22.1 C
Raipur
Sunday, November 1, 2026
Home Blog Page 195

राष्ट्र सम्मान का समय बढ़ाया गया:वंदे मातरम् पर नया नियम:

0

नई दिल्ली_ 11/02/2026

राष्ट्रगीत किसी भी राष्ट्र के लिए सम्मान होता है।राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और सरकारी नियमों में बड़े बदलाव अब सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान और उसका समय पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगा।

अब 2 छंद नहीं, पूरा गीत गूंजेगा।
अभी तक सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो छंद (Stanzas) गाए जाते थे, जिसमें करीब 1 मिनट लगता था। लेकिन अब गृह मंत्रालय ने इसके पूरे 6 छंद अनिवार्य कर दिए हैं। अब इसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी।

कब-कब बजाना जरूरी होगा?
जब तिरंगा (झंडा) फहराया जाएगा।राष्ट्रपति, राज्यपाल या उपराज्यपाल के आने और जाने के समय।राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले और ठीक बाद में।

3 मिनट 10 सेकंड की होगी राष्ट्र वंदना
वंदे मातरम् हमारी आजादी की लड़ाई का मंत्र था। सरकार का यह कदम उस पूरे गीत को सम्मान देने जैसा है। अब 3 मिनट 10 सेकंड तक राष्ट्र की वंदना गूंजेगी और हर भारतीय को इसके सम्मान में खड़ा होना होगा।

अनुशासन ही राष्ट्र की पहचान है।
अगर किसी प्रोग्राम में दोनों गीत होने हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रीय गीत) गाया जाएगा और उसके बाद ‘जन गण मन’ (राष्ट्रगान) होगा।वहां मौजूद हर व्यक्ति को ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा होना होगा। यह सम्मान का प्रतीक है। अगर आप सिनेमा हॉल में कोई फिल्म या डॉक्यूमेंट्री देख रहे हैं और उसमें वंदे मातरम् बजता है, तो वहां खड़े होने की जरूरत नहीं है, ताकि हॉल में अफरातफरी न मचे।

निजी कंपनियों के लिए इसे बजाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन अगर वे बजाती हैं, तो उन्हें मंत्रालय द्वारा जारी ‘आधिकारिक संस्करण’ (3 मिनट 10 सेकंड) और खड़े होने के नियम का पालन करना होगा।

स्कूलों के लिए विशेष निर्देश।
निजी हो या सरकारी, सभी स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे अपने दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से करें। कई राज्यों ( उत्तर प्रदेश) ने इसे पहले ही सभी शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य करने की घोषणा की है।

क्या.? मुर्शिदाबाद में बाबर की सोच फिर जिंदा हो रही है?

दृश्य बाबरी मस्जिद निर्माण,मीडिया की खबर देखकर ज्वाला के चेहरे पर गुस्सा है और ज्योतिपति शांत पर गंभीर मुद्रा में हैं)

मुर्शिदाबाद(भारत)_11/02/2026

(ज्योतिपति-ज्वाला संवाद)
ज्वाला: ज्योतिपति जी, क्या देख रहे हैं आप? क्या आपको दिखाई नहीं दे रहा कि मुर्शिदाबाद में क्या हो रहा है? हुमायूं कबीर ‘बाबरी’ के नाम पर नई इबारत लिख रहे हैं। क्या बाबर अब भी जिंदा है?
ज्योतिपति: (लंबी सांस लेकर) ज्वाला, बाबर तो मर गया, लेकिन उसकी छोड़ी हुई नफरत की लकीरें आज भी कुछ लोग खींचने की कोशिश कर रहे हैं। जिस नाम ने भारत की सभ्यता को घायल किया, उसी नाम को फिर से प्रतिष्ठित करना केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि एक चुनौती है।

ज्वाला: चुनौती? यह तो सीधा प्रहार है! हमारी आस्था पर, हमारे इतिहास पर। जब अयोध्या में कलंक मिट गया, तो मुर्शिदाबाद में ये नया बीज क्यों बोया जा रहा है? कहाँ है इस देश का कानून? कहाँ सो रहे हैं वो बड़े-बड़े ज्ञान बघारने वाले IAS-IPS अधिकारी? क्या उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
ज्योतिपति: जिम्मेदारी तो सबकी है, ज्वाला। लेकिन सत्ता और व्यवस्था कभी-कभी ‘वोट बैंक’ और ‘तुष्टीकरण’ के चश्मे से देखने लगती है। अधिकारी कागजों में उलझे हैं और प्रशासन कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है। पर क्या राष्ट्र की अखंडता के लिए हर बार कोर्ट के धक्के खाना जरूरी है?

ज्वाला: यही तो विडंबना है! अगर ये बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का मामला होता तो अब तक धाराएं लग चुकी होतीं। जब अमन के दुश्मनों की बात आती है, तो सबको सांप सूंघ जाता है। क्या हम अपनी सभ्यता को फिर से उन्हीं आक्रांताओं के नाम पर मिटने देंगे? बाबर लूटने आया था, और आज उसके नाम पर ये निर्माण क्या देश को बांटने की नई साजिश नहीं है?

ज्योतिपति: ज्वाला, तुम्हारी आग सही है। किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र में विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन आत्मघाती होता है। 1947 में हमने जमीन खोई, अब अगर हमने अपनी सांस्कृतिक पहचान और चेतना खो दी, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। सरकार और कोर्ट को इस ‘बाबरी सोच’ को वक्त रहते रोकना होगा।
ज्वाला: बिल्कुल! ‘जन चौपाल 36’ चुप नहीं रहेगा। हम पूछेंगे सवाल— कि जब तक भारत का नागरिक जागृत है, तब तक किसी बाबर की सोच को यहाँ पनपने नहीं दिया जाएगा। प्रशासन जागे, इससे पहले कि जनता का धैर्य जवाब दे दे!


नेवारी(कवर्धा )शराब दुकान का महिलाओं ने किया विरोध कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

दृश्य: नेवारी गांव की चौपाल
(पात्र: ज्वाला – एक जागरूक युवा, ज्योतिपति – गांव के बुजुर्ग/जानकार, और अन्य ग्रामीण)

कवर्धा /छत्तीसगढ़_10/02/2026

ज्वाला: (अखबार पटकते हुए) देख रहे हो ज्योतिपति काका? ये कवर्धा-बिलासपुर रोड वाले नेवारी गांव में नई शराब दुकान खोलने की पूरी तैयारी हो गई है। महिलाएं कलेक्टर ऑफिस तक दौड़ लगा आई हैं, लेकिन प्रशासन टेंडर फाइनल करने में तुला है। मेरा तो सीधा सवाल है काका—क्या सरकार के पास कमाई का और कोई रास्ता नहीं बचा?

स्कूलों में मास्टर नहीं हैं, जो हैं वो कभी-कभार नशे में मिल रहे हैं, और इनको फिक्र है तो बस मधुशाला की!

ज्योतिपति: (गहरी सांस लेकर) ज्वाला, तुम्हारी बात में दम तो है बेटा। ये सिर्फ नेवारी गांव का दर्द नहीं है।पास में बेमेतरा शहर के बीचों-बीच देख लो, जहां कलेक्टर ऑफिस पास में है, लड़कियों का हॉस्टल है, पुराना कॉलेज है, वहां भी प्रीमियम दुकान खोलकर पूरे रहवासी इलाके को शराब का अड्डा बना दिया गया है। इसे सुशासन तो नहीं कहेंगे।

ज्वाला: (तंज कसते हुए) काका, मुझे तो वो दिन याद आ रहे हैं जब यही लोग गंगाजल की कसम खाने वाली पिछली सरकार को घेरते थे कि शराबबंदी क्यों नहीं हुई? आज जब खुद कुर्सी पर बैठे हैं, तो 1 अप्रैल 2025 से 67 नई दुकानें और खोल दीं! अब राज्य में कुल 741 दुकानें हो जाएंगी। ये कैसा दोहरा मापदंड है?

ज्योतिपति: सरकार का तर्क तो ये है कि ग्रामीण इलाकों में ‘अवैध शराब’ रोकने के लिए ये सरकारी दुकानें खोली जा रही हैं। लेकिन सरकार ये नहीं समझ रही कि दुकान कानूनी हो या गैर-कानूनी, वो घर तो उजाड़ती ही है। मैंने अपनी आंखों से कितने हंसते-खेलते परिवारों को बिखरते देखा है। बच्चों का भविष्य धूल में मिल रहा है।

ज्वाला: (गुस्से में) अजीब बात है! एक तरफ नशा मुक्ति केंद्र (Rehab Centers) चलाने का ढोंग और दूसरी तरफ घर-घर शराब पहुंचाने की तैयारी? क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सिर्फ नशे की गर्त में धकेलने के लिए सरकार चुनते हैं? हमें शिक्षा चाहिए, रोजगार चाहिए, अस्पताल चाहिए… ये सरकार हमें बोतल थमा रही है!

एक अन्य ग्रामीण: और सुना है नेवारी में तो जमीन मालिक ने पहले से ढांचा भी खड़ा कर लिया है, जैसे उसे पता हो कि मंजूरी यहीं की मिलनी है। ये तो मिलीभगत लग रही है।

ज्योतिपति: देखो भाइयों, जब तक जनता जागरूक होकर विरोध नहीं करेगी, ये सिलसिला थमेगा नहीं। नेवारी की महिलाओं ने मशाल जलाई है, अब पूरे कवर्धा को सोचना होगा कि हमें विकास के नाम पर शराब चाहिए या अपने बच्चों का सुरक्षित भविष्य।


छत्तीसगढ़ वन विभाग का कारनामा: 2.5 करोड़ खर्च, प्लांटेशन का नामोनिशान नहीं

बस्तर/36 गढ़_ 10 फरवरी 2026

बैलाडीला की संवेदनशील राजा बंगला क्षेत्र में वन विभाग के पौधरोपण प्रोजेक्ट पर खबर सूत्रों से ली गई जानकारी अनुसार अब इस मुद्दे पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एनएमडीसी के क्षेत्र में खनन से कटे पेड़ों की भरपाई के लिए 132 हेक्टेयर में 2.5 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जमीन पर न पौधे न कोई काम।

बात करें केंद्र सरकार की तो महती कार्ययोजना तहत “एक पेड़ मां के नाम” अभियान पर जोर दे रहे हैं, एक-एक पेड़ की बात कर रहे हैं, लेकिन यहां 2.5 करोड़ खर्च के बाद पेड़ का बीज तक नहीं दिख रहा।

खबर सूत्रों के हवाले से अब जानकारी है कि केवल साइन बोर्ड और 10 बैग पुराना सीमेंट मिला। एस्टीमेट में तालाब, सोलर सिस्टम, बोरवेल, फेंसिंग जैसी सुविधाएं बताईं, लेकिन खबर देखी हकीकत कुछ और है खर्चों करोड़ों में और हासिल पेड़ शून्य। खर्च ब्रेकअप: फेंसिंग पर 24 लाख, पौधे तैयार करने पर 67 लाख, गड्ढा खुदाई पर 42 लाख।लाखों गड्ढे करने थे पर उस परिक्षेत्र में सिर्फ 1 हजार गड्ढे दिखे, जबकि 1 लाख होने चाहिए थे।

पिछले 5 साल से वन मंडल अधिकारी द्वारा जांच का बहाना ही बनाया जा रहा है कोई कार्रवाई नहीं।जवाब मांगने पर रेंजर का कहना है , “मौके पर जाकर देखेंगे, तब बताएंगे।”यह तो हद ही हो गई कि मौके पर गए ही नहीं है यह देखने की काम हुआ है कि नहीं ।दंतेवाड़ा की कटाई दूसरे जिलों में दिखाने का खेल चल रहा। विभाग पौधों की संख्या बताने को तैयार नहीं।

क्या.?बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी द्वारा बचेली और किरंदुल में खनन से हुई वन कटाई की भरपाई के लिए वर्षों से कागजों पर ही पौधरोपण दिखाया जा रहा है.!!

12 फरवरी को हड़ताल पर रहेंगे 30 करोड़ मजदूर:600 जिलों में प्रभाव दिखेगा

राष्ट्रव्यापी मजदूर हड़ताल पर भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल का समर्थन:_ब्रजेश शर्मा,दीपक पाण्डेय

नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि हड़ताल का असर देश के 600 जिलों में दिखेगा। ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रहेंगे। दूसरे राज्यों में भी आंदोलन का बहुत ज्यादा असर होगा।

अलग-अलग मांगों को लेकर देशभर के 30 करोड़ से ज्यादा मजदूर हड़ताल करने जा रहे हैं। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त संगठन ने सोमवार को कहा कि 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान जारी है। उम्मीद है कि देश भर से कम से कम 30 करोड़ मजदूर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।

यूनियनों ने केंद्र सरकार की “मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों” के खिलाफ अपना विरोध दिखाने के लिए यह हड़ताल बुलाई है। अमरजीत कौर ने मीडिया को बताया कि इस बार 12 फरवरी (बृहस्पतिवार) को बुलाए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 30 करोड़ से कम मजदूर हिस्सा नहीं लेंगे।

पिछली बार हुए विरोध-प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ मजदूरों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि हड़ताल का असर देश के 600 जिलों में दिखेगा। जो पिछले साल के लगभग 550 जिलों से ज्यादा है। कौर ने कहा कि ट्रेड यूनियनों के भागीदारी के दावे जिला और ब्लॉक स्तर पर की गई मजबूत तैयारियों पर आधारित हैं।

बीजेपी शासित राज्यों में प्रस्तावित हड़ताल के असर के बारे में उन्होंने कहा कि ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रहेंगे। संयुक्त फोरम के एक बयान के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी और ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन और लामबंदी में शामिल होने के लिए पूरा समर्थन दिया है।

लगभग सभी राज्यों में सभी क्षेत्रों – सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों में, ग्रामीण और शहरी भारत में मजदूरों, किसानों और आम जनता के बीच बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए हैं।

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास?: विपक्ष को बोलने से रोका, कांग्रेस की दोहरी रणनीति, कल 8 राज्यों की बड़ी बैठक

नई दिल्ली, 09 फरवरी 2026

लोकसभा में विपक्ष को बोलने से रोके जाने और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बीच कांग्रेस ने दोहरी रणनीति अपनाई है। सदन में हंगामा एक ओर, वहीं सड़क पर 7-8 राज्यों के नेताओं के साथ बैठक का ऐलान।

राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोका गया, तो वे बाहर आकर विपक्षी नेताओं से मिले। बड़ी बैठक बुलाई जा रही है, जिसमें स्पीकर पर अविश्वास, मनरेगा और अमेरिका के साथ ट्रेड डील जैसे मुद्दों पर रणनीति बनेगी। खबरों के मुताबिक, यह बैठक कल (10 फरवरी) सुबह 10 बजे कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की अगुवाई में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और तमिलनाडु के नेता शामिल होंगे। संगठन मजबूती और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।

बिल पर पहली दिन से विरोध कर रही कांग्रेस अब इसे जन मुद्दा बना रही है। विपक्ष का दावा है कि यह लड़ाई सिर्फ सदन तक सीमित नहीं, बल्कि मनरेगा, ट्रेड डील और यूजीसी जैसे हर नागरिक से जुड़े सवालों की है। बीजेपी सामान्य वर्ग के गुस्से के घेरे में है। कल की बैठक के बाद विपक्ष की रणनीति साफ हो जाएगी।


बस्तर पण्डुम में उमड़ा रिकॉर्ड जनसैलाब, अमित शाह का सख्त संदेश—“हथियार छोड़ो, सम्मान के साथ मिलेगा पुनर्वासन”

जगदलपुर/छत्तीसगढ़_09/02/2026

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सांस्कृतिक पहचान और जनजातीय अस्मिता का प्रतीक ‘बस्तर पण्डुम’ इस वर्ष प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों की तुलना में 54,745 लोग भाग लिये जो बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के सशक्त उभार को दर्शाता है।

बस्तर पण्डुम एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जिसमें जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं को समेटे बस्तर के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

तीन दिवसीय संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने संबोधन में नक्सलवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,
“हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, हमारी लड़ाई उन लोगों से है जो मासूम जनता के लिए खतरा बनते हैं। आदिवासी गांवों में लगाए जाने वाले आईईडी से यह भी नहीं पता होता कि किसका पैर पड़ेगा और कौन हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएगा या किस निर्दोष की जान चली जाएगी।”

उन्होंने शेष बचे नक्सलियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार सम्मान के साथ उनका पुनर्वासन करेगी। साथ ही मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा तैयार किए गए पुनर्वासन पैकेज की सराहना करते हुए कहा कि इससे बेहतर और आकर्षक पैकेज संभव नहीं हो सकता।

अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग गांवों में गोली चलाएंगे, आईईडी लगाएंगे, खेतों, सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। “हाथ में हथियार होगा, तो जवाब भी हथियार से दिया जाएगा,” उन्होंने कहा।

समापन पर उन्होंने कहा कि कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसे देशों के उदाहरण बताते हैं कि हिंसा से किसी का कल्याण नहीं हुआ, जबकि आज बस्तर पूरे देश के सामने एक उभरते हुए, आशावान क्षेत्र के रूप में नजर आ रहा है—जहाँ संस्कृति, विकास और शांति साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

10 साल में चंद्रमा पर मानव बस्ती! एलन मस्क ने किया बड़ा ऐलान

नई दिल्ली, 9 फरवरी 2026

स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क ने चंद्रमा पर मानव बस्ती के लिए बड़ा ऐलान किया। कंपनी ने मंगल प्लान टालकर चंद्रमा को प्राथमिकता दी। “चंद्र सिटी 10 साल में तैयार, आत्मनिर्भर बस्ती बनेगी,” मस्क ने कहा। नासा आर्टेमिस के तहत स्पेसएक्स मुख्य ठेकेदार। यह बस्तर जैसी सांस्कृतिक छवि बदलने से अलग, अंतरिक्ष में मानव विस्तार का कदम है।

स्पेसएक्स इस पर सक्रिय रूप से काम कर रही है।स्पेसएक्स का चंद्रमा शहर प्लान “self-growing city” पर आधारित है, जो 10 साल से कम समय में आत्मनिर्भर बस्ती बनेगी। यह नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम से जुड़ा है।

एलन मस्क ने हाल ही में स्पेसएक्स के माध्यम से चंद्रमा पर 10 साल के अंदर मानव बस्ती बसाने का ऐलान किया है। यह खबर 8-9 फरवरी 2026 की है और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्ट है।

ऐलान का विवरण
मस्क ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि स्पेसएक्स अब मंगल ग्रह से पहले चंद्रमा पर “खुद-ब-खुद बढ़ने वाली सिटी” (self-growing city) बनाने पर फोकस कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह 10 साल से कम समय में संभव है, जबकि मंगल पर 20 साल से ज्यादा लगेंगे।

कारण और योजना
मंगल यात्रा हर 26 महीने में संभव होती है, लेकिन चंद्रमा पर हर 10 दिन में लॉन्च हो सकता है—इसलिए लॉजिस्टिक्स आसान। स्पेसएक्स नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है और 2027 तक चंद्र लैंडर तैयार करने पर काम कर रही है।

पृष्ठभूमि
मस्क ने पहले मंगल पर 2024 तक मानव भेजने का लक्ष्य रखा था, लेकिन देरी हुई। अब राष्ट्रपति ट्रंप के चंद्र मिशन समर्थन से यह योजना तेज हुई है। मंगल अभी भी लॉन्ग-टर्म विजन है।

भारत-नेपाल सीमा 72 घंटे के लिए बंद: नेपाल चुनाव के कारण

मोरंग (नेपाल), 9 फरवरी 2026

पड़ोसी देश नेपाल में 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनावों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर चौकियां 72 घंटे के लिए बंद रहेंगी। इस निर्णय पर दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों ने सहमति जताई है, ताकि अवांछित तत्वों की घुसपैठ रोकी जा सके।

शुक्रवार को नेपाल के मोरंग जिले के बीरत नगर में नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और भारत के सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के बीच 16वीं उप महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा नियंत्रण को कड़ा करने पर जोर दिया। एपीएफ के प्रवक्ता डीआईजी बिष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया, “हमने भारतीय पक्ष से चुनाव से दो दिन पहले सीमा चौकियों को बंद करने का अनुरोध किया था, जिस पर वे सहमत हो गए।”

समझौते के अनुसार, चुनाव दिवस सहित तीन दिनों (कुल 72 घंटे) तक सीमा चौकियां पूरी तरह बंद रहेंगी। इससे यात्रियों, व्यापारियों और अन्य आवागमन पर असर पड़ेगा। दोनों देशों के अधिकारी मतदान प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न पहुंचे, इसके लिए सतर्क हैं।

यह कदम भारत-नेपाल संबंधों में सुरक्षा समन्वय का उदाहरण है, जो अतीत में भी कई मौकों पर उठाए गए हैं। नेपाल के संसदीय चुनाव राष्ट्रीय सभा और प्रतिनिधि सभा के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिसमें विभिन्न पार्टियां मैदान में हैं।डीडी1(इनपुट-आईएएनएस)


केंद्रीय मंत्री अमित शाह आज बस्तर पण्डुम महोत्सव के समापन के मुख्य अतिथि

जगदलपुर/छत्तीसगढ़ _9 फरवरी 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे के अंतिम दिन बस्तर पण्डुम महोत्सव के भव्य समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था, जिन्होंने ‘बस्तर पण्डुम 2026’ का शानदार उद्घाटन किया।

समापन समारोह आज सुबह 11 बजे जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोक कला, नृत्य, संगीत, खान-पान और परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला यह तीन दिवसीय उत्सव नक्सल प्रभावित क्षेत्र की सकारात्मक छवि गढ़ने का प्रयास है।

अमित शाह के दौरे से पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं—तीन स्तरीय बैरियर, भारी पुलिस बल और ड्रोन निगरानी। सरकार का लक्ष्य नक्सलवाद उन्मूलन के बाद बस्तर के आदिवासियों और युवाओं को रोजगार के वैकल्पिक अवसर प्रदान करना है। अब तक नक्सलवाद की छाया में रहा बस्तर अपनी सांस्कृतिक विरासत से विश्व पटल पर चमकेगा।

यह आयोजन बस्तर को पर्यटन और सांस्कृतिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।