लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी जहां सत्ता में वापसी के लिए चुनावी तैयारियों में जुटी है, वहीं लंबे समय से सत्ता से बाहर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी गठबंधन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी के साथ आने की संभावनाओं के बीच अब दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सपा और कांग्रेस कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।
परंपरागत सीटों पर सपा का दावा बरकरार
सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी अपनी परंपरागत सीटों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं दिख रही है। पार्टी उन क्षेत्रों को अपने पास रखना चाहती है, जहां उसके उम्मीदवार लगातार जीतते रहे हैं और उसका मजबूत जनाधार है।इसके अलावा सपा उन सीटों पर भी अपना दावा बनाए रखना चाहती है, जहां पिछले चुनाव में उसके प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी का मानना है कि वहां उसकी स्थिति मजबूत रही। ऐसे में गठबंधन के दौरान इन सीटों का बंटवारा दोनों दलों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है।
कांग्रेस भी मजबूत सीटों पर नहीं छोड़ना चाहती दावा
दूसरी ओर कांग्रेस भी उन विधानसभा क्षेत्रों पर अपनी दावेदारी बनाए रखना चाहती है, जहां पार्टी का संगठन और चुनावी आधार मजबूत है। दोनों दलों के सामने ऐसी सीटों की पहचान करने की चुनौती है, जहां गठबंधन के उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सहमति बनाई जा सके।सीटों की संख्या के साथ-साथ उम्मीदवारों के चयन और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी बातचीत अहम होगी। संभावना जताई जा रही है कि सपा और कांग्रेस के नेता दिल्ली में बैठक कर सीट बंटवारे के मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, बैठक की तारीख और अंतिम फॉर्मूले को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
लोकसभा चुनाव के नतीजों से गठबंधन को मिली उम्मीद
सपा और कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों के प्रदर्शन ने गठबंधन को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नई उम्मीद दी है। लोकसभा चुनाव के परिणामों में उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को कड़ी चुनौती दी थी।इसी प्रदर्शन के आधार पर दोनों दल विधानसभा चुनाव में भी साझा रणनीति के जरिए बेहतर परिणाम हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दों, उम्मीदवारों तथा क्षेत्रीय समीकरणों में अंतर होने के कारण पिछले परिणामों को भविष्य की सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता।
सीटों के फॉर्मूले पर सहमति बनाना होगी बड़ी चुनौती
सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की चर्चा के साथ सबसे बड़ा सवाल सीटों के बंटवारे का है। दोनों दल अपनी मजबूत सीटों पर दावा कर रहे हैं, ऐसे में आपसी सहमति बनाना आसान नहीं होगा। सपा अपने पारंपरिक जनाधार वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देना चाहेगी, जबकि कांग्रेस अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर सकती है।अब निगाहें दोनों दलों के बीच होने वाली संभावित बैठक और उसमें निकलने वाले फैसले पर टिकी हैं। सीट बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस किस रणनीति के तहत मैदान में उतरेंगी।
दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा मनाया जाता है। वर्ष 2026 में दशमी तिथि दो तारीखों में पड़ने के कारण लोगों के बीच यह सवाल है कि पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 21 अक्टूबर को। पंचांग में दी गई तिथियों के अनुसार, इस साल विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी।
दशहरा 2026 की सही तारीख क्या है?
पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि की गणना के आधार पर विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान श्रीराम की पूजा, शस्त्र पूजन और रावण दहन जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। कई स्थानों पर मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं।
रावण दहन का शुभ मुहूर्त
विजयादशमी पर रावण दहन के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, पूजा और रावण दहन के प्रमुख समय इस प्रकार हैं।
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा: दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक
प्रदोष काल की शुरुआत: शाम 5:47 बजे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण दहन शाम 5:47 बजे के बाद किया जा सकता है। हालांकि, स्थानीय पंचांग, सूर्यास्त के समय और आयोजन स्थल के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
विजयादशमी पर कैसे करें पूजा?
दशहरे के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।कुछ क्षेत्रों में गाय के गोबर से 10 गोले बनाकर उन पर जौ के बीज लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। पूजा के बाद इन गोलों को जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये गोले मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, लोभ और अन्य बुराइयों के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें जलाने का भाव अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करना है।
विजयादशमी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध करके अधर्म का अंत किया था। इसी विजय की स्मृति में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यह परंपरा संदेश देती है कि अन्याय और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंत में सत्य और धर्म की विजय होती है।विजयादशमी पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा के साथ कई स्थानों पर मां दुर्गा की आराधना तथा शस्त्र पूजन भी किया जाता है।
नए काम और खरीदारी के लिए शुभ माना जाता है दिन
हिंदू परंपरा में दशहरे को शुभ कार्यों के लिए विशेष दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नया व्यवसाय शुरू करना, वाहन या आभूषण खरीदना और नए कार्य की शुरुआत करना मंगलकारी होता है। कई लोग इस अवसर पर अपने औजारों, वाहनों और शस्त्रों की पूजा भी करते हैं।विजयादशमी का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, साहस और सदाचार को अपनाए तथा बुराइयों पर विजय पाने का संकल्प ले।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन नजदीक आने के साथ ही समर्थन मूल्य को लेकर किसानों की मांग तेज हो गई है। भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर राज्य में धान खरीदी की दर बढ़ाकर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। संघ का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, ऐसे में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। संगठन ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान लंबित धान बोनस की राशि जारी करने की मांग भी उठाई है।
धान की कीमत में 258 रुपये बढ़ोतरी की मांग
भारतीय किसान संघ के अनुसार, वर्तमान में राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। संघ का तर्क है कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 258 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, लेकिन इसका लाभ राज्य में किसानों को नहीं मिला है।इसी आधार पर किसान संघ ने मौजूदा दर में 258 रुपये जोड़कर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत निर्धारित करने की मांग की है। संगठन के नेताओं का कहना है कि खाद, बीज, डीजल, सिंचाई और मजदूरी सहित खेती से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में धान की कीमत में बढ़ोतरी से किसानों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
1,700 करोड़ रुपये का बकाया बोनस जारी करने की मांग
धान खरीदी की दर बढ़ाने के साथ ही किसान संघ ने करीब 1,700 करोड़ रुपये के कथित बकाया धान बोनस का मुद्दा भी उठाया है। संघ का कहना है कि यह राशि किसानों का हक है और इसे लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।संगठन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि किसानों को उनका बकाया बोनस जल्द जारी किया जाए। संघ के मुताबिक, धान की कीमत में उचित बढ़ोतरी और लंबित बोनस का भुगतान किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
27 अक्टूबर को मंत्रालय घेरने की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने सरकार को मांगें पूरी करने के लिए समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो 27 अक्टूबर को रायपुर में मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।संघ का दावा है कि इस प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों किसान शामिल होंगे। संगठन ने स्पष्ट किया है कि धान की कीमत बढ़ाने और बकाया बोनस जारी कराने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखा जाएगा।
डिप्टी सीएम अरुण साव बोले- किसानों के हित में काम कर रही सरकार
किसानों की मांगों के बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान की सबसे अधिक कीमत दे रही है और सरकार लगातार उनके हितों के लिए काम कर रही है।साव ने यह भी कहा कि सरकार धान के साथ दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य खेती में विविधता लाना और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर तैयार करना है।फिलहाल धान खरीदी की दर बढ़ाने और बकाया बोनस जारी करने को लेकर किसान संघ की मांगों पर राज्य सरकार के अगले कदम का इंतजार है।
जयपुर। जयपुर एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 की इमरजेंसी लैंडिंग कराए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। फ्रैंकफर्ट से दिल्ली जा रहे विमान को हाईजैक अलर्ट मिलने की सूचना के बाद जयपुर की ओर डायवर्ट किया गया। विमान के उतरते ही सुरक्षा कर्मियों ने जांच शुरू कर दी। हालांकि, शुरुआती जानकारी के अनुसार, विमान में किसी संदिग्ध गतिविधि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लैंडिंग के बाद विमान की सघन जांच
एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 ने 13 अक्टूबर की रात जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से उड़ान भरी थी। विमान को 14 अक्टूबर की सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुंचना था। लेकिन सुरक्षा अलर्ट के बाद इसे जयपुर डायवर्ट कर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।विमान के उतरने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी और अन्य सुरक्षाकर्मी जांच में जुट गए। एहतियात के तौर पर विमान को आइसोलेशन वे पर रखा गया, ताकि उसकी सुरक्षा संबंधी जांच की जा सके।
स्क्वाक-7500 कोड और अलर्ट की वजह की जांच
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हाईजैक अलर्ट किस वजह से जारी हुआ। पायलट की ओर से स्क्वाक-7500 कोड घोषित किए जाने के कारणों को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यह कोड विमान में हाईजैक की स्थिति का संकेत देता है।कुछ रिपोर्टों में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जांच टीमें अलर्ट के स्रोत और विमान में किसी संभावित तकनीकी समस्या से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
तेल अवीव जाने वाली फ्लाइट से जुड़ी घटना का भी जिक्र
दिए गए विवरण के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 से भी हाईजैक अलर्ट की घटना सामने आई थी। उस मामले में विमान के भीतर सह-पायलट द्वारा पायलट पर चाकू से हमला किए जाने की बात कही गई थी। विमान को संभावित खतरे से बचाने में पायलट की भूमिका का भी उल्लेख किया गया था।हालांकि, उस घटना से जुड़ी जानकारी और जयपुर में एयर इंडिया की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जयपुर वाले मामले में जांच पूरी होने और आधिकारिक बयान आने के बाद ही अलर्ट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। प्रदेश में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से 15 अक्टूबर से कई इलाकों में बादल छाने, गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के भी संकेत दिए हैं। बदलते मौसम का असर राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है।
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम?
राजधानी रायपुर में फिलहाल मौसम साफ रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, शहर में अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।हालांकि, 15 अक्टूबर से मौसम में संभावित बदलाव के चलते गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। बादल छाने और हल्की बारिश होने पर तापमान में बदलाव देखने को मिल सकता है।
कई इलाकों में बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, कुछ इलाकों में बादल गरजने, बिजली चमकने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। अनुमान है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम का ऐसा ही रुख बना रह सकता है।गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहना बेहतर होगा।
मंगलवार को कहां कितना रहा तापमान?
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। राजधानी रायपुर में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।इस दौरान प्रदेश में बारिश दर्ज करने वाले प्रमुख आंकड़े शून्य रहे। अब मौसम में बदलाव के पूर्वानुमान के बाद आने वाले दिनों में बारिश और तापमान की स्थिति पर नजर रहेगी।
क्यों बदल रहा है छत्तीसगढ़ का मौसम?
मौसम में संभावित बदलाव के पीछे ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय मौसमी प्रणालियों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, समुद्र तल से करीब 5.8 से 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 22 डिग्री उत्तरी अक्षांश के उत्तर में लगभग 82 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास पश्चिमी हवाओं में एक द्रोणिका बनी हुई है।इसके अलावा, करीब 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल, गरज-चमक और हल्की बारिश की स्थिति बन सकती है।
अगले दो दिन मौसम पर रहेगी नजर
छत्तीसगढ़ में अगले दो दिनों के दौरान मौसम में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक हो सकती है, जबकि अन्य स्थानों पर मौसम शुष्क भी रह सकता है।लोगों को सलाह दी जाती है कि बाहर निकलने से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की जानकारी लें। बिजली गिरने की चेतावनी वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर रुकने से बचें।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में बस से यात्रा करने वाले लोगों को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। राज्य में यात्री बसों के किराए में बढ़ोतरी किए जाने से रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और अन्य यात्रियों का खर्च बढ़ने वाला है। परिवहन विभाग की नई अधिसूचना के मुताबिक, साधारण बसों में प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। वहीं, शुरुआती 5 किलोमीटर के सफर का न्यूनतम किराया भी 8 रुपये से बढ़कर 10 रुपये हो गया है।किराए में इस बदलाव का असर छोटी दूरी के साथ लंबी दूरी की यात्रा पर भी पड़ेगा। इसके अलावा डीलक्स, लग्जरी और एसी स्लीपर बसों के टिकट भी महंगे होने की जानकारी सामने आई है।
रायपुर से बिलासपुर और जगदलपुर जाने वालों पर कितना असर?
नई दरों के बाद अलग-अलग रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रमुख मार्गों पर किराए में इस तरह का अंतर बताया गया है।
रायपुर से बिलासपुर: पहले 133 रुपये किराया था, जो अब 228 रुपये बताया गया है। यानी 95 रुपये अधिक।
रायपुर से जगदलपुर: पहले 300 रुपये देने पड़ते थे, जबकि नया किराया 521 रुपये बताया गया है। इससे 221 रुपये की बढ़ोतरी होगी।
रायपुर से अंबिकापुर: उपलब्ध विवरण के अनुसार, यात्रा का खर्च 230 रुपये बढ़ने की बात कही गई है।
रायपुर से जशपुर: इस मार्ग पर किराए में 346 रुपये की बढ़ोतरी बताई गई है।
इन आंकड़ों के आधार पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के मासिक बजट पर खासा असर पड़ सकता है। हालांकि, टिकट की वास्तविक कीमत बस की श्रेणी, दूरी और लागू किराया नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।
एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ा बस किराया
छत्तीसगढ़ में बस किराए में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब यात्री पहले ही रोजमर्रा के खर्चों को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले साल प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से घटाकर 1 रुपये किया गया था। इससे यात्रियों को कुछ राहत मिली थी।अब किराया बढ़ाकर 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर किए जाने से उस राहत का लाभ काफी हद तक समाप्त हो गया है। खासतौर पर उन लोगों को अधिक खर्च करना पड़ेगा, जो काम, पढ़ाई या दूसरे जरूरी कारणों से नियमित रूप से बसों से यात्रा करते हैं।
बस संचालक क्यों कर रहे थे किराया बढ़ाने की मांग?
बस ऑपरेटर लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और बसों के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने किराए पर बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा था।बस संचालकों ने किराया नहीं बढ़ाए जाने की स्थिति में बसें खड़ी करने और हड़ताल करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर को नई किराया दरों से संबंधित अधिसूचना जारी की।हालांकि, किराया बढ़ाने की मांग और सरकार के फैसले के बीच यात्रियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। बस सेवा पर निर्भर लोगों के लिए किराए में बढ़ोतरी सीधे उनके दैनिक खर्च को प्रभावित करती है।
प्रदेश की 5 हजार साधारण बसों से सफर करने वालों पर ज्यादा असर
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 13 हजार से अधिक बसें पंजीकृत हैं। इनमें करीब 5 हजार साधारण बसें बताई गई हैं। इन बसों में बड़ी संख्या में निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग यात्रा करते हैं।दैनिक यात्रियों के लिए किराए में बढ़ोतरी का मतलब महीने के कुल खर्च में इजाफा होना है। वहीं, लंबी दूरी के यात्रियों को हर यात्रा पर पहले से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
यात्रियों के बजट पर बढ़ेगा दबाव
बस किराए में नई बढ़ोतरी से परिवहन खर्च बढ़ना तय है। खासतौर पर उन परिवारों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, जिनके सदस्य नौकरी, पढ़ाई या छोटे कारोबार के लिए नियमित रूप से दूसरे शहरों की यात्रा करते हैं।अब यात्रियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई दरें किस तरह लागू की जाती हैं और अलग-अलग श्रेणी की बसों में अंतिम किराया कितना निर्धारित होता है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल धान के कटोरे और खनिज संपदा तक सीमित रखने के बजाय पर्यटन और खेल के क्षेत्र में भी मजबूत करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने के लिए दो अहम मिशन पर चर्चा की है। इनमें मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन और मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन शामिल हैं। सरकार की योजना पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने, निजी निवेश आकर्षित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार करने की है। वहीं, खेल मिशन के जरिए गांवों और आदिवासी अंचलों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
पर्यटन विकास मिशन: 1000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की तैयारी
राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए पर्यटन क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये का फंड रखने की योजना है। अन्य स्रोतों से भी संसाधन जुटाए जाएंगे, ताकि कुल निवेश 1000 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सके।इस पहल के तहत प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के साथ पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था और अलग-अलग पर्यटन मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक केवल कुछ घंटे घूमकर वापस न लौटें, बल्कि यहां अधिक समय बिताएं।
चित्रकोट से मैनपाट तक पर्यटन स्थलों की बदलेगी सूरत
पर्यटन विकास योजना के तहत चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, राजिम और हसदेव बांगो जैसे प्रमुख स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी है। यहां बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, शौचालय, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों की सहायता के लिए हेल्प सेंटर जैसी सुविधाओं पर काम किया जाएगा।इसके अलावा मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी मंदिर, कबीर चबूतरा, केंदई और चिल्फी घाटी जैसे स्थलों को भी विकास योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे राज्य के कम चर्चित पर्यटन स्थलों को पहचान दिलाने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
12 हजार नए कमरों का लक्ष्य, निजी कंपनियों को भी मिलेगा मौका
छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं के बावजूद पर्यटकों के लंबे समय तक ठहरने के लिए पर्याप्त सुविधाएं विकसित करना एक अहम चुनौती है। इसे देखते हुए सरकार ने 12 हजार नए कमरे तैयार करने का लक्ष्य रखा है।इस योजना में होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत 10 से 20 परियोजनाएं शुरू करने की योजना है। इनके माध्यम से करीब 1000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित करने की उम्मीद जताई गई है।यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान और गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
4 बड़े और 15 छोटे पर्यटन सर्किट बनाने की योजना
पर्यटकों को राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक आसानी से पहुंचाने के लिए चार प्रमुख और 15 छोटे पर्यटन सर्किट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन मार्गों पर करीब 15 से 20 स्थानों पर खाने और ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।इसके साथ लगभग 500 स्थानों पर दिशा बताने वाले साइन बोर्ड लगाए जाने का प्रस्ताव है। इससे पर्यटकों को रास्ते पहचानने में आसानी होगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सकेगी।पर्यटन सर्किट विकसित होने से एक ही यात्रा के दौरान कई स्थलों को देखने का अवसर मिलेगा। इसका फायदा उन स्थानीय कारोबारियों को भी मिल सकता है, जिनकी आजीविका पर्यटकों पर निर्भर है।
खेल उत्कर्ष मिशन: गांवों की प्रतिभाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर
पर्यटन के साथ राज्य सरकार खेल क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।योजना के तहत स्कूलों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और व्यायाम शिक्षकों को प्रतिभा पहचानने की प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से लेकर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण तक पहुंचाने के लिए फीडर सेंटर, खेल अकादमियों और उत्कृष्टता केंद्रों की व्यवस्था विकसित करने की योजना है।सरकार की मंशा है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से पीछे न हटना पड़े।
इन खेलों पर रहेगा विशेष ध्यान
खेल मिशन के तहत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी जैसे खेलों को प्राथमिकता देने की योजना है।खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए बेहतर कोचिंग के साथ पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, फिटनेस प्रशिक्षण और चोट से बचाव की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे खिलाड़ियों की तैयारी को वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।लंबी अवधि में इस पहल का लक्ष्य राज्य के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ाना है। ओलंपिक तक खिलाड़ियों को पहुंचाने का लक्ष्य इसी व्यापक सोच का हिस्सा है।
घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ी, विदेशी सैलानियों की कमी बनी चुनौती
पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में राज्य में घरेलू पर्यटकों की संख्या 3.34 करोड़ रही। इसके विपरीत विदेशी पर्यटकों की संख्या घटकर 926 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 3,485 था।
ये आंकड़े बताते हैं कि घरेलू पर्यटन के मामले में राज्य के पास बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को अधिक पहचान दिलाने की जरूरत है।विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, गुणवत्तापूर्ण आवास, पर्यटन स्थलों की जानकारी, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार जैसे पहलुओं पर काम करना महत्वपूर्ण होगा।
दोनों मिशन की सफलता के लिए प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी
पर्यटन और खेल से जुड़े ये दोनों मिशन छत्तीसगढ़ के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकते हैं। पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय रोजगार, कारोबार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, खेल सुविधाओं के मजबूत होने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का रास्ता मिल सकता है।हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ बजट के प्रभावी इस्तेमाल, समय पर परियोजनाएं पूरी होने, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता और सुविधाओं के नियमित संचालन पर निर्भर करेगा। विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाना और खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना भी सरकार के सामने अहम लक्ष्य रहेंगे।अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन और मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा खेल उपलब्धियों पर इनका कितना असर पड़ता है।
रायपुर : कबीरधाम जिले के बोड़ला में प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार और उच्च शिक्षा के लिए अधोसंरचना विकास को गति देते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज 60 लाख रुपए के दो विकास कार्यों का भूमिपूजन किया. इसके तहत एसडीएम कार्यालय बोड़ला में 30 लाख रुपए की लागत से सभा कक्ष सह सामुदायिक शौचालय तथा शासकीय स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में 30 लाख रुपए की लागत से अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया जाएगा. इस दौरान उन्होंने 40 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की. इसमें कॉलेज में बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए 15 लाख रुपये, बालिका शौचालय निर्माण के लिए 4.60 लाख रुपए, ग्राम भीरा में मंगल भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए तथा सीसी रोड निर्माण के लिए 10 लाख 40 हजार रुपए शामिल हैं. इसके साथ ही कॉलेज में स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट सुविधा और एआई आधारित तकनीक उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी.
उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक और नवाचार के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, क्षमताओं के विकास और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में करना चाहिए. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी तकनीक के स्वामी बनें, तकनीक उनका स्वामी न बने. चौटजीपीटी, जेमिनाई, ग्रोक और परप्लेक्सिटी जैसे एआई टूल्स का उपयोग पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है. साथ ही विद्यार्थियों को अपने संस्कारों और मूल्यों को बनाए रखना चाहिए. उन्होंने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विधानसभा क्षेत्र के 85 स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है. इनमें 50 स्थानों पर स्मार्ट बोर्ड लगाए जा चुके हैं तथा शेष 35 स्थानों पर भी लगाए जाएंगे. छात्रावासों और महाविद्यालयों में भी डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से विज्ञान, गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषयों की जटिल अवधारणाओं को वीडियो और डिजिटल सामग्री से सरलता से समझाया जा सकेगा.
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों की काउंसलिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. इसके तहत एनडीए, सीजीपीएससी, यूपीएससी, कर्मचारी चयन आयोग और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य के अनुरूप मार्गदर्शन मिल सके. उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीक सीखने और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और सकारात्मक सोच के साथ निरंतर प्रयास एवं अभ्यास से सफलता प्राप्त की जा सकती है. कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बालका रामकिंकर वर्मा, नगर पंचायत बोड़ला अध्यक्ष श्री विजय पाटिल, श्री बरसाती लाल वर्मा, श्री छोटूराम चंद्रवंशी, श्री मोहन धुर्वे, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री नंद श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती ललिता रूपसिंग धुर्वे, श्री कांशीराम उईके, सरपंच श्रीमती रेशमा बाई सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.
रायपुर: छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों में ऐसी अनेक प्रतिभाएं हैं, जिन्हें सही समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतिस्पर्धा के पर्याप्त अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा सकती हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रतिभाओं के लिए गांव के खेल मैदान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक आगे बढ़ने का सुनियोजित मार्ग तैयार करना है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन इसी सोच को धरातल पर उतारने की महत्वपूर्ण पहल है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों से यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की भरपूर क्षमता है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रतिभाओं की पहचान कम उम्र में हो और उन्हें लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन की कार्ययोजना ऐसी हो, जिसमें खिलाड़ी की प्रतिभा की पहचान से लेकर उसके उच्च प्रदर्शन वाले खिलाड़ी बनने तक की पूरी यात्रा के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो।
*गांवों और दूरस्थ अंचलों तक पहुंचे खेल प्रतिभाओं की खोज*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खेल प्रतिभाओं की तलाश केवल बड़े शहरों और स्थापित खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छत्तीसगढ़ के गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। तीरंदाजी, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों से इन क्षेत्रों के युवाओं का स्वाभाविक जुड़ाव रहा है। ऐसी प्रतिभाओं को चिन्हित कर वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण से जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन की सफलता इस बात से तय होगी कि हम जमीनी स्तर पर कितनी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे पाते हैं। कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों अथवा अवसर की कमी के कारण पीछे नहीं रहना चाहिए।
*स्कूल से ही मजबूत होगी खेल संस्कृति*
मुख्यमंत्री ने बच्चों को स्कूल स्तर से खेल गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में बच्चों का खेल के मैदानों से स्वाभाविक जुड़ाव होता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण यह जुड़ाव कम हुआ है। इसे फिर मजबूत करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना भी विकसित करते हैं। स्कूल स्तर पर प्रतिभा की पहचान होने से योग्य बच्चों को समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा और वे भविष्य में खेलों को एक बेहतर करियर के रूप में भी अपना सकेंगे।
*फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक बनेगा प्रशिक्षण का मजबूत तंत्र*
बैठक में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित प्राथमिकता वाले खेलों के विकास की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए फीडर सेंटर, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा की गई। फीडर सेंटरों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान के बाद उनके प्रदर्शन और प्रगति की नियमित निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे प्रत्येक चयनित खिलाड़ी के प्रशिक्षण, प्रदर्शन और आवश्यकता का नियमित आकलन हो तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अगले स्तर तक पहुंचने के अवसर मिलते रहें।
*प्रशिक्षित कोच और स्पोर्ट्स साइंस पर विशेष फोकस*
मुख्यमंत्री श्री साय ने खेलवार प्रशिक्षित और योग्य कोचों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस खेल की जहां संभावनाएं अधिक हैं, वहां उसी के अनुरूप विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की पदस्थापना और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं के विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, मनोवैज्ञानिक सहयोग, फिटनेस, चोटों से बचाव और पुनर्वास जैसी सेवाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की योजना पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में तकनीक और खेल विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी आधुनिक प्रशिक्षण की इन सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।
बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की भी समीक्षा की गई। सेंटर में आवासीय खिलाड़ियों की वर्तमान क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने तथा यहां संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पहले से उपलब्ध खेल अधोसंरचनाओं का अधिकतम और बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों के नियमित रखरखाव के साथ आवश्यकतानुसार उनका उन्नयन किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
*टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से प्रतिभाओं को मिलेगा मंच*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों को नियमित प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना भी आवश्यक है। प्रतियोगिताओं से खिलाड़ी अपने प्रदर्शन का आकलन कर पाते हैं और उनमें बड़े मुकाबलों के लिए आवश्यक आत्मविश्वास विकसित होता है।
बैठक में टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चिन्हित कर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आगे की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
*महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन*
मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियों ने विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा और क्षमता सिद्ध की है। उन्हें सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आवश्यक खेल सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
बैठक में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर, पैरा स्पोर्ट्स के विकास तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप तैयार करने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
*अगले पांच वर्षों के लिए तैयार होगी स्पष्ट कार्ययोजना*
मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट, परिणामोन्मुख और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में मिशन के विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर भी विस्तृत मंथन किया गया।
मुख्यमंत्री ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों का विकास किसी एक विभाग तक सीमित विषय नहीं है। सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करते हुए प्रदेश में मजबूत खेल संस्कृति और खिलाड़ियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश केवल खेल सुविधाओं का विस्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण, प्रतियोगिता और उच्चस्तरीय प्रदर्शन तक खिलाड़ी को हर जरूरी सहयोग एक सुनियोजित व्यवस्था के तहत मिले।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिले। गांव के खेल मैदान से शुरू हुआ उसका सफर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से हम ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नई पहचान दे।
बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य का प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर और धार्मिक आस्था के केंद्र हमारी विशिष्ट पहचान हैं। इन खूबियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी रूप से स्थापित करते हुए पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास का मजबूत आधार बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज महानदी भवन मंत्रालय में पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पर्यटन का विकास केवल किसी स्थान के सौंदर्यीकरण या अधोसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए। पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पियों, कलाकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा हों। स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प, लोककला और संस्कृति को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़कर आय के स्थायी साधन विकसित किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पर्यटन से समृद्धि’ इस मिशन की मूल भावना होगी।
500 करोड़ रुपए की मिशन निधि प्रस्तावित
बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव ने मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा तैयार मिशन के अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए 500 करोड़ रुपए की मूल मिशन निधि प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन परियोजनाओं के लिए उपलब्ध विभिन्न वित्तीय स्रोतों का प्रभावी उपयोग करने तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन परियोजनाओं की योजना बनाते समय उनकी दीर्घकालिक उपयोगिता, आर्थिक संभावनाओं और स्थानीय रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को प्राथमिकता दी जाए।
*चित्रकोट, मैनपाट, सिरपुर सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा कायाकल्प*
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। प्रथम चरण में चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सिरपुर, हसदेव बांगो जलाशय और राजिम को उच्च प्रभाव वाले पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित करने की योजना है।
इसके साथ ही मायाली-बगीचा, चंपारण, सतरेंगा, तीरथगढ़, देवरानी-जेठानी, कबीर चबूतरा, केंदई, महामाया और चिल्फी घाटी सहित अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में भी सुविधाओं के विस्तार की कार्ययोजना प्रस्तावित है।
इन स्थलों में बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, सुव्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाएगा। पर्यटन स्थलों की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए उनके विकास में स्थानीय वास्तुकला, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश के संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
*स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर*
मुख्यमंत्री श्री साय ने पर्यटन विकास में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मिशन के अंतर्गत 1,000 नए पर्यटन उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 250 महिला स्व-सहायता समूहों को पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इसके अतिरिक्त 600 आतिथ्य एवं पर्यटक सहायता कर्मियों तथा 500 टूर गाइड और फ्रंटलाइन कर्मियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोककला, पर्यटन मार्गदर्शन, परिवहन और अन्य सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे पर्यटन से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था में पहुंचेगा और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर प्राप्त होंगे।
*पर्यटकों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य*
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटकों के औसत प्रवास की अवधि बढ़ाकर दो दिन करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
पर्यटकों के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण आवास सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में 12 हजार अतिरिक्त कमरों की क्षमता विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। इसके लिए होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे और अन्य आवासीय सुविधाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।
पर्यटन क्षेत्र में 10 से 20 सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाएं विकसित करने का प्रस्ताव है, जिनके माध्यम से कम से कम 1,000 करोड़ रुपए की निजी पूंजी आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे होटल, रिसॉर्ट, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन आधारित सेवाओं के विस्तार के साथ स्थानीय बाजारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
*चार प्रमुख और 15 मिनी पर्यटन सर्किट होंगे विकसित*
प्रदेश के अलग-अलग पर्यटन स्थलों को एक-दूसरे से जोड़कर पर्यटकों को बेहतर और विविध अनुभव उपलब्ध कराने के लिए मिशन के अंतर्गत चार प्रमुख पर्यटन सर्किट और 15 मिनी पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है।
प्रमुख पर्यटन मार्गों पर लगभग 15 से 20 वे-साइड सुविधाएं तथा करीब 500 पर्यटन संकेतक स्थापित किए जाएंगे। इससे पर्यटकों को पर्यटन स्थलों तक पहुंचने और अपनी यात्रा को सुविधाजनक तरीके से नियोजित करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन सर्किट तैयार करते समय प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक और जनजातीय पर्यटन स्थलों को इस तरह जोड़ा जाए कि पर्यटक एक ही यात्रा में छत्तीसगढ़ की विविधता का व्यापक अनुभव प्राप्त कर सकें।
*डिजिटल तकनीक से आसान होगा पर्यटकों का सफर*
पर्यटन सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए भी मिशन में व्यापक प्रावधान किए गए हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए बहुभाषी पर्यटन वेबसाइट, मोबाइल एप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पर्यटन सूचना, डिजिटल बुकिंग, ऑनलाइन भुगतान और रियल टाइम नेविगेशन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
इन डिजिटल माध्यमों से पर्यटकों को पर्यटन स्थलों, आवास, परिवहन, स्थानीय आकर्षण, खानपान और अन्य आवश्यक सेवाओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
*जनजातीय संस्कृति और विरासत बनेगी छत्तीसगढ़ पर्यटन की विशिष्ट पहचान*
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककला, लोकनृत्य, पारंपरिक खानपान, हस्तशिल्प और जीवनशैली हमारी अमूल्य विरासत है। पर्यटन विकास के दौरान इनकी मौलिकता और गरिमा को संरक्षित रखते हुए इन्हें व्यापक पहचान दिलाई जानी चाहिए।
विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा अंचल की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति को पर्यटन के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार कर श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों के विकास में पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन के सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा जाए। प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर विकास कार्य वहां के पर्यावरण और जैव विविधता के अनुरूप हों।
*‘पर्यटन से समृद्धि’ बनेगा मिशन का आधार*
मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन की मूल अवधारणा ‘पर्यटन से समृद्धि’ निर्धारित की गई है। मिशन के माध्यम से पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखते हुए इसे स्थानीय अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक संरक्षण, रोजगार सृजन, निवेश और क्षेत्रीय विकास से जोड़ा जाएगा।
मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय मार्गदर्शक समिति तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय संचालन समिति का प्रावधान किया गया है। पर्यटन, लोक निर्माण, वन, नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, उद्योग, कौशल विकास सहित संबंधित विभागों के समन्वय से परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।