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20,400 टन LPG लेकर ‘जग विक्रम’ आज कांडला पहुंचेगा, समुद्री आपूर्ति सामान्य

नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क, 14 अप्रैल 2026

देश की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती देने के बीच भारतीय ध्वज वाला एलपीजी जहाज ‘जग विक्रम’ आज मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाला है। यह जहाज 20,400 टन एलपीजी लेकर आ रहा है और हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर चुका है, जिससे आपूर्ति को लेकर सरकार की तैयारियों को बल मिला है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद देश में एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह सुचारु बनी हुई है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

इसी बीच, खाड़ी क्षेत्र से भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी का अभियान भी जारी है। अब तक कुल 2,177 भारतीय नाविकों को स्वदेश लाया जा चुका है, जिनमें पिछले 24 घंटे में 93 लोग शामिल हैं। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन 24 घंटे हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों को सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक फिलहाल सुरक्षित हैं। डीजी शिपिंग कंट्रोल रूम ने अब तक हजारों कॉल और ईमेल के जरिए सहायता प्रदान की है, जिससे संकट के समय त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हुई है।

देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी जाम या अवरोध की स्थिति नहीं है। पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर वेस्ट एशिया से जुड़े हजारों कंटेनरों का संचालन सुचारु रूप से किया गया है, जिनमें अधिकांश की समय पर निकासी हो चुकी है।


पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय विदेश मंत्रालय और खाड़ी क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय कर लगातार काम कर रहा है, ताकि समुद्री संचालन प्रभावित न हो और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


विदेश मंत्री ने भी हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात का दौरा कर वहां के हालात की समीक्षा की। सरकार का कहना है कि वह खाड़ी और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय कर रही है।


सरकार ने दोहराया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सहायता और भलाई सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव प्रयास जारी रहेंगे।


एलपीजी आपूर्ति सामान्य, डिजिटल बुकिंग में उछाल; अफवाहों से बचने की अपील

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नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क, 14 अप्रैल 2026

देशभर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति फिलहाल पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, उपभोक्ताओं के बीच ऑनलाइन बुकिंग का रुझान तेजी से बढ़ा है और यह आंकड़ा करीब 98 प्रतिशत तक पहुंच गया है। निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए अधिकांश एलपीजी वितरक केंद्र रविवार को भी खुले रखे गए।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों के बावजूद, देश में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ा है। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

मार्च 2026 से अब तक देशभर में 1.28 लाख से अधिक छापेमारी की कार्रवाई की गई है, जिसमें 59 हजार से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई है।

मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की अतिरिक्त खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यमों से बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।

सरकार ने वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया है। पीएनजी, इलेक्ट्रिक और इंडक्शन कुकटॉप जैसे विकल्पों को अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि एलपीजी की मांग पर दबाव कम किया जा सके। ऊर्जा बचत को भी इस समय प्राथमिकता देने की अपील की गई है।

इसके अलावा, व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि फार्मा, इस्पात, ऑटोमोबाइल और कृषि क्षेत्र जैसे प्रमुख उद्योगों को भी प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलोग्राम सिलेंडर की आपूर्ति भी बढ़ाई गई है।

सरकार ने आपूर्ति और मांग के संतुलन के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में बुकिंग अंतराल को 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक करना शामिल है। इसके साथ ही कोयला और केरोसिन जैसे वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है।

मंत्रालय का कहना है कि देश में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह सुचारु है और आम जनता को किसी भी तरह की कमी की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

महिला आरक्षण बिल से नारी शक्ति को मिलेगा पूर्ण प्रतिनिधित्व, निर्णय लेने में बढ़ेगी भूमिका – सीएम विष्णुदेव साय

रायपुर, 13 अप्रैल 2026

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुनते हुए कहा कि महिला आरक्षण से देश की आधी आबादी को उनका पूरा हक मिलेगा और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने इसे लोकतंत्र को समावेशी बनाने का ऐतिहासिक कदम बताया, जो ‘पंचायत से संसद तक’ महिलाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करेगा।

सीएम साय ने रेखांकित किया कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा होगी, जो विकसित भारत की नींव मजबूत करेगा। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों में 50% महिला आरक्षण पहले से लागू है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर दिख रहा है। ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहलों से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही हैं, और प्रदेश ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है।

भारतीय संस्कृति में नारी को हमेशा उच्च स्थान प्राप्त रहा है, वैदिक काल से समाज निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। डबल इंजन सरकार की योजनाएं इस परंपरा को मजबूत कर रही हैं। सीएम ने महिलाओं और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर आवाज बुलंद करें, ताकि नारी सशक्तिकरण से राष्ट्र मजबूत बने।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अंत में कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह समय देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका देने का है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बेमेतरा में सहकारिता का विस्तार:-38 नई सेवा सहकारी समितियों के साथ 15 अप्रैल को होगा वर्चुअल शुभारंभ

बेमेतरा, 13 अप्रैल 2026:-

15 अप्रैल को होगा वर्चुअल शुभारंभ

15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं सहकारिता मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इन नवीन समितियों का वर्चुअल शुभारंभ किया जाएगा। इस अवसर पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिले की सभी 38 नई सहकारी समितियों में एक साथ किया जाएगा।

जिला बेमेतरा में किसानों को सशक्त बनाने और सहकारिता व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। जिले के प्रत्येक किसान परिवार तक सहकारिता की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 38 नई सेवा सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इन नवगठित समितियों में मर्या. ओड़िया, पिपरीया, परसबोड़, भटगांव, जानो, लुक, मासुलगोंदी, नवागांवकला, कंदई, तेंदुवा, केशडबरी, हरदी, सांकरा, कुम्ही, लावातरा, भाठासोहरी, आन्दु, परपोड़ा, बसनी, गांगपुर, खैरझिटी, बिटकुली, लालपुर, जांता, बटार, पड़कीडीह, करचुवा, मजगांव, जंगलपुर, गनिया, झुलना, मेहना, कुंवा, चिचोली, एरमशाही, गनियारी, तेन्दुआ एवं झिलगा सम्मिलित हैं।

किसानों को मिलेंगी बहुआयामी सुविधाएं
इन नई सेवा सहकारी समितियों के जरिए किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि यंत्र एवं ऋण जैसी सुविधाएं सहजता से मिल सकेंगी। इसके साथ ही किसान अपनी उपज — धान, चना, सोयाबीन, सरसों, मसूर आदि — को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक तरीके से समितियों के माध्यम से विक्रय कर सकेंगे। समितियों के बहुद्देशीय स्वरूप से आम नागरिकों को भी फायदा होगा। लोक सेवा केन्द्र के रूप में संचालित इन समितियों में बिजली बिल भुगतान, टिकट बुकिंग, मोबाइल रिचार्ज, ऑनलाइन आवेदन तथा बी-1, खसरा-नक्शा जैसी दैनिक जरूरतों की सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

खरीफ 2026-27 के लिए विशेष कार्यक्रम
इस आयोजन के दौरान खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को ऋण वितरण, नवीन सदस्यता ग्रहण, खाद वितरण एवं किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी पूर्ण किए जाएंगे।

किसानों से सहभागिता की अपील
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समिति अध्यक्षों, कर्मचारियों एवं सहकारिता विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति रहेगी। जिला प्रशासन ने कार्यक्षेत्र के समस्त किसानों से आग्रह किया है कि वे अपनी नजदीकी सेवा सहकारी समिति में पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता करें और उपलब्ध सेवाओं का भरपूर लाभ उठाएं।

बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर 2’ का दबदबा:बॉक्स ऑफिस दहाड़ के साथ रिकॉर्ड, लेकिन कहानी पर भी उठे सवाल

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मुंबई/डिजीटल डेस्क -13 अप्रैल 2026
मार्च 2026 में रिलीज हुई ने चौथे वीकेंड पर भी बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत रखते हुए यह साबित कर दिया है कि कंटेंट और स्टार पावर का सही मिश्रण दर्शकों को लंबे समय तक सिनेमाघरों तक खींच सकता है। की इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म ने 24 दिनों में वैश्विक स्तर पर ₹1,600 करोड़ से अधिक की कमाई कर ली है, जो इसे साल 2026 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल कर रही है।

फिल्म का निर्देशन ने किया है, जिन्होंने पहले भी देशभक्ति और एक्शन से भरपूर सिनेमा को नई पहचान दी है। ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद इसका सीक्वल ‘धुरंधर 2’ उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए और अधिक बड़े पैमाने पर दर्शकों के सामने आया है।

चौथे वीकेंड की कमाई और रिकॉर्ड
रिपोर्ट्स के अनुसार, चौथे रविवार को भी फिल्म ने दमदार कलेक्शन करते हुए यह साबित किया कि इसकी पकड़ अभी ढीली नहीं पड़ी है। नई रिलीज फिल्मों, खासकर को पीछे छोड़ते हुए इसने बॉक्स ऑफिस पर अपना वर्चस्व बनाए रखा। ट्रेड एनालिस्ट मान रहे हैं कि फिल्म का ₹1,700 करोड़ क्लब पार करना तय है और यह जल्द ही “1100 करोड़ी क्लब” (भारतीय कलेक्शन) में भी शामिल हो सकती है।

कहानी और प्रस्तुतिकरण
फिल्म की कहानी 26/11 हमलों के बाद एक भारतीय खुफिया एजेंट के मिशन पर आधारित है, जो पाकिस्तान के कराची में जाकर आतंकी नेटवर्क और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ ‘ऑपरेशन ल्यारी’ को अंजाम देता है। इसमें , और जैसे कलाकारों की मजबूत उपस्थिति फिल्म को और प्रभावशाली बनाती है।

फिल्म का पहला हाफ तेज रफ्तार और थ्रिल से भरपूर है, जबकि दूसरा भाग भावनात्मक और देशभक्ति के तत्वों पर अधिक केंद्रित है। एक्शन सीक्वेंस, लोकेशन और बैकग्राउंड स्कोर को दर्शकों से खासा सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला है।

समीक्षात्मक नजरिया
हालांकि फिल्म की व्यावसायिक सफलता निर्विवाद है, लेकिन समीक्षकों ने इसकी कहानी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कई समीक्षकों का मानना है कि फिल्म में देशभक्ति और एक्शन का ओवरडोज़ है, जिससे कुछ हिस्सों में यथार्थवाद प्रभावित होता है। वहीं, पाकिस्तान आधारित कथानक और वास्तविक घटनाओं की प्रस्तुति को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है।

इसके बावजूद की एनर्जी, स्क्रीन प्रेजेंस और एक्शन अवतार को दर्शकों ने खूब सराहा है। उनका किरदार फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

जनचौपाल-निष्कर्ष
‘धुरंधर 2’ न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि बड़े बजट, देशभक्ति और स्टारडम का मेल आज भी भारतीय दर्शकों के बीच कारगर फॉर्मूला है। हालांकि कंटेंट के स्तर पर कुछ सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन कमाई के आंकड़े यह साफ बताते हैं कि फिल्म ने दर्शकों का दिल जीतने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।




अंतरराष्ट्रीय संकट पर आम आदमी की नजर: होर्मुज तनाव से बढ़ी चिंता, भारत पर असर को लेकर गहराई बेचैनी

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली/रायपुर 13 अप्रैल 2026

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और को लेकर पैदा हुए हालात अब सिर्फ कूटनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आम लोगों की चर्चाओं का भी प्रमुख विषय बन चुके हैं। द्वारा और के बीच मध्यस्थता की कोशिशें भले ही फिलहाल बेनतीजा रही हों, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती तनातनी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे देशों के लिए चिंता बढ़ा दी है।

एक आम नागरिक का नजरिया

छत्तीसगढ़ के एक आम नागरिक के नजरिए से देखें तो यह पूरा घटनाक्रम “दूर का युद्ध, पास की परेशानी” जैसा नजर आता है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ताकतवर देशों के फैसलों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
उनके शब्दों में—“हमें भले ही अमेरिका-ईरान की राजनीति पूरी तरह समझ न आए, लेकिन जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तब इसका असर हर घर पर दिखता है।”

तनाव की जड़ और ताजा हालात

जानकारों के अनुसार, दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। द्वारा इस मार्ग पर सख्त रुख अपनाने और संभावित नाकेबंदी की चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।वहीं और की अगुवाई में इस्लामाबाद में हुई बातचीत से उम्मीद तो जगी, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

भारत पर संभावित असर
भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसका प्रमुख मार्ग यही समुद्री रास्ता है। ऐसे में—

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।महंगाई दर पर दबाव बढ़ेगा।परिवहन और रोजमर्रा की चीजें महंगी होंगी ।आम आदमी की नजर में सबसे बड़ा डर यही है कि “अगर तेल महंगा हुआ, तो हर चीज महंगी हो जाएगी।”

कूटनीतिक बनाम जमीनी सच्चाई

भले ही पाकिस्तान इस मध्यस्थता को अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अस्थिर बनी हुई है। आम नागरिक का मानना है कि जब तक बड़े देश अपने हितों से ऊपर उठकर समाधान नहीं निकालेंगे, तब तक ऐसे संकट बार-बार आते रहेंगे।

खबर सार:-
मध्य-पूर्व का यह तनाव एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि वैश्विक राजनीति का असर सीमाओं से परे होता है। एक आम भारतीय के लिए यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय खबर नहीं, बल्कि आने वाले समय में उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली हकीकत है।


IPL 2026: रन बरस रहे, लेकिन क्या क्रिकेट कहीं खो तो नहीं रहा? RCB की जीत, गिल का रिकॉर्ड और कुछ कड़वे सवाल

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मुंबई/नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क -13 अप्रैल 2026

2026 में रन मशीन की तरह चल रहा है—हर मैच में चौके-छक्कों की बारिश, रिकॉर्ड्स की झड़ी और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन। लेकिन इसी चमक के बीच कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जिन पर अब खुलकर बात होना जरूरी है।

RCB vs MI: बल्लेबाजी का तूफान, गेंदबाजी बेबस

मुंबई के वानखेड़े में खेले गए मुकाबले में ने को 18 रन से हराया। स्कोरकार्ड बताता है कि यह मुकाबला नहीं, बल्कि बल्लेबाजों का प्रदर्शन मंच था,और —तीनों ने अर्धशतक जड़कर 240 रन ठोक दिए। जवाब में (71*) और (40) ने लड़ाई तो लड़ी, लेकिन टीम 222 तक ही पहुंच सकी।
अब सवाल ये है—क्या 240 vs 222 वाला मैच सच में “कंटेस्ट” है? या फिर गेंदबाज सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं?

IPL धीरे-धीरे बल्लेबाजों का खेल बनता जा रहा है, जहां 200+ स्कोर अब “नॉर्मल” हो गया है।

शुभमन गिल: रिकॉर्ड बना, लेकिन कहानी इससे बड़ी है
दूसरी तरफ ने IPL में सबसे कम उम्र में 4000 रन पूरे कर का रिकॉर्ड तोड़ दिया।यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ा नहीं है—यह संकेत है कि भारतीय क्रिकेट का अगला “पोस्टर बॉय” तैयार है।गिल की बल्लेबाजी में क्लास है, स्थिरता है और सबसे बड़ी बात—वह “हाइप” से ज्यादा “परफॉर्मेंस” पर भरोसा करते हैं।लेकिन सवाल ये भी है कि क्या हम हर युवा खिलाड़ी को जल्दी-जल्दी “अगला कोहली” बनाने की कोशिश कर रहे हैं?

GT vs LSG: संतुलन की झलक, जो बाकी मैचों में गायब

गिल की पारियों ने मैच को प्रोफेशनल अंदाज में खत्म किया।यही असली T20 क्रिकेट है—जहां सिर्फ पावर नहीं, प्लान भी दिखता है।लेकिन ऐसे मैच अब कम क्यों हो रहे हैं?

बड़ी तस्वीर: IPL का बदलता चेहरा
रन तेजी से बढ़ रहे हैं गेंदबाजों का प्रभाव घट रहा है।युवा बल्लेबाज रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।लेकिन “कम्पटीशन” का संतुलन बिगड़ रहा है ।

सीधा सवाल:
क्या IPL अब “एंटरटेनमेंट लीग” ज्यादा और “क्रिकेट लीग” कम होता जा रहा है? IPL 2026 रोमांचक जरूर है, लेकिन एकतरफा भी होता जा रहा है।RCB की जीत, गिल का रिकॉर्ड—ये सब शानदार हैं, लेकिन अगर गेंद और बल्ले के बीच संतुलन नहीं रहा, तो खेल की असली आत्मा पर असर पड़ सकता है।दर्शक चौके-छक्के देखकर खुश जरूर होते हैं, लेकिन असली मजा तब आता है जब मैच आखिरी ओवर तक “बराबरी” का हो—ना कि सिर्फ “रनों की बारिश” का।








अक्षय तृतीया 2026: 100 साल बाद दुर्लभ संयोग, आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को भी दे सकता है बड़ा बल

धर्म डेस्क, 13 अप्रैल 2026

इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाई जा रही न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ज्योतिषीय और आर्थिक नजरिए से भी बेहद खास मानी जा रही है। ज्योतिषविदों के अनुसार करीब एक सदी बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब पंचमहापुरुष योग के साथ कई राजयोग एक ही दिन प्रभावी रहेंगे।

दुर्लभ योगों का संगम: आस्था का ‘सुपर डे’
इस बार के साथ गजकेसरी, त्रिपुष्कर, सर्वार्थ सिद्धि, रवि, शश और मालव्य जैसे योग बन रहे हैं।
ज्योतिष मान्यता है कि ऐसे योगों में किया गया कोई भी कार्य “अक्षय”—अर्थात कभी समाप्त न होने वाला फल देता है।
गजकेसरी योग: समृद्धि और प्रतिष्ठा
त्रिपुष्कर योग: निवेश का तीन गुना फल
सर्वार्थ सिद्धि योग: हर कार्य में सफलता
रवि योग: स्वास्थ्य और सम्मान
शश व मालव्य योग: करियर और वैभव में वृद्धि ।

मुहूर्त और पूजा का समय
तृतीया तिथि: 19 अप्रैल सुबह 10:49 से 20 अप्रैल सुबह 07:27 तक
श्रेष्ठ पूजा मुहूर्त: 10:49 से 12:20 (लगभग 1 घंटा 31 मिनट)
खरीदारी का शुभ समय: 19 अप्रैल सुबह 10:49 से 20 अप्रैल सुबह 05:51 तक
खरीदारी और बाजार पर प्रभाव
अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा पुरानी है, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ चुका है।
ज्वेलरी सेक्टर में भारी उछाल की उम्मीद
रियल एस्टेट और वाहन बिक्री में तेजी
छोटे व्यापारियों के लिए भी यह “बूम डे”

विश्लेषण:
यह पर्व अब सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि “इकोनॉमिक इवेंट” भी बन चुका है। भारत जैसे देश में जहां परंपरा और बाजार साथ चलते हैं, वहां अक्षय तृतीया अर्थव्यवस्था को सीधा बूस्ट देती है।

राशियों पर प्रभाव और निवेश संकेत
ज्योतिष के अनुसार मेष, वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष लाभकारी माना जा रहा है।
खासकर व्यापार और नए निवेश के लिए यह दिन अनुकूल बताया जा रहा है।

विश्लेषण: आस्था बनाम अंधविश्वास
अक्षय तृतीया का महत्व नकारा नहीं जा सकता, लेकिन एक सवाल हमेशा रहता है—क्या हर निवेश सिर्फ “शुभ मुहूर्त” के भरोसे करना सही है?
आस्था प्रेरणा दे सकती हैलेकिन आर्थिक निर्णय सोच-समझकर ही लेने चाहिएआज के दौर में यह पर्व “भावना + बाजार + विश्वास” का मिश्रण बन चुका है।

निष्कर्ष
2026 एक तरफ जहां आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर यह भारत की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने का अवसर बन रही है।
आखिरी बात:
यह दिन नई शुरुआत के लिए जरूर शुभ है—लेकिन सफलता सिर्फ योगों से नहीं, सही निर्णय और मेहनत से भी मिलती है।

रेलवे में ऐतिहासिक छलांग: 114% वृद्धि के साथ 6,000 किमी नई लाइनें मंजूर”

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छत्तीसगढ़ में रावघाट-जगदलपुर लाइन जैसी ऐतिहासिक पहल।

नई दिल्ली_12/04/2026

भारतीय रेलवे देश के सबसे गरीब और दूरदराज इलाकों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विविधता वाले भारत को एक सूत्र में पिरोते हुए, वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6,000 किलोमीटर लंबे रेलवे विस्तार को मंजूरी मिली है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 114 प्रतिशत अधिक है।

निवेश में ऐतिहासिक उछाल
1.53 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 100 परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई, जो पिछले वित्त वर्ष (72,869 करोड़, 64 परियोजनाएं, 2,800 किमी) की तुलना में 110 प्रतिशत अधिक है। परियोजनाओं में 56 प्रतिशत वृद्धि हुई। ये नई लाइनें, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, बाईपास, फ्लाईओवर शामिल हैं।

जनजातीय क्षेत्रों पर फोकस
जनजातीय और वंचित इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर, जैसे छत्तीसगढ़ का रावघाट-जगदलपुर लाइन। भीड़भाड़ वाले मार्गों को सुव्यवस्थित कर समयपालन सुधरेगा, यात्री अनुभव बेहतर होगा। सभी राज्य कवर, खासकर महाराष्ट्र (17), बिहार (11), झारखंड (10), मध्य प्रदेश ।

रेलवे की प्रमुख परियोजनाएं
1,000 करोड़ से अधिक की 35+ परियोजनाएं: कसारा-मनमाड (10,150 करोड़, 131 किमी), खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा (8,740 करोड़, 278 किमी), इटारसी-नागपुर (5,450 करोड़, 297 किमी), सिकंदराबाद-वाडी (5,000 करोड़, 173 किमी)। ये कुल 28,000 करोड़ की हैं। मिशन 3000 मीट्रिक टन से माल ढुलाई बढ़ेगी।

आर्थिक-सामाजिक लाभ बढ़ेगा
परिचालन दक्षता, यात्रा समय में कमी, रोजगार सृजन, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी। ऊर्जा सुरक्षा, पोर्ट कनेक्टिविटी, कोयला ढुलाई तेज होगी। बाजार, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार तक पहुंच सुनिश्चित। स्टील-सीमेंट जैसे उद्योगों को बढ़ावा।

यह विस्तार भारत की आर्थिक छलांग का आधार बनेगा, समावेशी विकास को गति देगा।

आशा भोंसले: सुरों की मल्लिका का एक युग समाप्त विनम्र श्रद्धांजलि

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बॉलीवुड डेस्क/मुंबई-12/04/2026



भारतीय संगीत की ‘वर्सेटाइल क्वीन’ आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी जादुई आवाज सदियों तक गूँजती रहेगी। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने संगीत के एक स्वर्ण युग का समापन कर दिया है।

संगीत में कदम और पहला गाना
आशा जी का जन्म 1933 में हुआ था। पिता दीनानाथ मंगेशकर के निधन के बाद, परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने बहुत कम उम्र में गाना शुरू कर दिया था।पहला गाना:

उन्होंने 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के लिए अपना पहला गीत ‘चला चला नव बाळा’ गाया।

प्लेबैक सिंगर के रूप में शुरुआत:हिंदी सिनेमा में उन्हें पहला बड़ा ब्रेक 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने “सावन आया” से मिला। उस समय उनकी दीदी लता मंगेशकर और अन्य दिग्गज गायिकाओं का बोलबाला था, इसलिए आशा जी को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा।

सफलता का ‘पीक टाइम’ और सुपरहिट सफर
आशा जी का असली उत्थान 1950 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ।
निर्णायक मोड़:संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत की दुनिया बदल दी। फिल्म ‘नया दौर’ (1957) की सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वर्सेटिलिटी:
जहाँ अन्य गायिकाएं केवल शास्त्रीय या गंभीर गीतों तक सीमित थीं, आशा जी ने कैबरे, गजल, पॉप, और कव्वाली हर विधा में महारत हासिल की।

सबसे सुपरहिट गाना:
वैसे तो उनके हजारों गाने हिट हैं, लेकिन “दम मारो दम (हरे रामा हरे कृष्णा) एक ऐसा गाना था जिसने उन्हें ग्लोबल आइकन बना दिया। इसके अलावा ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘चुरा लिया है तुमने’ और ‘इन आँखों की मस्ती के’ जैसे गीत आज भी हर जुबान पर रहते हैं।

वैवाहिक जीवन और पंचम दा (आर.डी. बर्मन)
आशा जी का निजी जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। 16 साल की उम्र में उन्होंने गणपतराव भोंसले से शादी की थी, जो सफल नहीं रही। उनके तीन बच्चे हुए: **हेमंत, वर्षा और आनंद।

पंचम दा के साथ रिश्ता:
1980 में उन्होंने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से शादी की। यह जोड़ी संगीत और प्रेम दोनों के मामले में बेमिसाल थी।

खुशहाल जीवन:
पंचम दा के साथ उनका जीवन बेहद रचनात्मक और खुशहाल रहा। दोनों ने मिलकर संगीत के नए प्रयोग किए। 1994 में पंचम दा के निधन तक वे एक-दूसरे के सबसे बड़े सहारे रहे।

सामाजिक सरोकार और व्यक्तित्व
आशा जी केवल एक गायिका नहीं, बल्कि एक परोपकारी व्यक्तित्व भी थीं।उन्होंने कई चैरिटी शो किए और संगीत के माध्यम से समाज सेवा से जुड़ी रहीं। वह एक बेहतरीन कुक (रसोइया) भी थीं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘Asha’s’ नाम से रेस्टोरेंट चेन शुरू की, जिससे उन्होंने भारतीय संस्कृति और स्वाद को दुनिया भर में फैलाया।

युवा प्रतिभाओं को निखारने के लिए उन्होंने हमेशा रियलिटी शो और मंचों के माध्यम से नए गायकों का मार्गदर्शन किया।

खबर निष्कर्ष:
आशा भोंसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाकर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराया। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे भरना नामुमकिन है। उनकी आवाज की खनक हमेशा हमें उनकी याद दिलाती रहेगी।

आशा भोंसले जी के निधन की खबर संगीत जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वह केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत का एक पूरा अध्याय थीं।
विनम्र श्रद्धांजलि!🙏