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Sunday, October 25, 2026
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शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आईं मां दुर्गा, धार्मिक मान्यताओं में जानिए इसका क्या है अर्थ और भविष्य से जुड़े संकेत

 Mata Durga Elephant Vahana Significance: शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही मां दुर्गा की आराधना और उनकी सवारी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्सुकता रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर नवरात्रि में देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मां दुर्गा कभी हाथी, कभी घोड़े, कभी नाव तो कभी पालकी पर सवार होकर आती हैं। इन वाहनों को आने वाले समय की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होने की मान्यता है। धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे वर्षा, खुशहाली और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

मां दुर्गा का हाथी पर आगमन क्यों माना जाता है शुभ?

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो इसे अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हाथी को शक्ति, स्थिरता, वैभव और संपन्नता से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण देवी का यह वाहन शुभ संकेतों से संबंधित माना जाता है।

हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें भविष्य की घटनाओं का वैज्ञानिक पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

किस आधार पर तय होता है मां दुर्गा का वाहन?

परंपरागत मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन पड़ने वाले वार के आधार पर मां दुर्गा के आगमन का वाहन निर्धारित किया जाता है। देवी पुराण से जोड़े जाने वाले एक प्रचलित श्लोक में अलग-अलग दिनों के लिए देवी के वाहनों का उल्लेख मिलता है।

श्लोक के अनुसार, रविवार या सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी माना जाता है। वहीं, शनिवार और मंगलवार को आगमन के लिए घोड़े का उल्लेख मिलता है। गुरुवार और शुक्रवार को पालकी तथा बुधवार को नाव से आगमन की मान्यता प्रचलित है।

मां दुर्गा की अलग-अलग सवारी का क्या है धार्मिक महत्व?

1. हाथी: अच्छी वर्षा और समृद्धि का प्रतीक

धार्मिक मान्यताओं में मां दुर्गा का हाथी पर आगमन वर्षा की अनुकूलता, खुशहाली और आर्थिक समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसे समाज और परिवार में सुख-शांति के संकेत के रूप में भी देखा जाता है।

2. घोड़ा: बदलाव और चुनौतियों का संकेत

मां दुर्गा के घोड़े पर आगमन को परंपरागत मान्यताओं में राजनीतिक बदलाव, तनाव और संघर्ष जैसी परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। कुछ धार्मिक व्याख्याओं में इसे प्राकृतिक चुनौतियों का संकेत भी माना गया है।

3. नाव: कार्यों में सफलता की मान्यता

नाव को देवी की ऐसी सवारी माना जाता है, जो कार्यों की सिद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति से जुड़ी है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, मां दुर्गा का नाव पर आगमन शुभ कार्यों में सफलता मिलने का संकेत देता है।

4. पालकी: सतर्कता और कठिन परिस्थितियों का संकेत

धार्मिक मान्यताओं में पालकी पर देवी के आगमन को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों, अशांति और कठिन परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है। इस मान्यता के आधार पर लोग ऐसे समय में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों पर विशेष ध्यान देते हैं।

नवरात्रि में देवी की सवारी को लेकर क्यों रहती है उत्सुकता?

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ उनके आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर भी चर्चा होती है। श्रद्धालु इन प्रतीकों को धार्मिक आस्था और परंपरा के नजरिए से देखते हैं। हाथी, घोड़ा, नाव और पालकी जैसे वाहनों के अलग-अलग अर्थ प्रचलित मान्यताओं में बताए गए हैं।

इस प्रकार, मां दुर्गा का हाथी पर आगमन धार्मिक दृष्टि से शुभता, वर्षा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि का मूल संदेश श्रद्धा, भक्ति, सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की विजय से जुड़ा है।

छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को 10% आरक्षण

रायपुर- राज्य सरकार ने गृह विभाग में आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इन पदों पर भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रविधान पहले ही किया जा चुका है। उनके अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य सेवाओं में लेने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने राज्य शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके तहत ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ किया जाएगा।

पीएम मोदी की 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा पर कैबिनेट में अभिनंदन प्रस्ताव पारित
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूरे होने पर बैठक में अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इसे राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों को समर्पित कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया।

अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे ऐतिहासिक फैसलों के लिए केंद्र का आभार
कैबिनेट ने जैम, जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और माओवादी हिंसा से मुक्ति सहित राष्ट्रहित में केंद्र सरकार के ऐतिहासिक निर्णयों का अभिनंदन किया। सहकारी संघवाद के जरिए छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग के लिए केंद्र का आभार भी जताया।

पीडब्ल्यूडी सचिव मुकेश कुमार बंसल बोले – बरसात के बाद निर्माण कार्यों को मिली रफ्तार, गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर

रायपुर.  बरसात के बाद सड़कों, पुल-पुलियों और भवनों के निर्माण को रफ्तार देने की पूरी तैयारी है। लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। काम की प्रगति अब केवल दफ्तरों की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेंगे। कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ औचक निरीक्षण से भी गुणवत्ता और प्रगति पर नजर रखी जाएगी। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने गरियाबंद जिले का दौरा कर सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक कर निर्माण में आ रही बाधाओं की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

सचिव बंसल ने गरियाबंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर निर्माणाधीन परियोजनाओं की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने फिंगेश्वर विकासखंड में कोपरा-पोखरा मार्ग के 26.20 किलोमीटर लंबे मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस परियोजना में पुल-पुलियों के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। उन्होंने राजिम में नवीन मेला स्थल चौबेबांधा से लक्ष्मण झूला तक 3.50 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण की प्रगति भी देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली और निर्माण में गुणवत्ता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सड़क परियोजनाओं के साथ सचिव बंसल ने गरियाबंद में निर्माणाधीन शासकीय भवनों का भी जायजा लिया। उन्होंने व्यवहार न्यायालय में न्यायिक अधिकारियों के लिए बनाए जा रहे दो डी-टाइप आवासगृहों, जिला परिवहन कार्यालय भवन तथा 40 जीएडी आवासगृहों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सचिव बंसल गरियाबंद जिले के बिंद्रानवागढ़ क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में भी पहुंचे। उन्होंने कसाबाय-पतोरा दादर मार्ग के आरडी 135 में चचंगी नाला पर निर्मित पुल एवं पहुंच मार्ग का निरीक्षण किया। यह कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कसाबाय-सातधार मार्ग में हलफली नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में संचालित इन परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों की स्थिति की जानकारी ली।

मैदानी निरीक्षण के बाद सचिव बंसल ने गरियाबंद सर्किट हाउस में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए काम में आ रही समस्याओं और बाधाओं की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों को गति देने के साथ गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। बरसात के बाद निर्माण कार्यों में तेजी लाने विभागीय अमले को सक्रियता से काम करना होगा। कार्यों की सतत निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों के मैदानी निरीक्षण से निर्माण की वास्तविक प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

सचिव बंसल ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय कार्यालय और कार्यालय परिसर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय में स्वच्छता और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता व्ही. के. भतपहरी, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी एवं उप अभियंतागण उपस्थित थे।

नवा रायपुर में 200 एकड़ में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क

छत्तीसगढ़ मध्य भारत के बड़े मेडिकल हब के रूप में हो रहा विकसित : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल, कैंसर उपचार केंद्र का हुआ भूमिपूजन

मुख्यमंत्री साय ने कहा – प्रदेश में ही कैंसर मरीजों को मिलेंगी उच्चस्तरीय उपचार सुविधाएं, दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम

शहरों से लेकर सुदूर वनांचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस

आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना बनीं जरूरतमंद परिवारों का संबल

मेडिसिटी से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा, फार्मा उद्योग, अनुसंधान और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ तेजी से मध्य भारत के एक बड़े मेडिकल हब के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं अपने प्रदेश में ही उपलब्ध हों तथा आर्थिक अभाव किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने।

मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में ओमेगा मेडिसिन अस्पताल की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहल एवं कैंसर उपचार केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और ओमेगा ग्रुप की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ पूरा परिवार कठिन दौर से गुजरता है। यदि उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़े तो परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयां भी आती हैं। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर से गंभीर बीमारी के उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न्यूनतम हो और उन्हें अपने परिवार के बीच रहते हुए विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने कहा कि ओमेगा अस्पताल का प्रस्तावित ऑन्कोलॉजी सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बेहतर कैंसर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांव, गरीब और सुदूर जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। जिला अस्पतालों में आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, आधुनिक पैथोलॉजी और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच चिकित्सा सुविधाओं के अंतर को कम करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।

गंभीर बीमारी में परिवारों का संबल बन रही सरकार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी केवल स्वास्थ्य संबंधी चुनौती नहीं होती, बल्कि कई बार परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट भी खड़ा कर देती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने ऐसे लाखों परिवारों को उपचार की चिंता से राहत दी है। शासकीय अस्पतालों के साथ बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा गया है, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। हमारा स्पष्ट संकल्प है कि पैसे के अभाव में किसी गरीब का इलाज न रुके और बीमारी के उपचार के लिए किसी परिवार को अपनी जमीन, घर या गहने बेचने जैसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा बदलाव केवल रायपुर या बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता अबूझमाड़ सहित प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना भी है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सीमित थी, वहां आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वनांचलों में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की जांच और उपचार किया जा रहा है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ चिकित्सकों, दवाइयों और आवश्यक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है जिसमें बस्तर के सुदूर गांव से लेकर राजधानी रायपुर तक हर नागरिक को आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।

नवा रायपुर में 200 एकड़ में मेडिसिटी और फार्मा पार्क से खुलेगा संभावनाओं का नया द्वार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख स्वास्थ्य और चिकित्सा निवेश केंद्रों में शामिल करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी और फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि मेडिसिटी और फार्मा पार्क के माध्यम से सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाओं, फार्मास्युटिकल उद्योग, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को एक मजबूत इकोसिस्टम उपलब्ध होगा। इससे चिकित्सकों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ सहित प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में सुपर स्पेशलिटी एवं मल्टीस्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आधुनिक स्वास्थ्य इकाइयों और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मेडिकल टूरिज्म की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल प्रदेशवासियों, बल्कि आसपास के राज्यों के लोगों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का प्रमुख केंद्र बने।

स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश से बढ़ेंगी सुविधाएं और रोजगार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ओमेगा ग्रुप का रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा क्षेत्र में निवेश के आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार और निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार संभव है। नए अस्पतालों और सुपर स्पेशलिटी केंद्रों की स्थापना से जहां मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

Weather Today : छत्तीसगढ़ में गर्मी से मिलेगी राहत! बदलेगा मौसम का मिजाज, जानिए लेटेस्ट अपडेट

रायपुर. मानसून रायपुर से विदा हो चुका है, मगर मानसून द्रोणिका छत्तीसगढ़ से पूरी तरह रवाना नहीं हुई है. दिन में तेज धूप निकलने से राज्य में गर्मी का असर बना हुआ है. मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को राजधानी रायपुर में तेज धूप वाला मौसम रहने वाला है. तापमान में एक डिग्री का इजाफा भी हो सकता है. प्रदेश के अधिकतर इलाकों में सोमवार को मौसम साफ रहने, जबकि कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है.

रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम 

रायपुर में लोगों को दिन-रात गर्मी का अहसास हो रहा है. सोमवार को मौसम साफ रहने की संभावना है. रविवार के मुकाबले अधकितम तापामान आज एक डिग्री अधिक यानी 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं.

प्रदेश में कैसा रहा पिछला 24 घंटा

बात करें प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान रहने वाले मौसम की तो अधिकतर स्थानों पर शुष्क रहा और एक-दो जगहों पर हल्की बारिश हुई. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस राजनन्दगांव में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस अम्बिकापुर में दर्ज किया गया.

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 दिनों तक अधिकांश स्थानों पर मौसम के शुष्क रहने की संभावना है. इसके बाद एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा हो सकती है.

किन शहरों में कितना रहा तापमान 

प्रदेश में रविवार को दुर्ग 33.4 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर 33.2 डिग्री सेल्सियस, माना 32.9 डिग्री सेल्सियस, बिलासपुर 32. 4 डिग्री सेल्सियस, पेंड्रारोड 31.4 डिग्री सेल्सियस और अंबिकापुर 31 डिग्री सेल्सियस रहा.

हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार

मौसम विभाग ने आज यानी सोमवार को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की वर्षा होने की संभावना जताई है. वहीं कुछ जगहों पर बादल गरजने-चमकने के साथ बिजली गिरने और 40 से 50 किमी की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के आसार हैं. दो दिन बाद इसी तरह की गतिविधियां जारी रह सकती हैं.

मौसमी सिस्टम

मौसम विभाग ने जानकारी दी कि सुपौल, रांची, सुंदरगढ़, बरगढ़, बीजापुर, हैदराबाद, बेलगावी, पणजी से होकर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा गुजर रही है. अगले 2 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए स्थितियां अनुकूल बन सकती हैं. इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश तक द्रोणिका बना हुआ है.

स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार का संकल्प: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री साय ने देवपुरी में सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल का किया शुभारंभ

छत्तीसगढ़ मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से हो रहा विकसित: मुख्यमंत्री श्री साय

प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम

नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी, मेडिकल टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर– मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी संकल्प के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ आज मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के देवपुरी में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में निर्मित 125 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर अस्पताल का शुभारंभ किया और अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्रदेश में ही उपलब्ध हों बेहतर और आधुनिक उपचार सुविधाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार को उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़े तो आर्थिक बोझ के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को अधिक से अधिक विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों।

उन्होंने कहा कि रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता लगातार कम होगी। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ के नागरिकों, बल्कि आसपास के राज्यों से आने वाले मरीजों को भी मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में एक मजबूत हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। आधुनिक अस्पतालों के खुलने से जहां लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिलेगी, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में व्यापक विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार इस योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया है। जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। सुदूर वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों तक चिकित्सकीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच स्पष्ट है – बेहतर स्वास्थ्य सेवा पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है, चाहे वह राजधानी में रहता हो या प्रदेश के किसी सुदूर वनांचल में।

नवा रायपुर की मेडिसिटी से स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना आने वाले समय में प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

उन्होंने कहा कि मेडिसिटी में आधुनिक और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की व्यापक संभावनाएं होंगी। इससे प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश तथा रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के लगातार विस्तार से छत्तीसगढ़ की पहचान एक बड़े हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत हो रही है। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के बेहतर उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि दूसरे राज्यों के लोग गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए छत्तीसगढ़ आएं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक संस्थानों की स्थापना प्रदेश में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के निरंतर विस्तार का परिचायक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सेवा, संवेदनशीलता और गुणवत्ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए मरीजों के हित में कार्य करने का आह्वान किया।

स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन और रोजगार का भी हो रहा विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। 
उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों का विस्तार छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार हो और युवाओं को अपने प्रदेश में ही बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचे और हर परिवार को आवश्यकता के समय बेहतर उपचार का भरोसा मिले।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य सुखी और समृद्ध जीवन का आधार है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रथमेश हॉस्पिटल जैसी आधुनिक चिकित्सा संस्थाओं के प्रारंभ होने से प्रदेशवासियों को बेहतर उपचार की सुविधा मिलेगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने के साथ निजी क्षेत्र में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। प्रथमेश हॉस्पिटल के शुभारंभ से प्रदेश की जनता को सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को सेवा और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री मोतीलाल साहू, प्रथमेश हॉस्पिटल ग्रुप के डॉ. राजीव साहू, डॉ. सारिका साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई

गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का मिलेगा बेहतर प्रतिफल- सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप

गन्ना बोनस की गणना का आधार रूपए 355 से बढ़ाकर रूपए 425 प्रति क्विंटल किया गया

रायपुर– छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को नवरात्रि से पहले बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गन्ना बोनस की गणना का आधार रूपए 355 से बढ़ाकर रूपए 425 प्रति क्विंटल कर दिया है। इस निर्णय से पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ना आपूर्ति करने वाले 31,022 किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रूपए की बोनस राशि प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस अवसर पर प्रदेश के गन्ना किसानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सहकारिता मंत्री  कश्यप ने कहा कि गन्ना बोनस में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बोनस की बढ़ी हुई राशि से किसानों को खेती की लागत वहन करने और आगामी फसल की बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी। यह निर्णय प्रदेश में गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा।

पेराई सत्र 2025-26 के लिए बोनस गणना में एफआरपी रूपए 329.05 प्रति क्विंटल का आधार लिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार रूपए 425 में से एफआरपी घटाने पर किसानों को रूपए 95.95 प्रति क्विंटल की दर से बोनस मिलेगा। 

इस निर्णय के तहत भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा के 14,961 किसानों को लगभग 24.55 करोड़ रूपए तथा सरदार पटेल सहकारी शक्कर कारखाना, पंडरिया के 8,049 किसानों को लगभग 11.68 करोड़ रूपए की बोनस राशि मिलेगी। इसी प्रकार महामाया सहकारी शक्कर कारखाना, केरता के 7,250 किसानों को लगभग 11.35 करोड़ रूपए और दंतेश्वरी मैया सहकारी शक्कर कारखाना, बालोद के 762 किसानों को लगभग 3.52 करोड़ रूपए का बोनस प्राप्त होगा।

महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी ही नहीं, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में नेतृत्वकर्ता बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री  साय

शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का किया सम्मान

महतारी वंदन योजना से 68 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक संबल, 32 किस्तों में 20700 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता

लक्ष्य से आगे बढ़कर 14 लाख ग्रामीण महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही मातृशक्ति

बस्तर में नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर शुरू, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता

रायपुर-मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है और महिला सशक्तिकरण विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का मजबूत आधार है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारा लक्ष्य महिलाओं को केवल शासकीय योजनाओं का लाभार्थी बनाना नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना है।

मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर में हिंदी खबर द्वारा आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं का सम्मान किया और उनसे संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। नवरात्रि मातृशक्ति की आराधना का महापर्व है। हमारी परंपरा में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

*मां के संघर्ष और संस्कारों ने सिखाया सेवा और संवेदनशीलता का महत्व*

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी माता को अनेक कठिनाइयों के बीच परिवार को संभालते और खेती-बाड़ी करते हुए देखा। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां के संघर्ष, सेवाभाव, सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और परिवार के प्रति समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया। जनसेवा और जरूरतमंद के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार और विशेष रूप से अपनी माता से मिली। आज मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व निभाते हुए भी वे उन्हीं संस्कारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

*महतारी वंदन ने बढ़ाया महिलाओं का आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में 20 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता की योजना नहीं है। इस राशि ने महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता देने के साथ परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि योजना की पात्र कोई भी महिला इसके लाभ से वंचित न रहे। तकनीकी कारणों, दस्तावेजों, आधार अथवा बैंक खाते से जुड़ी त्रुटियों के कारण जिन पात्र महिलाओं को लाभ नहीं मिल पाया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण कर आवश्यक समाधान किया जा रहा है।

*लक्ष्य से लगभग दोगुनी उपलब्धि, 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी*

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 14 लाख ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रदेश की 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु वनोपज, डेयरी, मशरूम उत्पादन, मिलेट प्रसंस्करण, सिलाई और रेडीमेड वस्त्र निर्माण सहित विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं केवल स्वरोजगार से न जुड़ें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर दूसरे लोगों को भी रोजगार देने की स्थिति में आएं।

*481 महतारी सदन बनेंगे महिला समूहों की गतिविधियों के केंद्र*

मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र बालिकाओं के 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर डेढ़ लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है।

*बस्तर में लौटी शिक्षा की रोशनी, नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल फिर खुले*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी बेटी के सपनों की राह में दूरी, गरीबी या असुरक्षा बाधा न बने, इसके लिए सरकार शिक्षा के अवसरों का लगातार विस्तार कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावासों, आश्रमों, आवासीय विद्यालयों और प्रयास संस्थानों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि बस्तर में लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण अनेक गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और स्कूल बंद हो गए थे। शांति और विश्वास की स्थापना के साथ राज्य सरकार ने ऐसे 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया है। वर्षों बाद इन स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई की आवाज लौटना बदलते बस्तर की सबसे सुखद तस्वीरों में से एक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों के बच्चों, विशेषकर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने परिवार और गांव से बहुत दूर न जाना पड़े।

*स्वस्थ महिला से स्वस्थ परिवार और स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला और बाल स्वास्थ्य को राज्य सरकार ने अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। गर्भवती महिलाओं, माताओं, किशोरियों और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की बेहतर व्यवस्था के लिए आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों के पोषण और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 6.21 लाख वय-वंदना कार्ड जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। आर्थिक स्थिति अथवा गांव की दूरी किसी महिला के उपचार में बाधा न बने, इसी सोच के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

*आईटी, एआई और आधुनिक उद्योगों में महिलाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को देखते हुए महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ भविष्य की तकनीकों और आधुनिक उद्योगों से जोड़ना भी आवश्यक है।राज्य की नई औद्योगिक नीति में महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर सरकार का विशेष जोर है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं है। निर्णय लेने और नेतृत्व करने में महिलाओं की बराबर भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। पंचायतों और स्थानीय निकायों से लेकर प्रशासन और उद्यमिता तक महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलने चाहिए। प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला कलेक्टर प्रशासन का नेतृत्व कर रही हैं, जो बदलते और सशक्त छत्तीसगढ़ की प्रेरणादायक तस्वीर है।

*छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में बढ़ा रही प्रदेश का गौरव*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। राज्य सरकार का संकल्प है कि संसाधनों, प्रशिक्षण अथवा आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाली ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी पद पर पदोन्नति के साथ 30 लाख रुपए की सम्मान राशि प्रदान की गई है। कोरबा जिले की संजू देवी रावत ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने उन्हें 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।
छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। उन्होंने रायपुर की आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों से ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर मिल रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

*बेटियां बड़े सपने देखें, सरकार अवसर उपलब्ध कराने के लिए उनके साथ है*

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के युवाओं और बेटियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज का छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरा प्रदेश है। युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर शिक्षा के साथ कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी, उभरते उद्योगों, कृषि आधारित व्यवसायों, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वनोपज, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं बन रही हैं। सरकार युवाओं और महिलाओं को इन नए अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास और प्रशिक्षण की व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है।

*मातृशक्ति की भागीदारी से बनेगा विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़*

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक शक्ति यहां की माताएं, बहनें और बेटियां हैं। नवरात्रि का पर्व हमें शक्ति की आराधना के साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों का सहारा बनने की प्रेरणा भी देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, किसान और युवा को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के साथ निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाकर ही विकसित एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी माताएं-बहनें आत्मनिर्भर होंगी, हमारी बेटियां शिक्षित और सक्षम होंगी तथा प्रदेश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी, तभी ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का संकल्प अपनी पूर्णता को प्राप्त करेगा।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, हिंदी खबर की ब्यूरो हेड सुश्री निशा द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।

पति के निधन के बाद चार बेटियों का भविष्य संवारने का उठाया बीड़ा, सक्षम योजना से आत्मनिर्भर बनीं इंदु लता

  एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन

रायपुर। पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और उनके बेहतर भविष्य की चिंता। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक मां के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी। यह प्रेरक कहानी सरगुजा जिले की इंदु लता गुप्ता की है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है और दो अन्य बेटियां भी अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखे हुए हैं। इंदु लता की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, साहस और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सक्षम योजना से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आजीविका का साधन बनने के साथ बेटियों की उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ है।

पति के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, बेटियों की पढ़ाई जारी रखना था सबसे बड़ा संकल्प
इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार बेटियों की परवरिश और घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। नियमित आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन परिस्थितियों में उन्हें सबसे अधिक चिंता बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य की होती थी। वे चाहती थीं कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए। इसके लिए उन्होंने स्वयं कुछ काम शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आजीविका चलाने के साथ बेटियों की शिक्षा का खर्च भी उठा सकें। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने की जानकारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई।

एक लाख के ऋण से खरीदीं दो भैंसें, डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक स्थिति
इंदु लता गुप्ता ने सक्षम योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी बचत के पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाया और मेहनत के साथ डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनकी दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की पढ़ाई में सहायक बन रही है। इंदु लता बताती हैं कि पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी व्यवसाय से आय का साधन उपलब्ध होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। इससे उन्हें बेटियों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।

मां की मेहनत लाई रंग, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी इंजीनियरिंग की कर रही पढ़ाई
इंदु लता गुप्ता के जीवन की सबसे बड़ी खुशी उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। डेयरी व्यवसाय से आर्थिक संबल मिलने के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। एक समय बेटियों की पढ़ाई का खर्च जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। आज उन्हीं बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करते देखकर इंदु लता को अपनी मेहनत सफल होती दिखाई देती है। वे बताती हैं कि बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाना उनका सबसे बड़ा सपना है। वे चाहती हैं कि उनकी चारों बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें और अपने जीवन में आगे बढ़ें। इंदु लता का संघर्ष यह दर्शाता है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद दृढ़ संकल्प और स्वरोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार के भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं।

सक्षम योजना ने दिया आर्थिक संबल, आत्मविश्वास के साथ संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारी

इंदु लता गुप्ता के अनुसार, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का माध्यम बनी है। योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने से व्यवसाय शुरू करने में सुविधा हुई। दूध उत्पादन से प्राप्त आय के कारण अब वे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ बेटियों की शिक्षा में भी आर्थिक योगदान दे पा रही हैं। उनका कहना है कि पहले परिवार के भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब स्वयं का व्यवसाय होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। वे अपनी मेहनत से परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं और बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।

बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना ही इंदु लता के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य

इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद जीवन में कठिन परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने बेटियों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। उनका मानना है कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना उनके बेहतर भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इसी सोच के साथ उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और उससे मिलने वाली आय का उपयोग परिवार की जरूरतों तथा बेटियों की पढ़ाई में किया। आज एक बेटी का मेडिकल कॉलेज और दूसरी का इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। शेष दो बेटियों की शिक्षा को भी वे इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ा रही हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
इंदु लता गुप्ता ने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले आर्थिक सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया। डेयरी व्यवसाय से प्राप्त आय के कारण वे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों की पढ़ाई का खर्च भी उठा पा रही हैं। इंदु लता का कहना है कि ऐसी योजनाएं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
एक मां का संघर्ष, चार बेटियों के सपनों को मिला संबल

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत इंदु लता गुप्ता की कहानी महिला आत्मनिर्भरता और बेटियों की शिक्षा का प्रेरक उदाहरण है। पति के निधन के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उनके लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने की राह खोली। दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध उत्पादन के माध्यम से उन्होंने परिवार की आजीविका को मजबूत बनाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में और दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां भी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। इंदु लता की सफलता बताती है कि स्वरोजगार के लिए मिला आर्थिक सहयोग केवल एक महिला को आत्मनिर्भर नहीं बनाता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संवारने का माध्यम भी बन सकता है। एक मां की मेहनत, संघर्ष और बेटियों को शिक्षित बनाने के संकल्प ने इस कहानी को विशेष बना दिया है।

महतारी वंदन योजना से सरिता के हुनर को मिला सहारा, सिलाई से परिवार की आजीविका में दे रहीं योगदान

  हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से खरीद रहीं धागा और सिलाई सामग्री, घर बैठे स्वरोजगार को मिली मजबूती

 पति की मजदूरी और अपनी सिलाई से संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारियां, तीन बच्चों के पालन-पोषण में मिल रही मदद

रायपुर। सिलाई का हुनर तो पहले से था, लेकिन काम को लगातार जारी रखने के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में आर्थिक परेशानियां आती थीं। अब महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने सरगुजा जिले की सरिता तिग्गा के इस हुनर को आजीविका का मजबूत सहारा बना दिया है। वे योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं और घर बैठे सिलाई का काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे रही हैं। पति की मजदूरी से होने वाली आय के साथ उनकी मेहनत से अर्जित अतिरिक्त आमदनी तीन बच्चों के पालन-पोषण और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्रा कला निवासी सरिता तिग्गा की यह कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली छोटी आर्थिक सहायता भी महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को उन्होंने अपने हुनर और स्वरोजगार से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

पति करते हैं मजदूरी, सरिता ने सिलाई को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया

सरिता तिग्गा बताती हैं कि उनके पति  सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनकी परवरिश, पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की जिम्मेदारी दोनों मिलकर निभाते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सरिता ने अपने सिलाई के हुनर को परिवार की आजीविका से जोडऩे का निर्णय लिया। वे घर पर ही सिलाई का काम करती हैं, जिससे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने का अवसर मिलता है। उनका कहना है कि पति की मजदूरी से घर का खर्च चलता है, जबकि सिलाई से मिलने वाली आय परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती है। इस तरह वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की सहभागी बन रही हैं।महतारी वंदन के एक हजार रुपये से खरीदती हैं धागा और सिलाई सामग्री
सरिता के लिए महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि विशेष महत्व रखती है। वे इस राशि का उपयोग सिलाई के लिए धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं। सरिता बताती हैं कि सिलाई का काम नियमित रूप से जारी रखने के लिए समय-समय पर सामग्री की आवश्यकता होती है। पहले सीमित पारिवारिक आय के बीच इन जरूरतों के लिए पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल होता था। अब योजना से मिलने वाली राशि के कारण सिलाई सामग्री खरीदने में सुविधा हो रही है। इस सहायता से वे अपने काम को लगातार जारी रख पा रही हैं। सिलाई से प्राप्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। सरिता का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग छोटे स्वरोजगार को बनाए रखने और आगे बढ़ाने में भी किया जा सकता है।
घर की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार, तीन बच्चों की परवरिश में मिल रहा सहयोग
तीन बच्चों की देखभाल और घरेलू कामकाज के बीच सरिता घर पर ही सिलाई करती हैं। इससे उन्हें परिवार के साथ रहते हुए अपनी मेहनत से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। उनका कहना है कि घर से सिलाई का काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आमदनी में भी योगदान दे पाती हैं। पति की मजदूरी और स्वयं के सिलाई कार्य से प्राप्त आय के सहारे परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि उनके इस प्रयास को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
छोटी आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास, हुनर बना आजीविका का सहारा
सरिता तिग्गा के लिए सिलाई केवल घरेलू काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे का माध्यम है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपने हुनर का उपयोग कर आय अर्जित करने में सहयोग दिया है। वे बताती हैं कि हर महीने सहायता राशि मिलने से सिलाई सामग्री की व्यवस्था करना आसान हुआ है। इससे उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए परिवार की सीमित आय पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। सरिता का प्रयास यह भी दर्शाता है कि महिलाओं के पास उपलब्ध कौशल को आर्थिक सहयोग मिलने पर वह परिवार की आजीविका का उपयोगी साधन बन सकता है।
महतारी वंदन की राशि से सिलाई का सामान खरीदती हूं, परिवार को भी मिल रही मदद 
सरिता तिग्गा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से उन्हें हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। इस राशि से वे सिलाई के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदती हैं। उनका कहना है कि इससे सिलाई का काम जारी रखने में सुविधा होती है और वे घर पर काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। सरिता के अनुसार, योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में भी सहयोग मिल रहा है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
महतारी वंदन योजना से मिल रहे लाभ पर खुशी व्यक्त करते हुए सरिता तिग्गा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है। इस सहायता से वे अपने सिलाई कार्य के लिए आवश्यक सामग्री खरीद पा रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।
महतारी वंदन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, सरिता की कहानी बनी प्रेरणा
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत सरिता तिग्गा की कहानी महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का उदाहरण है। सीमित आय वाले परिवार में तीन बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने सिलाई के हुनर को अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक सहायता राशि का उपयोग वे सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं। इससे उनका काम जारी रखने में मदद मिल रही है और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग मिल रहा है।