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मुख्यमंत्री ने किया ‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन

रायपुर, 04 फरवरी 2026

विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में ‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आर्द्रभूमियों एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण हेतु चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जल ही जीवन है और आर्द्र_भूमियां मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रदेश की मातृशक्ति को इस पवित्र अभियान से जोड़ना एक प्रेरणा दायी और दूरदर्शी पहल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नदियां, तालाब, कुएं, पोखर एवं आर्द्रभूमियां केवल जल-स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी प्रकृति की पहचान हैं और इनका संरक्षण हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि महिलाएं आगे आएंगी तो जल-स्रोतों का संरक्षण एक सशक्त जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।

उल्लेखनीय है कि ‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान की संस्थापक एवं महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष श्रीमती प्रज्ञा निर्वाणी द्वारा प्रदेशभर में आर्द्र_भूमि संरक्षण को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत तालाबों, नहरों, कुओं, नदियों एवं अन्य प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए महिलाओं को संगठित किया जा रहा है।

इस अवसर पर प्रज्ञा निर्वाणी ने नवागढ़ स्थित गिधवा-परसदा-नगधा पक्षी विहार क्षेत्र को रामसर साइट घोषित किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा। पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में प्रसन्ना अवस्थी, प्राची शर्मा, प्रणीता शर्मा, आरविका अवस्थी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

तांत्रिक ने की पैसों की बारिश!!या दिखाया हमारी कमजोरी का विज्ञापन

यह संवाद इस बात पर चोट करता है कि कैसे अंधविश्वास और नशे की लत समाज को खोखला कर रही है। रातों-रात बाजी पलटने का लालच ही ठगी का सबसे बड़ा कारण बनता है। हमें ‘चमत्कार’ नहीं, ‘जागरूकता’ की आवश्यकता है। जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक।

बरगद के पेड़ के नीचे गांव की चौपाल पर ज्योतिपति बैठा अखबार पढ़ रहा है और तांत्रिक ने कैसे ललचा दिया युवक को उस खबर पर खोया हुआ।

ज्वाला: (गुस्से में मोबाइल फोन बेंच पर पटकते हुए) ज्योतिपति भैया, ये सब क्या हो रहा है हमारे राज्य में? एक तरफ हम मंगल ग्रह पर जाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ ये तांत्रिक सरेआम ढाई लाख को ढाई करोड़ करने का दावा कर रहे हैं! मेरा खून खौलता है यह देखकर कि लोग कितने भोले हैं और मूर्ख भी आज भी लोग चमत्कार पर विश्वास करते है।

ज्योतिपति: ज्वाला, गुस्सा समाधान नहीं है। यह तंत्र-मंत्र का कारोबार तुम्हारी इसी ‘जल्दबाजी’ और ‘कम समय में बहुत कुछ पा लेने’ की भूख पर टिका है।
ज्वाला: (तमतमाते हुए) भूख क्यों न हो भैया? देखिए न, सरकारें शराब की दुकानें खोलकर युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही हैं, कमाई के चक्कर में घरों को उजाड़ रही हैं। जब चारों तरफ अंधेरा दिखता है, तो इंसान ऐसे ही किसी ‘चमत्कार’ की तलाश करता है। वो तांत्रिक वीडियो दिखा रहा था, नोटों की बारिश हो रही थी। मुझे लगा अगर एक बार बाजी मेरे हाथ आ गई तो, मेरा और मेरे गांव का भविष्य सुधर जाएगा।

ज्योतिपति: वही तो धोखा है! बिलासपुर के रतनपुर और बिल्हा की उस घटना को देखो। पाँच ठगों ने पंडित और तांत्रिक बनकर लोगों को फंसाया। उन्होंने ढाई लाख रुपये ठग लिए और जब पीड़ित को अहसास हुआ, तो बात मारपीट और लूटपाट तक पहुँच गई। आज वो तांत्रिक और उसे लूटने वाले, दोनों सलाखों के पीछे हैं। क्या बाजी पलटी? नहीं, बस तबाही हुई।

ज्वाला: (चिढ़कर) तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें? पढ़े-लिखे अधिकारी और नेता भी तो इन्हीं तांत्रिकों के पास जाते हैं बुलाकर अपना घर दफ्तर और पार्टी कार्यालय बंधवाते है। जब सिस्टम ही ढोंग और आडम्बर पर चल रहा हो, तो एक आम युवा क्या करे?

ज्योतिपति: तंत्र-मंत्र कोई समाधान नहीं, बल्कि एक मानसिक गुलामी है। ये ढोंगी तांत्रिक जानते हैं कि हम छत्तीसगढ़िया लोग सीधे हैं। वे इसी का फायदा उठाते हैं। समाज की कुरीतियां—चाहे वो अंधविश्वास हो या शराब का बढ़ता चलन—तभी खत्म होंगी जब तुम जैसे युवा अपनी ऊर्जा ‘शॉर्टकट’ खोजने में नहीं, बल्कि सही दिशा में सवाल पूछने में लगाएंगे।
ज्वाला: (कुछ शांत होते हुए) आप सही कह रहे हैं भैया। ये जो ‘पैसों की बारिश’ का वीडियो है, ये दरअसल हमारी कमजोरी का विज्ञापन है। हमें इस तांत्रिक कारोबार की जड़ों पर प्रहार करना होगा।

ज्योतिपति: बिल्कुल! जब तक लालच जिंदा है, ये तांत्रिक फलते-फूलते रहेंगे। असली चमत्कार मेहनत और तर्क में है, किसी तांत्रिक के झोले में नहीं। छत्तीसगढ़ को इस ढोंग से बाहर निकालना अब तुम युवाओं की जिम्मेदारी है।

भारत को बड़ी राहत: ट्रंप ने टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया, पीएम मोदी ने जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प को धन्यवाद दिया।(नमो ऐप)जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक

नई दिल्ली _03 फरवरी, 2026

भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में आज एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी-भरकम टैरिफ को घटाकर अब 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए साझा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने किया स्वागत
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर वार्ता की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा:
“अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बेहद खुशी हुई। ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ कम करने का फैसला स्वागत योग्य है। 140 करोड़ भारतीयों की ओर से मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।”

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इसके परिणाम वैश्विक शांति और समृद्धि के रूप में सामने आते हैं।

वार्ता के मुख्य बिंदु पर नजर
आर्थिक मजबूती: टैरिफ में इस कटौती से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी।
रणनीतिक साझेदारी: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पुष्टि की है कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है।
भविष्य की राह: भारत की विशाल बाजार शक्ति और अमेरिका की आर्थिक क्षमता का यह मेल आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

निजता का मामला:सुप्रीम कोर्ट की व्हाट्सऐप-मेटा को फटकार: ‘निजता का उलंघन न करें, भारत छोड़ दें’

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नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026:

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पर मेटा को दो टूक चेतावनी दी। चीफ जस्टिस भानु प्रताप सूर्यकांत की बेंच ने मंगलवार को सुनवाई में कहा, ‘आप नागरिकों की निजता के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। एक सिंगल डेटा भी शेयर करने की अनुमति नहीं मिलेगी। अगर कानून न मानें तो भारत छोड़ दें।’

यह मामला कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के 213.14 करोड़ जुर्माने से उपजा है, जिसे NCLAT ने बरकरार रखा। मेटा-व्हाट्सऐप ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। बेंच ने यूजर कंसेंट और ऑप्ट-आउट को ‘चालाकी’ करार दिया, कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।

CJI सूर्यकांत ने जोर देकर कहा, ‘टेक्नोलॉजी या बिजनेस के नाम पर निजता से समझौता नहीं।’ कोर्ट ने केंद्र को पार्टी बनाया और 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पर विचार का ऐलान किया। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी (मेटा के वकील) ने संविधान बेंच केस का हवाला दिया, लेकिन बेंच नाराज।

विशेषज्ञों ने इसे डिजिटल प्राइवेसी के लिए मील का पत्थर बताया। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने स्वागत किया। मेटा ने कहा कि वे DPDP एक्ट का पालन करेंगे। कपिल सिब्बल जैसे वकीलों का पुराना जुड़ाव चर्चा में है।

अपराध: नौकरी का झांसा देकर पीड़िता का शोषण

ज्योतिपति ने अपनी पोटली समेटते हुए कहा, “ज्वाला, यह मामला सिर्फ एक युवती के साथ हुए अन्याय का नहीं है, बल्कि उस भरोसे के कत्ल का है जो आम जनता सरकारी तंत्र पर करती है। जब शासकीय आवासों का इस्तेमाल शोषण के अड्डों के रूप में होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि समाज का नैतिक पतन चरम पर है।”जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

भिलाई छत्तीसगढ़ _03/02/2026

चौपाल की चर्चा: ज्योतिपति की व्यथा और ज्वाला का क्रोध
(ज्योतिपति ने हाथ में अखबार मरोड़ते हुए एक गहरी सांस ली। उनकी आंखों में गहरी निराशा और व्यवस्था के प्रति क्षोभ था। तभी ज्वाला अपनी चिर-परिचित आक्रामकता के साथ वहां पहुंचता है।)

ज्वाला: “क्यों ज्योतिपति? फिर ये माथा पकड़ के क्यों बैठे हो? क्या देख लिया इस कागज के टुकड़े में जो इतने गुमसुम हो? बताओ मुझे, नाम लो उस समस्या का… मैं अन्याय को जला राख कर दूंगा ऐसी व्यवस्था को जो तुम्हें परेशान करे!”

ज्योतिपति: (ठंडी आह भरकर) “ज्वाला, ये आग बाहर लगाने से कुछ नहीं होगा। यह आग तो भीतर लगनी चाहिए, उन हुक्मरानों के जमीर में जो रक्षक बनकर भक्षक बन गए हैं। देख रहे हो भिलाई की ये खबर? जिसे व्यवस्था का पहिया घुमाने के लिए ‘टाइम कीपर’ रखा गया था, उसी राजू कश्यप ने वक्त की गरिमा को ही कलंकित कर दिया।”

ज्योतिपति का विश्लेषण: रक्षक ही जब भक्षक बन जाए
ज्योतिपति ने अखबार के पन्नों पर उंगली रखते हुए ज्वाला को इस घृणित खेल के बारे में बताया:
नौकरी का झांसा, अस्मत का सौदा: पीडब्ल्यूडी का टाइम कीपर राजू कश्यप उर्फ कृपा शंकर, इस पूरे काले खेल का मास्टरमाइंड निकला। उसने एक मासूम युवती को सरकारी नौकरी का सपना दिखाया और उस सपने की आड़ में उसका शारीरिक शोषण शुरू किया। यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं है ज्वाला, यह एक पूरा गिरोह है। राजू ने खुद शोषण करने के बाद पीड़िता को मत्स्य विभाग के रिटायर्ड कर्मी भीम नारायण पांडेय के पास धकेल दिया। इसके बाद ठेकेदार संजय पंडित ने उसे ‘नौकरी से निकालने’ का डर दिखाकर अपनी हवस का शिकार बनाया।

व्यवस्था की खामियों का फायदा: हैरानी की बात तो यह है कि राजू कश्यप विभाग में रसूख इस कदर रखता है कि अपने परिवार के नाम पर ठेकेदारी भी चला रहा है और अपने भाई को सरकारी आवास पर अवैध कब्जा भी दिला रखा है।
ज्योतिपति की टिप्पणी: “जब विभाग के भीतर ही भ्रष्ट तंत्र की जड़ें इतनी गहरी हों, तो न्याय की गुहार किसके पास लगाई जाए? बड़े अधिकारियों की चुप्पी भी अब संदेह के घेरे में है।”

ज्वाला का आक्रोश और वर्तमान स्थिति
ज्वाला: (गुस्से में लाल होकर) “तो क्या ये दरिंदे अब भी खुले घूम रहे हैं? पुलिस क्या कर रही है?”
ज्योतिपति: “पुलिस हाथ-पांव तो मार रही है ज्वाला। गोविंद सिंह नागवंशी जैसे कुछ लोग गिरफ्त में आए हैं, लेकिन मुख्य आरोपी राजू कश्यप, बीएन पांडेय और संजय पंडित अभी भी फरार हैं। विभाग में खलबली मची है, क्योंकि सबको डर है कि अगर जांच की आंच ऊपर तक पहुंची, तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो जाएंगे।”

रसोई की ‘ज्वाला’ और ज्योतिपति की चिंता: क्या घर के मुखिया देंगे राहत?

ज्योतिपति सोच रहा था कहीं रसोई की आग में उसका पूरा वजूद खत्म न हो जाए,उसको अब भुक्तभोगी जनता का समग्र संसार दिखने लगा। जन चौपाल 36 /चौपाल से चौपाटी तक

डिजिटल डेस्क_03/02/2026

ज्योतिपति घर आया तो चाय पीने की इच्छा जताई। पत्नी उनसे भिड़ने को तैयार थी।आज के दौर में जब बाज़ार की कीमतें आसमान छू रही हैं, कुछ लिखोगे इस पर?!बाहर चाय 20 रुपए चटनी समोसे 40 रुपए ढंग की खाने की थाली 250 रुपए।

‘ज्योतिपति‘ (आम नागरिक) अपने खाली होते बटुए को देखकर गहरी चिंता में है। उसे समझ नहीं आ रहा कि थाली की यह दाल और सब्जियों की कीमतें किसी आर्थिक नीति का परिणाम हैं या फिर इसके पीछे बाज़ार की कोई छिपी हुई ‘ज्वाला’ काम कर रही है।

सदन से सड़क तक की हलचल:
हाल ही में जब सदन में कीमतों पर चर्चा हुई, तो ‘जनता की आवाज़ के प्रतिनिधि’ (विपक्ष) ने खाली सिलेंडरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या “आम आदमी के पसीने की कमाई” सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर रह गई है?
वहीं, ‘देश की तिजोरी के रखवाले‘ (वित्त मंत्री/सरकार) ने तर्क दिया कि वैश्विक परिस्थितियों और ‘बाहरी तूफानों’ की वजह से कीमतें प्रभावित हुई हैं। उनका दावा है कि वे हर संभव कोशिश कर रहे हैं ताकि घर के बजट को संतुलित रखा जा सके।

ज्योतिपति का नजरिया:
ज्योतिपति सोच रहा है कि जब ‘घर के बड़े मुखिया‘ और ‘तिजोरी के रखवाले’ आपसी बहस में उलझे होते हैं, तब ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। उसे डर है कि कहीं यह आर्थिक असमानता की ‘ज्वाला’ उसके बच्चों के भविष्य को प्रभावित न कर दे।

निष्कर्ष:
अब सवाल यह है कि क्या ‘घर के मुखिया‘ कोई ऐसा ठोस कदम उठाएंगे जिससे रसोई की आग शांत हो सके और ज्योति पति के चेहरे पर मुस्कान लौट आए? यह केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि भरोसे का सवाल है।

सदन में ‘अप्रकाशित पन्नों’ पर घमासान: क्या है 4 पन्नों का हिसाब

ज्वाला: “ज्योति पति, ये चार पन्ने क्या हैं? लाओ इन्हें मैं चुटकी में जला देता हूँ… समस्या खत्म!”
ज्योति पति: “नहीं ज्वाला! सच जलाना समाधान नहीं, साज़िश है। पन्ने जलने से फाइलों का बोझ तो कम हो सकता है, लेकिन उन रहस्यों का क्या!?? जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक

नई दिल्ली: 03/02/2026

ज्योति पति और ज्वाला चौपाल में अनायास मिले ज्वाला ने ज्योति पति के हाथ में चार पन्ने देखकर पूछा क्या ज्योति पति यह तुम्हारे हाथ में चार पन्ने क्या है ज्योति पति ने कहा यही तो समस्या है तो,, बोलो!?

संसद के उच्च सदन में बीते दिन उस वक्त गहमागहमी बढ़ गई, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक सैन्य अधिकारी की किताब के कुछ अंशों का मुद्दा उठाया। यह बहस केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह ‘ज्योति पति’ जैसे जागरूक नागरिकों के मन में कई सवाल खड़े कर रही है—क्या यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है या राजनीति की ‘ज्वाला’ में सुलगाया गया एक और विवाद?

सदन का घटनाक्रम: क्या है वह चार पन्नों का रहस्य?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कारवां पत्रिका में प्रकाशित, पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंशों का हवाला दिया। राहुल गांधी ने सदन में उन पन्नों को लहराते हुए सीधे तौर पर सवाल किया, “इन चार पन्नों में आखिर क्या लिखा है? क्या भारत की भूमि को किसी अन्य देश को सौंपने की कोई मजबूरी या साजिश रची जा रही है?”

राहुल गांधी के इन तीखे सवालों ने सदन का तापमान बढ़ा दिया। विपक्ष का आरोप था कि इन पन्नों में कुछ ऐसा है जिसे सरकार छिपाना चाहती है।

सत्ता पक्ष का पलटवार: ‘संवैधानिक मर्यादा’ का तर्क
विपक्ष के इन आरोपों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार का पक्ष स्पष्ट था:
👉 प्रमाणिकता का अभाव: रक्षा मंत्री ने सवाल किया कि जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई, तो उसका उल्लेख सदन में करने का क्या औचित्य है?
👉मर्यादा: सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना था कि सदन में केवल उन्हीं दस्तावेजों पर चर्चा हो सकती है जो संवैधानिक रूप से प्रमाणित हों। किसी अप्रकाशित किताब के अंशों को आधार बनाकर सेना या सरकार पर सवाल उठाना गलत है।

ज्योति पति का संदेह और ज्वाला की आशंका
इस पूरे विवाद के बीच, समाज का प्रतिनिधित्व करने वाला पात्र ‘ज्योति पति’ (सत्य का खोजी) असमंजस में है। उसे लग रहा है कि तथ्यों की इस धुंध में कुछ बड़ा छिपाया जा रहा है। क्या यह वास्तव में देशहित का मुद्दा है, या फिर इसके पीछे ‘ज्वाला’ (विवाद उत्पन्न करने वाली शक्तियां) का हाथ है जो देश की शांति को भंग करना चाहती हैं?

यह न्यूज/लेख प्रतीकात्मक पात्रों के माध्यम से समसामयिक घटनाओं का एक विश्लेषणात्मक चित्रण है। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है।”

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल की बैठक राजधानी में

मजदूर हितों की रक्षा एवं अधिकार दिलाने का संकल्प।
जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक

रायपुर, 02 फरवरी 2026

रायपुर में दिनांक 01 फरवरी 2026 (रविवार) को भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य मजदूरों एवं कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना तथा उनके अधिकारों को मजबूती प्रदान करना था।

बैठक में जिला पदाधिकारियों द्वारा मजदूरों के कामकाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं। जिला पदाधिकारी ने बैठक प्रभारी को विभिन्न मुद्दों से अवगत कराया, जिसमें मजदूर कल्याण योजनाएं, न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा एवं श्रम कानूनों का पालन प्रमुख थे।

बैठक प्रभारी ने BJMTUC की प्रदेशीय एवं राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने संगठन की उपलब्धियों, आंदोलनों एवं भविष्य की रणनीतियों पर प्रकाश डाला। प्राप्त जानकारियों पर उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मजदूर हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने एवं उनके पूर्ण अधिकार दिलाने का संकल्प लिया। संगठन ने श्रमिकों के लिए एकजुटता, न्यायपूर्ण मजदूरी एवं सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने पर बल दिया।

प्रमुख उपस्थित सदस्य:
– ब्रजेश शर्मा अध्यक्ष
– प्रदेश महासचिव: बृजेश कुमार पांडे
– सलाहकार: अजय चौहान, शैलेश सोनी – अमित मिश्रा
– महिला प्रदेश अध्यक्ष: जानकी मार्कण्डेय
– रायपुर महिला जिला अध्यक्ष: रंजना सिंह, श्रीमती देवांगन
– रायपुर जिला उपाध्यक्ष: शरद पांडेय, कयूम अली
– राजनांदगांव युवा जिला अध्यक्ष: शिवम यादव सहित जिला के अन्य सदस्यगण।

BJMTUC प्रदेशभर में मजदूर आंदोलन को तेज करने एवं उनके उत्थान के लिए कटिबद्ध रहेगी।


“प्रदेशभर में खाद्य निरीक्षण: लगातार औचक कार्रवाई”

महासमुंद में गुटखा जब्ती, 15.50 लाख का जुर्माना। जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक।

रायपुर, 02 फरवरी 2026

छत्तीसगढ़ में आमजन को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पोषणयुक्त खाद्य सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा लगातार औचक निरीक्षण एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

खाद्य विभाग ने धमतरी जिले में जनवरी 2026 में जिला धमतरी में 73 खाद्य परिसरों का निरीक्षण किया गया। 14 परिसरों को सुधार के निर्देश दिए गए। 1 नमूना संग्रहित कर 2 प्रकरण एडीएम न्यायालय में प्रस्तुत किए। उपभोक्ता शिकायत पर रमन स्वीट्स से ‘ढोकना’ का नमूना लिया गया। अखबारी कागज के उपयोग के विरुद्ध जन जागरूकता अभियान चलाया तथा फॉसटैक प्रशिक्षण अनिवार्य किया।

बलौदाबाजार-भाटापारा में पोहा मिलों पर कार्रवाई की गई जिसमें भाटापारा की मातारानी इंडस्ट्रीज में लेबल उल्लंघन पर कार्रवाई, महासती उद्योग से पोहा नमूना तथा एन.एस. इंडस्ट्रीज में असत्य जानकारी पर नोटिस व नमूने लिए। जिले में 5 विधिक नमूने एवं 1 प्रकरण न्यायालय में।

महासमुंद में गुटखा जब्ती, 15.50 लाख का जुर्माना के साथ
13 नमूनों में 8 विधिक संग्रहित। 92,352 पाउच प्रतिबंधित गुटखा, 2 किलो बेसन एवं 500 ग्राम अवमानक सेव जब्त। न्याय निर्णयन अधिकारी ने 15,50,000 रुपये अर्थदंड लगाया। बिना अनुज्ञप्ति के 2 प्रकरणों में 20,100 रुपये जुर्माना तथा 51 नग अखाद्य रंग नष्ट।

रायगढ़ में संदिग्ध वाहन से दुग्ध उत्पाद जब्त: संदिग्ध पिकअप से 2 लाख रुपये के दुग्ध उत्पाद (कॉलेज एनालॉग, दही) जब्त। नमूने रायपुर प्रयोगशाला भेजे।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य हेतु सघन निरीक्षण जारी रखेगा।



नक्सलियों का ‘सप्लाई चेन’ ध्वस्त:नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार अबूझमाड़ में पुलिस-ITBP को बड़ी कामयाबी,

बस्तर के जंगलों में अब कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। विस्फोटक सामग्रियों का नष्ट होना न केवल जवानों की जान बचाने वाला साबित हुआ है, बल्कि इलाके के ग्रामीणों में भी सुरक्षा का भाव पैदा हुआ है।
जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक

रायपुर/नारायणपुर _ 02 फरवरी, 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा जैसे-जैसे करीब आ रही है, छत्तीसगढ़ के जंगलों में सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में नारायणपुर पुलिस और आईटीबीपी (ITBP) की संयुक्त टीम ने अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के एक बड़े मंसूबे को नाकाम करते हुए भारी मात्रा में विस्फोटक और रसद बरामद की है।

सर्जिकल स्ट्राइक जैसी तैयारी: ‘ऑपरेशन अबूझमाड़’
31 जनवरी 2026 को शुरू हुए इस जॉइंट सर्च ऑपरेशन की कमान 53वीं वाहिनी ITBP के सेनानी संजय कुमार और उप सेनानी तेजवीर सिंह के हाथों में थी। नारायणपुर पुलिस की DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और ITBP के जवानों ने घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में रणनीतिक घेराबंदी की।

बरामद सामाग्री एवं हथियार
📌विस्फोटक और घातक हथियार: भारी मात्रा में जिलेटिन रॉड्स और डेटोनेटर।
📌 IED बरामदगी: एक शक्तिशाली प्रेशर कुकर IED बरामद किया गया, जिसे सुरक्षा बलों के बम निरोधक दस्ते ने मौके पर ही डिफ्यूज कर दिया।
* लॉजिस्टिक्स डंप: रसद (राशन), खाना बनाने के बड़े ड्रम और दैनिक उपयोग का भारी सामान।

नक्सलियों की कमर तोड़ने वाली सफलता
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन और विस्फोटक की बरामदगी का मतलब है कि नक्सली किसी बड़े हमले या लंबे समय तक छिपने की तैयारी में थे। इस ‘डंप’ के पकड़े जाने से नक्सलियों की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है।
“छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सुरक्षा बल अब नक्सलियों के सुरक्षित किलों (Safe Havens) में घुसकर प्रहार कर रहे हैं। यह सफलता जवानों के बढ़ते मनोबल और सटीक खुफिया तंत्र का परिणाम है।”— सुरक्षा अधिकारी, नारायणपुर