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भीषण गर्मी में हेल्दी लाइफस्टाइल: खुद को रखें फिट, फ्रेश और सुरक्षित

लाइफ़ स्टाइल/जीवन मंत्रास -16/04/2026

गर्मी का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां लेकर आता है—डिहाइड्रेशन, थकान, हीट स्ट्रोक और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में सही लाइफस्टाइल अपनाकर न केवल इन परेशानियों से बचा जा सकता है, बल्कि पूरे सीजन खुद को ऊर्जावान और स्वस्थ भी रखा जा सकता है।

सबसे पहले, नियमित शारीरिक गतिविधिको अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30-35 मिनट की ब्रिस्क वॉकिंग (तेज चलना), हल्का व्यायाम या योग करना शरीर को एक्टिव रखता है। हालांकि, तेज धूप से बचने के लिए सुबह या शाम का समय व्यायाम के लिए बेहतर माना जाता है।

खानपान में संतुलन बनाए रखना गर्मी में बेहद जरूरी है। अपनी डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। तरबूज, खीरा, नींबू पानी जैसे पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। वहीं, ज्यादा तेल-मसाले, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक और चीनी से दूरी बनाना फायदेमंद रहता है।

गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे अहम है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, साथ ही नारियल पानी, छाछ और ताजे जूस भी शरीर में तरल संतुलन बनाए रखते हैं। ध्यान रखें कि प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें।

इसके साथ ही, पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही जरूरी है। हर रात 7-8 घंटे की अच्छी नींद शरीर और दिमाग को तरोताजा रखती है। नींद की कमी से थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है, जो गर्मी में और ज्यादा असर डालता है।

मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी जरूरी है। ध्यान (मेडिटेशन), योग और अपने पसंदीदा शौक जैसे पढ़ना या संगीत सुनना तनाव को कम करने में मदद करते हैं। इससे मन शांत रहता है और शरीर भी बेहतर तरीके से काम करता है।

अंत में, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि ये आदतें शरीर को डिहाइड्रेट करती हैं और गर्मी के असर को बढ़ा देती हैं।

खबर सारांश
अगर आप गर्मी के मौसम में सही लाइफस्टाइल अपनाते हैं, तो न सिर्फ बीमारियों से बच सकते हैं बल्कि पूरे दिन खुद को ऊर्जावान और फ्रेश भी महसूस करेंगे। छोटे-छोटे बदलाव आपकी सेहत में बड़ा अंतर ला सकते हैं।

महिला और पुरुष की सोच में अंतर: तनाव, जिम्मेदारियां और लाइफ मैनेजमेंट का संतुलन

लाइफ स्टाइल/16/04/2026

समाज में अक्सर यह चर्चा होती है कि महिला और पुरुष की सोच में कितना अंतर होता है और जीवन को देखने का उनका नजरिया किस तरह अलग होता है। यह अंतर केवल जैविक नहीं, बल्कि सामाजिक, पारिवारिक और अनुभवजन्य भी होता है, जो उनके व्यवहार और निर्णय लेने की शैली को प्रभावित करता है।

आमतौर पर पुरुषों की सोच अधिक लक्ष्य-केन्द्रित और परिणाम आधारित मानी जाती है। वे समस्याओं को सीधे हल करने और नियंत्रण में रखने की कोशिश करते हैं। वहीं, महिलाएं भावनात्मक जुड़ाव और रिश्तों को अधिक महत्व देती हैं। वे किसी भी परिस्थिति को सिर्फ समस्या के रूप में नहीं, बल्कि उससे जुड़े लोगों और भावनाओं के साथ समझती हैं।

तनाव की बात करें तो यह कहना सही नहीं होगा कि किसी एक पर ज्यादा या कम होता है। पुरुष और महिला दोनों ही तनाव का अनुभव करते हैं, लेकिन उसे व्यक्त करने और संभालने का तरीका अलग होता है।

पुरुष अक्सर अपने तनाव को अंदर ही दबा लेते हैं या उसे साझा करने से बचते हैं, जिससे वह लंबे समय तक बना रह सकता है। दूसरी ओर, महिलाएं अपने भावनाओं को व्यक्त करने में अपेक्षाकृत अधिक सहज होती हैं—चाहे वह बातचीत के जरिए हो, रोकर हो या किसी करीबी से साझा करके। यही कारण है कि वे बाहर से कम तनावग्रस्त नजर आ सकती हैं।

महिलाओं की लाइफ मैनेजमेंट क्षमता को लेकर अक्सर यह देखा गया है कि वे एक साथ कई भूमिकाएं निभाने में दक्ष होती हैं—घर, परिवार, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियां। वे प्राथमिकताओं को तय करने, समय का सही उपयोग करने और छोटी-छोटी खुशियों में संतुलन बनाने की कला जानती हैं। इसके पीछे उनकी आदत होती है कि वे हर परिस्थिति में सामंजस्य बैठाने की कोशिश करती हैं, जबकि पुरुष कई बार एक ही समस्या पर अधिक फोकस कर देते हैं।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि इस तुलना को सामान्यीकरण के रूप में न देखा जाए। आज के समय में पुरुष भी अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने और व्यक्त करने लगे हैं, वहीं महिलाएं भी निर्णय लेने और नेतृत्व में आगे बढ़ रही हैं। दोनों के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है।

लेख एक दृष्टिकोण पर आधारित है
महिला और पुरुष की सोच में अंतर स्वाभाविक है, लेकिन यह अंतर प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि संतुलन का आधार है। जहां एक ओर पुरुष समस्या समाधान में दक्ष होते हैं, वहीं महिलाएं भावनात्मक संतुलन और प्रबंधन में मजबूत होती हैं। अगर दोनों एक-दूसरे की खूबियों को समझें और अपनाएं, तो जीवन अधिक सहज, संतुलित और खुशहाल बन सकता है।


TIME100 2026: दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों में भारत की मजबूत मौजूदगी, रणबीर कपूर, विकास खन्ना और सुंदर पिचाई शामिल

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026:

दुनिया की प्रतिष्ठित मैगजीन ने वर्ष 2026 के लिए अपनी बहुचर्चित TIME100 सूची जारी कर दी है। इस सूची में उन 100 हस्तियों को शामिल किया जाता है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है। इस बार भारत के लिए खास बात यह रही कि तीन प्रमुख भारतीय चेहरों—, और —को इसमें जगह मिली है।

अलग-अलग क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा का जलवा
TIME100 सूची में चयन केवल लोकप्रियता के आधार पर नहीं, बल्कि उस प्रभाव के आधार पर किया जाता है जो व्यक्ति समाज, संस्कृति, तकनीक या वैश्विक सोच पर डालता है। इस लिहाज से भारत के इन तीनों नामों का चयन अलग-अलग क्षेत्रों में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

टेक्नोलॉजी में नेतृत्व: सुंदर पिचाई
को टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनके नेतृत्व और नवाचार के लिए शामिल किया गया है। गूगल के सीईओ के रूप में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी की दिशा तय करने में उनका योगदान लगातार चर्चा में रहा है।

भारतीय स्वाद की वैश्विक पहचान: विकास खन्ना
ने भारतीय व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है। एक शेफ होने के साथ-साथ वे समाजसेवा और मानवीय कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं। महामारी और आपदा के समय उनके द्वारा किए गए राहत कार्यों ने उन्हें वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाई।

सिनेमा में प्रभाव: रणबीर कपूर
को भारतीय सिनेमा में उनके प्रभावशाली अभिनय और विविध भूमिकाओं के लिए इस सूची में स्थान मिला है। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में दी हैं, जिनसे न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिली बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय फिल्मों की पहचान मजबूत हुई।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती पहचान
TIME100 2026 सूची में भारतीय हस्तियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, संस्कृति और क्रिएटिव इंडस्ट्री में भी विश्व स्तर पर प्रभाव डाल रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों से आए ये नाम इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय प्रतिभा अब वैश्विक विमर्श का अहम हिस्सा बन चुकी है।

क्या है TIME100 सूची की खासियत?
हर साल जारी होने वाली यह सूची राजनीति, बिजनेस, मनोरंजन, विज्ञान और समाजसेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों की प्रभावशाली हस्तियों को एक मंच पर लाती है। इसमें शामिल होना किसी भी व्यक्ति के लिए वैश्विक पहचान और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

खबर सार
टाइम 100 2026 में , और का चयन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रभाव का भी प्रतीक है। आने वाले समय में ऐसे और नाम इस सूची में शामिल हो सकते हैं, जो देश की पहचान को और मजबूत करेंगे।

चिन्नास्वामी में ‘विराट’ गर्जना: लखनऊ को कुचलकर अंकतालिका के शिखर पर बैठा बेंगलुरु

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बेंगलुरु /16 अप्रैल 2026

एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम की फिजाओं में बुधवार रात सिर्फ एक ही नाम गूँज रहा था—RCB! आईपीएल 2026 के 23वें मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने न सिर्फ लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को 5 विकेट से धूल चटाई, बल्कि नेट रनरेट के दम पर राजस्थान रॉयल्स को पछाड़कर अंकतालिका के सिंहासन (Number 1) पर कब्जा कर लिया है।

रसिक की रफ़्तार और भुवी की धार: ढेर हुई लखनऊ
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी लखनऊ की टीम बेंगलुरु की अनुशासित गेंदबाजी के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।रसिक सलाम डार इस रात के असली हीरो रहे, जिन्होंने अपनी सटीक लाइन-लेंथ से लखनऊ के 4 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।अनुभवी भुवनेश्वर कुमार ने अपनी स्विंग का जादू बिखेरते हुए लगातार गेंदों पर विकेट चटकाए और 3 सफलताएं अपने नाम कीं।

लखनऊ के लिए मिचेल मार्श (40) और मुकुल चौधरी (39) ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन पूरी टीम निर्धारित 20 ओवरों में 146 रनों पर सिमट गई। कप्तान ऋषभ पंत के लिए भी दिन अच्छा नहीं रहा; पहले वे चोटिल होकर ‘रिटायर्ड हर्ट’ हुए और वापसी के बाद भुवी का शिकार बन गए।

किंग कोहली का ‘इम्पैक्ट’ और पॉवर-हिटिंग का शो
147 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बेंगलुरु की शुरुआत धीमी रही, लेकिन ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के तौर पर मैदान में उतरे विराट कोहल ने समां बांध दिया।कोहली ने 34 गेंदों पर 49 रनों की सधी हुई पारी खेलकर जीत की नींव रखी। हालांकि वह अपने अर्धशतक से महज 1 रन चूक गए, लेकिन उनकी पारी ने लखनऊ के गेंदबाजों का मनोबल तोड़ दिया।

पाटीदार और जितेश का तूफान- मध्यक्रम में कप्तान रजत पाटीदार (27 रन, 13 गेंद) और जितेश शर्मा (23 रन, 9 गेंद) ने कैमियो पारियां खेलकर रनरेट को आसमान पर पहुँचा दिया।
फिनिशिंग टच:अंत में टिम डेविड और रोमारियो शेफर्ड की जोड़ी ने महज 15.1 ओवर में ही मैच खत्म कर बेंगलुरु की झोली में जीत डाल दी।

बेंगलुरु का राज:- लखनऊ पर 15.1 ओवर में धमाकेदार जीत दर्ज करने के कारण RCB का नेट रनरेट काफी उछल गया है, जिसकी बदौलत उन्होंने राजस्थान रॉयल्स (RR) को पहले स्थान से नीचे धकेल दिया है।

विजेता की लय: बेंगलुरु ने अपने पिछले 5 में से 4 मैच जीते हैं। अगली चुनौती:पंजाब किंग्स (PBKS) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के पास अपने अगले मुकाबलों में टॉप-2 में सेंध लगाने का मौका होगा।लखनऊ की हालत: इस हार के बाद लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) मिड-टेबल की जद्दोजहद में फंस गई है।

इतिहास में RCB का पलड़ा भारी
आंकड़ों की बात करें तो लखनऊ और बेंगलुरु के बीच हुए अब तक के 7 मुकाबलों में बेंगलुरु ने चौथी जीत दर्ज कर अपनी बादशाहत कायम रखी है। इस सीजन में बेंगलुरु की टीम अब तक सनराइजर्स, चेन्नई और मुंबई जैसी दिग्गज टीमों को पटखनी दे चुकी है।
मैच का टर्निंग पॉइंट:रसिक सलाम डार का वह स्पेल जिसने लखनऊ के मध्यक्रम की कमर तोड़ दी और बेंगलुरु को एक छोटा लक्ष्य मिला।

आस्था का महासंगम: चारधाम यात्रा 2026 के लिए उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 18 लाख के पार पहुँचा पंजीकरण

ऋषिकेश/देहरादून -16 अप्रैल 2026

हिमालय की धवल चोटियों पर विराजमान देवताओं के दर्शन की अभिलाषा और सनातन संस्कृति के प्रति अटूट विश्वास एक बार फिर रिकॉर्ड तोड़ रहा है। ‘मोक्ष’ की राह कही जाने वाली उत्तराखंड की पावन चारधाम यात्रा को लेकर इस वर्ष देश-दुनिया के श्रद्धालुओं में जो उत्साह दिख रहा है, वह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस की गहरी आस्था का प्रमाण है।अप्रैल के मध्य तक ही पंजीकरण की संख्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार देवभूमि के आंगन में भक्तों का हुजूम पिछले सभी कीर्तिमानों को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है।

भक्ति के शिखर पर केदारनाथ: पंजीकरण के मुख्य आंकड़े
पवित्र चारधाम और हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है। 15 अप्रैल की शाम तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 18 लाख से अधिक श्रद्धालु अपना पंजीकरण करा चुके हैं।

बाबा केदार की गूँज: महादेव के प्रति दीवानगी का आलम यह है कि सबसे अधिक 5.96 लाख लोगों ने केदारनाथ धाम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। मंदाकिनी के तट पर बसे इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु बर्फबारी की चुनौतियों के बावजूद भक्तों का हौसला बुलंद है।

बद्री विशाल के प्रति समर्पण:जगत के पालनहार भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिए अब तक **5.10 लाख** श्रद्धालु अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
गंगा-यमुना का पावन बुलावा: मां गंगोत्री के लिए 3.06 लाख और मां यमुनोत्री के लिए 2.98 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की इस डगर पर चलने का संकल्प लिया है।

सिख आस्था का केंद्र: सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के लिए भी 16,250 से अधिक पंजीकरण दर्ज हो चुके हैं, जो दुर्गम रास्तों पर अडिग विश्वास को दर्शाता है।चुनौतियां भी नहीं डिगा सकीं भक्तों का संकल्प।
हाल ही में हिमालयी क्षेत्रों में हुई ताज़ा बर्फबारी ने स्थानीय प्रशासन के लिए प्रबंधकीय चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

केदारनाथ पैदल मार्ग और बद्रीनाथ हाईवे के आसपास जमी बर्फ को हटाना एक कठिन कार्य बना हुआ है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह ‘ईश्वरीय आशीर्वाद’ जैसा है। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे यात्रा की तिथि नज़दीक आएगी, यह संख्या और भी तीव्र गति से बढ़ेगी। भक्तों की भीड़ को देखते हुए रुकने, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुगम आवागमन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

सावधान: आस्था के मार्ग में ‘साइबर ठगों’ का साया
जहाँ एक ओर लाखों भक्त श्रद्धा के वशीभूत होकर पहाड़ों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं कुछ असामाजिक तत्व इस विश्वास का अनुचित लाभ उठाने की ताक में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर विंग (I4C) ने तीर्थयात्रियों के लिए एक गंभीर ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।

सतर्क रहें श्रद्धालु:
साइबर ठगों ने चारधाम यात्रा की आधिकारिक वेबसाइटों से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट्स बना ली हैं। गूगल पर विज्ञापन चलाकर ये स्कैमर्स खुद को हेलीकॉप्टर बुकिंग और होटल बुकिंग का अधिकृत एजेंट बताते हैं। भोले-भाले यात्री जब इन साइट्स पर क्लिक करते हैं, तो उन्हें व्हाट्सएप के जरिए झांसे में लेकर मोटी रकम ऐंठ ली जाती है।

यात्रियों के लिए सलाह:हेलीकॉप्टर या होटल की बुकिंग केवल सरकार द्वारा जारी की गई आधिकारिक वेबसाइटों (www.registrationandtouristcare.uk.gov.in) के माध्यम से ही करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को बुकिंग के लिए एडवांस पेमेंट न करें।

खबर सारांश :-विश्वास की विजय
चारधाम यात्रा केवल एक भौगोलिक भ्रमण नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का एक वार्षिक उत्सव है। 18 लाख का यह आंकड़ा बताता है कि कठिन चढ़ाई, कड़ाके की ठंड और तकनीकी बाधाओं पर आज भी विश्वास‘ भारी है। देवभूमि एक बार फिर अपने भक्तों का स्वागत करने के लिए तैयार है, जहाँ मंत्रों की गूँज और घंटियों की आवाज़ के बीच हर श्रद्धालु अपनी आस्था के संगम में डुबकी लगाएगा।



सबरीमाला विवाद: “न्यायालय तय नहीं कर सकता क्या सही है और क्या गलत” – देवस्वोम बोर्ड की तीखी दलील

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डिजिटल डेस्क/नई दिल्ली /16 अप्रैल 2026
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक पीठ के समक्ष चल रही सुनवाई ने एक नया मोड़ ले लिया है। बुधवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म किसी कानूनी परिभाषा का मोहताज नहीं है, बल्कि यह एक पूरे समुदाय की सामूहिक आस्था का प्रतिबिंब है।

प्रमुख दलीलें: आस्था बनाम संवैधानिक हस्तक्षेप

सुनवाई के दौरान सिंघवी ने तर्क दिया कि किसी समुदाय की परंपराओं की वैधता उस समुदाय के विश्वास के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि बाहरी कानूनी मानकों पर। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु रखे:

  • सामूहिक अधिकार सर्वोपरि: सिंघवी ने कहा कि धर्म एक समूह की पहचान है। कुछ व्यक्तियों के व्यक्तिगत अधिकारों (महिलाओं की एंट्री) को पूरे समुदाय की सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
  • अदालत की सीमाएं: बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि संविधान के तहत कोर्ट को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी धार्मिक प्रथा की व्याख्या करे या उसे ‘सही या गलत’ की कसौटी पर परखे। उन्होंने राम जन्मभूमि मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायपालिका को धार्मिक आस्थाओं के विश्लेषण से बचना चाहिए।
  • अनुच्छेद 25 की सुरक्षा: दलील दी गई कि संविधान का अनुच्छेद 25 केवल पूजा की ही नहीं, बल्कि उन प्रथाओं की भी रक्षा करता है जिन्हें समुदाय अपने धर्म का अभिन्न हिस्सा मानता है।

तार्किकता और भेदभाव पर बहस

सुनवाई के दौरान जब मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने धर्म और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के बीच की रेखा पर सवाल किए, तो सिंघवी ने ‘हिंदू जीवन शैली’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में ‘नास्तिक दर्शन’ (चार्वाक) को भी जगह दी गई है, जो इसे केवल ईश्वर से संबंध तक सीमित न रखकर एक व्यापक जीवन पद्धति बनाता है।
भेदभाव का सवाल: सिंघवी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्थान कहता है कि “केवल हिंदू प्रवेश कर सकते हैं,” तो यह उसकी धार्मिक पहचान है। हालांकि, यदि वह क्षेत्र (जैसे केवल उत्तर भारतीय) के आधार पर प्रतिबंध लगाता है, तो वह भेदभाव की श्रेणी में आएगा।

सामाजिक सुधार बनाम धार्मिक स्वतंत्रता

जस्टिस सुंदरेश द्वारा ‘सामाजिक सुधार’ (जैसे हिंदू उत्तराधिकार कानून) के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर सिंघवी ने बचाव करते हुए कहा कि राज्य को धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों को विनियमित करने का अधिकार तो है, लेकिन इस प्रक्रिया में ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ का मूल तत्व नष्ट नहीं होना चाहिए। उन्होंने नागा साधुओं और दिगंबर जैन मुनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन परंपराओं को ‘सामान्य सामाजिक नैतिकता’ के तराजू पर नहीं तौला जा सकता।

खबर सारांश: वर्तमान सुनवाई इस जटिल सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है कि क्या व्यक्तिगत समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-15) किसी धार्मिक समुदाय के अपने रीति-रिवाजों को संरक्षित करने के अधिकार (अनुच्छेद 25-26) से बड़ा है। केंद्र सरकार ने भी पहले ही संकेत दिया है कि कई मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश भी वर्जित है, अतः परंपराओं का सम्मान अनिवार्य है।

भीषण गर्मी में पेयजल व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट

जिला, विकासखंड व जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त, टोल फ्री नंबर जारी

बेमेतरा, 15 अप्रैल 2026:-

जिले में बढ़ती गर्मी को देखते हुए पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला, विकासखंड एवं जनपद स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करते हुए उनके संपर्क नंबर जारी किए गए हैं, ताकि पेयजल से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले के किसी भी गांव में पेयजल संकट उत्पन्न होने या हैंडपंप खराब/बंद होने की स्थिति में शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का कंट्रोल रूम भी गठित किया गया है, जो शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए 24×7 कार्य करेगा।

इसके अलावा आम नागरिकों की सुविधा के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-0008 जारी किया गया है, जिस पर पेयजल से संबंधित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति न बने।

जनपद स्तर पर शिकायत पंजी की व्यवस्था
प्रशासन द्वारा 15 अप्रैल 2026 से जिले के प्रत्येक जनपद कार्यालय में हैंडपंप खराब या बंद होने की शिकायतों के लिए शिकायत पंजी (रजिस्टर) संधारित किया जा रहा है। इससे शिकायतों का रिकॉर्ड रखने एवं उनके त्वरित समाधान में सुविधा होगी। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
जिला प्रशासन ने विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है, जिनमें जिला स्तर, विकासखंड स्तर एवं जनपद स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था की सतत निगरानी एवं समस्या के तुरंत समाधान के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में नियमित मॉनिटरिंग करें और किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति बाधित न होने दें। साथ ही, आमजन से अपील की गई है कि वे किसी भी समस्या की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारी या टोल फ्री नंबर पर दें, ताकि शीघ्र समाधान किया जा सके। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि गर्मी के मौसम में जिले में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नोडल अधिकारियों के नाम एवं संपर्क नंबर
पेयजल व्यवस्था की निगरानी एवं समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु जिला स्तर पर श्री मोतीलाल ठाकुर (मो. 7389531388), बेमेतरा विकासखंड स्तर पर श्री संतोष कुमार नायक (मो. 7049301410), बेमेतरा जनपद स्तर पर श्री योगेश कुमार सिन्हा (मो. 8085527621), नवागढ़ विकासखंड स्तर पर श्री डी.के. कोशले (मो. 8871926074), साजा विकासखंड स्तर पर श्री संदीप प्रधान (मो. 8770439831), साजा जनपद स्तर पर श्री ए.के. करेया (मो. 8878832200) तथा बेरला जनपद स्तर पर श्री डी.एल. वर्मा (मो. 9691188118) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।


क्या होता है यूएन शांति मिशन और वहां क्या करते हैं भारतीय सैनिक?

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2026

लेबनान में इजरायली हमलों की खबरों के बीच एक सवाल बार-बार उठ रहा है — आखिर भारतीय सैनिक वहां क्यों हैं और वे क्या करते हैं? आइए समझते हैं पूरा मिशन।

क्या है UNIFIL?
UNIFIL यानी United Nations Interim Force in Lebanon — संयुक्त राष्ट्र की वह शांति सेना जो 1978 से इजरायल और लेबनान के बीच की सीमा पर तैनात है। इसकी स्थापना उस वक्त हुई थी जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 425 और 426 के तहत इस मिशन का मकसद इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करना, क्षेत्र में शांति बहाल करना और लेबनान सरकार को अपनी सत्ता मजबूत करने में मदद करना था।

क्या है ब्लू लाइन?
भारतीय सैनिक मुख्य रूप से ‘ब्लू लाइन’ पर तैनात हैं। यह करीब 120 किलोमीटर लंबी एक सीमांकन रेखा है, जो इजरायल और लेबनान को अलग करती है। यह कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा दोनों देशों के बीच सीधे टकराव को रोकने के लिए तय की गई रेखा है।

भारतीय सैनिक वहां क्या करते हैं?
भारतीय जवानों की भूमिका सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वे एक ‘बफर’ की तरह काम करते हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच सीधा टकराव रोका जा सके। इसके अलावा उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं — लेबनानी सेना को दक्षिणी क्षेत्र में मजबूत करने में मदद करना, संघर्ष प्रभावित नागरिकों तक राहत सामग्री और दवाइयां पहुंचाना, सीमा पर किसी भी घुसपैठ या उल्लंघन पर नजर रखना और युद्धविराम समझौते को जमीन पर लागू कराना।

कितने बड़े हैं इस मिशन में भारत के सैनिक?
वर्तमान में UNIFIL में करीब 7,500 से 8,500 शांति सैनिक तैनात हैं, जो लगभग 50 देशों से आते हैं। इनमें भारत के 50 अधिकारी और 550 जवान शामिल हैं, जो मुख्यतः ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट से हैं। दल में केवल पैदल सेना ही नहीं, बल्कि आर्मर्ड, इंजीनियर्स, सिग्नल, मेडिकल और एयर डिफेंस के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

क्या भारत इन्हें वापस बुला सकता है?
नहीं। चूंकि ये सैनिक संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत तैनात हैं, इसलिए भारत उन्हें एकतरफा वापस नहीं बुला सकता। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के तहत ही होती है।

क्या शांति सैनिकों पर हमला अपराध है?
हां। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के तहत शांति सैनिकों पर हमला एक गंभीर अपराध माना जाता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा होती है।

वैश्विक शांति में भारत की भूमिका
भारत दुनिया के उन देशों में अग्रणी है, जो संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं। संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग शांति मिशनों में भारत के करीब 6,000 जवान दुनियाभर में तैनात हैं। लेबनान में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि भारत केवल अपने राष्ट्रीय हितों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाता है।(खबर मीडिया सूत्रों अनुसार

जंग के बीच लेबनान में डटे हैं 600 भारतीय जवान,बंकरों में रहने के निर्देश — भारत सरकार सतर्क

नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क, 15 अप्रैल 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच लेबनान की स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है। 8 अप्रैल 2026 को इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया, जिसमें महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया और 300 से अधिक लोगों की जान चली गई।

इस खतरनाक माहौल में इजरायल और लेबनान के बीच की सीमा पर संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना (UNIFIL) के तहत भारत के करीब 600 सैनिक तैनात हैं। मेजर जनरल एसके सिंह ने बताया कि भारतीय सेना की एक इन्फेंट्री बटालियन वहां शांति बनाए रखने के लिए मोर्चा संभाले हुए है और रक्षा मंत्रालय लगातार उनके संपर्क में बना हुआ है।



बंकरों में रहने के निर्देश और सुरक्षा के कड़े इंतजाम



ब्लू लाइन के 120 किलोमीटर लंबे दायरे में भारतीय सैनिकों के साथ-साथ 50 अन्य देशों के सैनिक भी शांति दूत बनकर तैनात हैं। ताजा हमलों के बाद सेना के सूत्रों ने जानकारी दी है कि भारतीय जवानों को फिलहाल बंकरों में ही रहने का सख्त निर्देश दिया गया है, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। स्थिति सामान्य होने तक जवानों को सभी जरूरी काम बंकर के भीतर से ही करने को कहा गया है। सुरक्षा के मद्देनजर जवान अब बख्तरबंद गाड़ियों से पेट्रोलिंग कर रहे हैं और बुलेटप्रूफ जैकेट का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत सरकार ने जताई गहरी चिंता

भारत ने अमेरिका व ईरान के बीच संघर्षविराम की सहमति के बावजूद लेबनान पर इजरायली हमलों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने पर गहरी चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन व देशों की संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि UNIFIL में सैनिक भेजने वाले देश के रूप में, घटनाओं का यह रुख बहुत परेशान करने वाला है। भारत सरकार ने कहा है कि बेरूत में मौजूद भारतीय दूतावास वहां रह रहे सभी भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में है।




नकली दवाओं के खिलाफ खाद्य एवं औषधि विभाग की बड़ी कार्यवाही, तीन गिरफ्तार

रायपुर, 15 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा राज्य में नकली दवाओं के अवैध कारोबार पर लगाम कसने के लिए सतत अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में एक संगठित सप्लाई चेन का पर्दाफाश करते हुए विभाग ने तीन प्रमुख आरोपियों को रायपुर से गिरफ्तार किया है।

कुछ माह पूर्व नागपुर गोल्डन ट्रांसपोर्ट, गोगाँव से नकली दवाओं की जप्ती के बाद शुरू हुई जांच में इस नेटवर्क से जुड़े तीन आरोपियों की भूमिका उजागर हुई — रोचक अग्रवाल (बिजरासन मेडिकोज, इंदौर), सुरेंद्र कामनानी (प्रेम प्रकाश एजेंसी, भाटापारा) और खेमराज बानी (सरस्वती मेडिकल स्टोर, सारंगढ़)। तीनों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

इससे पूर्व दिसंबर माह में सरस्वती मेडिकल स्टोर, सारंगढ़ में विभागीय टीम ने विस्तृत निरीक्षण कर नकली एवं संदिग्ध दवाओं के भंडारण व वितरण से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए थे, जो इस प्रकरण में निर्णायक साबित हुए।

इस अवैध व्यापार के अन्य राज्यों से जुड़े होने की संभावना को देखते हुए विभागीय टीम ने अंतरराज्यीय जांच भी की। फिलहाल प्रकरण में नियमानुसार अभियोजन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है और नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों व संस्थानों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी विधिक कार्यवाही की जा रही है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि दवाएं केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नकली दवाओं के विरुद्ध यह अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।