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Tuesday, October 27, 2026
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🛰️ राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर शासकीय पीजी महाविद्यालय बेमेतरा में इसरो वैज्ञानिकों का आगमन, छात्रों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ी रुचि

बेमेतरा, छत्तीसगढ़ |जनचौपाल36.कॉम

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर शासकीय पंडित जवाहरलाल नेहरू कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बेमेतरा में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने महाविद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ अपने ज्ञान और अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बेमेतरा विधायक माननीय श्री दीपेश साहू जी रहे। इस अवसर पर इसरो टेक्नोलॉजी के प्रमुख वैज्ञानिकडॉ. आनंद अरुण, डॉ. जुगल किशोर मनी (वैज्ञानिक SF), श्री अरुण एस. सूर्यवंशी (वैज्ञानिक E), श्री पी. कपीश्वर (वैज्ञानिक E1), डॉ. अमित दुबे (वैज्ञानिक D), श्री अखिलेश त्रिपाठी (वैज्ञानिक D) सहित इसरो की विशिष्ट टीम उपस्थित रही।
🌕 चंद्रयान से लेकर गूगल मैप तक की जानकारी
इसरो टीम ने विद्यार्थियों को भारत के अंतरिक्ष अभियानों की महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। रॉकेट लॉन्चर, मिसाइल टेक्नोलॉजी, चंद्रयान मिशन, सैटेलाइट मैपिंग (गूगल मैप) और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम में न सिर्फ महाविद्यालय के छात्र-छात्राएँ शामिल हुए, बल्कि जिले के विभिन्न विद्यालयों से भी विद्यार्थियों की उत्साहजनक भागीदारी रही।
🎨 रंगोली व पोस्टर प्रतियोगिता में छात्रों की रचनात्मक प्रतिभा
इस अवसर पर रंगोली एवं पोस्टर प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान, ग्रह-नक्षत्रों और भारतीय अंतरिक्ष मिशनों पर आधारित विषयों पर रचनात्मक प्रस्तुतियाँ दीं। विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो इसरो के वैज्ञानिकों के हाथों प्रदान कर सम्मानित किया गया।
🏫 संगठन और सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. वीणा त्रिपाठी की नेतृत्व भूमिका सराहनीय रही। साथ ही श्री डी.आर. साहू, डॉ. डी.डी. द्विवेदी, डॉ. संध्या बघेल, श्री जितेंद्र बारले, श्री दुर्गा प्रसाद जंघेल, सुश्री श्वेता साहू, श्री बी.आर. साहू, डॉ. राजकुमार त्रिपाठी, श्रीमती ज्योति गेंद्रे, डॉ. पायल गोस्वामी, श्री अविनाश अगलावे, श्री आशुतोष शुक्ला तथा समस्त शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्टाफ का विशेष योगदान रहा।
🌟 एक प्रेरणादायी अनुभव
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जटिलताओं को समझने और उसमें करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि भारत का युवा वर्ग अब अंतरिक्ष में नए आयाम गढ़ने को तैयार है।
✍️ रिपोर्ट: जनचौपाल36 न्यूज डेस्क, बेमेतरा
📷 फोटो/वीडियो स्रोत: महाविद्यालय मीडिया प्रकोष्ठ / प्रतिभागी छात्र।

छत्तीसगढ़ में दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सौगात: पहली बार स्पेशल एजुकेटर्स की सीधी भर्ती

रायपुर, 29 जुलाई 2025:(छग जनसंपर्क)
छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांग विद्यार्थियों के शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में पहली बार स्पेशल एजुकेटर्स (विशेष शिक्षकों) की सीधी भर्ती की जाएगी। यह निर्णय शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता को बढ़ावा देने और विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
100 पदों पर होगी नियुक्ति
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, राज्य के विभिन्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के लिए कुल 100 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इन पदों में सभी स्तरों के लिए उपयुक्त संख्या में रिक्तियां आरक्षित की गई हैं।
पात्रता के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता
इन पदों पर आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों के पास पुनर्वास परिषद् (RCI) से मान्यता प्राप्त संस्थान से बी.एड. या डी.एड. (स्पेशल एजुकेशन) की डिग्री होना अनिवार्य है। साथ ही, उम्मीदवार का RCI में पंजीकृत होना भी आवश्यक है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित शिक्षक दिव्यांग विद्यार्थियों की विशिष्ट शैक्षणिक आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से समझ और संबोधित कर सकें।
जल्द जारी होगा विस्तृत दिशा-निर्देश
भर्ती से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश, पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा की जानकारी जल्द ही विभाग की अधिकृत वेबसाइट eduportal.cg.nic.in पर प्रकाशित की जाएगी।
शिक्षा विभाग की पहल की सराहना
राज्य सरकार के इस फैसले की शिक्षाविदों और दिव्यांग अधिकार संगठनों ने सराहना की है। यह पहल न केवल दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायक होगी, बल्कि विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं को भी रोजगार का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी।
जनचौपाल-36 विशेष टिप्पणी:
छत्तीसगढ़ जैसे उभरते राज्य में यह कदम एक सामाजिक रूपांतरण का संकेत है, जहां शिक्षा को सिर्फ समानता नहीं, संवेदनशीलता के साथ न्याय भी मिल रहा है। अब देखना यह है कि यह नीति ज़मीन पर किस तरह से प्रभावशाली साबित होती है।
📝 यह खबर जनचौपाल-36 द्वारा प्रमाणित स्रोतों के आधार पर प्रकाशित की गई है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर अवश्य जाएं।

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में साकेतवा बांध में दरारें: प्रशासन अलर्ट मोड में, 2000 लोगों पर मंडरा रहा खतरा

बलरामपुर, 29 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सकेतवा बांध में दरारें पड़ गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 25 से अधिक घरों को खाली करवा लिया है और पुलिस व एसडीआरएफ की टीम मौके पर तैनात है।
पानी लबालब, दबाव बढ़ा — दरारें पड़ीं
बलरामपुर-रामानुजगंज जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित साकेतवा बांध में बीते दो दिनों की भारी बारिश के चलते पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है। बांध में दबाव बढ़ने के कारण कई स्थानों पर मिट्टी धंसने और दरारें आने की पुष्टि हुई है।
रातभर चला राहत कार्य
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन, जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन दल सक्रिय हो गए हैं। जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, भाजपा युवा मोर्चा के वरिष्ठ नेता अंश सिंह, एसडीएम आनंद निगम समेत पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने मौके पर पहुंचकर देर रात तक वैकल्पिक नहर बनाकर पानी निकासी का कार्य किया। अधिकारियों के अनुसार, “आउटलेट तैयार किया जा रहा है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है।”
खतरे में चार गांव, 2000 लोग प्रभावित हो सकते हैं
सकेतवा बांध, जो चनान नदी के उद्गम स्थल पर स्थित है, बलरामपुर जिले की एक अहम जल संरचना है। यह बांध आसपास के जमुआटांड, खड़ियाडामर, बुद्धडीह और डूमरखोरका गांवों के बेहद करीब है। यदि बांध टूटता है, तो इन गांवों के लगभग 2000 निवासी सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
जल संसाधन विभाग सतर्क, स्थिति पर नजर
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि, “बांध में पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ने से दरारें आई हैं। यदि बारिश नहीं थमी, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।” विभाग और प्रशासन लगातार बांध की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और हरसंभव वैकल्पिक उपाय किए जा रहे हैं।
जनचौपाल-36 विशेष टिप्पणी:
सकेतवा बांध की स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि जल संरचनाओं की नियमित निगरानी और मजबूत रख-रखाव कितना जरूरी है। प्रशासन की तत्परता सराहनीय है, लेकिन आने वाले समय में ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान और जलवायु जोखिम प्रबंधन नीति भी उतनी ही आवश्यक है।

भक्ति, परंपरा और गौरव का संगम: मुख्यमंत्री ने हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर किया कांवड़ियों का स्वागत

भोरमदेव (कवर्धा)/रायपुर, 28 जुलाई 2025।
सावन मास के तीसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ की धरती श्रद्धा और शिवभक्ति से सराबोर हो गई, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भोरमदेव मंदिर में हजारों कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। “हर-हर महादेव” के जयघोष से मंदिर परिसर गूंज उठा।

इस ऐतिहासिक और भावनात्मक दृश्य के साक्षी बने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और श्री अरुण साव, जो इस शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे।

भक्ति और प्रशासन का अभूतपूर्व संगम

पुष्पवर्षा के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं बाबा भोरमदेव मंदिर में पहुंचकर विशेष पूजा, मंत्रोच्चार और रुद्राभिषेक किया तथा प्रदेशवासियों की समृद्धि, सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कांवड़ियों और श्रद्धालुओं से आत्मीय संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा—

“श्रावण मास के इस पावन सोमवार को बाबा भोरमदेव की धरती पर भक्तों के साथ होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और आस्था की अद्वितीय मिसाल है।”

इस मौके पर उन्होंने 151 किमी पदयात्रा कर भोरमदेव पहुंचने वाली पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा का भगवा वस्त्र व श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना स्वीकृत की गई है। यह परियोजना मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुवा, सरोदा जलाशय तक के समग्र धार्मिक क्षेत्र का कायाकल्प करेगी।

इसके साथ ही अनूपपुर (म.प्र.) में 5 एकड़ भूमि पर श्रद्धालु भवन के निर्माण की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे अमरकंटक यात्रा और अधिक सुविधाजनक होगी।

पौराणिक परंपरा और ऐतिहासिक महत्व

11वीं शताब्दी का भोरमदेव मंदिर, कवर्धा से 18 किमी दूर चौरा ग्राम में स्थित है, जिसे छत्तीसगढ़ का “खजुराहो” भी कहा जाता है। श्रावण मास में यहां कबीरधाम, बेमेतरा, खैरागढ़, मुंगेली, राजनांदगांव समेत मध्यप्रदेश के अमरकंटक से हजारों कांवड़िए पदयात्रा कर जलाभिषेक हेतु पहुंचते हैं।

“बोल बम”, भजनों और शिव नाम संकीर्तन के बीच श्रद्धालु 150 किलोमीटर की यात्रा तय कर भोरमदेव, डोंगरिया के बूढ़ा महादेव और जलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते हैं।


जनचौपाल 36 विशेष

सावन की महिमा, शिव की भक्ति और शासन की संकल्पशक्ति—भोरमदेव में एक साथ सजीव हुईं।


विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर जागरूकता रथ रवाना: “Hepatitis: Let’s Break It Down” थीम पर जनजागरूकता अभियान शुरू

(Janchoupal 36)
बेमेतरा, 28 जुलाई 2025

विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बेमेतरा जिले में सोमवार को जन-जागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस वर्ष की थीम “Hepatitis: Let’s Break It Down” को ध्यान में रखते हुए यह रथ आम जनता को हेपेटाइटिस के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जागरूक करेगा।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृतलाल रोहलेडर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार बसोड़, जिला नोडल अधिकारी डॉ. बी. एल. राज एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री लता बंजारे उपस्थित रहे।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों से निम्न बातों का पालन करने की अपील की गई:
🔸 व्यक्तिगत वस्तुएं साझा न करें।
🔸 रेज़र व इंजेक्शन केवल एक बार उपयोग करें।
🔸 असुरक्षित यौन संबंध व संक्रमित रक्त/इंजेक्शन से बचें।
🔸 गर्भवती महिलाएं नि:शुल्क हेपेटाइटिस जांच कराएं व प्रसव अस्पताल में कराएं।
🔸 नवजात को 24 घंटे के भीतर टीका जरूर लगवाएं।
🔸 0-1 वर्ष के बच्चों को हेपेटाइटिस बी का टीका अवश्य दिलाएं।
🔸 दूषित भोजन व पानी से बचें, उबालकर व छानकर पानी पिएं।
🔸 टैटू/गोदना आदि करवाते समय नई सुई का ही उपयोग करें।
🔸 हेपेटाइटिस जांच, इलाज व टीकाकरण सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध है।

जनचौपाल 36 की अपील है कि हर नागरिक इस जागरूकता में सहभागी बने और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के विरुद्ध लड़ाई में सहयोग करें।

रायपुर का नाम कभी हाटकपुर रहा इसलिए हाटकेश्वर शिव जी खारुन तट पर स्थित हैं

सोमवार विशेष:_JANCHOUPAL36.COM
रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी, न केवल आधुनिक विकास के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ऐतिहासिक नगर का नाम पहले
“कनकपुर”, “हाटकपुर” और “कंचनपुर” हुआ करता था। इन नामों से ही स्पष्ट है कि यह क्षेत्र कभी सोने (कनक/हाटक/कंचन) की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा होगा
प्राचीन इतिहास
“यहां खारून नदी के तट पर स्थित हाटकेश्वर महादेव का एक प्राचीन मंदिर भी है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का विकास कलचुरी वंश के शासनकाल में हुआ था, जो लगभग 500 से 600 वर्ष पूर्व का समय माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, संभवतः उसी समय इस क्षेत्र का नाम ‘हाटकपुर’ रहा होगा, जो बाद में ‘रायपुर’ के रूप में जाना गया। इस मंदिर से जुड़ी कुछ लोक कथाएँ और धार्मिक मान्यताएँ भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर त्रेता युग में लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित किया गया था। एक कथा के अनुसार, हनुमान जी ने शिवजी को अपने कंधे पर बिठाकर यहां लाया था और इसी स्थान पर उनकी स्थापना की गई थी।”
इतिहास में रायपुर
इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1402 ईस्वी में राजा ब्रह्मदेव राय ने इस शहर की पुनः स्थापना की और अपने नाम पर इसका नाम “रायपुर” रखा। राजा ब्रह्मदेव राय, रतनपुर के कलचुरी वंश के शक्तिशाली शासकों में से एक थे, और उनके कार्यकाल में इस क्षेत्र को नई दिशा और पहचान मिली।
आज रायपुर सिर्फ छत्तीसगढ़ की राजधानी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। लेकिन इस आधुनिक शहर की नींव एक ऐतिहासिक विरासत पर रखी गई थी, जिसे जानना और सहेजना हमारे लिए गर्व का विषय है।
धार्मिक महत्व छत्तीसगढ़ का काशी
“छत्तीसगढ़ न केवल अनेक नदियों का उद्गम स्थल है, बल्कि यहाँ कई महत्वपूर्ण संगम स्थल भी हैं। जैसे राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है, जिसे ‘त्रिवेणी संगम’ कहा जाता है। इसी कारण राजिम को ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ कहा जाता है। उसी प्रकार, रायपुर के निकट खारून नदी तट पर स्थित महादेव घाट में शिवजी की उपस्थिति के कारण इस स्थान को ‘छत्तीसगढ़ का काशी’ कहना उपयुक्त प्रतीत होता है,क्योंकि यहां अंतिम संस्कार के अलावा पूर्वजों का पिंडदान भी किया जाता है। यहाँ प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर एक भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसकी परंपरा आज भी निरंतर जारी है।”
कल्चुरी शासन काल में
राजा ब्रह्मदेव राय छत्तीसगढ़ के रतनपुर के कलचुरी वंश के एक प्रमुख शासक थे। वे 15वीं शताब्दी की शुरुआत में शासन करते थे और उन्हें रायपुर नगर की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। माना जाता है कि उन्होंने वर्ष 1402 ईस्वी में रायपुर को बसाया और अपने नाम से इसका नाम “रायपुर” रखा।
वे एक शक्तिशाली, दूरदर्शी और संगठनकर्ता राजा थे, जिन्होंने प्रशासनिक दृष्टि से रायपुर क्षेत्र को संगठित किया और इसे एक सशक्त नगर के रूप में विकसित किया। उनके समय में कला, संस्कृति और बुनियादी संरचना का भी विकास हुआ।
संक्षेप में, राजा ब्रह्मदेव राय रायपुर के संस्थापक माने जाते हैं और छत्तीसगढ़ के इतिहास में उनका स्थान गौरवपूर्ण है।

डिस्क्लेमर:यह लेख केवल सामान्य जानकारी एवं लोक मान्यताओं के आधार पर संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार की धार्मिक, ऐतिहासिक या सांस्कृतिक मान्यताओं पर विवाद खड़ा करना नहीं है। यदि कहीं कोई तथ्य किसी व्यक्ति या समुदाय की भावना को अनजाने में आहत करता हो, तो उसके लिए खेद प्रकट किया जाता है। यह सामग्री केवल जानकारी हेतु है।कृपया दावे प्रतिदावे से इसे दूर रखें।


30 हजार के इनामी आरोपी की गिरफ्तारी — बेमेतरा पुलिस की बड़ी सफलता

बेमेतरा, 26 जुलाई 2025:
बेमेतरा पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हत्या के गंभीर मामले में फरार चल रहे 30 हजार रुपये के इनामी आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। बिलासपुर सिटी कोतवाली की मदद से पकड़े गए आरोपी की गिरफ्तारी, नए आपराधिक कानून बीएनएसएस के अंतर्गत की गई है।

पुलिस चौकी संबलपुर अंतर्गत ग्राम सोनपुरी में 17 फरवरी को एक किशोरी की हत्या के मामले में नामजद आरोपी सोहन राजपूत (वर्मा), पिता रज्जू राजपूत, उम्र 30 वर्ष, फरार चल रहा था। पीड़ित अजय राजपूत द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, खेत से लौटते समय उनकी पुत्री लापता हो गई थी, जो बाद में पास के ही धान के खेत में मृत अवस्था में मिली।

इस संबंध में चौकी संबलपुर, थाना नवागढ़ में मर्ग क्रमांक 09/2025 धारा 194 बीएनएसएस के तहत प्रारंभिक मामला दर्ज किया गया था। जांच में हत्या की पुष्टि के बाद अपराध क्रमांक 40/2025, धारा 103 (1) बीएनएस के तहत आरोपी के विरुद्ध अपराध दर्ज हुआ। आरोपी की फरारी के बाद धारा 335 बीएनएसएस के तहत फरारी पंचनामा तैयार कर न्यायालय में चालान पेश किया गया था।

इनाम की राशि 5 हजार से बढ़ाकर 30 हजार

आरोपी की गिरफ्तारी में सफलता न मिलने पर एसएसपी बेमेतरा श्री रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) द्वारा ₹5,000 के इनाम की घोषणा की गई थी, जिसे बाद में पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज, श्री राम गोपाल गर्ग (आईपीएस) द्वारा ₹30,000 कर दिया गया।

गठित की गई विशेष टीम

आईजी श्री राम गोपाल गर्ग व एसएसपी श्री रामकृष्ण साहू के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती ज्योति सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में अनुविभागीय अधिकारी श्री मनोज तिर्की, श्री विनय कुमार, निरीक्षक श्री चंद्रदेव वर्मा, उप निरीक्षक श्री अलील चंद समेत पुलिस के कई अधिकारियों व कर्मचारियों को शामिल किया गया था।

गिरफ्तारी में सफलता का श्रेय सतत प्रयासों को

गिरफ्तारी हेतु लगातार प्रचार-प्रसार किया गया। इसी बीच आरोपी के बिलासपुर में देखे जाने की सूचना मिलने पर, संबंधित सूचनाकर्ता द्वारा बिलासपुर सिटी कोतवाली व संबलपुर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

सम्मानित होंगे अधिकारी व सूचनाकर्ता

इस उल्लेखनीय सफलता के लिए सूचनाकर्ता सहित बिलासपुर पुलिस व बेमेतरा टीम के अधिकारियों/कर्मचारियों को ₹30,000 की नगद राशि व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

कानून-व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता

एसएसपी श्री रामकृष्ण साहू ने पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि बेमेतरा पुलिस अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। यह कार्रवाई पुलिस की तत्परता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


जनचौपाल 36 विशेष रिपोर्ट

124वीं ‘मन की बात’: अतीत की गौरवगाथा और भविष्य की उड़ान का मंत्र

Janchoupal 36.com

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2025 मन की बात
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज आकाशवाणी और दूरदर्शन पर मन की बात कार्यक्रम के 124वें एपिसोड के माध्यम से देशवासियों से संवाद किया। इस बार उन्होंने विज्ञान, विरासत, स्वदेशी, स्वच्छता और सद्भाव जैसे विविध विषयों पर विचार रखते हुए राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी को आवश्यक बताया।
स्पेस से देश का मान बढ़ा: बच्चों का भविष्य अंतरिक्ष में
प्रधानमंत्री ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि “चंद्रयान-3 की सफलता के बाद से देश के बच्चों में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति नई जिज्ञासा जगी है। अब बच्चे कहते हैं – ‘हम भी चांद पर जाएंगे, हम भी स्पेस साइंटिस्ट बनेंगे।’”
उन्होंने अंतरिक्ष यात्री सुधांशु शुक्ला की सफल वापसी को देश के लिए गौरव का क्षण बताया और याद दिलाया कि 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
अतीत से जुड़ो, गौरव को जानो: किलों में छिपा है भारत का इतिहास
श्री मोदी ने यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त 12 मराठा किलों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, “हर किला भारत की आत्मा का प्रतीक है — शिवनेरी, प्रतापगढ़, विजयदुर्ग, खंडेरी जैसे किले छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस और दूरदर्शिता के जीवंत उदाहरण हैं।”
उन्होंने राजस्थान के चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, आमेर, कुंभलगढ़ जैसे दुर्गों को भारतीय संस्कृति का स्तंभ बताते हुए कहा कि “ये किले सिर्फ पत्थर नहीं, हमारे संस्कार और स्वाभिमान की कहानी कहते हैं।”
उत्तर प्रदेश के कालिंजर किले से लेकर मध्यप्रदेश के ग्वालियर, झांसी और बुंदेलखंड के किलों तक — प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इन स्थलों की यात्रा कर इतिहास से जुड़ें।
देशभक्ति के अमर प्रतीक: खुदीराम बोस को नमन
पीएम मोदी ने 11 अगस्त 1908 के दिन को याद करते हुए स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस की शहादत को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “18 वर्ष की उम्र में फांसी के फंदे पर मुस्कुराना वही कर सकता है, जिसकी आत्मा देश के लिए समर्पित हो।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अगस्त माह में तिलक पुण्यतिथि (1 अगस्त), भारत छोड़ो आंदोलन (8 अगस्त) और स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) जैसे ऐतिहासिक पड़ाव आते हैं। साथ ही, 7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को स्वदेशी आंदोलन की स्मृति से जोड़ा।
खादी और हैंडलूम: आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि “स्वदेशी केवल नारा नहीं, आत्मनिर्भरता का मंत्र है। खादी का कपड़ा सिर्फ वस्त्र नहीं, भारत की सांस्कृतिक चेतना है।”
उन्होंने हैंडलूम सेक्टर को देश की ताकत बताते हुए कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र में नए आयाम भारत को ग्लोबल लीडर बना सकते हैं। इस साल राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस की 10वीं वर्षगांठ विशेष रूप से मनाई जाएगी।
खेल: शरीर और मन का संतुलन
“खेल जीवन का सर्वोत्तम फल है,” श्री मोदी ने खेलों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना की — जैसे इंटरनेशनल केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स ओलंपियाड में जीते गए पदक।
उन्होंने बताया कि अगले माह मुंबई में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स ओलंपियाड का आयोजन होगा, जिसमें 60 से अधिक देश भाग लेंगे — यह भारत में अब तक का सबसे बड़ा साइंस ओलंपियाड होगा।
स्वच्छता और सेवा: आधुनिक भारत की मूल भावना
प्रधानमंत्री ने फिर दोहराया कि स्वच्छता सिर्फ एक अभियान नहीं, जीवन जीने की शैली होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस और फायर डिपार्टमेंट्स की सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा, “भारत की छवि अब एक कर्मठ, अनुशासित और सेवाभावी राष्ट्र की है। इसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
हिंसा छोड़ो, सौहार्द अपनाओ
मोदी जी ने आज के संदर्भ में विशेष संदेश देते हुए कहा कि “जीवन को सुंदर और विशाल बनाना है तो हिंसा का परित्याग करना होगा। शांतिपूर्ण समाज ही समृद्ध राष्ट्र का आधार है।”
📻 ‘मन की बात’ का यह 124वां एपिसोड इतिहास, विज्ञान और संस्कृति के बीच एक सेतु बनाते हुए आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और गौरवशाली भारत का सपना साकार करने का आह्वान है।

तमिलनाडु को 4800 करोड़ की सौगात: थूथुकुडी से विकास की नई उड़ान, पीएम मोदी ने गिनाई विरासत और भविष्य की दिशा

थूथुकुडी (तमिलनाडु), 27 जुलाई। स्त्रोत (PIB)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को तमिलनाडु के ऐतिहासिक तटीय शहर थूथुकुडी में 4800 करोड़ रुपये से अधिक की बहु-क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए राज्य की आर्थिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया। इन परियोजनाओं में हवाई अड्डा, बंदरगाह, राजमार्ग, रेलवे और हरित ऊर्जा से जुड़ी अनेक योजनाएँ शामिल हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने कारगिल विजय दिवस की स्मृति में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा,
“जब हम विकास की बात करते हैं, तो हमें उन रणबांकुरों को नहीं भूलना चाहिए, जिनकी वीरता के कारण ही आज भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ राष्ट्र है।”

प्रधानमंत्री ने ₹450 करोड़ की लागत से बने नए एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया, जिसकी सालाना यात्री क्षमता अब 3 लाख से बढ़कर 20 लाख हो गई है। इसके साथ ही उन्होंने थूथुकुडी पोर्ट, रेलवे लाइनें, और नेशनल हाईवे के विस्तार से जुड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।
पीएम मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ में तमिलनाडु की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि राज्य इंडिया-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के संदर्भ में MSMEs और युवाओं के लिए रोजगार और अवसरों का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा,
“पिछले 11 वर्षों में हमने इन्फ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में जो निवेश किया है, वह तमिलनाडु के प्रति हमारी प्राथमिकता का प्रमाण है।”

विरासत की बात, आत्मनिर्भर भारत की राह

पीएम मोदी ने थूथुकुडी की ऐतिहासिक पहचान पर प्रकाश डालते हुए वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई और सुब्रमण्यम भारती जैसे स्वाधीनता सेनानियों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यही वह धरती है जहां स्वदेशी जहाज निर्माण के ज़रिए औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी गई थी।
उन्होंने थूथुकुडी के विश्व प्रसिद्ध मोती उद्योग का ज़िक्र करते हुए बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष बिल गेट्स को थूथुकुडी के मोती उपहारस्वरूप दिए थे, जिन्हें उन्होंने बहुत पसंद किया। यह टिप्पणी ना सिर्फ स्थानीय गौरव को उजागर करती है, बल्कि वैश्विक पहचान की ओर इशारा भी करती है।
चुनावी पृष्ठभूमि में खास मायने
राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव संभावित हैं और ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा विकास और राजनीति के संगम के रूप में देखी जा रही है। तमिलनाडु में भाजपा की पकड़ बढ़ाने के प्रयासों के बीच यह दौरा जनसंवाद और जनविश्वास निर्माण की एक बड़ी रणनीति माना जा रहा है।


कारगिल विजय दिवस पर साजा कृषि महाविद्यालय में भावनात्मक श्रद्धांजलि और देशभक्ति कार्यक्रम

साजा/बेमेतरा 26 जुलाई 2025।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कुमारी देवी चौबे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, साजा में वीरता, समर्पण और देशभक्ति का भावपूर्ण आयोजन हुआ। राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर भारतीय सैनिकों के शौर्य को स्मरण किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की शुरुआत भाषण प्रतियोगिता से हुई जिसमें विद्यार्थियों ने ‘अगर मौत भी आई तो हँसकर गले लगाएंगे’ और ‘कारगिल के वीर – राष्ट्र की शान’ जैसे ओजस्वी विषयों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के पराक्रम को शब्दों में पिरोकर सभी को भावुक कर दिया।
डॉ. गोविन्द प्रसाद कन्नौजे ने कहा,
“कारगिल विजय दिवस, भारतीय सेना के अद्भुत साहस और बलिदान का प्रतीक है। यह दिन हमें बताता है कि देश की रक्षा हेतु हमारे जवान कैसे दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में दुश्मन से लड़े और विजय प्राप्त की।”
वहीं डॉ. राजेश कुमार इक्का ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह विजय केवल युद्ध की नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय एकता, दृढ़ संकल्प और अखंडता की जीत है।
इसके बाद आयोजित रंगोली प्रतियोगिता में छात्राओं ने तिरंगा, हिमालय की चोटियाँ, कारगिल रणभूमि और भारतीय सेना के अदम्य साहस को रंगों के माध्यम से जीवंत कर दिया। रंगोलियों ने न केवल सौंदर्य बल्कि देशप्रेम का संदेश भी दिया।
🌄 पोस्टर प्रतियोगिता में कारगिल युद्ध के रणनीतिक स्थल, राष्ट्रगान की पंक्तियाँ, और शहीदों के चित्रों को प्रभावशाली नारों के साथ प्रस्तुत किया गया। हर पोस्टर देशभक्ति का जीवंत प्रमाण बन गया।
कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को और भी प्रेरणादायक बना दिया। ‘ए मेरे वतन के लोगों’ जैसे गीतों ने सभी की आँखें नम कर दीं।

🪔अंत में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके सपनों के भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ जिसमें उपस्थित सभी छात्र, शिक्षक एवं अतिथियों ने सहभागिता की और देश के प्रति निष्ठा को दोहराया।
🟩 आज जैसे आयोजनों से नई पीढ़ी में देशभक्ति और संवेदनशील नागरिक बनने की भावना गहराती है।