21.1 C
Raipur
Monday, November 2, 2026
Home Blog Page 164

प्रेमी जलता रहा प्रेमिका वीडियो बनाती रही:क्या यह प्रेम है या विनाश का नग्न नृत्य?

डिजिटल डेस्क/बेंगलुरु -22/04/2026

ज्वाला: ज्योतिपति, आज की इस भयावह खबर ने अंदर तक हिला दिया है। प्रेरणा नाम की एक लड़की ने अपने प्रेमी किरण को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। क्या यह प्रेम था? अगर प्रेम का अंत इतना क्रूर हो सकता है, तो फिर प्यार पर भरोसा कैसे किया जाए?

ज्योतिपति: देखो ज्वाला, जिसे तुम ‘प्रेम’ कह रहे हो, वह प्रेम का मुखौटा पहने हुए एक ‘अहंकार’ का विस्फोट है। जब संबंध में ‘स्व’ (Self) की प्रधानता हो जाती है, तो वह प्रेम नहीं, अधिकार और बदले की भूख बन जाता है। इस घटना में पेट्रोल किरण पर नहीं, प्रेरणा के अपने उस खोखले अहंकार पर छिड़का गया था, जो उसकी शर्तों को पूरा होते नहीं देख सका।

प्रेम या प्रतिशोध का पाश?
ज्वाला: लेकिन इतना क्रूर? शादी का प्रस्ताव ठुकराना क्या इतना बड़ा अपराध था कि प्रेरणा ने किरण की जान ही ले ली?

ज्योतिपति: प्रेरणा के लिए यह शादी का प्रस्ताव नहीं, एक ‘शर्त’ थी। उसने जिंदगी को ‘उसूलों’ के उस संकीर्ण दायरे में बांध रखा था, जिसमें किरण को ‘ना’ कहने की इजाजत नहीं थी। जब किरण ने उन शर्तों को ठुकराया, तो प्रेरणा को लगा कि उसका वजूद—उसका ‘साम्राज्य’—ढह रहा है।

अपराध: जब प्रेमी पूरी तरह असहाय हो गया, तो महिला ने उस पर ज्वलनशील पदार्थ (पेट्रोल/केरोसिन) छिड़क कर आग लगा दी।

यह हत्या नहीं, बल्कि एक विकृत मानसिकता का प्रदर्शन था, जहाँ प्रेरणा ने किरण को ‘इंसान’ नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं की ‘वस्तु’ (Object) समझा। वीडियो बनाना यह साबित करता है कि वह उस हिंसा का उपभोग कर रही थी। यह प्रेम नहीं, ‘हिंसक स्वामित्व’ है।

कारण: बताया जा रहा है कि महिला इस बात से नाराज थी कि प्रेमी उसे नजरअंदाज कर रहा था और शादी के लिए तैयार नहीं था।

शर्तों का जाल और प्रेम का भ्रम

ज्वाला:हम अक्सर कहते हैं कि प्यार में थोड़ा ‘पजेसिव’ होना चलता है। क्या प्यार में शर्तें जरूरी नहीं हैं?

ज्योतिपति:सुनो ज्वाला, जहाँ शर्तें हैं, वहाँ समर्पण मर जाता है। प्रेम में समर्पण बिना किसी सौदे के होता है। अगर प्रेरणा चाहती थी कि किरण उसकी शर्तों पर चले, तो वह उससे नहीं, अपनी इच्छाओं से प्यार कर रही थी। असली प्रेम वह है जहाँ ‘मैं’ नहीं, ‘हम’ का विस्तार हो। जहाँ दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान न हो, वहाँ प्रेम के नाम पर केवल ‘अनुबंध’ (कॉन्ट्रैक्ट) होता है।

पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। गंभीर रूप से झुलसे प्रेमी की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। (खबर प्राप्त जानकारी पर)

ऐसे ‘भयानक प्रेम’ को कैसे पहचानें?
ज्वाला: तो एक इंसान कैसे पहचाने कि सामने वाला वाकई प्यार कर रहा है या आने वाले समय के लिए खतरा बन रहा है?
ज्योतिपति: प्रेम को पहचानने की कुछ कसौटियां हैं, जिसे हर व्यक्ति को समझना चाहिए:

स्वतंत्रता का आदर
एक सच्चा प्रेमी तुम्हारी उड़ान से नहीं डरेगा। यदि कोई तुम्हें सीमाओं में बांधने या तुम्हारे व्यक्तिगत निर्णयों पर शर्त लगा रहा है, तो समझो कि वह प्यार नहीं, नियंत्रण चाहता है।

अहंकार का भाव:
यदि उसे तुम्हारी ‘ना’ बर्दाश्त नहीं है, तो उसे तुम्हारी भावना से मतलब नहीं, बल्कि अपनी जीत प्रिय है।

अति-भावुकता (Hysteria):
जो लोग बात-बात पर खुद को या तुम्हें नुकसान पहुँचाने की धमकी देते हैं, वे मानसिक रूप से एक बड़ी हिंसा के लिए तैयार हो सकते हैं।

अधिकार की भाषा:
जहाँ ‘मेरा है तो मेरा ही रहेगा’ वाली भावना हावी हो, वहां प्रेम कम और ‘कब्जा’ ज्यादा होता है।






पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: राष्ट्र ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि, प्रधानमंत्री ने दोहराया—”भारत आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा”

0

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2026

आज पूरा देश 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस भयावह आतंकी हमले की पहली बरसी मना रहा है, जिसने पूरे भारत को स्तब्ध कर दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों (मुख्य रूप से पर्यटक) ने अपनी जान गंवाई थी। आज इस दुखद घटना को याद करते हुए शीर्ष नेतृत्व और देश के नागरिकों ने शहीदों को नमन किया।

प्रधानमंत्री का संदेश: ‘भारत अडिग’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने पोस्ट में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, *”पिछले साल पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को हम याद कर रहे हैं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया।”

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि *”एक राष्ट्र के रूप में, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं। भारत कभी भी किसी भी प्रकार के आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा। आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।”

केंद्रीय गृह मंत्री और अन्य नेताओं की श्रद्धांजलि
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पीड़ितों को याद करते हुए कहा, “आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है। पहलगाम हमले के जख्म अभी भी हर भारतीय के दिल में हैं। भारत आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर अडिग रहेगा।”विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा की और राष्ट्र की एकता के संकल्प को दोहराया।

पहलगाम में सुरक्षा और शांति का संदेश
बरसी के मौके पर पहलगाम और कश्मीर के अन्य पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। हालाँकि, आज वहां की फिज़ाओं में डर नहीं, बल्कि दृढ़ता का भाव है। पर्यटकों और स्थानीय टूर ऑपरेटरों ने आज सामूहिक रूप से मौन रखकर और प्रार्थना कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सैलानियों का कहना है कि *”आतंक हमें विभाजित नहीं कर सकता, कश्मीर की खूबसूरती और यहां के लोगों का भाईचारा सभी साजिशों से कहीं अधिक मजबूत है।”

पृष्ठभूमि: एक साल का घटनाक्रम
22 अप्रैल 2025:लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों ने पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया था।

ऑपरेशन सिंदूर: इस हमले के जवाब में, भारतीय वायुसेना और सेना ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, जिसके तहत पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के भीतर स्थित नौ बड़े आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया गया था।

न्याय: इस हमले के जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों ने समय-समय पर सख्त कार्रवाई की है, जिससे यह संदेश साफ है कि भारत के खिलाफ की गई किसी भी कार्रवाई का जवाब हर हाल में दिया जाएगा।
आज का दिन न केवल उन 26 निर्दोष आत्माओं को याद करने का है, बल्कि यह देश के उस संकल्प को भी दोहराने का है कि भारत अपनी अखंडता और शांति की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।




जीवन समर्पण बिना शर्त: शर्तों का कारावास या प्रवाह की स्वतंत्रता?

लेख आलेख – 22/04/2026

हम अक्सर जिंदगी को ‘शर्तों’ और ‘उसूलों’ के दायरे में कैद कर लेते हैं। लेकिन क्या जिंदगी सच में समझौते का नाम है? क्या शर्तों के साथ जीना ही जीवन है? गहराई से सोचें तो, जिंदगी तो खानाबदोश की तरह है—इसे केवल ‘होना’ चाहिए, समझौते का मोहताज नहीं।

शर्तों का खोखलापन
जब हम कहते हैं कि “मैं ऐसा करूँगा तो वैसा होगा,” हम जिंदगी पर अपनी शर्तें थोप रहे होते हैं। उसूल अक्सर बनावटी होते हैं, वे तर्क की ऐसी कसौटी हैं जिनका कोई ठोस आधार नहीं होता। गौर कीजिए, प्रकृति में कहीं कोई शर्त नहीं है:
सूरज रोशनी देने के लिए शर्त नहीं रखता।हवा बहने के लिए अनुमति नहीं मांगती।फूल अपनी खुशबू लुटाने के लिए किसी सौदे का इंतजार नहीं करते।

जब हम दूसरे की शर्तों पर जीना शुरू करते हैं, तो हम अपनी मौलिकता खो देते हैं। याद रखिए, चांदनी केवल चांद में होती है, सितारों में नहीं। सितारे जगमगा सकते हैं, लेकिन वे चांद की तरह शीतलता और पूर्णता नहीं दे सकते। अपनी ‘चांदनी’ को पहचानिए, दूसरों की नकल करना बंद कीजिए।

मन का सागर और भावनाओं के भंवर
मन एक असीम सागर है। इसमें लहरें भी उठेंगी और भंवर भी बनेंगे।लहरें:ये जीवन का प्रवाह हैं।भंवर: ये हमारी भावनाएं हैं।जीवन का अर्थ भावनाओं का त्याग नहीं, बल्कि उनमें ‘संतुलन’ है। भावना रखिए, पर भावुक मत बनिए। जब आप भंवर के बीच भी शांत रह पाते हैं, तभी आप सागर की भव्यता को समझ पाते हैं।

जीवन एक तपस्या, एक पूर्णता
जीवन केवल आनंद का नाम नहीं है, यह एक तपस्या है। जैसे: लोहा तपकर अपना आकार बदलता है।सोना तपकर ‘कुंदन’ बनता है।जठराग्नि भी जलती है तभी भोजन को पचाकर उसे पोषक तत्व बनाती है।

उसी प्रकार, जीवन की बाधाएं, पहाड़ और चट्टानें ही तो हमारे ‘जलप्रपात’ (Waterfall) हैं। जब धारा पहाड़ों से टकराती है, तो वह रुकती नहीं, बल्कि और अधिक सुंदर हो जाती है—वहां से फव्वारे निकलते हैं, संगीत पैदा होता है, और लोग उसे देखने खिंचे चले आते हैं। आपकी समस्याएं भी वैसी ही हैं; उन्हें अपनी सुंदरता और सुकून को नष्ट न करने दें, बल्कि उनसे ‘आनंद के फव्वारे’ पैदा करें।

अंतिम विचार: आपने क्या बनाया?
ऋषि-मुनियों ने नदी के किनारे, लहरों के शोर के बीच शांति पाई थी। वे जानते थे कि संसार के शोर से कहीं अधिक सुकून प्रकृति की लय में है।

जिंदगी की दिशा ऐसी बनाओ कि वह ‘पूर्णता’ की ओर जाए। यदि एक लहर दुनिया को इतना सुकून दे सकती है, तो एक इंसान के रूप में आपके पास तो अनंत संभावनाएं हैं।

अब रुककर स्वयं से पूछिए:
इस तपन और इस प्रवाह के बीच, मैंने अपने जीवन को क्या बनाया है?जीवन की सार्थकता शर्तों को पूरा करने में नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को पूर्णता के साथ जीने में है।

जनचौपाल36: आस्था, परंपरा और संविधान की चौखट

लेखआलेख-22/04/2026

(दृश्य: शाम का समय, चौपाल पर सन्नाटा है। ज्योतिपति पुरानी फाइल देख रहे हैं, ज्वाला चाय लेकर आते हैं।)

ज्वाला: दादा, आज चारों तरफ ‘सबरीमाला’ की चर्चा है। अखबारों में भी है और टीवी पर भी बहस चल रही है। ये मामला आखिर सुलझ क्यों नहीं रहा?

ज्योतिपति: (लंबी सांस लेकर) देख ज्वाला, यह मामला दो धाराओं के बीच का है। एक तरफ हमारी सदियों पुरानी आस्था और परंपरा है, तो दूसरी तरफ आज का संविधान, जो कहता है कि सब बराबर हैं। अदालत इसी पर सुनवाई कर रही है कि क्या कोई परंपरा ‘संवैधानिक मर्यादा’ से ऊपर हो सकती है?

ज्वाला: लेकिन दादा, लोग कहते हैं कि ये तो हमारे धर्म का मामला है, इसमें कानून की क्या जरूरत?

ज्योतिपति: यही तो असली पेच है, ज्वाला। धर्म इंसान को बेहतर जीने का रास्ता दिखाता है। लेकिन जब धर्म के नाम पर किसी के साथ ‘भेदभाव’ की बात आती है, तो संविधान का काम शुरू होता है। सुनवाई में अदालत यही देख रही है कि क्या ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ के नाम पर किसी को पूजा के अधिकार से रोका जा सकता है, या परंपरा का अपना एक अलग न्याय है जिसे छेड़ा नहीं जाना चाहिए।

ज्वाला: यानी मामला सिर्फ मंदिर के दरवाजे खुलने या न खुलने का नहीं है?

ज्योतिपति: बिल्कुल नहीं। यह मामला ‘लिंग समानता’ (Gender Equality) का है। क्या भगवान के दरबार में इंसान-इंसान में फर्क किया जा सकता है? अदालत एक तरफ लोगों की भावना देख रही है, तो दूसरी तरफ ‘समानता का अधिकार’। मामला इसलिए पेचीदा है क्योंकि आस्था का कोई तार्किक पैमाना नहीं होता, और कानून बिना तर्क के नहीं चलता।

ज्वाला: तो फिर हल क्या है दादा? कोई जीत जाएगा तो कोई हार जाएगा, क्या समाज में कड़वाहट नहीं बढ़ेगी?

ज्योतिपति: असली जीत उसकी होगी जो यह समझ पाएगा कि समय के साथ परंपराओं का परिष्कार (Refinement) जरूरी है। पुरानी परंपराएं समाज को जोड़ने के लिए थीं, तोड़ने के लिए नहीं। अदालत का फैसला जो भी हो, हमें यह समझना होगा कि ‘संविधान’ देश का आधार है और ‘आस्था’ इंसान का सुकून। ये दोनों टकराने नहीं, बल्कि साथ चलने चाहिए।

ज्वाला: सही कह रहे हैं आप दादा। ‘जनचौपाल36’ का काम शायद यही है कि हम लोगों को बिना उत्तेजित हुए यह समझाएं कि न्याय क्या है और परंपरा का सही अर्थ क्या है।

ज्योतिपति: सही पकड़ा है, ज्वाला। खबर तो हर कोई देता है, लेकिन खबर की ‘आत्मा’ को समझना पत्रकारिता का असल धर्म है।


एक नई राह, एक नया नजरिया “यूं ही चला चल राही, यूं ही चला चल राही, जिधर ले चले रस्ता… जिंदगी एक नई सोच है!”

लाइफ स्टाइल-22/04/2026

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर खुद को एक मशीन की तरह महसूस करते हैं। सुबह से शाम तक की भागदौड़, डेडलाइन्स और उम्मीदों के बोझ तले हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि जीवन केवल ‘काटना’ नहीं, बल्कि ‘जीना’ है। क्या आपकी जिंदगी भी बस एक ढर्रे पर चल रही है? अगर हां, तो समय आ गया है कि हम अपनी सोच का चश्मा बदलें।

क्या जिंदगी वाकई एक ठहराव है?
अक्सर लोग कहते हैं, “जिंदगी ऐसी ही है, इसे बदला नहीं जा सकता।” यह सोच हमें एक ऐसे दायरे में कैद कर देती है जहाँ न उम्मीद बची है और न ही उत्साह। अक्सर हम दूसरों के बनाए उसूलों के जाल में इतने उलझ जाते हैं कि हमें पता ही नहीं चलता कि हम अपनी जिंदगी जी रहे हैं या किसी और की पटकथा (script) का हिस्सा हैं।

किसी फिल्म के किरदार की तरह यह सोचना कि “कुछ नहीं बदला है,” एक तरह का मानसिक समझौता है। याद रखिए, बदलाव की शुरुआत बाहर से नहीं, आपके भीतर से होती है। अगर आप खुद को बदलेंगे, तो दुनिया और आपका नजरिया—दोनों खुद-ब-खुद बदलने लगेंगे।

कांटों का ताज नहीं, खुशबू भरी बगिया चुनिए
समाज ने सफलता और जीने के जो ‘तयशुदा मापदंड’ बनाए हैं, वे अक्सर कांटों की तरह चुभते हैं। दूसरों को खुश करने के लिए या पुरानी परंपराओं के बोझ तले दबकर जीना वैसा ही है जैसे कांटों के ताज को पहनना।

आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल का असली मंत्र यह है:
“शीशी भरी गुलाब की पत्थर से तोड़ दूं, जीवन चौराहे पर ठहरा हुआ, इसे एक खूबसूरत मोड़ दूं।”

खुद को उन बंधनों से मुक्त करें जो आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं। एक खूबसूरत ‘मोड़’ लेने के लिए साहस की जरूरत होती है। अपने शौक, अपनी पसंद और अपनी खुशी को प्राथमिकता देना स्वार्थ नहीं, बल्कि खुद के प्रति ईमानदारी है।

सहारे की तलाश नहीं, खुद सहारा बनिए
जिंदगी के सफर में हम अक्सर किसी बाहरी सहारे की तलाश में रहते हैं—चाहे वह कोई व्यक्ति हो, नौकरी हो या कोई पद। पर सच्चाई यह है कि जब-जब हम दूसरों पर निर्भर होते हैं, तब-तब हम कमजोर पड़ जाते हैं। सहारा जब तक है, तब तक ठीक, पर उसके हटते ही पूरी जिंदगी बिखर सी जाती है।

मॉडर्न सोच का सार:
सहारे की तलाश बंद करें और खुद को इतना समर्थ बनाएं कि आप दूसरों के लिए सहारा बन सकें। जब आप दूसरों के काम आते हैं, जब आप अपनी मेहनत से अपनी पहचान बनाते हैं, तब आपको सहारा ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि आप खुद अपनी ताकत बन जाते हैं।

निष्कर्ष: राहें खुद बनानी पड़ती हैं
जिंदगी हताशा या उदासीनता का नाम नहीं है। यह तो एक ऐसी खाली कैनवास (canvas) है जिस पर आप अपनी मर्जी के रंग भर सकते हैं। खोने के लिए आपके पास कुछ नहीं है, लेकिन पाने के लिए पूरी कायनात आपके सामने है।

कल की चिंता छोड़िए और आज की इस नई सोच को अपनाइए। चलिए, रास्तों के मोहताज न बनकर खुद रास्ता बनाते हैं। क्योंकि याद रखिए, जो राहें खुद चुनते हैं, वही मंजिल तक पहुंचती हैं। तो, आज आप अपनी जिंदगी को कौन सा नया मोड़ देने वाले हैं?


सबरीमाला मंदिर:-सुप्रीम कोर्ट में ‘आस्था बनाम कानून’ पर सुनवाई जारी,क्या परंपराएं संविधान के ऊपर हैं?

0

नई दिल्ली | 22 अप्रैल 2026

सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ में ‘सबरीमाला’ सहित धर्म और कानून के जटिल मामलों पर सुनवाई छठे दिन भी जारी रही। सुनवाई के दौरान धार्मिक स्वतंत्रता, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन पर व्यापक बहस हुई।

सुनवाई के मुख्य बिंदु:
धार्मिक स्वतंत्रता की परिभाषा: वरिष्ठ अधिवक्ता गिरी ने अनुच्छेद-25 के तहत पूजा के अधिकार को व्यक्ति की निजी आस्था का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल पर प्रवेश का अधिकार विश्वास से जुड़ा है।

अधिवक्ता गिरी ने दलील दी कि मंदिर में ‘आगम’ परंपराएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि परंपराओं के विरुद्ध कोई अन्य व्यक्ति मूर्ति को स्पर्श करता है, तो यह श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुँचा सकता है, जिसमें राज्य का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

पुजारी बनने का आधार: बहस के दौरान यह सवाल उठा कि क्या किसी को केवल जन्म के आधार पर पुजारी बनने से रोका जा सकता है? हालांकि, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट कानूनी राय सामने नहीं आई है।

न्यायिक अवलोकन: जस्टिस पी.बी. वराले ने आधुनिक समाज और तर्कसंगत आस्था पर सवाल उठाया, जबकि जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि हर मंदिर की अलग पूजा पद्धति होती है और इसे ‘छुआछूत’ से जोड़ना सही नहीं है।
व्यापक दायरा: वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने मांग की कि इस मामले को केवल हिंदू धर्म तक सीमित न रखकर मुस्लिम, ईसाई और पारसी धर्मों के धार्मिक नियमों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।

खबर सार
बेंच अब यह तय करने की दिशा में बढ़ रही है कि क्या सार्वजनिक मंदिरों के लिए संविधान का अनुच्छेद-25(2) अनिवार्य है, या धार्मिक पंथों को अपने नियम बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता है? यह मामला भारतीय समाज में धार्मिक अधिकारों और समानता के बीच संतुलन तय करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।


आम चुनाव 2026: सोशल मीडिया पर सख्ती, अवैध कंटेंट पर 3 घंटे में कार्रवाई—ईसीआई

0

रायपुर, 21 अप्रैल 2026।

आगामी आम चुनाव एवं उपचुनावों के मद्देनज़र (ECI) ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी भ्रामक, अवैध या एआई-जनित छेड़छाड़ वाली सामग्री की सूचना मिलने पर संबंधित प्लेटफॉर्म द्वारा 3 घंटे के भीतर कार्रवाई अनिवार्य होगी।

आयोग के अनुसार, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों को प्रचार में उपयोग की जाने वाली किसी भी एआई-जनित या डिजिटल रूप से परिवर्तित सामग्री को स्पष्ट रूप से “AI-जनित”, “डिजिटल रूप से संवर्धित” या “सिंथेटिक सामग्री” के रूप में चिह्नित करना होगा, साथ ही इसके स्रोत की जानकारी भी देनी होगी।

असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन, कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले पोस्ट और मतदान प्रक्रिया से जुड़ी भ्रामक सामग्री पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। 15 मार्च 2026 से अब तक 11 हजार से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट/यूआरएल पर कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें कंटेंट हटाने, एफआईआर दर्ज करने और स्पष्टीकरण जारी करने जैसी कार्रवाइयाँ शामिल हैं।

आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा है कि मतदान समाप्ति से पहले 48 घंटे की मौन अवधि में किसी भी प्रकार का चुनाव प्रचार—चाहे वह टीवी, रेडियो, प्रिंट या सोशल मीडिया पर हो—प्रतिबंधित रहेगा।

इसके अलावा, नागरिकों को भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराने के लिए ऐप का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच इस ऐप के माध्यम से 3,23,099 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 96.01% शिकायतों का समाधान 100 मिनट के भीतर किया गया।

आयोग ने सभी हितधारकों से अपील की है कि वे चुनाव के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी, पारदर्शिता और कानून के दायरे में रहकर करें, ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।

परशुराम जयंती पर बेमेतरा ब्राह्मण समाज का भव्य आयोजन, महाआरती व सम्मान समारोह संपन्न

बेमेतरा, 21 अप्रैल 2026

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर बेमेतरा ब्राह्मण समाज द्वारा नगर में श्रद्धा और उत्साह के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। परशुराम चौक स्थित भगवान परशुराम परिसर में सुबह की कथा एवं पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
आचार्य थानेश्वर दीवान के मार्गदर्शन में मुख्य यजमान आदर्श शर्मा एवं शिवांगी शर्मा ने विधिवत पूजा संपन्न कराई। कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के वरिष्ठजनों एवं महिला सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही।

संध्या समय भव्य महाआरती का आयोजन सलधा शिव गंगा आश्रम के दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती के पावन सानिध्य में किया गया। इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य सदस्य—लेखमणी पाण्डेय, अजय शर्मा, अशोक तिवारी, कौशल शर्मा, अरुण मिश्रा, किशोर शर्मा, धनंजय दीवान, रघुनंदन दुबे, सतीश शर्मा, जय पांडे, अनिल दुबे, डी.के. तिवारी, जितेन्द्र शुक्ला, डॉ. शिरीष शर्मा, डॉ. शिवेंद्र त्रिपाठी, शरद शर्मा, दीपक पाण्डेय, दीपक तिवारी, लोकेश्वर शुक्ला, विक्की चौबे सहित महिला ब्राह्मण समाज की मंजू तिवारी, जया पाण्डेय, ममता शुक्ला, सोमी शुक्ला एवं आशा दुबे उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम के दौरान समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले वरिष्ठजनों का सम्मान भी किया गया। स्वर्गीय नरेंद्र धर दीवान की स्मृति में उनके पुत्र राजेश दीवान द्वारा दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती के करकमलों से सम्मानित व्यक्तियों को जनेऊ, शॉल एवं श्रीफल भेंट किए गए। सम्मानित होने वालों में आचार्य बलदेव प्रसाद शास्त्री, जीधन प्रसाद तिवारी, केशव प्रसाद तिवारी, कृष्ण प्रसाद तिवारी, अभय राम तिवारी, दलहरण प्रसाद तिवारी, डॉ. महेंद्र तिवारी, ईश्वरी प्रसाद तिवारी, टहल प्रसाद तिवारी एवं लाल प्रसाद तिवारी प्रमुख रहे।

इस अवसर पर दंडी स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती ने समाजहित में कार्य करने वाले लोगों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान से समाज में एकजुटता बढ़ती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने बुजुर्गों से प्रेरणा लेकर संस्कारों को आत्मसात करें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में धारा 163 लागू, जुलूस-धरना पर प्रतिबंध

बेमेतरा, 21 अप्रैल 2026

जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला दंडाधिकारी सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने संयुक्त जिला कार्यालय परिसर के आसपास प्रतिबंधात्मक आदेश को पुनः प्रभावशील कर दिया है। यह आदेश 17 अप्रैल से 15 जून 2026 तक लागू रहेगा।

जारी आदेश के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) के अंतर्गत संयुक्त जिला कार्यालय परिसर के 100 मीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में जुलूस, धरना, आमसभा और किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

प्रशासन के अनुसार यह क्षेत्र संवेदनशील है, जहां खाद्य, आदिवासी विकास, कृषि, आबकारी एवं खनिज विभाग सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित होते हैं। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में दिव्यांगजन, वृद्धजन और महिलाओं का आवागमन होता है, जिससे किसी भी प्रकार के प्रदर्शन से असुविधा और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी सभा, रैली या जुलूस के आयोजन से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही लाउडस्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग के लिए संबंधित एसडीएम या कार्यपालिक दंडाधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी।

इसके अलावा, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को हथियार, विस्फोटक या धारदार वस्तु लेकर चलने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि धार्मिक परंपरा के तहत धारण किए जाने वाले कृपाण को छूट दी गई है।

आदेश के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्र में एक समय में पांच से अधिक व्यक्तियों के समूह के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है।
जिला दंडाधिकारी ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 (पूर्व में धारा 188) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

संक्षेप में (हेडलाइन पॉइंट्स):
100 मीटर क्षेत्र में धारा 163 लागू जुलूस, धरना, प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित 5 से अधिक लोगों के समूह पर रोक।बिना अनुमति सभा-रैली नहीं,उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई।

रायपुर में IPL 2026 का महाउत्सव: 10 और 13 मई को होंगे दो धमाकेदार मैच

0

क्रिकेटन्यूज-रायपुर/छत्तीसगढ़ -21/04/2026

BCCI ने IPL 2026 के दूसरे चरण का शेड्यूल जारी कर दिया है, जिसमें रायपुर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है।

नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में इस बार दो बड़े मुकाबले खेले जाएंगे। पहला मैच 10 मई (रविवार) को शाम 7:30 बजे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और मुंबई इंडियंस के बीच होगा, जबकि दूसरा मुकाबला 13 मई (बुधवार) को RCB और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला जाएगा।

यानी एक ही स्टेडियम में विराट कोहली, रोहित शर्मा और शाहरुख खान की टीमें आमने-सामने होंगी।रायपुर को पहली बार RCB ने अपना दूसरा होम ग्राउंड बनाया है, जो छत्तीसगढ़ के फैंस के लिए एक बड़ी सौगात है।

RCB के CEO ने साफ कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार और क्रिकेट संघ से किए गए वादे को निभाना जरूरी था, ताकि फैंस में किसी तरह का भ्रम न फैले। स्टेडियम में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गोल्ड और प्लैटिनम सीटों को अपग्रेड किया जाएगा, VIP और प्रीमियम सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और दर्शकों की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मीडिया खबर है इस बार फिजिकल टिकट की व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी और स्टेडियम में प्रवेश सिर्फ डिजिटल टिकट के माध्यम से होगा। दर्शक ऑनलाइन बुकिंग के बाद मोबाइल पर क्यूआर कोड वाली डिजिटल टिकट प्राप्त करेंगे।

रायपुर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं होगा।टिकट की कीमतें 500 रुपये से लेकर 8000 रुपये तक रखी गई हैं, जबकि छात्रों के लिए 2000 रुपये की विशेष कैटेगरी भी रखी गई है।

पिछले साल चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ जैसी घटना से सबक लेते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रहेगी। भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष योजना बनाई गई है और आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है। खासतौर पर विराट कोहली की लोकप्रियता को देखते हुए उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।