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अध्यात्म एक यात्रा—परंपराओं के गौरव से आधुनिकता के तर्कों तक (भाग-1)

अध्यात्म डेस्क,12/04/2026

धर्म जहाँ जीवन जीने की मर्यादा और बाहरी अनुशासन का विज्ञान है, वहीं अध्यात्म स्वयं की खोज और आंतरिक चेतना का विज्ञान है। षड्दर्शन (छह शास्त्र) इसी सत्य को प्रमाणित करते हैं।धर्म बाह्य आचरण का विज्ञान, अध्यात्म आंतरिक खोज का आधार है,षड्दर्शनों का यही सार, कि चेतना ही जीवन का सच्चा विस्तार है।वेदांत से परे शेष पांच दर्शन, अंतर्मन की ज्योति को ही दर्शाते हैं,धर्म को बाहरी आवरण और अध्यात्म को ही अंतिम सत्य बताते हैं।धर्म एक बाहरी प्रकाश है और अध्यात्म एक आंतरिक प्रकाश यह बहुत ही बुनियादी और गहरा सवाल है। ‘भीतरी प्रकाश’ कहना आसान है, लेकिन इसे महसूस करना और समझना कठिन है।

अध्यात्म के इस ‘प्रकाश’ के तीन व्यावहारिक अर्थ हैं:
स्वयं का निष्पक्ष अवलोकन (Self-Observation):
आमतौर पर हम अपनी गलतियों को छिपाते हैं और दूसरों की गलतियों को देखते हैं। अध्यात्म का प्रकाश वह ‘टॉर्च’ है जिसे हम अपनी ओर घुमाते हैं। जब आप बिना किसी अहंकार या ग्लानि के अपनी कमियों और खूबियों को देख पाते हैं, तब आप स्वयं से परिचित होते हैं। यह प्रकाश आपको बताता है कि आपकी पहचान केवल आपके पद, जाति या धन से नहीं है।

प्रतिक्रिया और विवेक के बीच का अंतर (Response vs Reaction):
विज्ञान कहता है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। लेकिन अध्यात्म कहता है कि क्रिया और प्रतिक्रिया के बीच एक छोटा सा ‘खाली स्थान’ है, जहाँ हमारी स्वतंत्र इच्छा विल पावर रहती है।जब कोई आपको गाली देता है, तो गुस्सा आना विज्ञान है ।लेकिन उस गुस्से को पी जाना या यह समझना कि गाली देने वाला स्वयं दुखी है, यह अध्यात्म है।यही वह मानसिक शांति है जो भीतर से आती है क्योंकि आपका ‘रिमोट कंट्रोल’ किसी और के हाथ में नहीं रहता।

जुड़ाव का अहसास
जैसे सूर्य की रोशनी हर वस्तु पर समान रूप से पड़ती है—चाहे वह फूल हो या कचरा—वैसे ही आध्यात्मिक प्रकाश हमें यह समझाता है कि हम सब एक ही ‘चेतना’ के हिस्से हैं।

जब आप सत्यनारायण पूजा में एक लकड़हारे या सफाई कर्मी को देखते हैं, तो अध्यात्म आपको बताता है कि उसके भीतर भी वही प्रकाश है जो आपके भीतर है।

यही वह आत्मबल है जो व्यक्ति को निडर बनाता है, क्योंकि उसे पता चलता है कि वह अकेला नहीं है, वह पूरे ब्रह्मांड (नारायण) का हिस्सा है।

संक्षेप सार में:
अध्यात्म वह फिल्टर है जो हमारे अनुभवों से कचरा (नफरत, ईर्ष्या, अहंकार) निकाल देता है और केवल ‘सत्य’ को रहने देता है। जिसे यह प्रकाश मिल गया, उसे फिर बाहर की चकाचौंध या विज्ञान के विनाशकारी प्रभावों से डर नहीं लगता, क्योंकि वह ‘सूर्य’ की तरह अपने केंद्र में स्थित हो जाता है।

इस परिभाषा से कोई सहमत है या नहीं अपने अपने अनुभव में रहता है ।अलग अलग व्यक्तियों की नजर और दर्शन में यह ‘प्रकाश’ कुछ और है?

लेकिन यह सोच वर्तमान युग की सबसे बड़ी आवश्यकता को रेखांकित करती है। विज्ञान यदि केवल ‘शक्ति’ (Power) देता है और उसके साथ ‘विवेक’ (Wisdom) न हो, तो वह ‘विनाश’ का कारण बनता है। परमाणु ऊर्जा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है—यह बिजली भी दे सकती है और दुनिया को राख भी कर सकती है। यह सहनशीलता और अध्यात्म ही है जो तय करता है कि हमें सृजन करना है या विनाश।






जीवन का दूसरा सिरा: भूख या रूह का सुकून?रोटी खाता बच्चा या अध्यात्म में डूबा आदमी

लेख/आलेख/रविवारीय -12/04/2026

अक्सर समाज हमें सिखाता है कि ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ मिल जाए तो जीवन सफल है। लेकिन क्या कभी आपने गौर किया है कि आलीशान महलों में रहने वाले भी अक्सर उदासी की दवाइयां ढूंढते फिरते हैं? इसका अर्थ स्पष्ट है: इंसान सिर्फ पेट भरने के लिए पैदा नहीं हुआ है, वह तो अपने भीतर के शून्य को भरने के लिए पैदा हुआ है।

भौतिकता बनाम सार्थकता
रोटी शरीर को जिंदा रखती है, लेकिन एक ‘उद्देश्य’ (Purpose) आत्मा को जिंदा रखता है। बिना किसी लक्ष्य के जीना वैसा ही है जैसे बिना पतवार की नाव, जो पानी पर तैर तो रही है पर कहीं पहुँच नहीं रही।
जरूरत: भूख मिटाना मजबूरी हो सकती है।
जुनून: कुछ ऐसा रचना जिससे दुनिया में आपके होने का प्रमाण मिले, वह गर्व का अहसास है।

आत्म-सम्मान: सुकून की पहली सीढ़ी
जीने के लिए सिर्फ सांसें काफी नहीं हैं; उन सांसों में ‘गर्व’ की महक होनी चाहिए। जब आप अपनी मेहनत से अपनी तकदीर बदलते हैं, तो वह जो सुकून मिलता है, वह किसी भी महंगे रिसॉर्ट की शांति से बड़ा होता है।
“भीख में मिले महलों से बेहतर है, अपनी मेहनत से बनाई गई झोपड़ी।”

भीतर की इच्छा: वह आग जो बुझनी नहीं चाहिए
हर इंसान के अंदर एक ‘छोटा बच्चा’ और एक ‘कलाकार’ होता है। जब हम दुनिया की भेड़चाल में फंसकर अपनी इच्छाओं का गला घोंट देते हैं, तभी ‘तल्खियां’ और ‘उदासी’ जन्म लेती हैं।
जिज्ञासा: नया सीखने की ललक।
अभिव्यक्ति: अपने मन की बात कहने या उसे किसी हुनर (कला, लेखन, काम) में ढालने की आजादी। यही वो तत्व हैं जो इंसान को मशीन बनने से बचाते हैं।

सुकून का असली पता
सुकून किसी सहारे में नहीं, बल्कि ‘स्वयं की तलाश’ में है। जब आप अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर लेते हैं और अपनी खूबियों पर काम करना शुरू करते हैं, तो जिंदगी बोझ नहीं, एक उत्सव लगने लगती है।

निष्कर्ष: हौसलामंदों की ही होती है दुनिया।याद रखिए दुनिया तब तक है जब तक आप हैं
जिंदगी गुमसुम और गुमनाम तब तक है जब तक आप अंधेरे कमरे की खिड़की नहीं खोलते। उजाला बाहर खड़ा आपका इंतजार कर रहा है, बस आपको एक कदम बढ़ाने की हिम्मत जुटानी है।

याद रखिए, जिंदगी हौसलामंद और हुनरमंद इंसान को ही सलाम करती है। हारना तब नहीं होता जब आप गिर जाते हैं, हारना तब होता है जब आप उठने से इनकार कर देते हैं। तो उठिए, अपनी कश्ती को तूफानों की ओर मोड़िए और दिखा दीजिए इस कायनात को कि आप केवल ‘गुजरने’ के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को अपनी मौजूदगी से ‘जीतने’ के लिए पैदा हुए हैं।

एक आखिरी विचार: होंगे वो कोई और जो थक कर बैठ जाते हैं,हमें तो लहरों की सरकशी में ही घर बनाना आता है।

ठहराव से तूफान तक: जिंदगी को एक खूबसूरत मोड़ देने की कला ,बैसाखियों को छोड़िए, खुद के पैरों पर ऐतबार कीजिए।”

लेख-आलेख/रविवारीय-12/04/2026

हम मान लेते हैं कि जो मिल गया वही मुकद्दर है और जो छूट गया वही मलाल। लेकिन असल में, जिंदगी किसी ढर्रे पर चलने का नाम नहीं, बल्कि हर पल खुद को नए सांचे में ढालने का हुनर है। अगर आपकी कश्ती किनारे पर आकर डूबी है, तो याद रखिए कि किनारा करीब था—अगली बार लहरों को चीरने का जज्बा और भी बड़ा होना चाहिए।

बैसाखियों को छोड़िए, खुद के पैरों पर ऐतबार कीजिए।ज्ञान बिना तर्क के अपाहिज है,खुद से तर्क कीजिए केवल देखिए नहीं ! मूकदर्शक मत बनिए उसमें शरीक हो जाइए मैं तुझमें समा जाऊं तू मुझमें समा जाओ।हमने महसूस किया है कि “चांदनी चांद से होती है, सितारों से नहीं।” जब हम अपनी खुशी का रिमोट कंट्रोल दूसरों के हाथ में दे देते हैं, तो वह सहारा टूटते ही हमारी दुनिया अंधेरी हो जाती है।
स्वयं की चमक: सितारों की तरह केवल चमकिए मत, चांद की तरह खुद की शीतलता पैदा कीजिए।

आत्मनिर्भर जज्बात: अपनी शर्तों पर जीना मुश्किल जरूर है, लेकिन यही वह रास्ता है जहाँ आप ‘बेबस’ नहीं ‘बादशाह’ होते हैं।

उसूलों की बगिया और कांटों का सफर
फूलों भरी बगिया सबको पसंद है, लेकिन गुलाब की खुशबू वही महसूस कर पाता है जिसने कांटों की चुभन को सहा हो।
नजरिया बदलिए: खयाली उसूल उड़ जाएंगे खुशबू बनकर अगर जीवन ठहरा हुआ है, तो उसे एक ‘खूबसूरत मोड़’ देने की जिम्मेदारी आपकी है। पत्थर उठाकर उस शीशी को तोड़ना ही होगा जो पुराने विचारों और निराशाओं से भरी है,शीशी भरी गुलाब की पत्थर से तोड़ दूं।

परिवर्तन का साहस:जो है उसे स्वीकार करना समझौता है, लेकिन जो हो सकता है उसके लिए लड़ना ‘जीना’ है। मौजों के मजदूर बनिए, साहिल के तमाशबीन नहीं।

“तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार”—यह पंक्ति जीवन का सबसे बड़ा मैनेजमेंट मंत्र है।

चुनौतियों का आनंद: जो डूबने से डरते हैं, वे कभी समंदर की गहराई नहीं माप पाते। जिंदगी का असली लुत्फ लहरों से टकराने में है, न कि किनारे पर बैठकर उनके शांत होने का इंतजार करने में।वो लाशें होती है जो तैरती है जिंदगी का मजा तो डूबने में है।

जोश और जुनून: जब खोने के लिए कुछ न हो, तो पाने के लिए पूरा ब्रह्मांड खुला होता है। अपनी नाकामियों को ‘सीख’ का नाम दीजिए और फिर से मैदान में उतरिए।

लाइफस्टाइल में नयापन कैसे लाएं?
जिंदगी को नया मोड़ देने के लिए आपको अपनी रोजमर्रा की सोच में कुछ बदलाव करने होंगे ।स्थिति ,यह है कि पुराना ढर्रा (निराशा) पर बैठी है इसे नया मोड़ (जोश) दीजिए।
असफलता:- यह मेरा अंत है। यह एक नई शुरुआत का संकेत है।
अकेलापन– मैं तन्हा और उदास हूँ। | यह खुद को जानने का सुनहरा समय है।

मुश्किलें-मेरी किस्मत ही खराब है। | “आज सिंधु ने विष उगला है”, मैं इसे पीकर नीलकंठ बनूँगा। |
भविष्य– क्या होगा, पता नहीं। | मैं अपना रास्ता खुद बनाऊँगा। |
हौसला मंदों की ही होती है दुनिया ।चिड़िया आकाश में अपने हौसले से उड़ती है कोई विज्ञान से नहीं_
जिंदगी गुमसुम और गुमनाम तब तक है जब तक आप अंधेरे कमरे की खिड़की नहीं खोलते। उजाला बाहर खड़ा आपका इंतजार कर रहा है, बस आपको एक कदम बढ़ाने की हिम्मत जुटानी है।

याद रखिए, जिंदगी हौसलामंद और हुनरमंद इंसान को ही सलाम करती है। हारना तब नहीं होता जब आप गिर जाते हैं, हारना तब होता है जब आप उठने से इनकार कर देते हैं। तो उठिए, अपनी कश्ती को तूफानों की ओर मोड़िए और दिखा दीजिए इस कायनात को कि आप हारने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को जीतने के लिए पैदा हुए हैं।

एक आखिरी विचार:होेंगे वो कोई और जो थक कर बैठ जाते हैं, हमें तो लहरों की सरकशी में ही घर बनाना आता है।

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र की साजिश बेनकाब: ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा निकली नाबालिग, POCSO के तहत FIR दर्ज

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/महेश्वर – 11 अप्रैल 2026

मध्य प्रदेश और केरल के बीच चर्चा का विषय बनी ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले के निकाह मामले में एक सनसनीखेज मोड़ आया है।खबर आ रही है कि, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)की गहन जांच में यह साबित हो गया है कि निकाह के समय मोनालिसा नाबालिग थी। महेश्वर के सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड ने उस फर्जी जन्म प्रमाण पत्र की साजिश को बेनकाब कर दिया है, जिसके आधार पर उसे बालिग बताकर विवाह कराया गया था।

72 घंटे की जांच में खुला राज
NCST के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में गठित टीम ने मात्र 72 घंटे के भीतर केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक कड़ियां जोड़ीं।
जांच में पाया गया कि:
मोनालिसा का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को महेश्वर के सरकारी अस्पताल में हुआ था। केरल में 11 मार्च 2026 को हुए निकाह के समय उसकी आयु मात्र 16 वर्ष, 2 महीने और 12 दिन थी।विवाह के लिए नगरपालिका महेश्वर से एक फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया था, जिसमें जन्म तिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज की गई थी।

साजिश के पीछे बड़े संगठनों का हाथ?
आयोग के समक्ष अधिवक्ता प्रथम दुबे ने दलील दी कि यह केवल एक निजी विवाह नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक साजिश थी। उन्होंने इस मामले में केरल के कुछ राजनीतिक नेताओं और कट्टरपंथी संगठनों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हुए इसे “फॉल्स नैरेटिव” सेट करने की कोशिश करार दिया। आयोग ने पाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केरल के पुअर गांव की ग्राम पंचायत में विवाह का पंजीकरण कराया गया था।

कड़ी कानूनी कार्रवाई और पुलिस शिकंजा
जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी फरमान खान के खिलाफ खरगोन जिले के महेश्वर थाने में पॉक्सो (POCSO) एक्ट, बीएनएस और एट्रोसिटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। चूंकि पीड़िता ‘पारधी’ जनजाति से संबंध रखती है, इसलिए मामला और भी संवेदनशील हो गया है।

आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के डीजीपी को दिल्ली मुख्यालय में तलब किया है। साथ ही, तीन दिनों के भीतर इस मामले की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी गई है। इस खुलासे ने केरल पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


बंगाल में टीएमसी के भय की राजनीति का अंत अब निश्चित: प्रधानमंत्री मोदी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/कोलकाता 11 अप्रैल 2026

पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल फूंकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि बंगाल में टीएमसी की ‘भय की राजनीति’ अब अपने अंतिम चरण में है और इसे खत्म होने से कोई नहीं रोक सकता। प्रधानमंत्री ने राज्य की वर्तमान स्थिति के लिए सत्ताधारी दल की नीतियों और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए।

आदिवासियों के साथ विश्वासघात और न्याय का वादा
पीएम मोदी ने बंगाल के आदिवासी समाज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि टीएमसी ने इस वर्ग के साथ केवल विश्वासघात किया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अब आदिवासियों को न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है।” सभा के दौरान जब कुछ लोग अपने साथ चित्र और पत्र लेकर आए, तो प्रधानमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपनी टीम और एसपीजी से उन्हें कलेक्ट करने को कहा। उन्होंने वादा किया कि पते लिखे होने पर वे व्यक्तिगत रूप से उन्हें पत्र भेजेंगे।

15 साल का हिसाब और विकास का संकल्प
मंच से प्रधानमंत्री ने टीएमसी के 15 साल के शासनकाल पर श्वेत पत्र की मांग की। उन्होंने कहा:
“ये टीएमसी ‘मां-माटी-मानुष’ का नारा देकर सत्ता में आई थी, लेकिन आज केवल गालियां और झूठे दावे ही इनकी पहचान हैं। 15 साल में इन्होंने बंगाल के लिए क्या किया, इसका कोई जवाब इनके पास नहीं है। जो 15 साल में कुछ नहीं कर पाए, वे अगले 5 साल में बंगाल को और बर्बाद ही करेंगे।”

भय बनाम भरोसा: विकसित बंगाल का विजन
पीएम मोदी ने टीएमसी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर तंज कसते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों ने भी इनकी ‘गुंडई’ और ‘बेईमानी’ को पहचान लिया है, इसलिए बंगाल के बाहर कोई इन्हें वोट नहीं देता। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के संकल्प के लिए बंगाल का विकसित होना अनिवार्य है।

उन्होंने जनता से आह्वान किया कि बंगाल को देश में नंबर एक बनाने के लिए ‘भय के राज’ को हटाकर ‘बीजेपी का भरोसे वाला राज’ लाना होगा। भारी भीड़ और चिलचिलाती धूप में खड़े लोगों से माफी मांगते हुए पीएम ने अंत में कहा कि जनता का यह तप बेकार नहीं जाएगा और वे इसे विकास के जरिए ‘सवा गुना’ करके लौटाएंगे।




मधुमक्खी पालन से बदलेगी किसानों की तस्वीर —जशपुर में 20 किसानों को मिला सरकारी अनुदान

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत शहद उत्पादन, परागण और स्वरोजगार को एक साथ मिल रहा बढ़ावा

रायपुर, 11 अप्रैल 2026—

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को वैकल्पिक आजीविका से जोड़ने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राज्य योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के 20 किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना में मधुमक्खी पेटी व कॉलोनी हेतु ₹1,600, छत्ते के लिए ₹800 तथा मधु निष्कासन यंत्र के लिए ₹8,000 का अनुदान शामिल है।

मधुमक्खियां शहद उत्पादन के साथ-साथ परागण के जरिए सरसों, आम, लीची, अमरूद, सूरजमुखी और सब्जी फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे कृषि अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मधुमक्खियों की संख्या घट रही है — ऐसे में यह योजना पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है।

यह व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बन रहा है। थोड़ा प्रशिक्षण लेकर कोई भी इसे शुरू कर सकता है। शहद, मोम और रॉयल जेली की बाजार में अच्छी माँग होने से आय के स्थायी स्रोत तैयार हो रहे हैं। एक बॉक्स से साल में कई बार उत्पादन लिया जा सकता है।

यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण — दोनों को मजबूत करने वाली साबित हो रही है।


जमीन की घटती उर्वरता पर कृषि विभाग की चिंता:- अब धरती को दवाई नहीं, हरी खाद दीजिए

रायपुर, 11 अप्रैल 2026

सूरजपुर जिले में मिट्टी की घटती उर्वरता चिंता का विषय बनती जा रही है। लगातार सघन खेती, रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग और पशुधन में कमी के कारण खेतों में जैविक कार्बन तेजी से घट रहा है। इस संकट से निपटने के लिए कृषि विभाग ने किसानों से हरी खाद अपनाने का आह्वान किया है।

हरी खाद यानी ढैंचा, सन, मूंग, उड़द, लोबिया जैसी दलहनी फसलें जिन्हें हरी अवस्था में ही खेत में जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इनकी जड़ों में मौजूद राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को सीधे मिट्टी में स्थिर कर देता है — वही काम जो किसान महंगे यूरिया से कराता है। ढैंचा तो प्रति एकड़ करीब तीन बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन देता है।

इसके फायदे सिर्फ नाइट्रोजन तक सीमित नहीं हैं। मिट्टी नरम और भुरभुरी बनती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है, खरपतवार स्वाभाविक रूप से दबते हैं और अगली फसल में कीट-रोग का प्रकोप भी कम होता है। सबसे बड़ी बात — रासायनिक खाद की लागत घटने से किसान की जेब में सीधा फायदा पहुँचता है।

कृषि विभाग की सलाह है कि सिंचित क्षेत्रों में मई में और असिंचित क्षेत्रों में जून में बुवाई करें। जब फसल 40 से 50 दिन की हो जाए तो उसे मिट्टी में पलट दें। रबी के लिए बरसीम की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में करें।

अधिक जानकारी के लिए जिला कृषि कार्यालय अथवा मृदा परीक्षण कार्यालय, सूरजपुर से संपर्क करें।


महिला आरक्षण लागू करने की मांग पर भाजपा का देशव्यापी अभियान आज से, सड़कों पर उतरी महिला ब्रिगेड

डिजिटल डेस्क-नई दिल्ली/रायपुर, 11 अप्रैल 2026

महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने और आगामी लोकसभा चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग को लेकर ने आज 11 अप्रैल से देशव्यापी प्रदर्शन और जागरूकता अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत भाजपा की महिला कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर रैलियां, पदयात्राएं और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

पार्टी का यह आंदोलन 16 से 18 अप्रैल के बीच प्रस्तावित विशेष संसद सत्र से पहले महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रित है। अभियान के पहले चरण में 11 से 13 अप्रैल तक देश के 100 से अधिक शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी, जिनमें कई केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

इसके बाद 15 और 16 अप्रैल को देश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में “नारी शक्ति पदयात्रा” निकाली जाएगी। भाजपा का लक्ष्य महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने और 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाना है।

इस पूरे अभियान को सरकार की महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर आगामी चुनावी माहौल के बीच। पार्टी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।

वहीं, इस मुद्दे पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण संशोधन को जल्दबाजी में लाया जा रहा है और यह आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण को लेकर शुरू हुआ यह अभियान आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है और इसका सीधा असर मतदाताओं, खासकर महिला वोटर्स पर पड़ने की संभावना है।


वृंदावन हादसा: यमुना में नाव पलटी, 10 श्रद्धालुओं की मौत, कई लापता—लापरवाही पर उठे सवाल

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वृंदावन, 11 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के में यमुना नदी पर बड़ा हादसा सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।कीर्ति घाट के पास शुक्रवार दोपहर करीब 3:15 बजे श्रद्धालुओं से भरी नाव अचानक पलट गई, जिससे अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 5 श्रद्धालु अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंजाब के लुधियाना, मोगा और मुक्तसर से आए करीब 30–35 श्रद्धालु में नौका विहार के लिए निकले थे। इसी दौरान नाव पीपा पुल से टकरा गई और संतुलन बिगड़ने से पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

राहत की बात यह रही कि करीब 22 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन कई लोग पानी में बह गए। सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचा और देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद डूबी हुई नाव को नदी से बाहर निकाला गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और बचे हुए श्रद्धालुओं ने इस हादसे के पीछे गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पीपा पुल पर निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन वहां किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड या संकेतक नहीं लगाया गया था। इसके अलावा नाव में क्षमता से अधिक सवारी होने और लाइफ जैकेट की अनुपस्थिति भी सामने आई है, जिससे हादसे की गंभीरता और बढ़ गई।

हादसे पर ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं ने भी घटना पर दुख जताते हुए संवेदना प्रकट की है। प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये सहायता देने की घोषणा की गई है।

पुलिस के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आईं क्योंकि नाव पलटकर दलदली क्षेत्र में फंस गई थी। डीआईजी शैलेश कुमार पांडे ने बताया कि लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।

इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंधे कत्ल का खुलासा: बेमेतरा पुलिस की बड़ी सफलता, एक विधि संघर्षरत बालक निरुद्ध

बेमेतरा, 10 अप्रैल 2026

उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) रामकृष्ण साहू (भा.पु.से.) द्वारा इस मामले के संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विस्तृत जानकारी दी गई।

थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस को अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने एक विधि से संघर्षरत बालक को निरुद्ध किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना बेमेतरा में अपराध क्रमांक अंतर्गत धारा 103(1) बीएनएस में मृतक अमन ध्रुव (उम्र 24 वर्ष), निवासी बेमेतरा, को दिनांक 03 अप्रैल 2026 को हनुमान जयंती रैली के दौरान रात्रि लगभग 10 बजे प्रताप चौक के पास अज्ञात व्यक्ति द्वारा पेट के दाहिने हिस्से में धारदार वस्तु से गंभीर चोट पहुंचाई गई थी।

घटना के बाद मृतक ने वास्तविक घटना छिपाते हुए इसे दुर्घटना बताकर रॉड घुसने की बात कही। तबीयत बिगड़ने पर 06 अप्रैल को उसे जिला अस्पताल बेमेतरा लाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया। उपचार के दौरान 07 अप्रैल 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 09 अप्रैल 2026 को अज्ञात आरोपी के विरुद्ध धारा 103(1) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच प्रारंभ की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री हरीश कुमार यादव के मार्गदर्शन तथा एसडीओपी बेमेतरा श्री भूषण एक्का के नेतृत्व में थाना प्रभारी निरीक्षक सोनल ग्वाला एवं साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक मयंक मिश्रा सहित 19 सदस्यीय टीम गठित की गई।

जांच के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि रैली के दौरान नाचने के समय मृतक का एक विधि से संघर्षरत बालक के साथ विवाद हुआ था। संदेही से पूछताछ करने पर उसने धारदार वस्तु से हमला करना स्वीकार किया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिया गया है।आरोपी विधि संघर्षरत बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

इस पूरी कार्यवाही में पुलिस टीम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहनीय भूमिका रही।