती थी, यह बच्चा किसका था? आज लड़की और बच्चा दोनों की मौत हो गई।”
महिला आयोग ने की जांच की मांग
घटना के बाद पुलिस ने मृतका का मोबाइल जब्त कर लिया है। इस मामले में महिला आयोग सदस्या दीपिका शौरी ने पुलिस से साइबर सेल के माध्यम से विस्तृत जांच की मांग की है, ताकि मोबाइल फोन से जुड़े डेटा के आधार पर सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने कहा —
“यह केवल आत्महत्या नहीं हो सकती, जब तक पूरी सच्चाई बाहर नहीं आती, हम शांत नहीं बैठेंगे।”
अब यह मामला गहराई से जांच के दायरे में आ गया है और पुलिस जांच के बाद ही पूरी सच्चाई उजागर हो सकेगी।


छत्तीसगढ़ कैबिनेट बैठक आज: कृषि, शिक्षा और आबकारी विभाग से जुड़े हो सकते हैं बड़े फैसले

📍 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय में होगी बैठक

रायपुर :_11 जुलाई 2025 | Janchoupal36
छत्तीसगढ़ सरकार की आज महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महा सचिवालय) में हो रही इस बैठक में सभी मंत्रियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
मानसून सत्र के पहले बैठक
बैठक में कृषि, खाद्य, शिक्षा और आबकारी विभाग से जुड़े प्रमुख विषयों पर चर्चा की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों के हित में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकती है।
वहीं, शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दों जैसे सरकारी स्कूलों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की भर्ती और विद्यार्थियों के लिए नई योजनाओं पर भी प्रस्ताव आ सकते हैं।
🚨 शराब घोटाले की गूंज भी बैठक में
हाल ही में सामने आए शराब घोटाले को लेकर आबकारी विभाग द्वारा की गई सख्त कार्रवाई भी इस बैठक का हिस्सा हो सकती है। सरकार इस पर आगे की रणनीति तय करने के संकेत दे रही है।शराब का मुद्दा छत्तीसगढ़ में बहुत हावी हो गया है पक्ष हो या विपक्ष सभी इस मुद्दे पर भिड़े हुए हैं।

(Jan Chaupal 36 a digital media platform)

पति की हत्या करने वाली पत्नी गिरफ्तार–बेरला पुलिस ने अंधे कत्ल की सुलझाई गुत्थी

🗓️ बेमेतरा, 10 जुलाई 2025
जिला बेमेतरा के बेरला थाना क्षेत्र में हुए एक अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। हत्या के इस सनसनीखेज मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब जांच के बाद मृतक की पत्नी ही कातिल निकली। पुलिस ने महिला आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
क्या है मामला?
ग्राम लेंजवारा बुचीडीह (पारधी पारा) में रहने वाले अभिषेक सिंह उर्फ बिहारी की पत्नी रीना उर्फ जंगो पारधी के साथ बीते 6-7 वर्षों से पति-पत्नी के रूप में रह रही थी।
दिनांक 07 जुलाई 2025 की रात करीब 1:30 बजे रीना अपने मायके पहुंची और बताया कि अभिषेक के कान के पीछे और गर्दन पर धारदार हथियार से गंभीर वार हुआ है और खून बह रहा है। इस पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी।
थाना बेरला में प्रथम सूचना रिपोर्ट अज्ञात हमलावर के खिलाफ दर्ज की गई और धारा 103(1) बीएनएस के तहत मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग में जांच तेज
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.), अति. पुलिस अधीक्षक ज्योति सिंह, और एसडीओपी बेरला विनय कुमार के निर्देशन में थाना प्रभारी कृष्णकांत सिंह और पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम की मदद भी ली गई ताकि घटना स्थल से हर संभावित सुराग जुटाया जा सके।
जांच में उलझा मामला, शक की सुई पत्नी पर गई
पुलिस टीम ने लगातार पूछताछ, वैज्ञानिक तरीके और पारंपरिक विधियों से जांच जारी रखी। परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत के दौरान कई संदेहास्पद बातें सामने आईं, जिससे पुलिस का शक रीना पर गया। जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो आखिरकार सच्चाई सामने आ गई।
गुस्से में उठाया खौफनाक कदम
रीना ने स्वीकार किया कि 06-07 जुलाई की रात अभिषेक नशे की हालत में घर आया और दरवाजा न खोलने पर खिड़की से भीतर घुसकर गालियाँ देते हुए उसके साथ मारपीट की। खुद को घायल पाकर और पति द्वारा घर की आर्थिक मदद न करने के कारण गुस्से में आकर उसने सब्जी काटने के हसिये से अभिषेक के गले पर वार कर उसकी हत्या कर दी।
आरोपिया की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार, मृतक का लॉकेट, चांदी की चेन और अन्य सबूत जब्त किए गए।
गिरफ्तारी और कोर्ट में पेशी
पुलिस ने आरोपी महिला रीना उर्फ जंगो पारधी (30 वर्ष) को गिरफ्तार कर आज दिनांक 10 जुलाई को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
जांच में इनका योगदान रहा अहम:
इस केस की सफल विवेचना में थाना बेरला प्रभारी निरीक्षक कृष्णकांत सिंह, प्रधान आरक्षक नोहर यादव, दीनानाथ यादव, महिला प्रधान आरक्षक पूनम सिंह, महिला आरक्षक मालती साहू, आरक्षक रामेश्वर पटेल, सुरेन्द्र जांगड़े, धनसाय मिरे सहित अन्य स्टाफ की अहम भूमिका रही।
✍️ समाचार संकलन – JanChoupal36
📌 स्रोत: बेमेतरा पुलिस प्रेस विज्ञप्ति

3_भाग/ सोनार किले की प्रतीक्षा और वह अनायास मुलाकात(वापसी अतीत की ओर)

🟣 परिचय
इतिहास और वर्तमान के मिलन की यह कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँचती है, जहाँ दो आत्माएँ — अनिमेष और विनीता — पहली बार एक-दूसरे को वास्तव में पढ़ना शुरू करती हैं। सोनार किले की वह मुलाक़ात, मरुस्थल की हवाओं में एक नई कहानी लिखने को तत्पर है।

✍️गतांक से आगे…
👉आज रात अनिमेष जल्दी खाना खा कर सो गया, क्योंकि कल उसे विनीता से मिलना था। सुबह उठते ही उसने खुद को आईने में देखा और सोचा — “कुछ बदलाव ज़रूरी हैं।”
उसने पुराने संदूक से अपनी मनपसंद शर्ट निकाली — वही शर्ट जिसे पहनकर लोग अक्सर कहते थे “तू तो हीरो लगता है इसमें।”
वह पहली बार अपने गेटअप को लेकर सजग हुआ, और मन में पहली बार यह भाव आया — “शायद मैं भी किसी के काबिल हूँ।”
जल्दी तैयार होकर वह सुनार किले पहुँच गया। लेकिन विनीता वहाँ नहीं दिखी। वह द्वार के पास खड़ा रहा, आँखें चारों ओर उसे खोजती रहीं।
अनिमेष… गाइड तो था ही, लेकिन उससे कहीं अधिक एक संवेदनशील कथावाचक था।
उसकी शैली, उसकी कहानियाँ पर्यटकों को इतिहास से जोड़ देती थीं। आज भी वह नए सैलानियों के साथ जैसेलमेर की गलियों में घूम रहा था, लेकिन मन पिछली शाम की उस मुलाकात में ही खोया था।
“यहीं से आरंभ हुआ था वह अध्याय, जहाँ इतिहास और वर्तमान की दहलीज़ पर दो आत्माएँ एक-दूसरे को पढ़ने लगी थीं…”
संध्या की सुनहरी किरणें मरुस्थल की रेत पर बिखर रही थीं। अनिमेष, अपनी परिचित मुस्कान के साथ
जैसलमेर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में रत्नेश्वर महादेव मंदिर, जो सोनार दुर्ग में स्थित है, और लौद्रवा का शिव मंदिर शामिल हैं। रत्नेश्वर महादेव मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और पीले पत्थरों से बने होने के लिए जाना जाता है. लौद्रवा का शिव मंदिर, जो कभी प्राचीन रियासत थी, काफी प्रसिद्ध है, अनिमेष उन्हीं मंदिर की ओर पर्यटकों को ले जा रहा था — लेकिन उसकी दृष्टि आज किसी और को खोज रही थी।

और फिर… विनीता!
वह सामने खड़ी थी — पारंपरिक वेशभूषा में, सरल, सजीव, और किसी गहरी कहानी की तरह शांत।
विनीता ने मुस्कराते हुए कहा,
“माफ करना अनिमेष, मैं यहाँ की पारंपरिक पोशाक खरीदने चली गई थी… और मुझे यहाँ आकर कुछ करना भी तो है।
“चलो मैं भी शिव मंदिर के दर्शन को चलती हूं””
कुछ दूर चलने के साथ थोड़ी देर रुककर बोली —
“दरअसल, मैं रेगिस्तान के इतिहास पर रिसर्च कर रही हूँ।”

अनिमेष ने मुस्कराकर पूछा —
“इतिहास में इतनी रुचि?”
विनीता ने उसकी ओर देख कर कहा —
“इतिहास…? हाँ, लेकिन उससे भी ज़्यादा उसमें छिपी अधूरी कहानियों में। जैसे इस रेत में कोई सच्चाई दफ़्न हो, जो कभी पूरी कहानी नहीं बन सकी।”

उस एक उत्तर ने अनिमेष के भीतर कुछ खोल दिया। उसने पहली बार किसी सैलानी में अपने भीतर की आवाज़ सुनी।
रेत की उन लहरों के बीच,
दो आत्माएँ — एक ही अधूरी कहानी के दो पन्नों की तरह —
एक-दूसरे की ओर बढ़ चली थीं।
इतिहास ने वर्तमान से हाथ मिलाया था।
और समय ने इस मिलन को नाम दिया —
“एक ऐतिहासिक प्रेम कथा की शुरुआत।”
सभी सैलानी थक चुके थे, उन्होंने विदा ली।
चलते चलते अनिमेष ने धीरे से पूछा —
“क्या तुम कल मिलोगी?”
विनीता ने मुस्कराकर उत्तर दिया —
“हाँ, क्यों नहीं…”
और दोनों अपने-अपने रास्ते पर बढ़ चले।,(क्रमशः _3)





रायपुर के पचपेड़ी नाका चौक का नाम बदलने पर मचा बवाल, सामाजिक संगठनों और नागरिकों का फूटा गुस्सा

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रायपुर, 9 जुलाई 2025:
राजधानी रायपुर के प्रसिद्ध पचपेड़ी नाका चौक का नाम बदलने की प्रक्रिया को लेकर प्रदेशभर में विरोध और आक्रोश की लहर दौड़ गई है। रायपुर नगर निगम द्वारा इस चौक का नाम बदलकर “संत बाबा गोदड़ी वाला चौक” करने की पहल ने स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में गहरी असहमति और चिंता उत्पन्न की है।
नगर निगम ज़ोन क्रमांक-10 के अंतर्गत आने वाले इस ऐतिहासिक चौक के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव ब्रह्म स्वरूप संत बाबा गेलाराम ट्रस्ट और गोदड़ी वाला धाम, देवपुरी की ओर से रखा गया था, जिसे नगर निगम ने बिना जनसुनवाई के औपचारिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा दिया। यही कारण है कि लोगों का असंतोष अब आंदोलन का रूप लेने लगा है।
सामाजिक संगठनों का मुखर विरोध
छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ (युवा प्रकोष्ठ) समेत कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए ज़ोन-10 कार्यालय में आपत्ति पत्र सौंपा। उनका कहना है कि एक ट्रस्ट के प्रस्ताव पर नगर निगम द्वारा इतना बड़ा निर्णय लेना, जनतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक भागीदारी की अवहेलना है।
“पचपेड़ी नाका” सिर्फ नाम नहीं, पहचान है”
स्थानीय निवासियों का मानना है कि पचपेड़ी नाका चौक सिर्फ एक ट्रैफिक पॉइंट नहीं, बल्कि रायपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान है। वर्षों से प्रचलित यह नाम शहरवासियों की स्मृतियों में गहराई से जुड़ा हुआ है। इसे बिना आम सहमति बदला जाना अस्मिता पर चोट के रूप में देखा जा रहा है।
आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला की कड़ी आपत्ति
राज्य के सक्रिय आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने भी इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ज़ोन आयुक्त को पत्र लिखकर नगर निगम की कार्यप्रणाली को अविवेकपूर्ण और अपारदर्शी बताया और चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने पुनर्विचार नहीं किया, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
सोशल मीडिया पर जनता का विरोध
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #SavePachpediNaka और #PublicVoiceMatters जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। हजारों यूजर्स वीडियो, पोस्ट और टिप्पणियों के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं —
“क्या अब जनता की राय के बिना कोई भी निर्णय थोप देना लोकतंत्र बन गया है?”
नामकरण को लेकर सुझाव भी आए सामने
इस बीच, कुछ सामाजिक प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए हैं कि यदि चौक का नाम बदलना ही है, तो उसे गुरु घासीदास, पंडित सुंदरलाल शर्मा, शहीद वीर नारायण सिंह, माता राजिम, बालकदास या गुंडाधुर जैसे प्रदेश के महान विभूतियों के नाम पर किया जाए, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की चेतना को दिशा दी।
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब बहुसंख्यक जनता इस निर्णय के विरुद्ध है, तो नगर निगम किस दबाव में कार्य कर रहा है? यह निर्णय प्रशासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

कवर्धा में शासकीय शराब दुकान कर्मियों का प्रदर्शन, पुलिस पर सुपरवाइजर से मारपीट का आरोप

शराबी शराबी ये सावन(छत्तीसगढ़)का मौसम

कवर्धा, 10 जुलाई 2025:
कबीरधाम जिले की शासकीय शराब दुकानों में कार्यरत प्लेसमेंट सेल्समैन और सुपरवाइजरों ने आज पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में कामकाज छोड़कर जमकर प्रदर्शन किया। नाराज कर्मचारियों ने डिप्टी सीएम कार्यालय, एसपी कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपा।
क्या है मामला?
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि कुंडा शराब दुकान में कार्यरत सुपरवाइजर प्रशांत चतुर्वेदी को हाल ही में पुलिस ने एक झूठे आरोप के आधार पर देर रात हिरासत में लिया। बताया गया कि एक अवैध शराब विक्रेता (कोचिया) के आरोप पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और थाने में रातभर बैठाकर मारपीट की।
सीसीटीवी और जांच में नहीं मिला दोष:
कर्मचारियों ने कहा कि दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों और आबकारी विभाग की प्राथमिक जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई है, इसके बावजूद पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई अनुचित, बेबुनियाद और असंवैधानिक है।
डर और असुरक्षा का माहौल:
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रकार की कार्यवाही से कर्मचारियों में भय का माहौल बन गया है। अगर एक सुपरवाइजर के साथ ऐसा हो सकता है, तो कल किसी और के साथ भी यह दोहराया जा सकता है।
प्रशासन को चेतावनी:
आक्रोशित कर्मचारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि हिरासत में लिए गए कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई को तत्काल समाप्त नहीं किया गया और उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो वे सभी शासकीय शराब दुकानों में शराब बिक्री बंद कर देंगे।
कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बावामोहतरा में केंद्रीय विद्यालय संचालन को लेकर सर्वपक्षीय बैठक सम्पन्न, ग्रामीणों ने दिया पूर्ण सहयोग का भरोसा

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बेमेतरा, 9 जुलाई 2025:
कलेक्टर रणबीर शर्मा के निर्देश पर ग्राम पंचायत भवन, बावामोहतरा में बुधवार को केंद्रीय विद्यालय के सुचारू संचालन हेतु एक महत्वपूर्ण सर्वपक्षीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसडीएम बेमेतरा श्री प्रकाश भारद्वाज, तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी, बीईओ, विद्यालय प्राचार्य, पंचायत प्रतिनिधि, शाला प्रबंधन समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
बैठक में ग्रामवासियों ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि भविष्य में विद्यालय संचालन में किसी प्रकार का धरना, चक्काजाम या विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने विद्यालय के शांतिपूर्ण संचालन में पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक के प्रमुख बिंदु एवं निर्णय:
🔹 विद्यालय भवन और कक्ष निर्माण पर सहमति:
ग्राम के शासकीय विद्यालय भवन में केंद्रीय विद्यालय के अस्थायी संचालन पर सहमति बनी। पंचायत द्वारा आगामी 4 माह में 6 अतिरिक्त कक्षों का निर्माण पूरा करने का वादा किया गया। प्रशासन द्वारा 5 कक्षों के निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है, जो जिला खनिज न्यास निधि से पूर्ण किए जाएंगे।
🔹 पूर्व घटनाओं पर स्पष्टीकरण:
ग्रामवासियों ने बताया कि पूर्व में हुई घटनाओं का उद्देश्य केवल समस्याओं को उजागर करना था, न कि कानून व्यवस्था भंग करना। उन्होंने आपराधिक मामलों की वापसी का आग्रह किया, जिस पर एसडीएम ने पुलिस अधीक्षक से समन्वय कर न्यायोचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया।
🔹 विद्यालय संचालन की समय-सारणी:
जिला शिक्षा अधिकारी एवं विद्यालय प्राचार्य द्वारा विद्यालय संचालन की समय-सारणी और बैठकों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिसे ग्रामीणों और शाला प्रबंधन समिति ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
🔹 आरटीई अधिनियम की जानकारी से संतोष:
एसडीएम ने ग्रामीणों को आरटीई (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार) अधिनियम के अंतर्गत मिलने वाले लाभों की जानकारी दी, जिससे ग्रामीण संतुष्ट नजर आए और विद्यालय संचालन को लेकर सकारात्मक वातावरण बना।
🔹 ट्रांसफार्मर स्थानांतरण को स्वीकृति:
विद्यालय परिसर में स्थित ट्रांसफार्मर को स्थानांतरित करने की वर्षों पुरानी मांग को प्रशासन ने स्वीकार करते हुए आवश्यक स्वीकृति प्रदान की।
🔹 पंचायत कैशबुक और चार्ज रजिस्टर विवाद पर निर्देश:
ग्राम पंचायत द्वारा कैशबुक एवं चार्ज रजिस्टर के हस्तांतरण की शिकायत पर एसडीएम ने तत्काल जनपद सीईओ को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह बैठक पूर्णतः शांतिपूर्ण और सौहार्द्रपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुई। सभी उपस्थित पक्षों ने संवाद और सहयोग की भावना के साथ केंद्रीय विद्यालय के सफल संचालन हेतु एकजुटता और सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।


2_भाग —वापसी अतीत की ओर ↔️प्रेम और समय के मध्य एक सेतु

लघु उपन्यास “वापसी अतीत की ओर” का दूसरा भाग प्रस्तुत है। यह अध्याय उन दिनों की स्मृतियों की ओर ले जाएगा, जहाँ अनिमेष और विनीता का पहला साक्षात्कार हुआ था—एक अद्भुत क्षण, जहाँ भविष्य की आशाएं अनजाने रूप में आकार ले रही थीं।

💛(स्थान_पीले फूलों की घाटी)
जैसलमेर के रेगिस्तान की धूप भी उस दिन कुछ कोमल थी, मानो प्रकृति स्वयं किसी आगंतुक के स्वागत में संकोचवश ठहर गई हो।
अनिमेष, जो वर्षों से रेत की लहरों के बीच एक मौन गाइड के रूप में जी रहा था,वैसे दिखने में अनिमेष आकर्षक चेहरा सुडौल कद काठी पढ़ा लिखा खूबसूरत जवान था।लेकिन हालात से किनारा कर आया था कुछ लोग होते हैं जो हालात से टकराते हैं कुछ लोग हालात से टकराने के बजाय अपने आप को किनारा कर लेते हैं उन्हीं में से था एक अनिमेष।🏃🏃
उस दिन पहली बार समय से पहले “सोनार किला” पहुँचा था। उसके भीतर कुछ अज्ञात उत्सुकता थी, जैसे आज कोई विशेष मिलने वाला हो। सोनार किला राजस्थान में रेगिस्तान का स्वर्ण मुकुट कहलाता है देखने में अति सुंदर ।शाम के समय जब सूर्यास्त गामी सूर्य की रोशनी किले पर पड़ती है तो ऐसा लगता है जैसे वहां पूरा स्वर्ण नगरी निकल आई हो क्योंकि संपूर्ण रूप से पीले पत्थरों से बनाया गया अदभुत बहुत प्राचीन किला था । इस ऐतिहासिक किले को देखने विश्व के लोग आते हैं यह किला पीले बलुआ पत्थर से बना है और इसमें चार बड़े प्रवेश द्वार हैं जिन्हें “पोल” कहा जाता है।
🧑‍🌾
अनिमेष ने देख लिया
किला के द्वार पर खड़ी वह लड़की…
गहरी नीली आँखें मासूमियत में लिपटी, आँखों में झीलों सी शांति, और होंठों पर आधा-अधूरा प्रश्न…दिखने में बला की खूबसूरत कश्मीरी वेशभूषा इसे साफ प्रतीत होता है कि वह कश्मीर से ताल्लुकात रखती है।
👰
दोनों की नजरें मिली उस लड़की ने अनिमेष पर एक गहरी नजर डाली जैसे कोई स्त्री किसी पुरुष को नजरों से पढ़ती है फिर उसके चेहरे पर नजर टिकाती बोली__””
“क्या आप ही अनिमेष हैं?”
उसने पूछा।

अनिमेष चौंका।
वह प्रश्न नहीं था—जैसे कोई स्वर पहले ही आत्मा को छू गया हो।
“हाँ, मैं ही हूँ।”
उसके स्वर में एक अनचाही गंभीरता थी।

लड़की मुस्कराई।
“मैं विनीता हूँ… कश्मीर से आई हूँ। आपकी कहानियाँ बहुत सुनी हैं। सोचा खुद सुनूँ, खुद देखूँ…”
🤱🧑‍🍼
“यहीं से आरंभ हुआ वह अद्भुत अध्याय, जहाँ इतिहास और वर्तमान की दहलीज़ पर दो आत्माएँ एक-दूसरे को पढ़ने लगी थीं।
राजस्थान – जो अब अतीत की परछाई बन चुका है, और कश्मीर – जो आज भी वर्तमान की धड़कनों में साँस लेता है।
जब अतीत वर्तमान से मिलता है, तो समय ठहर जाता है, और जब इतिहास स्वयं अतीत से हाथ मिलाता है, तो वह मिलन ऐतिहासिक हो जाता है।
🌼🌼🌼🌼🌼
यह वही क्षण था – दो रूहों के मिलन का, दो खोई हुई आत्माओं की तलाश का, जो एक-दूसरे में खुद को पा रही थीं।”यही ऐतिहासिक मिलन थी दो रूहों की दो खोजती खोई आत्माओं की।
🕌🛕🏘️
उस दिन उन्होंने किले के प्राचीन गलियारों से लेकर रेगिस्तान की थिरकती रेतों तक न जाने कितनी बातें कीं।
विनीता बातों में ठहरती नहीं थी—वह बहती थी, जैसे झरना।
और अनिमेष? वह उसे सुनते-सुनते स्वयं को भूलता जा रहा था।
शाम को जब सूर्य रेत पर सिंदूरी चादर बिछा रहा था, विनीता ने पूछा—
“क्या आप यहाँ हमेशा रहते हैं?”
अनिमेष ने सिर हिलाया।
“हाँ, और शायद हमेशा रह जाऊँ…”
..??
“पर क्यों?”
“क्योंकि अतीत ने मुझे यहीं छोड़ दिया है…”
अनिमेष का उत्तर भारी था।
विनीता थोड़ी देर मौन रही।
फिर मुस्कराकर बोली—
“फिर मैं अतीत को बदलने आई हूँ…”एक शोखी शरारत थी उसमें।

अनिमेष ने पहली बार उसकी आँखों में सीधा देखा।
शायद उसी क्षण कुछ जुड़ गया था—
एक बंधन जो भाषा से परे था,
एक संवाद जो आत्मा से आत्मा तक पहुँचा था।
(क्रमशः…2)


🌞 तपती धूप में श्रमिकों की न्याय की लड़ाई — प्रशासन की चुप्पी जारी

📍स्थान: पंडरिया | 📅 दिनांक: 8 जुलाई 2025 | 📰 जन चौपाल 36
पंडरिया शक्कर कारखाना के श्रमिकों ने कलेक्टर कार्यालय के सामने दिया धरना, रोजगार की सुरक्षा और सम्मान की मांग
पंडरिया —
जैसे-जैसे सूरज सिर पर चढ़ता गया, वैसे-वैसे पंडरिया के शक्कर कारखाने के श्रमिकों का आक्रोश भी तेज़ होता गया। आज श्रमिक कल्याण संघ के बैनर तले रमा शंकर विश्वकर्मा (अध्यक्ष) और अजय बंजारे (सचिव) के नेतृत्व में सैकड़ों श्रमिकों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्वक धरना दिया।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें हैं:
रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
मेंटेनेंस कार्यों में पुराने श्रमिकों को पुनः शामिल किया जाए
कारखाना प्रबंधन की तानाशाही प्रवृत्ति पर रोक लगे
धरने के दौरान संघ पदाधिकारियों ने कहा,
“इन श्रमिकों ने सालों तक अपना खून-पसीना इस फैक्ट्री को दिया है। अब जब नौकरी जाने का डर मंडरा रहा है, तो प्रशासन से उम्मीद थी कि कोई तो उनकी सुध लेगा। लेकिन अब तक न कोई अफसर आया और न ही किसी तरह की पहल हुई।”
श्रमिकों के चेहरों पर धूप की तपन के बावजूद संघर्ष की जिद झलक रही थी। यह आंदोलन केवल एक नौकरी के लिए नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की गारंटी के लिए है।
प्रशासन की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
क्या वाकई मेहनतकशों की आवाज़ यूं ही अनसुनी रह जाएगी?
संघ ने चेताया है कि यदि जल्द ही सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
📝 रिपोर्ट: जन चौपाल36 संवाददाता | स्रोत: प्रेस विज्ञप्ति_ टीम से जानकारी

भाजपा के मैनपाट प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन रहा प्रभावशाली, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए लोकव्यवहार और वक्तृत्व कौशल के टिप्स

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मैनपाट/, छत्तीसगढ़ :_भाजपा के मैनपाट स्थित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का दूसरा दिन पार्टी कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। इस अवसर पर राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश, केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, तथा राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने अलग-अलग सत्रों में मार्गदर्शन प्रदान किया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने सत्र में लोक व्यवहार, समय प्रबंधन और वक्तृत्व कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है जो राष्ट्र और जनहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करती है।”
शिविर का अनुशासन और गोपनीयता रही प्रमुख विशेषता
आज के सत्र की सबसे विशेष बात यह रही कि बैठक में भाग लेने वाले सभी जनप्रतिनिधियों और नेताओं के मोबाइल फोन बाहर ही जमा करा लिए गए थे। मीटिंग हॉल में मोबाइल पूरी तरह से वर्जित रहे। यह निर्णय इसीलिए लिया गया ताकि सत्र में कोई व्यवधान न हो और सभी प्रतिनिधि वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन को पूरे ध्यान से सुन सकें। बैठक को पार्टी के दृष्टिकोण से गोपनीय और रणनीतिक माना गया।
नई पीढ़ी के नेताओं को मिल रहा नेतृत्व का प्रशिक्षण
छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली जीत के साथ कई नव निर्वाचित विधायक पहली बार विधानसभा पहुँचे हैं। ऐसे नेताओं को संगठनात्मक कार्यप्रणाली, प्रशासनिक संवाद, और मीडिया से प्रभावी चर्चा जैसे पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि सभी जनप्रतिनिधियों को सीधे जनता से संवाद, स्थानीय समस्याओं को समझने, और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने की आवश्यकता है।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का यह दूसरा दिन भाजपा की संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
🖋️ लेखक: जन चौपाल 36 न्यूज डेस्क