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सरकारी जमीन पर कब्जा कर धड़ल्ले से प्लॉटिंग, गिरौद में बड़ा खुलासा; प्रशासन सख्त, बेदखली की कार्रवाई शुरू

डिजिटल डेस्क(जन चौपाल 36)_24 मार्च 2026

राजधानी के अंतर्गत गिरौद गांव में शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग किए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुई जांच में चरागाह, निस्तार और जल क्षेत्र की जमीन पर कब्जा कर प्लॉट काटने और सड़क निर्माण करने की पुष्टि हुई है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट 18 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को सौंप दी गई थी, जिसके आधार पर अब प्रशासन ने सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।

जांच में खुलासा हुआ कि जमीन कारोबारी बसंत अग्रवाल द्वारा कई खसरा नंबरों की सरकारी जमीन पर कब्जा कर नियमों के विपरीत प्लॉटिंग की गई। मौके पर मुरुम सड़क निर्माण और बाउंड्री खड़ी कर जमीन को निजी बताकर बेचने की कोशिश की जा रही थी। इस पूरे मामले में ओम प्रकाश सरवैया और पूनम चौधरी समेत अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।

एसडीएम ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के बाद पटवारी और राजस्व अमले से मौके की जांच कराई गई, जिसमें स्पष्ट रूप से शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और अवैध प्लॉटिंग की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि धरसींवा और आसपास के क्षेत्रों में भू-माफिया सक्रिय हैं, जो कभी किसानों की जमीन तो कभी सरकारी जमीन पर कब्जा कर आम लोगों को प्लॉट बेच रहे हैं। गिरौद का मामला इसी कड़ी का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जहां तालाब, चरागाह और निस्तार भूमि तक को नहीं छोड़ा गया।

प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ बेदखली की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अवैध निर्माण हटाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी ताकि सरकारी जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि प्लॉट खरीदने से पहले जमीन के दस्तावेजों की पूरी जांच जरूर करें, ताकि वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का शिकार न हों।

पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी ने लोकसभा संबोधन में कहा — “हर भारतीय सुरक्षित है, शांति हमारी प्राथमिकता”

नई दिल्ली-23/03/2026

पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी युद्ध की आंच अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को झुलसा रही है। इस गंभीर संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में विस्तृत संबोधन दिया और स्पष्ट किया कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा आपूर्ति — दोनों मोर्चों पर पूरी तरह सतर्क है।

एक करोड़ भारतीय — सरकार की सर्वोच्च चिंता
पीएम मोदी ने सदन को बताया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। इसके अलावा इन समुद्री मार्गों पर चलने वाले वाणिज्यिक जहाजों में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या है। यही कारण है कि इस संकट को लेकर भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से अन्य देशों से कहीं अधिक हैं।

उन्होंने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से प्रभावित देशों में हर भारतीय को मदद पहुंचाई गई है और उन्होंने स्वयं अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से दो-दो बार फोन पर सीधी बातचीत की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य — तेल-गैस आपूर्ति पर नज़र
प्रधानमंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। कच्चा तेल, गैस और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से भारत आती है। इसके बावजूद सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति पर कम से कम असर पड़े और देश के आम परिवारों को असुविधा न हो।

व्यापार पर भी मंडरा रहा खतरा
पीएम ने यह भी रेखांकित किया कि युद्धग्रस्त देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक संबंध हैं और यह क्षेत्र दुनिया के अन्य देशों के साथ भारत के व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी है। ऐसे में इस संकट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।

“संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता”
पीएम मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से मानवता के हित में शांति का समर्थक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या का एकमात्र समाधान संवाद और कूटनीति है। भारत के सभी प्रयास तनाव कम करने और इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने की दिशा में हैं।
“इस युद्ध में किसी की भी जान जोखिम में डालना मानवता के हित में नहीं है। भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करना है।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

संसद की एकजुट आवाज़ ज़रूरी
प्रधानमंत्री ने यह भी आग्रह किया कि इस संकट पर भारत की संसद की सर्वसम्मत और एकजुट आवाज़ दुनिया तक पहुंचनी चाहिए। विदेश मंत्री जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी पहले ही सदन को इस विषय पर आवश्यक जानकारी दे चुके हैं।

पश्चिम एशिया की धधकती आग के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता और मानवीय दृष्टिकोण — दोनों एक बार फिर विश्व मंच पर उजागर हुए हैं।

छत्तीसगढ़ के लिए टेमरी गांव बना मिसाल! राज्यपाल के “गोद” से बदली किसानों की तकदीर

बेमेतरा, 23 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के गोद लिए गांव टेमरी में खेती की तस्वीर बदल रही है। सरकारी योजनाओं की बयार अब इस गांव के हर खेत तक पहुंच रही है।
विभागीय जानकारी के अनुसार ग्राम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित कई योजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

527 किसानों की जेब में पहुंची सम्मान निधि
PM किसान योजना में 559 के लक्ष्य में से 527 किसान लाभान्वित — बाकी 32 का पंजीयन जल्द होगा।
विभाग के अनुसार कुछ किसानों का ऑनलाइन पंजीयन अभी शेष है, जबकि 32 किसान तकनीकी कारणों से पंजीयन नहीं करा पाए हैं। पोर्टल में सुधार होते ही इनका पंजीयन भी कराया जाएगा।

बीमा में 100% कवरेज — खरीफ में 501, रबी में 226 किसान सुरक्षित
फसल बर्बाद होने का डर अब नहीं — शत-प्रतिशत किसान फसल बीमा की छत्रछाया में।कृषि विभाग का कहना है कि बीमा योजना के प्रति किसानों में जागरूकता बढ़ी है और अब अधिक किसान इसमें शामिल हो रहे हैं।

किसानों ने धान छोड़ा,दलहन-तिलहन अपनाया!
पहले 242 हेक्टेयर में वैकल्पिक फसल → अब 412 हेक्टेयर में दलहन-तिलहन धान का रकबा घटकर महज 40 हेक्टेयर रह गया।पहले जहां 242 हेक्टेयर में वैकल्पिक फसलें ली जाती थीं, वहीं इस वर्ष 40 हेक्टेयर में ही धान की फसल ली गई है और 412 हेक्टेयर में दलहन–तिलहन व अन्य फसलें बोई गई हैं।

टेमरी में पहली बार उगी रागी— नई फसल, नई उम्मीद!
4 हेक्टेयर में रागी की ऐतिहासिक शुरुआत। 9 किसान 15.70 हेक्टेयर में चना-रागी का प्रमाणित बीज उत्पादन कर रहे हैं।
ग्राम टेमरी में पहली बार 4 हेक्टेयर क्षेत्र में रागी की खेती शुरू की गई है, जिसे किसानों के लिए एक नई पहल माना जा रहा है।

राज्यपाल के गोद ग्राम की यह कहानी अब पूरे छत्तीसगढ़ में एक मिसाल पेश करने जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में अफीम का उभरता कारोबार; रायगढ़ में 2 करोड़ की अफीम जब्त

छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क_22 मार्च 2026

रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट इलाके में पुलिस ने करीब एक एकड़ में अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया है। झारखंड के खूंटी जिले के रहने वाले मार्शल सांगा को गिरफ्तार किया गया है, जिसने 10 साल पहले रायगढ़ में शादी की थी और तरबूज व सब्जी उगाने के बहाने खेत लेकर दोस्तों के साथ मिलकर अफीम का कारोबार शुरू कर दिया।

पुलिस ने 60,326 अफीम के पौधे और 3 किलो तैयार अफीम जब्त की है जिसकी कुल कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। दो आरोपी इमानवेल भेंगरा और सीप्रियन भेंगरा अभी भी फरार हैं

इस मामले पर राजनीति भी गरमा गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के पीछे भाजपा के पदाधिकारियों का हाथ है। उन्होंने दुर्ग, बलरामपुर, तमनार और नगरी-सिहावा के उदाहरण देते हुए बताया कि दुर्ग में खेती करने वाला और बलरामपुर में जमीन उपलब्ध कराने वाला दोनों ही भाजपा के पदाधिकारी हैं। बघेल ने यह भी कहा कि धमतरी के नगरी-सिहावा में भाजपा के एक पदाधिकारी के फार्म हाउस में 20 एकड़ में अफीम लगी हुई थी और जैसे ही उन्होंने इसका खुलासा किया, वहां तुरंत बुलडोजर चला दिया गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि भाजपा से जुड़े लोगों की अफीम की खेती में संलग्नता से इनकार नहीं किया जा सकता।

पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव ने निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने इस मामले को बेहद चिंताजनक बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस ने इस पर बीजेपी का संरक्षण होना बताया है।

वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में बोए गए बीज अब पौधे बन रहे हैं और साय सरकार ही इनका खुलासा कर कार्रवाई कर रही है।

खबर निष्कर्ष:
वर्तमान सरकार पूर्व सरकार को दोषी बताकर इस मामले पर पर्दा नहीं डाल सकती। क्योंकि शिकायत आज की है, कल की नहीं। खुलासे वर्तमान के हैं, तो जवाबदेही भी वर्तमान सरकार की ही बनती है।
जनता ने जिसे चुना है, जवाब उसी को देना होगा। कल, आज और कल के बीच की सच्चाई जनता देख रही है।

ई-चालान व्यवस्था: 1 अप्रैल 2026 से भौतिक चालान पूरी तरह बंद

बेमेतरा, 23 मार्च 2026

राज्य शासन के निर्देशानुसार 1 अप्रैल 2026 से छत्तीसगढ़ में भौतिक चालानों का प्रचलन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। अब सभी सरकारी विभागों में राशि जमा करने के लिए केवल ऑनलाइन ई-चालान प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

क्या है नई व्यवस्था?
जिला कोषालय बेमेतरा द्वारा सभी विभाग प्रमुखों को जारी निर्देश में बताया गया है कि अब चालान केवल ओटीसी (ओवर द काउंटर) माध्यम से ही जनरेट किए जाएंगे। ई-चालान पोर्टल पर चालान भरते समय उसका डेटा सीधे बैंक को ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे बैंक स्तर पर अलग से डेटा एंट्री की आवश्यकता नहीं रहेगी।
बैंक काउंटर पर अब केवल ऑनलाइन जनरेट किए गए चालान — जिसमें ट्रेज़री रिफरेन्स नंबर (TRN) दर्ज होगा — के आधार पर ही राशि स्वीकार की जाएगी। इसके बाद बैंक संबंधित जानकारी MIS के माध्यम से कोषालय को ऑनलाइन भेजेगा।

क्या होंगे फायदे?
त्रुटियों में कमी — डेटा एंट्री एक ही बार होगी, जिससे गलतियों की संभावना घटेगी।
पारदर्शी लेखांकन — सभी लेन-देन का रिकॉर्ड ऑनलाइन और सटीक रहेगा।
समय की बचत — बैंक काउंटर पर दोहरी प्रक्रिया समाप्त होगी।
चालान प्रिंट की सुविधा — जमाकर्ता ई-चालान पोर्टल के “सर्च चालान” विकल्प से अपने चालान का प्रिंट कभी भी निकाल सकेंगे, जो पहले भौतिक चालान में संभव नहीं था।

विभागों और नागरिकों से अपील
जिला कोषालय बेमेतरा ने सभी विभागाध्यक्षों से अनुरोध किया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ-साथ कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों को भी इस नई व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि किसी को असुविधा न हो।
यदि किसी को प्रक्रिया में कोई समस्या आती है तो वे सीधे जिला कोषालय बेमेतरा से संपर्क कर सकते हैं।

यह बदलाव सरकारी वित्तीय प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

WhatsApp New Update: अब मैसेज पढ़ने के 15 मिनट बाद हो जाएंगे ‘छूमंतर’, प्राइवेसी के लिए आ रहा है धांसू फीचर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली | 22/03/2026

व्हाट्सऐप पर अब प्राइवेसी का ‘सुपर मोड’! 🕵️‍♂️ क्या आप भी अपनी GF/BF की चैट या ज़रूरी पासवर्ड लीक होने से डरते हैं? आ रहा है 15 मिनट वाला धांसू फीचर। अब चैट्स का ‘कबाड़’ होगा साफ! 🧹

मेटा के लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप (WhatsApp) ने प्राइवेसी की दुनिया में एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी एक नए ‘After Reading’ (पढ़ने के बाद) फीचर पर काम कर रही है, जो मैसेज पढ़े जाने के ठीक 15 मिनट बाद उसे दोनों तरफ से गायब कर देगा।

15 मिनट का नया ‘टाइमर’
व्हाट्सएप का यह नया फीचर एक स्मार्ट टाइमर की तरह काम करेगा। जैसे ही रिसीवर मैसेज को पढ़ेगा, 15 मिनट का काउंटडाउन शुरू होगा और मैसेज डिलीट हो जाएगा। यह उन लोगों के लिए वरदान है जो निजी जानकारी या पासवर्ड शेयर करते हैं।

निजी चैट्स का ‘बोझ’ और स्टोरेज की समस्या
देखा जाए तो व्हाट्सएप पर ‘जरूरी’ काम कम और ‘निजी’ बातचीत (जैसे GF/BF से गपशप) ज्यादा होती है। इन चैट्स में आने वाले फोटो और वीडियो फोन की मेमोरी को ‘कबाड़’ से भर देते हैं। यूजर्स की मांग है कि व्हाट्सएप में ‘प्रायोरिटी मोड’ होना चाहिए ताकि:
स्पेशल चैट्स सुरक्षित रहें: सिर्फ खास लोगों की बातें बची रहें।
ऑटो-क्लीनअप: बाकी फालतू ग्रुप्स और डेटा अपने-आप डिलीट हो जाए।

सेफ्टी के लिए ‘क्लाउड’ ही बेहतर!?
जानकारों का मानना है कि व्हाट्सएप को सिर्फ बातचीत के लिए रखना चाहिए। सुरक्षा और लंबे समय तक डेटा सेव रखने के लिए आज भी DigiLocker या ऑनलाइन D-Drive (Cloud Storage) ही सबसे बेस्ट और सेफ विकल्प हैं। व्हाट्सएप पर ज्यादा डेटा लोड करना न तो प्राइवेसी के लिए सही है और न ही फोन की परफॉरमेंस के लिए।

संपादकीय विचार: 15 मिनट वाला प्राइवेसी फीचर फिलहाल टेस्टिंग में है। यह खबर भविष्य के अपडेट्स पर आधारित है। अपनी जरूरी फाइल्स के लिए हमेशा क्लाउड स्टोरेज का ही इस्तेमाल अपनी इच्छानुसार करें।

विश्व जल दिवस पर प्रधानमंत्री ने किया जल संरक्षण की प्रतिबद्धता का आह्वान; बढ़ते जल संकट पर जताई चिंता

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डिजिटल डेस्क _दिनांक: 22 मार्च 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘विश्व जल दिवस’ के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए जल संरक्षण के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने इस अनमोल प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा के लिए ‘हर बूंद बचाने’ (Saving every drop) और उसके उत्तर दायित्वपूर्ण उपयोग का आह्वान किया है।

संरक्षण की संस्कृति पर जोर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के माध्यम से अपना संदेश साझा करते हुए कहा, “जल हमें जीवन देता है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। आइए, हम जल के संरक्षण और उसके विवेकपूर्ण उपयोग के अपने संकल्प को और मजबूत करें।” उन्होंने उन व्यक्तियों और संस्थाओं की सराहना की जो जल बचाने के लिए जागरूकता फैला रहे हैं और सतत पद्धतियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

बढ़ते जल संकट के कारण पर नजर डालें तो
शहरीकरण और कंक्रीट का बढ़ता संकट
देश के बढ़ते जल संकट के तकनीकी पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया। वर्तमान में दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगर जल संकट के जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘कंक्रीट के जंगलों’ के विस्तार के कारण वर्षा जल जमीन में नहीं समा पा रहा है, जिससे भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है। साथ ही, नदियों में बढ़ता औद्योगिक अपशिष्ट और आर्द्रभूमियों पर अतिक्रमण इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन की चुनौती प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप, कृषि क्षेत्र में जल की बर्बादी को रोकना प्राथमिकता है। ज्ञात हो कि वैश्विक स्तर पर मीठे पानी का 70-80% हिस्सा कृषि में उपयोग होता है। पारंपरिक ‘फ्लड इरिगेशन’ के कारण होने वाली पानी की भारी क्षति को रोकने और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जल-कुशल तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है। विज्ञप्ति में चेतावनी दी गई है कि यदि जल प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह वैश्विक खाद्यान्न संकट का रूप ले सकता है।

खबर निष्कर्ष आज का दिन केवल एक दिवस नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक सामूहिक संकल्प का दिन है। प्रधानमंत्री ने देश के प्रत्येक नागरिक से जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की है।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत ने ऊर्जा संकट और आपूर्ति का बनाया संतुलन

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डिजिटल डेस्क -नई दिल्ली 22/03/2026

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता ने जब वैश्विक ऊर्जा बाजार को अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है, तब भारत सरकार का कमर्शियल एलपीजी कोटा 30% से बढ़ाकर 50% करने का निर्णय एक ‘सधा हुआ संतुलन’ प्रदर्शित करता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का यह कदम केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि संकट काल में अर्थव्यवस्था के पहिये को थामे रखने की एक दूरदर्शी रणनीति है।

उद्योग को संजीवनी, आम जन को सुरक्षा
23 मार्च 2026 से लागू होने वाला यह फैसला सीधे तौर पर होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग जैसे उन क्षेत्रों को राहत देगा, जो ईंधन की किल्लत के कारण ठप होने की कगार पर थे। रिफाइनरियों में उत्पादन को 38% तक बढ़ाना यह दर्शाता है कि भारत अपनी आंतरिक क्षमताओं का दोहन कर वैश्विक झटकों को सहने के लिए तैयार है। सबसे प्रशंसनीय पहलू यह है कि कमर्शियल आपूर्ति बढ़ाते समय भी घरेलू एलपीजी, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों की प्राथमिकता से कोई समझौता नहीं किया गया है।

प्रबंधन की कड़वी लेकिन जरूरी खुराक
आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ सरकार ने ‘डिमांड मैनेजमेंट’ पर भी कड़ा रुख अपनाया है। सिलेंडर बुकिंग के अंतराल (गैप) को बढ़ाना—शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन—एक कड़वा लेकिन अनिवार्य निर्णय है। यह कदम पैनिक बाइंग को रोकने और स्टॉक के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता की ओर देख रही है।

सतर्कता ही समाधान
संपादकीय नजरिए से देखें तो चुनौती अब इसके क्रियान्वयन (Implementation) की है। अतिरिक्त कोटे का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे और इसकी कालाबाजारी न हो, इसके लिए मुख्य सचिवों को दी गई सख्त निगरानी की हिदायत जमीन पर दिखनी चाहिए। सामुदायिक रसोई और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडरों को प्राथमिकता देना इस नीति के मानवीय चेहरे को उजागर करता है।

खबर सारांश:_ वैश्विक युद्ध और ऊर्जा संकट के काले बादलों के बीच, भारत ने अपनी घरेलू जरूरतों और व्यापारिक हितों के बीच जो संतुलन बनाया है, वह एक ‘रोल मॉडल’ की तरह है। यह नीतिगत सक्रियता न केवल महंगाई को नियंत्रित रखेगी, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी देश की विकास दर को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।

फरसा वाले बाबा और मथुरा में तनाव—तथ्य और अफवाह के बीच की चुनौती

डिजिटल डेस्क -22/03/2026

मथुरा के कोसीकलां क्षेत्र में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से विख्यात गौरक्षक चंद्रशेखर की सड़क दुर्घटना में हुई मृत्यु और उसके बाद उपजा जनाक्रोश, वर्तमान समय में सोशल मीडिया की संवेदनशीलता और ‘नैरेटिव’ की जंग का एक ज्वलंत उदाहरण है। जहाँ एक ओर अनुयायियों और स्थानीय लोगों की भावनाएं इसे सुनियोजित हत्या बता रही हैं, वहीं पुलिस प्रशासन के साक्ष्य इसे घने कोहरे के कारण हुआ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा करार दे रहे हैं।

तथ्यों की कसौटी पर प्रशासन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्लोक कुमार का बयान स्पष्ट करता है कि प्रारंभिक जांच में यह घटना ‘चेन एक्सीडेंट’ का परिणाम है। पुलिस के अनुसार, जिस कंटेनर को रोका गया था उसमें गौवंश नहीं बल्कि किराने का सामान था, और पीछे से टक्कर मारने वाले ट्रक में तार लदे थे। प्रशासन द्वारा 13 उपद्रवियों और अफवाह फैलाने वाले दक्ष चौधरी की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी प्रकार के ‘फेक न्यूज’ या अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेगी।

श्रद्धा और संदेह का टकराव
ग्रामीणों और अनुयायियों का तर्क है कि 10 हजार गायों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराने वाले बाबा को जानबूझकर कुचला गया। यह संदेह केवल भावनात्मक नहीं है, बल्कि उन पूर्ववर्ती घटनाओं का परिणाम है जहाँ गौरक्षकों को निशाना बनाया गया। पूर्व मंत्री सुनील भराला द्वारा ‘साजिश की आशंका’ और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा गौरक्षकों की सुरक्षा पर सवाल उठाना इस मामले को राजनीतिक और धार्मिक रूप से और अधिक संवेदनशील बना देता है।

सियासत और समाधान
विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग और सत्ता पक्ष द्वारा गौशाला को सरकारी सहायता व समाधि स्थल बनवाने का आश्वासन—यह दोनों ही प्रतिक्रियाएं एक बड़े हादसे के बाद की पारंपरिक राजनीतिक कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। जिलाधिकारी (DM) द्वारा पात्र लोगों को लाइसेंस देने पर विचार करने का आश्वासन स्थानीय रोष को शांत करने की एक प्रशासनिक कोशिश है।

खबर निष्कर्ष सूचनाओं पर आधारित
मथुरा की यह घटना चेतावनी है कि डिजिटल युग में ‘तथ्य’ और ‘अफवाह’ के बीच की रेखा बहुत धुंधली हो चुकी है। जब तक विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक शांति बनाए रखना और सोशल मीडिया पर संयम बरतना ही समाज के हित में है। प्रशासन की प्राथमिकता अब यह होनी चाहिए कि वह पारदर्शी जांच के जरिए जनता का विश्वास जीते, ताकि यह ‘हादसा बनाम हत्या’ का विवाद किसी बड़े सामाजिक टकराव का रूप न ले ले।

स्वस्थ मुँह, खुशहाल जीवन’ – केवल नारा नहीं, समग्र स्वास्थ्य का आधार

बेमेतरा, 21 मार्च 2026

अक्सर कहा जाता है कि शरीर का द्वार मुँह होता है, और यदि द्वार ही अस्वस्थ हो, तो भीतर का स्वास्थ्य कभी सुरक्षित नहीं रह सकता। इसी महत्वपूर्ण संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विश्व मुख स्वास्थ्य दिवस (20 मार्च) के अवसर पर बेमेतरा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पहल सराहनीय है। “A Happy Mouth is a Happy Life” (स्वस्थ मुँह, खुशहाल जीवन) की वैश्विक थीम पर आधारित इस वर्ष के कार्यक्रमों ने न केवल बच्चों को जागरूक किया, बल्कि समाज के सामने मुख स्वास्थ्य की अनदेखी से होने वाले गंभीर खतरों का खाका भी खींचा।

बेमेतरा के विभिन्न स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित शिविरों में 288 बच्चों का परीक्षण महज एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस पीढ़ी को तैयार करने की कोशिश है जो बचपन से ही ‘ओरल हाइजीन’ के महत्व को समझेगी। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से आयोजित इन शिविरों में बच्चों को ब्रश करने के सही तरीके से लेकर तंबाकू के दुष्प्रभावों तक की जानकारी दी गई।

अनदेखी की भारी कीमत
मुँह के स्वास्थ्य को अक्सर हम सामान्य मानकर टाल देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी डराने वाली है। मसूड़ों की सूजन, दाँतों की सड़न या मुँह का कम खुलना केवल स्थानीय समस्याएं नहीं हैं।खबर की दृष्टि से यह समझना आवश्यक है कि मुख स्वास्थ्य का सीधा संबंध हमारे समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में मुख रोगों की अनदेखी कुपोषण, समयपूर्व प्रसव और नवजात में जन्मजात विकृतियों जैसी जटिलताओं को जन्म दे सकती है। यह तथ्य बताता है कि एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मुख स्वास्थ्य की जागरूकता कितनी अनिवार्य है।

कैंसर की दस्तक और तंबाकू का जाल
शिविर में मुख कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों—जैसे दो सप्ताह से अधिक पुराने छाले, सफेद चकत्ते या मुँह का कम खुलना—पर जो जोर दिया गया, वह आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। तंबाकू की लत ने न केवल युवाओं को अपनी चपेट में लिया है, बल्कि यह मुख कैंसर का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। बेमेतरा जिला चिकित्सालय में स्थापित ‘तंबाकू नशा मुक्ति केंद्र’ जैसी सुविधाएं इस लड़ाई में एक मजबूत हथियार हैं।

खबर सार जनचौपाल 36
सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर का यह कहना कि यह ‘साल भर चलने वाले अभियान की शुरुआत है’, एक सकारात्मक संकेत है। मुख स्वास्थ्य के प्रति यह जागरूकता केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हर छह महीने में दंत परीक्षण की आदत और तंबाकू मुक्त जीवन की संकल्पना ही “स्वस्थ मुँह, खुशहाल जीवन” के सपने को साकार कर सकती है। बेमेतरा का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा है कि कैसे जमीनी स्तर पर बच्चों और शिक्षकों को जोड़कर एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखी जा सकती है।