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Saturday, October 31, 2026
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कुरूद महाविद्यालय में BFSI प्रशिक्षण: युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत आधार

कुरूद, 08 फरवरी 2026

संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुरूद में 4 से 7 फरवरी तक NSE और उच्च शिक्षा विभाग के एमओयू के तहत चार दिवसीय BFSI (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ एवं बीमा) प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 183 छात्रों ने हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ:
👉बैंकिंग प्रणाली, वित्तीय सेवाएँ और बीमा क्षेत्र की बुनियादी जानकारी।
👉स्टॉक मार्केट की व्यावहारिक कार्यप्रणाली और आधुनिक निवेश अवसर।
👉 फिनटेक, डिजिटल बैंकिंग तथा रोजगार संभावनाएँ।

NSE विशेषज्ञ आशीष शर्मा ने मुख्य व्याख्यान दिया, जबकि समापन में जनभागीदारी समिति अध्यक्ष टिकेश साहू (मुख्य अतिथि) और योगेश साहू (विशेष अतिथि) उपस्थित रहे। टिकेश साहू ने विधायक अजय चंद्राकर के सहयोग की सराहना की और BFSI को युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का विकल्प बताया।

प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने NSE-BSE के योगदान पर प्रकाश डाला, कहा कि ऐसे नवाचार उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ते हैं। संचालन पवन कुमार ताम्रकार (नोडल अधिकारी) के नेतृत्व में हुआ, जिसमें रेनु पाटले, डॉ. श्रीकांत नामदेव, अंकिता साहू, हिना चंद्राकर और एमकॉम छात्रों का योगदान रहा।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अनुकरणीय बनेगा।


“सीधी बात: दिल्ली और देश” लापता और गुमशुदा होते लोग

आज की चौपाल: ज्वाला: एक युवा, जिसका लहजा सख्त है और जिसकी आवाज़ में व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा है।
ज्योतिपति: एक अनुभवी, गंभीर और जागरूक नागरिक जो आंकड़ों और गहरी चिंताओं पर बात करता है।

नई दिल्ली 08/02/2026

ज्वाला: (सख्त और ऊंचे स्वर में) मीडिया पर जारी खबरों पर :शर्म आनी चाहिए इस सिस्टम को! दिल्ली की सड़कों पर इंसान गायब हो रहे हैं या हवा में भाप बन रहे हैं? सिर्फ 27 दिनों में 538 लोग गायब! जिसमें 137 मासूम बच्चे हैं। क्या यहाँ कोई इंसानों को निगलने वाला गैंग पाल रखा है किसी ने? वजीराबाद का 16 साल का ऋतिक पिछले साल से गायब है, और सुरक्षा के जिम्मेदार? व्यवस्था और प्रदेश के मुखिया का दफ्तर सिर्फ ‘सीसी’ (CC) और मेल-मेल खेल रहे हैं। धिक्कार है ऐसी व्यवस्था पर!

ज्योतिपति: (खबरों पर गंभीर पर संयमित स्वर में)
ज्वाला, तुम्हारा गुस्सा जायज है, लेकिन इस तबाही की गहराई को देखो। ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये उजड़ते हुए घर हैं। देशभर में हर रोज 1,328 लोग लापता हो रहे हैं। गणित लगाएंगे तो रूह कांप जाएगी—हर मिनट एक व्यक्ति गायब हो रहा है। हमारी बहनें, हमारी बेटियां… हर 2 मिनट में एक महिला का पता नहीं चलता। दिल्ली अब दिलवालों की नहीं, ‘लापतागंज’ बन चुकी है।

ज्वाला: (आक्रामक होकर)
ज्योतिपति जी, आप तो सुलझे हुए आदमी हैं, मुझे बताइए—ये कौन सा देश बन रहा है? संसद के भीतर देश के मुखिया की सुरक्षा पर खतरा मंडराता है, तो बाहर आम नागरिक की क्या बिसात? मुखिया सदन में न आएं तो देश चल जाता है, उनकी कुर्सी सलामत रहती है। लेकिन एक गरीब बाप, एक मजदूर भाई, एक कामकाजी महिला… अगर ये रोजगार के लिए बाहर न निकलें, तो घर का चूल्हा बुझ जाएगा। क्या अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर निकलना अब मौत या गायब होने को दावत देना है?

ज्योतिपति: (चिंताजनक मुद्रा में)
यही तो सबसे बड़ा संकट है। हम समस्याओं से लड़ना छोड़ चुके हैं, अब हम समस्याओं से भागना और डरना शुरू कर चुके हैं। जब रक्षक ही भक्षक के सामने घुटने टेक दें या सुस्त हो जाएं, तो समाज में खौफ पसर जाता है। ऋतिक के माता-पिता दर-दर भटक रहे हैं, मेट्रो स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में वो आखिरी बार दिखा, फिर धुएं की तरह उड़ गया? क्या हमारी तकनीक, हमारी सुरक्षा व्यवस्था इतनी लाचार है?

ज्वाला: (सपाट लहजे में)
लाचार नहीं है ज्योतिपति जी, ये नीयत की कमी है! अगर किसी नेता का कुत्ता गायब हो जाए तो पूरी फौज लगा दी जाती है, पर एक आम आदमी का बच्चा गायब हो तो उसे थानों के चक्कर कटवाए जाते हैं। मैं पूछता हूँ—ये जो 2023 में 3 लाख से ज्यादा महिलाएं गायब हुईं, ये कहाँ गईं? क्या ज़मीन निगल गई या आसमान खा गया?

ज्योतिपति: (लंबी सांस लेते हुए)
सच्चाई कड़वी है ज्वाला। हर घंटे 37 महिलाएं गायब होना एक ‘नेशनल इमरजेंसी’ है। हमें अब जागना होगा। हमें सरकार से और हर उस जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे शख्स से पूछना होगा—क्या आपकी सुरक्षा की गारंटी सिर्फ आपके पद तक है? हमारी सुरक्षा का क्या?





मुंबई में पहली बार भाजपा का मेयर: रीतू तावड़े का नाम तय

भाजपा ने रीतू तावड़े (घाटकोपर वार्ड 132 से पार्षद) को मेयर उम्मीदवार बनाया; शिवसेना ने संजय शंकर घाड़ी को डिप्टी मेयर के लिए। जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

मुंबई, 07/02/2026

तमाम राजनीतिक उठापटक और दांव-पेंच के बाद आखिरकार भाजपा ने रीतू तावड़े को मुंबई महानगरपालिका (BMC) का मेयर पद उम्मीदवार बनाया। यह पहली बार होगा जब बीजेपी का मेयर BMC में बनेगा।

तीन बार BMC पार्षद रह चुकीं रीतू तावड़े अपनी पहचान की मोहताज नहीं। जमीन स्तर पर सक्रियता, लोकप्रियता और नागरिक मुद्दों को कुशलता से सुलझाने के लिए जानी जाती हैं।

जनवरी 15 को हुए चुनावों के 16 को रिजल्ट आने के बाद साफ था कि महायुति की सरकार बनेगी और महा विकास की मेयर की उम्मीद टूटेगी। लेकिन उसके बाद की राजनीति में उथल-पुथल देखने को मिली। एकनाथ शिंदे समर्थक कॉर्पोरेटर्स की होटल राजनीति चार दिनों तक चली। लगभग एक महीने की खींचतान के बाद नॉमिनेशन की अंतिम तिथि सात फरवरी को दोनों पार्टियां एकजुट हुईं। आज शक्ति प्रदर्शन भी हुआ।

रीतू तावड़े 2012, 2017 और 2025 से लगातार जीतीं; BMC एजुकेशन कमिटी चेयरपर्सन रहीं।

घूसखोर कहना इतिहास का अपमान”: छग सर्व ब्राह्मण समाज ने उठाई आवाज

बेमेतरा छत्तीसगढ़ 06/02/2026

छग सर्व ब्राह्मण समाज ने दी चेतावनी: “बर्दाश्त नहीं होगा अपमान”
बेमेतरा छत्तीसगढ़ से सर्व ब्राह्मण समाज ने इस फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उपप्रांताध्यक्ष लेखमणी पाण्डेय, जिलाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला और अन्य पदाधिकारियों (दीपक पाण्डेय, डॉ. शिवेन्द्र त्रिपाठी, डॉ. शिरिष शर्मा) ने संयुक्त बयान जारी कर फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की है।

छग सर्व ब्राह्मण समाज के मुख्य बिंदु:
मौलिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग: अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी विशेष वर्ग को टारगेट करना गलत है।
जातिवादी भेदभाव: फिल्म के शीर्षक से समाज में वैमनस्य और भेदभाव बढ़ने की आशंका है।
सम्मान को ठेस: पंडित शब्द सदैव पूजनीय रहा है, उसे ‘घूसखोर’ विशेषण देना समाज का अपमान है।

ज्वाला का प्रश्न: क्या कुंठित मानसिकता से मिट जाएगा इतिहास?
फिल्म के बहाने ब्राह्मण समाज को निशाना बनाए जाने पर ज्वाला ने गहरा रोष व्यक्त किया। ज्वाला ने तीखे स्वर में पूछा, “ज्योतिपति जी, क्या कुछ लोग अपनी कुंठित मानसिकता के चलते देश के इतिहास की चूलें हिला देंगे? ईसा पूर्व से लेकर देश की आज़ादी तक जिस समाज का लहू और मेधा इस मिट्टी में मिली है, क्या उसे चंद फिल्मी दृश्य मिटा पाएंगे?”

ज्योतिपति का ऐतिहासिक प्रत्युत्तर: साक्ष्यों की कसौटी पर सच
ज्वाला के तमतमाते सवालों का जवाब देते हुए ज्योतिपति ने इतिहास के उन स्वर्णिम पृष्ठों को खोला, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के विमर्श से ओझल कर दिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा और शासन की बागडोर सदियों तक ब्राह्मण राजवंशों के हाथों में रही:
शुंग वंश (185-73 ईसा पूर्व): मौर्य साम्राज्य के बाद वैदिक संस्कृति के पुनरुत्थान का काल।
सातवाहन वंश (60 ई.पू. – 240 ईस्वी): दक्षिण पथ के स्वामी, जिन्होंने विदेशी आक्रांताओं को भारत की सीमाओं से दूर रखा।
वाकाटक और कदंब वंश: कला, साहित्य और धर्म के संरक्षक।
सिंध का ब्राह्मण वंश (632-712 ईस्वी): महाराजा दाहिर जैसे योद्धा, जिन्होंने 600-700 ईस्वी तक विदेशी घुसपैठियों के सामने दीवार बनकर भारत को सुरक्षित रखा।

राष्ट्रीय स्तर पर विरोध जारी:
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका और FIR की मांग
फिल्म के टाइटल को जातिसूचक बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका कर्ताओं का तर्क है कि ‘पंडित’ शब्द को ‘भ्रष्टाचार’ और ‘रिश्वतखोरी’ जैसे नकारात्मक शब्दों के साथ जोड़ना समाज की गरिमा को कलंकित करने जैसा है। मांग की गई है कि फिल्म मेकर्स के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।

पशुबली नहीं, पशुक्रूरता है! सिद्धि माता में निरीह प्राणियों का कत्लखाना: शिवनाथ का पानी खून से लाल:_स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती

सलधा/देवरबीजा/बेमेतरा, 06 फरवरी 2026:

सिद्धि माता मंदिर में पशुबलि का घिनौना सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। नतीजा? शिवनाथ नदी का पवित्र जल मरे पशुओं के रक्त से रक्तरंजित हो गया। दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने जिला प्रशासन और मंदिर समिति की बैठक में गरजते हुए कहा- “हिंदुओं का पूजास्थल पवित्र होता है, कत्लगाह थोड़े न! सरकार नोटबंदी एक झटके में रोक सकती है, तो ये क्रूरता क्यों नहीं?”

प्रशासन की बैठक में भारी हंगामा
तहसीलदार के नेतृत्व में आसपास के सरपंचों ने हिस्सा लिया। स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने फटकार लगाई- ” *भारत हिंदुओं का देश है,यहां नदी-पर्वत-गाय देवतुल्य। अगर सुरक्षा न दे सकते, तो कम से कम ये घृणित कृत्य रोकें। पुलिस निगरानी, प्रशासनिक हस्तक्षेप और भारी जुर्माना लगाएं!” उन्होंने सवाल दागा- “ये मंदिर है या असामाजिक तत्वों का अड्डा?”

कबीर समाज की अपील: यज्ञ से सत्कार्य शुरू करें
कबीर सत्संग के लोगों ने कहा- “धर्म की आड़ में कत्ल हो रहा है। संतसमागम कर यज्ञ या सत्संग आयोजित करें, ताकि मन सत्भावना से भरें। ये देवस्थान है, कत्लखाना नहीं! प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित करे।”

ब्राह्मण समाज का सोशल मीडिया हथियार
सर्व ब्राह्मण समाज के लेखमणि पांडे, जितेंद्र शुक्ला, दीपक पांडे ने चेताया- “मोबाइल वाले सब रील बनाओ, व्हाट्सएप-फेसबुक-यूट्यूब पर वायरल करो: ‘आज से पशुबलि बंद! उल्लंघन पर तगड़ा जुर्माना!’ जीत हमारी बनेगी।”

जनता का पुरजोर विरोध: शराबी-मांसभक्षी मचल रहे
उपस्थित ग्रामीणों ने चिल्लाया- “ये पूजास्थल है, कसाईखाना थोड़े! प्रशासन रोके, वरना लगेगा सरकार बढ़ावा दे रही।” एक ग्रामीण ने रोष जताया- “बलि वाले कहते हैं प्रथा बंद है, लेकिन प्रचार नहीं। शराब-मांस के लोभी गाड़ी से पशु लादकर आते हैं, कत्ल करते हैं, हंगामा मचाकर भागते। होली नजदीक- अप्रिय घटना से पहले चाक-चौबंद करो!”

तहसीलदार का वादा: जागरूकता अभियान और कलेक्टर को रिपोर्ट
तहसीलदार बोले- “हर गांव में समिति बने, जागरूकता फैलाओ। बैठक के फैसले कलेक्टर तक पहुंचाऊंगा।”

रिपोर्टर का सवाल: प्रशासन जागो ! ये दैवीय स्थान शराब-मांस मंडी न बने। सालों से बलि के बहाने कत्ल चल रहा, दुर्गंध फैल रही, शिवनाथ खून से लाल। बलि रोको, वरना हिंसा भड़केगी तो जिम्मेदार तुम ही! पुलिस तैनात करो, हवालात भर दो। पशुक्रूरता बंद करो- ये मंदिर है, कत्ल का अड्डा नहीं!

ओमान में अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले बढ़ी वैश्विक निगाहें, क्या बातचीत से निकलेगा तनाव का रास्ता?

ओमान -06/02/2026

अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में होने वाली अहम वार्ता में अब कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच इस बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों बाद दोनों देशों का बातचीत की मेज पर आमने-सामने आना न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से अहम है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ सकता है।

बीते कुछ महीनों में गाजा संघर्ष, लाल सागर में बढ़ी अस्थिरता, ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियां और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में ओमान की मध्यस्थता में होने वाली यह वार्ता तनाव कम करने की दिशा में एक अहम प्रयास के तौर पर देखी जा रही है।

किन मुद्दों पर हो सकती है बातचीत

जानकार सूत्रों के अनुसार, इस वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और अप्रत्यक्ष सैन्य टकराव को रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। अमेरिका जहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण की बात करता रहा है, वहीं ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों को हटाने की मांग करता आ रहा है।

समझौते की संभावना कितनी?

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक से तुरंत किसी बड़े समझौते की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। हालांकि, यदि दोनों पक्ष संवाद जारी रखने और तनाव कम करने पर सहमत होते हैं, तो इसे एक सकारात्मक संकेत माना जाएगा। बातचीत का सफल होना इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश कितनी लचीलापन दिखाते हैं।

वार्ता विफल होने पर क्या होंगे परिणाम

यदि ओमान में होने वाली यह वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और बढ़ सकता है, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है और वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा अप्रत्यक्ष टकराव और गहराने की आशंका भी जताई जा रही है।

ओमान की भूमिका

ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इससे पहले भी कई अहम और संवेदनशील वार्ताएं ओमान की जमीन पर हुई हैं। इसी कारण इस बार भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद है कि ओमान बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष

ओमान में होने वाली यह वार्ता भले ही किसी त्वरित समाधान की गारंटी न दे, लेकिन यह साफ कर देगी कि अमेरिका और ईरान टकराव के बजाय संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं या नहीं। आने वाले कुछ घंटे पश्चिम एशिया की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध सूचनाओं और वर्तमान कूटनीतिक परिस्थितियों के आधार पर तैयार एक विश्लेषणात्मक प्रस्तुति है।

मेघालय की कोयला खदान में धमाका, 18 मजदूरों की मौत; कई अब भी फंसे होने की आशंका

मेघालय 06/02/2026

मेघालय के ताशखाई इलाके में स्थित एक कोयला खदान में हुए भीषण धमाके ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 18 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि खदान के भीतर अभी और लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। हालांकि, देर शाम अंधेरा होने के कारण बचाव कार्य रोकना पड़ा, जिसे सुबह फिर से शुरू किया जाएगा।

अचानक हुआ धमाका, निकलने का मौका नहीं मिला प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खदान के भीतर काम चल रहा था तभी अचानक तेज धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि अंदर मौजूद मजदूर बाहर निकल ही नहीं पाए। कई मजदूर मौके पर ही इसकी चपेट में आ गए।

मृतकों में असम के मजदूर, पहचान की प्रक्रिया जारी प्रशासन का कहना है कि मृतकों में अधिकांश मजदूर असम के रहने वाले बताए जा रहे हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतकों में से एक मजदूर असम के कटिगारा क्षेत्र के बिहारा गांव का निवासी था।

कटिगारा इलाके के नौ मृतकों की पहचान हो चुकी है। वहीं, इस हादसे ने एक ही परिवार को भी उजाड़ दिया है। राजपुर गांव के रहने वाले अनवरा हुसैन और दिलदार हुसैन, जो रिश्ते में चाचा-भतीजा थे, दोनों की इस हादसे में मौत हो गई।

सुरक्षा घेरे में इलाका, जांच शुरू खदान हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र को सील कर सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि राहत कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने बताया कि धमाके के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती तौर पर गैस रिसाव या तकनीकी खामी को हादसे की वजह माना जा रहा है।

दुर्घटना पर फिर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिमजदूरों की सुरक्षा और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

PMO ने की आर्थिक सहायता की घोषणा कोयला खदान हादसे पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
हादसे में घायल लोगों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी।

सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

छत्तीसगढ़ में खैर लकड़ी तस्करी का मामला:जब्त लकड़ी वन विभाग के कब्जे में

छह टन खैर की लकड़ी_जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

घरघोड़ा लैलूंगा/रायपुर_05/02/2026

रायगढ़ जिले के घरघोड़ा-लैलूंगा वन क्षेत्र में अवैध खैर लकड़ी तस्करी का मामला सामने आया है, जहां राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। एसडीएम दुर्गा प्रसाद अधिकारी के नेतृत्व में 10 टन खैर लकड़ी जब्त कर वन विभाग को सौंप दी गई।

खबर पर मिली जानकारी और मुख्य तथ्य की बात करें तो
छापेमारी भेंगारी ग्राम पंचायत के राजस्व वन भूमि पर हुई, जहां ट्रैक्टर में लकड़ी अंतरराज्यीय तस्करी के लिए तैयार की जा रही थी।जिसमें चार आरोपी—कमल प्रकाश, प्रेम, संतोष और राजेश (सभी उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के मैसोर गांव निवासी)—हिरासत में लिए गए।

टीम में घरघोड़ा एसडीओ वन आसुतोष मंडावा, तहसीलदार मनोज कुमार गुप्ता, नायब तहसीलदार सहोदर राम और वन परिक्षेत्र अधिकारी सी.के. राठिया शामिल रहे।

तस्करी पर ग्रामीण का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से वन कर्मियों के संरक्षण में रातोंरात जंगलों की कटाई और तस्करी चल रही थी। रात्रि गश्त की लापरवाही से तस्करों के हौसले बुलंद हो गए थे।

कार्रवाई प्रभाव क्या पड़ेगा
प्रशासन की इस कार्रवाई से वन माफिया में हड़कंप मच गया है, और वन विभाग आरोपी पूछताछ व वैधानिक कार्रवाई में जुटा है। यह घटना छत्तीसगढ़ में बढ़ती लकड़ी तस्करी की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण है।


खास चर्चा: ‘करोड़पति चूहों’ की दावत और गिरती गाज!

वे ‘खास चूहे’ जिन्हें न पिंजरे का डर है, न बिल्ली का… बस 7 करोड़ के धान का शौक है!”जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

कवर्धा/कबीरधाम_05/02/2026

ज्योतिपति: चश्मा ठीक करते हुए, गंभीर और दार्शनिक मुद्रा में।
ज्वाला: बेबाक, तेवर वाली और सिस्टम को आइना दिखाने वाला युवा_तुर्क दोनों चौपाल में बैठे चर्चा करने लगे।

ज्योतिपति: (लंबी सांस लेते हुए) ज्वाला, कलयुग अपनी चरम सीमा पर है। विज्ञान कहता है कि चूहा छोटा सा जीव है, लेकिन कवर्धा के जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा जी के ज्ञान ने जीव विज्ञान की परिभाषा ही बदल दी। 7 करोड़ का धान… और आरोप लगा दिया बेचारे छोटे से मूक प्राणी पर!
ज्वाला: (तंज कसते हुए) अरे ज्योतिपति जी, आप भी किन मासूमों की बात कर रहे हैं? ये कवर्धा के चूहे हैं, कोई आम चूहे नहीं! इन्हें धान की बोरी और तिजोरी के बीच का फर्क बखूबी पता है। 26 हजार क्विंटल धान डकार गए और डकार तक नहीं ली। लेकिन अफसोस, मिश्रा जी की ये ‘चूहा-थ्योरी’ रायपुर में बैठे साहबों को हजम नहीं हुई और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

ज्योतिपति: बिल्कुल, निलंबन का आदेश तो जारी हो गया। लेकिन ज्वाला, सोचने वाली बात ये है कि जब 7 जनवरी को उन्होंने यह बयान दिया कि “मौसम की मार, दीमक और चूहों ने खेल किया है”, तो क्या उन्हें लगा था कि जनता इसे सच मान लेगी? 2026 में हम चांद पर बसने की सोच रहे हैं और यहां साहब चूहों को ‘करोड़पति’ बनाने पर तुले हैं।
ज्वाला: ज्योतिपति जी, असल खेल तो ‘चारभाठा’ संग्रहण केंद्र के पीछे छिपा है। वहां सीसीटीवी कैमरों के साथ जो छेड़छाड़ हुई, वो क्या चूहों ने की थी? या दीमक ने तारों को कुतर दिया था? प्रितेश पांडेय तो पहले ही नप चुके हैं, अब मिश्रा जी पर गाज गिरी है क्योंकि उन्होंने मीडिया में ‘भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना’ ज्ञान बांटा था।

ज्योतिपति: (कागज पलटते हुए) सही कहा। 3 फरवरी को जो निलंबन की कार्रवाई हुई, उसने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। विपक्षी दल—चाहे कांग्रेस हो या जोगी कांग्रेस—सब सड़कों पर हैं। वे पूछ रहे हैं कि इन ‘दो पैरों वाले चूहों’ की तलाश कब होगी जो सिस्टम को भीतर ही भीतर खोखला कर रहे हैं?
ज्वाला: सीधी बात है ज्योतिपति, जब फाइलों में अनाज ज्यादा और गोदामों में कम होता है, तो अक्सर ‘चूहे’ ही काम आते हैं। पर इस बार चूहे भारी पड़ गए! मिश्रा जी घर बैठ गए हैं और फाइलें अब उनकी जगह बोल रही हैं। जनता देख रही है कि ये 7 करोड़ की कमी आखिर किसकी जेब की शोभा बनी है।

ज्योतिपति: खैर, प्रशासन ने जांच समिति तो बिठा दी है। अब देखना यह है कि जांच में ‘चूहे’ मिलते हैं या ‘चेहरे’।
ज्वाला: चेहरे ही मिलेंगे ज्योतिपति, बस चश्मा उतार कर देखने की जरूरत है!

सिद्धि माता मंदिर क्षेत्र में बलि व अवैध गतिविधियों पर रोक की मांग

सर्व ब्राह्मण समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।जनचौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक।

बेमेतरा_05/02/2026

जिले के ग्राम संडी में स्थित सिद्धि शक्ति पीठ सिद्धि माता मंदिर परिसर एवं उसके आसपास क्षेत्र में पशु बलि, खुलेआम मांस सेवन एवं शराबखोरी जैसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग को लेकर सर्व ब्राह्मण समाज, जिला–बेमेतरा द्वारा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है।

ज्ञापन में बताया गया है कि विगत कुछ माह से मंदिर परिसर के आसपास तथा संडी मार्ग व खेतों में बाहर से आने वाले लोगों द्वारा बड़ी संख्या में बकरों की बलि दी जा रही है। इसके बाद वहीं मांस सेवन एवं शराब का सेवन खुलेआम किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र का धार्मिक एवं सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पवित्र स्थल पर बलि प्रथा निषिद्ध है, इसके बावजूद यह गतिविधियां लगातार जारी हैं।

समाज ने बताया कि पूर्व में इस तरह की असामाजिक गतिविधियों के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया था, जिसके बाद एसडीओपी के समझाइश से कुछ समय के लिए स्थिति नियंत्रित हुई थी, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई स्थायी न होने के कारण समस्या पुनः गंभीर रूप ले रही है। मंदिर प्रशासन को भी अवगत कराया गया, परंतु अपेक्षित परिणाम नहीं निकल सके।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 3 फरवरी 2026 को शिवगंगा सलधा आश्रम के सामने स्थित बजरंगबली मंदिर प्रांगण में अन्य ग्राम से आए लोगों द्वारा पुनः बकरों की बलि देने का प्रयास किया गया, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। समाज ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

सर्व ब्राह्मण समाज ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर एवं आसपास क्षेत्र में बलि, शराबखोरी एवं अन्य असामाजिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए तथा इसकी पुनरावृत्ति होने पर संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं होती हैं तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।ज्ञापन देने वालों में सर्व ब्राह्मण समाज से लेखमणि पाण्डेय प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला जिलाध्यक्ष दीपक पाण्डेय प्रदेश प्रचार सचिव डॉ शिवेंद्र त्रिपाठी राकेश तिवारी गिरीश मिश्रा रामाधार तिवारी अजय शुक्ला प्रमुख थे।