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आरंग विधायक की गाड़ी पर हमले की घटना पर बेमेतरा विधायक दीपेश साहू ने जताई गहरी चिंता और की कड़ी निंदा

जनचौपाल_36
13 जुलाई 2025
📍 बेमेतरा

आरंग विधायक एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब जी की गाड़ी पर अज्ञात तत्वों द्वारा हमला किए जाने की घटना को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश है। यह घटना उस समय हुई जब वे नवागढ़ से रायपुर लौट रहे थे। हमला चारभांठा और भोईनाभांठा के बीच किया गया।
इस घटनाक्रम पर बेमेतरा विधायक श्री दीपेश साहू ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा —
“यह घटना अत्यंत निंदनीय और गंभीर चिंता का विषय है। हमारे आरंग विधायक श्री गुरु खुशवंत साहेब जी सतनाम समाज की सामाजिक बैठक में भाग लेकर लौट रहे थे, और इस प्रकार उन पर हमला होना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात है। मैं इस कायराना हमले की घोर निंदा करता हूं।”
विधायक साहू ने प्रशासन से घटना की निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग करते हुए कहा —
“हमारे एसपी साहब स्वयं मौके पर पहुंच चुके हैं और प्रारंभिक जांच शुरू हो चुकी है। मैं जनता को आश्वस्त करता हूं कि यह जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही, उन्होंने गुरु खुशवंत साहेब जी के कुशल स्वास्थ्य की जानकारी मिलने पर राहत की भावना प्रकट की और उनके शीघ्र स्वस्थ रहने की कामना की।
🔺 इस तरह की घटनाएं प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए चेतावनी हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

_5 वॉ भाग“कुलधरा : इतिहास के मौन पृष्ठों की ओर(वापसी अतीत की ओर)

(गतांक से आगे)
अगले दिन की सुबह जैसलमेर के आकाश में सुनहरी रेखाएँ उभर रही थीं, और रेत अपनी आदत के अनुसार एक नई कहानी लिखने को तैयार लग रही थी।

अनिमेष और विनीता आज कुलधरा जाने वाले थे — वह रहस्यमय, वीरान गाँव जहाँ सदियों पहले पूरा एक समाज बिना कोई निशान छोड़े रातों रात लुप्त हो गया था। पर्यटक वहाँ अब भी आते हैं, लेकिन केवल ईंट-पत्थर की चुप्पियों को देखकर लौट जाते हैं। पर आज, वहां जाने वाले दो लोग, उस मौन से संवाद करने निकले थे।

कहानी उस समय की है, जब जैसलमेर की रेत में आधुनिकता की चहल-पहल नहीं, बल्कि इतिहास की साँसें गूंजा करती थीं।
अनिमेष अब इस धरती का हिस्सा बन चुका था। ऊंट की सवारी हो या ऊंटगाड़ी चलाना, रेत में दिशा पहचाननी हो या पारंपरिक नाव से जल यात्रा — सब कुछ उसे स्वाभाविक लगता था।

उसने निर्णय लिया कि कुलधरा की यात्रा ऊंटगाड़ी से ही की जाए। न कोई जल्दबाज़ी, न कोई मशीन की शोरगुल — बस थिरकते कदमों वाली ऊंटगाड़ी, खुला आसमान और साथ में विनीता।

वह चाहता था कि इस यात्रा के हर पल में विनीता रेगिस्तान की आत्मा को महसूस करे, इतिहास की बारीकियों को समझे, और उनके बीच जो संवाद हों, वे समय से परे किसी पुराने लोकगीत की तरह गूंजते रहें।

🤱“तुम कुलधरा क्यों दिखाना चाहते हो?”
विनीता ने ऊँटगाड़ी की धीमी चाल में आनंद लेते हुए पूछा,
🧑‍🍼अनिमेष कुछ क्षण चुप रहा, फिर बोला,
“क्योंकि मुझे लगता है कि कुछ जगहें केवल देखी नहीं जातीं, उन्हें पढ़ा जाता है। और कुलधरा… शायद तुम उसे समझ सको।”

🛣️विनीता ने उसकी बात को बड़े ध्यान से सुना।
उसके स्वर में उत्सुकता कम, और संवेदना अधिक थी।
“मैंने सुना है,” वह बोली,
🧱“कुलधरा की हवाओं में अब भी वो प्रार्थनाएँ गूंजती हैं, जो पूरी नहीं हो सकीं…”

जब दोनों कुलधरा पहुँचे, तो रेत ने जैसे अचानक मौन ओढ़ लिया।
चारों ओर खंडहर थे, दीवारें थीं जिन पर समय ने कोई नया रंग नहीं चढ़ाया था — केवल धूल की परतें, और स्मृतियों के धुंधले पद चिह्न।
अनिमेष एक टूटी हवेली के सामने ठहर गया।

विनीता भी पास आ गई।
“यहाँ क्या हुआ था?”

अनिमेष ने आहिस्ता से कहना शुरू किया —
“कहते हैं, गाँव के मुखिया की बेटी से जोधपुर के दीवान की कुटिल दृष्टि थी। जब ज़बरदस्ती का आदेश आया, तो गाँववालों ने एक रात फैसला लिया — धर्म, प्रेम और स्वाभिमान के लिए वे सब कुछ छोड़ देंगे… और छोड़ गए। एक भी व्यक्ति पीछे नहीं रहा। और अब, यह गाँव कभी आबाद नहीं हो पाया…”

विनीता ध्यान से सुन रही थी। उसके मन में यह कथा इतिहास नहीं, एक जीवंत दस्तावेज़ बन रही थी।
“क्या सच में कोई भी नहीं लौटा?”

उसका स्वर धीमा और भीतरी था।

“नहीं,” अनिमेष बोला,
“लेकिन उनकी कहानियाँ लौटती हैं… हर बार किसी नई आत्मा में उतरकर।”

दूर खामोश शून्य में नजरे टिकाए दोनों देख रहे थे।
कुछ देर तक दोनों एक चुप्पी में बंधे रहे —
एक ऐसी चुप्पी, जिसमें शब्दों की आवश्यकता नहीं थी जैसे दो रूह एक ही जिस्म में समा गई हो।

विनीता ने दीवार की एक दरार में झाँकते हुए पूछा —
“क्या तुम्हें कभी किसी को खो देने का ऐसा डर लगा है, कि तुम उसे खुद से दूर कर दो?”

अनिमेष ने उसकी ओर देखा।
आँखों में एक पुराना दुख कौंधा — लेकिन उसने सिर झुका लिया।
“हाँ… और शायद अब भी वही कर रहा हूँ।”

रेत पर दोनों के कदमों की छाप एक साथ चल रही थी — लेकिन दिलों की चालें अब भी कुछ दूरी बनाए हुए थीं।
सूरज ढलने लगा था।
जैसे कुलधरा की दीवारें आज थोड़ी कम वीरान थीं।

चिंतन की गहराइयों में डूबे अनिमेष को जैसे ही जैसलमेर की सीमाएँ निकट आती प्रतीत हुईं, मार्ग के किनारे एक हरित उपवन ने ध्यान खींच लिया।

वह था — बड़ा बाग, स्वर्ण धरा के मध्य स्थित एक सुरम्य तीर्थ समान स्थल। यह उपवन एक टीले पर स्थित था, जिसके चारों ओर दूर तक फैली थी रेगिस्तान की सुनहरी चादर — मानो रेत और हरियाली का मिलन एक दिव्य सौंदर्य की रचना कर रहा हो।

जैसलमेर से कोई छः कोस की दूरी पर बसा यह बाग, न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, वरन् इसकी भूमि में राजवंशों की स्मृति भी समाई हुई है।
अनिमेष ने ऊंटगाड़ी की दिशा बदली और उसे उपवन की ओर मोड़ते हुए विनीता को एक पत्थर की बेंच पर ससम्मान बैठाया।

हल्की सी मुस्कान के साथ बोला —
“थोड़ा विश्राम कर लो… मन कुछ बोझिल सा जान पड़ता है।”
विनीता ने चुपचाप एक दृष्टि उपवन पर डाली और फिर बेंच पर विराजमान हो गई।

उसके चारों ओर फैले राजपूताने की स्थापत्यकला के प्रतीक — शाही छतरियाँ — इतिहास की मौन गाथा कह रही थीं।

इन भव्य स्मारकों में जैसलमेर के महाराजाओं एवं विशिष्ट कुलों के नर-नारियों की समाधियाँ स्थापित थीं — हर एक छतरी एक जीवन की कहानी, एक युग की छाया थी।

विनीता की दृष्टि उनमें अटक गई — यही वो तत्व थे जो उसके शोध कार्य की आत्मा बन सकते थे।उसने अनिमेष की ओर देखा — मानो समय थम गया हो, और वे दोनों अतीत के किसी चित्रपट में प्रवेश कर चुके हों।

विनीता खामोश खड़ी कहीं खो गई थी।

वातावरण की संजीदगी को हल्का करने हेतु अनिमेष धीरे-धीरे फुलवारी की ओर बढ़ा। वहाँ पहुँचकर उसने एक कोमल गुलाब, डंठल सहित, बड़े स्नेह से तोड़ लिया। फिर वह लौटकर विनीता के समक्ष घुटनों के बल बैठ गया, और दोनों हथेलियों में सहेजते हुए उस गुलाब को विनम्र प्रेम भरे भाव से उसकी ओर बढ़ाया।

विनीता कुछ क्षण निस्पंद होकर उस गुलाब को निहारती रही…
फिर उसकी दृष्टि अनिमेष की आंखों से जा मिली — वहाँ एक मौन, गहरा प्रेम बोल रहा था।

मुस्कुराते हुए उसने वह गुलाब थाम लिया।

उस पल जैसे समय ठहर गया। कुछ अदृश्य, परंतु अनंत बदल गया था।
विनीता ने दृष्टि झुकाए, फिर अनिमेष की आंखों में झांकते हुए कोमल स्वर में कहा,
“इस युग में, जब हर बात शोर बन चुकी है — भावनाओं को मौन में समझ लेने की समझ ही सच्चा बौद्धिक प्रेम कहलाती है।

मैं तुम्हारी भावना को समझ चुकी हूँ… और स्वीकार भी कर चुकी हूँ।
पुराने समय में तो साथ चलना भी विरल था — और आज, मन की बात कहने में विलंब नहीं करते।”

अनिमेष के अधरों पर एक शांत, आत्मिक मुस्कान उभरी। उसने उत्तर दिया —
“आभार, विनीता…
देखो, प्रतीक्षा का विस्तार मन में असंख्य औपचारिकताएँ भर देता है,
और हम विचारों की जटिलताओं में उलझने लगते हैं।

किन्तु प्रेम —वह कोई परीक्षा नहीं, अपितु एक निःशर्त समर्पण है।”
फिर दोनों एक नई सहजता के साथ अपने-अपने ठिकानों की ओर लौट चले — मानो मन के किसी कोने में फिर से एक गुलाब खिल गया हो।




हत्या के आरोपी को बेरला पुलिस ने किया गिरफ्तार, लोहे के टंगिया से सिर पर किया वार

Janchoupal36

बेमेतरा, 12 जुलाई 2025:
थाना बेरला क्षेत्र के बारगांव में एक व्यक्ति की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या धारदार टंगिया से सिर पर वार कर की गई थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रार्थी पुनीत राम साहू (40 वर्ष) ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके बड़े पिता के पुत्र छविराम साहू पर गांव के ही जीवन यादव (22 वर्ष) ने हमला किया। घटना 11 जुलाई की शाम करीब 6 बजे की है, जब छविराम गांव के शिव मंदिर के पास अकेला था। तभी जीवन यादव ने पुरानी रंजिश और आपसी विवाद के चलते टंगिया से उसके सिर और गर्दन पर प्राणघातक हमला कर दिया।
गंभीर रूप से घायल छविराम को 108 एंबुलेंस से शासकीय अस्पताल बेरला लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में थाना बेरला पुलिस ने मर्ग कायम कर धारा 103(1) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) के निर्देशन पर अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमती ज्योति सिंह और एसडीओपी बेरला श्री विनय कुमार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्णकांत सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी जीवन यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार किया।
आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का टंगिया और अन्य साक्ष्य बरामद कर लिए गए हैं। आरोपी को आज विधिवत गिरफ्तार कर कल न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जाएगा।
इस कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक कृष्णकांत सिंह के साथ प्रधान आरक्षक नोहर यादव, दीनानाथ यादव, आरक्षक संदीप गायकवाड, रामेश्वर पटेल, सुरेन्द्र जांगड़े, धनसाय मिरे, टेकेन्द्र यादव, राजेन्द्र बंसोर सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब के काफिले पर पथराव, बाल-बाल बचे विधायक

📍 बेमेतरा / रायपुर | 12 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ की राजनीति में शनिवार की शाम उस वक्त हलचल मच गई जब आरंग विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक गुरु खुशवंत साहेब के काफिले पर अचानक पथराव कर दिया गया। घटना बेमेतरा से रायपुर लौटते समय की बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विधायक किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होकर रायपुर लौट रहे थे। जैसे ही उनका वाहन भोईनाभांठा क्षेत्र से गुजर रहा था, वहां पहले से मौजूद अज्ञात लोगों ने उनके काफिले पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इस हमले में वाहन के शीशे टूट गए, लेकिन गनीमत रही कि कोई शारीरिक चोट नहीं आई। विधायक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
🎙️ स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, घटना सुनियोजित हो सकती है, हालांकि पुलिस इस मामले में सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है।
🛡️ पुलिस का बयान:
बेमेतरा पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एसपी रामकृष्ण साहू स्वयं मामले की निगरानी कर रहे हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है।
🔊 विधायक की प्रतिक्रिया:
गुरु खुशवंत साहेब ने घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है।
👥 समाज में आक्रोश:
घटना के बाद सतनामी समाज में आक्रोश देखने को मिला है। कई नेताओं और संगठनों ने कड़ी निंदा करते हुए इसे एक समुदाय विशेष को डराने की कोशिश बताया है।
📌 जांच जारी:
फिलहाल पुलिस संदिग्धों की तलाश में जुटी है और जल्द ही इस हमले के पीछे की मंशा और साजिश का खुलासा हो सकता है।
✍️ रिपोर्ट: जनचौपाल36 न्यूज डेस्क | संपर्क: deepakpandey6127@gmail.com



गौ प्रणाम यात्रा: गौ पुत्रों की दंडवत जन जागरण यात्रा, गौ माता की घर वापसी की मांग तेज

जनचौपाल_36 | विशेष रिपोर्ट

गिरौधपुरी तीर्थ से बलौदाबाजार तक दंडवत यात्रा
बलौदाबाजार, 12 जुलाई 2025 —
परम पूज्य गुरुदेव बाबा घासीदास जी के पावन आशीर्वाद के साथ, गौ माता के संरक्षण और संवर्धन को लेकर गौ पुत्र ओमेश बिसेन के नेतृत्व में एक अनोखी दंडवत जन जागरण यात्रा जारी है। गिरौधपुरी तीर्थ से बलौदा बाजार तक की यह यात्रा पूर्ण आस्था और जनसमर्थन के साथ संचालित हो रही है।
यात्रा का उद्देश्य साफ है —
गौ धन की घर वापसी, गौ तस्करी पर सख्त कानून, और देशी नस्ल के गौवंश का संरक्षण।
मुख्य मांगे:
गौ तस्करी पर कड़ा कानून: गौ तस्करों को गोली मारने का आदेश मिले।
पकड़े जाने पर 10 साल की सजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो।
अंतरराज्यीय गौ तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
गौ सेवा के लिए आधारभूत संरचना: हर जिले के मुख्यालय में वेटनरी अस्पताल और 3 सर्जन डॉक्टर की नियुक्ति।
देशी गायों की देखभाल हेतु ग्राम स्तर पर पुरस्कार योजना।
जर्सी गायों पर पूर्ण प्रतिबंध और कृत्रिम गर्भाधान पर रोक।
गौ आधारित जैविक कृषि का विस्तार: गोबर और गौमूत्र की सरकारी दर पर खरीदी।
जैविक खाद तैयार कर किसानों को वितरित करना।
गौ संवर्धन बोर्ड और जैविक कृषि बोर्ड का गठन।
नंदी संरक्षण और सामाजिक मान्यता: सावन माह को “नंदी संरक्षण माह” घोषित किया जाए।
कोसली गौ माता को “राज माता” और गौ माता को “राष्ट्र माता” का दर्जा मिले।
राशन कार्ड में गौ धन की संख्या दर्ज हो और योजनाओं में गौ पालकों को प्राथमिकता दी जाए।
सब्सिडी में भी गौ पालकों को वरीयता मिले।
सरकार से अपील:
गौ पुत्रों ने राज्य और केंद्र सरकार से इन मांगों पर शीघ्र कार्यवाही की अपील की है। यात्रा के माध्यम से जनजागरण का संदेश दूर-दूर तक फैलाया जा रहा है।
अंत में एक स्वर:
“गौ धन की रक्षा, राष्ट्र की सुरक्षा।”
🕊️ रिपोर्टर: जनचौपाल_36
📍स्थान: बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़
📅 तिथि: 12 जुलाई 2025
✍️ संपर्क: deepakpandey6127@gmail.com

शक्कर कारखाने में श्रमिकों का हल्ला बोल — टूल डाउन आंदोलन की अनुभागीय अधिकारी को दी सूचना

पंडरिया शक्कर कारखाने के श्रमिकों ने बेमियादी टूल डाउन आंदोलन शुरू किया 320 श्रमिकों ने काम छोड़ा, आंदोलन की चिट्ठी प्रशासन को_मांगें अनसुनी, श्रमिक बिफरे शक्कर कारखाने में अनिश्चितकालीन टूल डाउन शुरू।

पंडरिया, 12 जुलाई 2025 — लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित, पंडरिया में कार्यरत श्रमिकों ने आज से अनिश्चितकालीन टूल डाउन आंदोलन शुरू कर दिया है। यह आंदोलन भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले किया जा रहा है।
संघ द्वारा 07 मई 2025 एवं 09 जुलाई 2025 को दो बार कारखाना प्रबंधन को श्रमिकों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। बावजूद इसके, मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। पत्र में बताया गया है कि प्रबंधन द्वारा श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे नाराज होकर मजदूर संघ के 320 श्रमिकों के साथ आज से टुल डाउन आंदोलन शुरू किया गया।

संघ के पदाधिकारियों ने अनुविभागीय अधिकारी, पंडरिया को पत्र सौंपकर टूल डाउन आंदोलन की सूचना दी है और कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। यह आंदोलन श्रमिक हित में किया जा रहा है और संयमित रूप से संचालित किया जाएगा।
इस आंदोलन के कारण शक्कर कारखाने के नियमित कार्यों पर प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है। वहीं, प्रशासन और प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



टीसी के लिए कॉलेज पहुंची छात्रा को महिला प्रिंसिपल ने जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल

प्रकाशन तिथि:12 जुलाई 2025
: Deepak Pandey
बिलासपुर (छत्तीसगढ़):
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक छात्रा और महिला प्रिंसिपल के बीच विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) लेने कॉलेज पहुंची फाइनल ईयर की छात्रा को महिला प्राचार्य ने तेज आवाज में बोलने पर थप्पड़ जड़ दिया। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकंडा के राज किशोर नगर निवासी छात्रा अंकिता यादव, बीआर साव कॉलेज नेवसा गांव की फाइनल ईयर की छात्रा है। उसे खेल कोटे से प्रवेश मिला था और पहले दो वर्षों तक कॉलेज ने फीस नहीं ली थी। फाइनल ईयर में कॉलेज प्रबंधन ने शुल्क जमा करने को कहा, जिसके जवाब में छात्रा ने टीसी की मांग की।
छात्रा का आरोप है कि टीसी के लिए कई बार कॉलेज का चक्कर लगाने के बावजूद उसे परेशान किया जा रहा था। मंगलवार को जब वह फिर कॉलेज पहुंची तो प्राचार्या से तीखी बहस हो गई। इसी दौरान, गुस्से में आकर महिला प्रिंसिपल ने छात्रा को थप्पड़ मार दिया। साथ ही, छात्रा के साथ आए युवक से मोबाइल छीनने की भी कोशिश की गई। इस पूरी घटना का वीडियो किसी ने बना लिया और वह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
थाने में शिकायत दर्ज
घटना के बाद छात्रा ने रतनपुर थाने पहुंचकर इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। हालांकि कॉलेज प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर बवाल
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में रोष है। सोशल मीडिया पर कॉलेज प्रशासन की तीखी आलोचना हो रही है। कई यूजर्स ने पूछा है कि क्या छात्रों की आवाज उठाना अब भी एक ‘अपराध’ है? कुछ लोगों ने प्राचार्या के व्यवहार को गैर-पेशेवर और अनुचित बताया है।
हालांकि, कुछ वर्गों ने छात्रा की भाषा और तेवर को भी अनुशासनहीन बताया है। उनका कहना है कि छात्रा ने भी अभद्र और उग्र व्यवहार किया, जो एक शिक्षा संस्थान में स्वीकार्य नहीं है।
प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल पुलिस जांच कर रही है और कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

महिला वकील ने क्लाइंट को पीटा, फैमिली कोर्ट परिसर में मारपीट का वीडियो वायरल

बिलासपुर। फैमिली कोर्ट में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक महिला वकील और उसकी क्लाइंट के बीच विवाद मारपीट में बदल गया। घटना 10 जुलाई की है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार, वकील लीना अग्रहरि और उनकी क्लाइंट सुमन ठाकुर के बीच पहले से ही फीस और केस की सुनवाई को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि कोर्ट परिसर में अचानक बहस तेज हो गई, और महिला वकील ने पहले सुमन ठाकुर की मां, जो हार्ट पेशेंट हैं, को धक्का दे दिया, जिससे वह जमीन पर गिर गईं। इसके बाद वकील ने सुमन ठाकुर की बाल पकड़कर खींचा और उसके भाई का शर्ट पकड़कर धमकाने लगी।
वीडियो में वकील को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसे “किसी का डर नहीं है”। घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी बीच-बचाव करने पहुंचे, लेकिन वे भी स्थिति को संभाल नहीं पाए।
दोनों पक्षों ने लगाए आरोप
सुमन ठाकुर ने महिला वकील पर आरोप लगाया कि फीस लेने के बावजूद वह केस की पैरवी से मुकर गईं, और जब इस बात का विरोध किया गया तो मारपीट पर उतर आईं। वहीं वकील लीना अग्रहरि ने सुमन के भाई पर बदतमीजी करने का आरोप लगाया है।
हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया, लेकिन इस घटना ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा और वकील-पक्षकार संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन की चुप्पी सवालों में
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बावजूद अब तक महिला वकील के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। कोर्ट परिसर में हुई इस तरह की घटना ने न्याय व्यवस्था की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।अब क्या करें बचाने वाले ही मारने लग जाए,!1

प्रधानमंत्री मोदी 12 जुलाई को 51,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे

📍नई दिल्ली, 11 जुलाई 2025
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 12 जुलाई 2025 को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रोज़गार मेला कार्यक्रम के तहत विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में नियुक्त किए गए 51,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नवचयनित अभ्यर्थियों को संबोधित भी करेंगे।
प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया यह रोज़गार मेला, रोज़गार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पहल देश के युवाओं को सशक्त बनाने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है।
अब तक देशभर में आयोजित रोज़गार मेलों के जरिए 10 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं।
📌 इस बार का 16वां रोज़गार मेला, देश के 47 विभिन्न स्थलों पर आयोजित किया जाएगा। इसमें चुने गए अभ्यर्थी रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, डाक विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय समेत विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में अपनी सेवाएं देंगे।
🔗 यह जानकारी NAMO ऐप व सरकारी स्रोतों से प्राप्त है।


4_भाग/मौन के उस पार(वापसी अतीत की ओर)

यह दृश्य जैसलमेर के एक प्राचीन किले के प्रांगण में घटता है, जहाँ पत्थरों की खामोशी में सदियों की कहानियाँ बंद हैं — और उन्हीं के बीच दो रूहें पहली बार एक-दूसरे की आत्मा से बातें करती हैं।

किले की ऊँचाइयों से नीचे फैले रेत के समंदर को देखती विनीता चुप थी।
वो बोलती कम थी, लेकिन उसकी निगाहें पूछती बहुत कुछ थीं।
अनिमेष, जो अब तक केवल ऐतिहासिक तथ्यों और स्थापत्य की बारीकियाँ बताता आया था, आज पहली बार मनुष्य के भीतर के स्थापत्य को पढ़ने की कोशिश कर रहा था।
“आप यहाँ अकेली आई हैं?”
उसने सावधानी से पूछा।और नजर भर विनीता को देखने लगा,
आज विनीता कुछ अलग ही लग रही थी…
जवां, खिला-खिला बदन, गोरे मुखड़े पर ताजगी की बौछार थी।
मानो सुबह की ओस से भीगी कोई कश्मीरी कली…
सफेद शर्ट में उसका निखरा चेहरा और भी उजला लग रहा था — जैसे धूप में चमकती बर्फ।
नीली जींस और पांवों में सफेद सैंडिल ने उसके पूरे व्यक्तित्व को एक सहज, आधुनिक आभा दे दी थी।
शर्ट की आस्तीनें कोहनी तक मोड़ी हुई थीं — एक सलीकेदार अंदाज़,और कलाई पर बंधी एक क्लासिक रिस्टवॉच जैसे वक्त भी थम कर उसे निहार रहा हो।
एक बार बस जी भर के देख लो…
तो दिल बाग़-बाग़ हो जाए, और मन कहे —
“यही है वो लम्हा, जिसे आंखों में कैद कर लिया जाए।”
विनीता ने गर्दन झुका कर एक पल की चुप्पी के बाद कहा —
“हाँ। कुछ खोया है… उसे ढूँढ़ने आई हूँ।”
उसके स्वर में कश्मीर की ठंडी हवाओं की सी उदासी थी,उसने अनिमेष से नजर मिलाती बोली।

“इतिहास से कुछ खोजती हैं?”
अनिमेष ने सहजता से पूछा।

“शायद…” — विनीता ने किले की दीवारों को हाथ से छूते हुए कहा,
“यहाँ की दीवारें बोलती हैं… बहुत कुछ।
ये सिर्फ किले नहीं हैं, ये इंसानों के भीतर के किले हैं।
कुछ टूट चुके हैं, कुछ अब भी खड़े हैं — वीरान मगर ज़िंदा।”

अनिमेष मौन हो गया।
विनीता की आँखों में उसे किसी पहाड़ी झील की सी गहराई दिखी —
शांत, लेकिन उसमें डूब जाने का मन करे।
इसी का फायदा उठाते हुए विनीता ने बड़े प्रेम और आदर की नजरों से अनिमेष को देखा।
जवानी, आकर्षण, सलीका और गहराई को उभारता है — विनीता की नजरों से, एक हल्के रोमांटिक भावना से:
अनिमेष…
नाम जितना शांत, व्यक्तित्व उतना ही गहरा।
वह कोई शोर मचाने वाला लड़का नहीं था —
वो तो उन शांत झीलों की तरह था, जो अपने भीतर गहराइयों का रहस्य समेटे रहती हैं।
गौर वर्ण तेजस्वी चेहरा —

“क्या आप मानते हैं कि इंसानों की आत्माएँ भी कहीं किसी कालखंड में अटक जाती हैं?”
विनीता ने पूछा।

अनिमेष ने धीरे से उत्तर दिया —
“हाँ। और शायद कभी-कभी दो आत्माएँ किसी पुराने युद्धक्षेत्र में टकराती हैं,
सिर्फ इसलिए नहीं कि वे एक-दूसरे को जानती हैं,
बल्कि इसलिए कि वे एक-दूसरे की अधूरी कहानी को पूरा करना चाहती हैं।”

उस पल दोनों के बीच एक गहरा मौन छा गया।
रेत उड़ रही थी, हवाएँ चल रही थीं, लेकिन उनके भीतर जैसे वक़्त ठहर गया था।
दो अलग-अलग दिशाओं से आए मुसाफ़िर — जिनकी आत्माएँ अनजाने में एक पुराने अध्याय की ओर लौट रही थीं।

शाम ढल रही थी।सूरज अस्ताचल की ओर बढ़ गया था
अब किले की छाया लंबी होती जा रही थी।
और उसी छाया में दो परछाइयाँ पहली बार साथ चली थीं —किले के सबसे ऊपरीला मंजिल से।

आज दोनों सोनार गढ़ को अकेले ही देखने निकले थे साथ में कोई पर्यटक नहीं लिया था अनिमेष।
अनिमेष मन ही मन से कहा_पर यहां तो पूरा इतिहास ही है जिसकी खोज में विनीता है।
दोनों में काफी समानताएं भी दिख रही ,एक रेत में रहता है दूसरा रेत में कुछ देखने आई है ।

अब यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि रेत यहां बंजर है पर पूरा आशियाना महल इसी रेत के दम से खड़ा किया जाता है।

विनिता और अनिमेष दोनों वर्तमान में थे एक विचार एक व्यवहार।
अब सोनार गढ़ का इतिहास तो खुद को थाम कर धरोहर बचा लिया था किंतु यह दोनों कैसे बचा पाएंगे दो जवां जिस्म और दो धड़कते दिल ,क्या?
वैसे ही जैसे इतिहास और वर्तमान ने एक-दूसरे को थाम लिया हो लेकिन जब दो दिल मिलते हैं तो इतिहास बना ही लेते है ।रेगिस्तान हो या कश्मीर भावनाएं तो बूंद बन बरसेंगी ही क्या वन ,क्या उपवन जब साथ हो दो जीवन तो रेगिस्तान में बहारों के सपने खिलेंगे ही.!!.