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Monday, November 2, 2026
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प्रेम की कूटनीति: लहरों के शोर से मौन की समाधि तक

लेख/आलेख -25/04/2026(दीपक पाण्डेय)

अक्सर प्रेम को भावनाओं का सैलाब माना जाता है, लेकिन वास्तविकता में प्रेम एक उच्चतम डिप्लोमेसी (कूटनीति) है। यह वह कूटनीति नहीं जो स्वार्थ पर टिकी हो, बल्कि वह जो ‘बराबर के सम्मान’ पर स्थापित हो। जहाँ सम्मान की नींव नहीं होती, वहाँ प्रेम केवल एक क्षणिक आवेग बनकर रह जाता है।

लहरों का भ्रम और गहराई का सत्य
संसार एक लहर की तरह है—अस्थिर, शोर मचाती और सीमाओं से टकराती हुई। ये लहरें दरअसल एक अवरोध हैं, जो हमें गहराई में उतरने से रोकती हैं। जो व्यक्ति इन सतही हलचलों (अहंकार, ईर्ष्या और सामाजिक दिखावे) में उलझा रहता है, वह उस ‘तैरती हुई लाश’ के समान है जिसमें प्राण तो हैं पर गहराई नहीं। जीवन का असली आनंद तो उस गहराई में डूब जाने में है, जहाँ लहरों का शोर नहीं, बल्कि सत्य की गंभीरता होती है।

मौन: जीवन का आधार
जैसे-जैसे हम सतह को छोड़कर नीचे उतरते हैं, बाहरी हवाओं का प्रभाव समाप्त होने लगता है। हवाएँ पानी की सतह पर हलचल तो मचा सकती हैं, लेकिन वे सागर के अंतस्तल की शांति को भंग नहीं कर सकतीं। इस गहराई का अंतिम पड़ाव है—मौन। मौन केवल शब्दों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि वह आधार है जिस पर पूरी सृष्टि टिकी है। साधु-संतों और ऋषियों ने इसीलिए मौन की साधना पर बल दिया है, क्योंकि अंततः हर हलचल को इसी महा-मौन में विलीन होना है।

समाधि: परा-लौकिक मिलन
जब शांति इतनी प्रगाढ़ हो जाए कि सांसें थमने लगें और केवल धड़कनों की आहट सुनाई दे, तब इंसान ‘इंसान’ नहीं रहता। वह परा-लौकिक हो जाता है। मौन का यही अंतिम भाग समाधि है। यहाँ पहुँचकर प्रेमी और प्रेम, साधक और साध्य का भेद मिट जाता है। जिसे प्रेम का असली मोती चाहिए, उसे इन लहरों को चीरकर इस समाधि तक पहुँचना ही होगा।

लेख/निष्कर्ष
सृष्टि का सारा वैभव, सारा खनिज और जीवन की वर्षा उसी गहरे सागर से आती है जो ऊपर से शांत दिखता है। उसी प्रकार, एक समर्थ जीवन और सच्चा प्रेम वही है जो बाहरी शोर से अप्रभावित रहकर अपने भीतर के मौन और सम्मान को जीवित रखे।

चर्चा का सार:एक ऐसे दर्शन में छिपा है जहाँ प्रेम, कूटनीति और मौन एक बिंदु पर आकर मिल जाते हैं।स्व विचारों को समेटते हुए एक लेख प्रस्तुत है









सीमाओं की जंग और सागर का मौन – एक वैश्विक दृष्टिकोण

लेख/आलेख -25/04/2026(दीपक पाण्डेय)

आज जब हम विश्व पटल पर ईरान, इज़राइल और अमेरिका जैसे देशों को एक-दूसरे के आमने-सामने देखते हैं, तो यह केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि ‘सतह’ पर वर्चस्व की एक पुरानी जंग का हिस्सा लगता है। सागर की लहरों और सीमाओं के लिए आज जीवन की सीमाओं को खत्म किया जा रहा है। एक पत्रकार और एक तटस्थ विचारक के रूप में, जब हम इस परिदृश्य को देखते हैं, तो कुछ गहरे दार्शनिक प्रश्न सामने आते हैं।अभी तो युद्ध विराम है।

लहरों का भ्रम और गहराई का सत्य

संसार एक सागर की तरह है। जब तक हम इसकी सतह पर रहेंगे, हमें लहरों के आवेग को सहना ही होगा। ये लहरें—चाहे वे राजनीतिक हों या कूटनीतिक—अस्थाई होती हैं, लेकिन वे बहुत शोर मचाती हैं। सागर का खारापन दुनिया के अनुभवों का वह स्वाद है, जो भले ही पीने लायक न हो, पर उसे नकारा नहीं जा सकता। विडंबना यह है कि आज राष्ट्र इसी ‘खारेपन’ और सतही सीमाओं पर कब्जा करने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा नष्ट कर रहे हैं।

साक्षी भाव: ब्रह्मांडीय तटस्थता

जैसे हम ब्रह्मांड के अनंत विस्तार और उसमें होने वाली खगोलीय घटनाओं को देखते हैं, जहाँ हमारा कोई अधिकार नहीं होता, वैसे ही आज के इन युद्धों को एक ‘साक्षी’ की नज़र से देखना अनिवार्य है। यह तटस्थता हमें यह समझने की शक्ति देती है कि सत्ता और सीमाओं की ये जंग कितनी क्षणभंगुर है। सागर की एक-एक बूंद पर अपना नाम लिखने की चाहत में मनुष्य उस महासागर (शांति) को ही ज़हरीला बना रहा है, जिसने पूरी सृष्टि को थाम रखा है।

मौन ही अंतिम सत्य है

सागर की गहराई में एक ऐसा बिंदु आता है जहाँ बाहरी हवाओं का असर खत्म हो जाता है। वहाँ न कोई सरहद है, न कोई देश और न ही कोई अहंकार। साधु-संतों ने इसे ‘मौन’ कहा है और यही मौन जीवन का आधार है। युद्ध की विभीषिका के बीच, अंततः सबको इसी मौन में विलीन होना है। लेकिन युद्ध का मौन ‘समाधि’ का नहीं, बल्कि ‘विनाश’ का होता है।

निष्कर्ष

हमें लहरों के खेल का आनंद लेना चाहिए और उनकी मर्यादा को समझना चाहिए, लेकिन हमारी नज़र हमेशा उस गहराई पर होनी चाहिए जहाँ ‘परम शांति’ निवास करती है। मैं केवल एक दृष्टा हूँ, जो लहरों के इस संघर्ष को देख रहा हूँ, पर मेरी चेतना उस अथाह गहराई के मौन में सुरक्षित है जहाँ कोई भौतिक सीमा नहीं पहुँच सकती।


तटस्थता: ब्रह्मांडीय दृष्टि और युद्ध का कोलाहल

लेख/आलेख – 25/04/2026

आज जब हम ईरान, इज़राइल और अमेरिका जैसे देशों को सागर की लहरों और सीमाओं के लिए टकराते हुए देखते हैं, तो हमारी भूमिका एक ‘साक्षी’ की होनी चाहिए। यह तटस्थता उदासीनता नहीं, बल्कि एक गहरी समझ है। जैसे हम ब्रह्मांड के अनंत विस्तार को देखते हैं—जहाँ तारे जन्म लेते हैं और गैलेक्सियाँ नष्ट हो जाती हैं—वहाँ हमारा कोई अधिकार नहीं होता, हम केवल एक दर्शक होते हैं।

जब हम तटस्थ होकर युद्ध या संसार की हलचलों को देखते हैं, तो हम उस दर्शक की तरह होते हैं जो आकाश में तारों को टूटते हुए तो देखता है, पर उन्हें रोकने या उन पर अधिकार जताने की कोशिश नहीं करता।

युद्ध की ये लहरें ‘अहंकार’ की उपज हैं। जब हम इन सीमाओं की जंग को तटस्थ होकर देखते हैं, तब हमें समझ आता है कि मनुष्य कितनी व्यर्थ की कोशिशों में लगा है। सागर की एक-एक बूंद पर अपना नाम लिखने की चाहत में वह पूरे महासागर की शांति को दांव पर लगा रहा है।

एक ‘साक्षी’ के रूप में हम देखते हैं कि जीवन की सीमाएं उन नक्शों से कहीं अधिक कीमती हैं जिन्हें इंसान ने बनाया है। जो तटस्थ है, वही देख पाता है कि हर मिसाइल के साथ न केवल एक शरीर मरता है, बल्कि उस ‘मौन’ का भी अपमान होता है जिससे हम सब आए हैं। ब्रह्मांड की तरह, जीवन भी अपने आप में पूर्ण है; इसे किसी अधिकार या सरहद की जरूरत नहीं।

लेख में एक ‘तटस्थ दृष्टिकोण’ प्रस्तुत है:
“मैं केवल एक दृष्टा हूँ, जो लहरों के संघर्ष को देख रहा है, पर मेरी आत्मा उस अथाह गहराई के मौन में सुरक्षित है जहाँ कोई सीमा नहीं पहुँच सकती।”

AAP में सियासी भूचाल: 7 राज्यसभा सांसद अलग, 3 ने थामा BJP का दामन

नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026

दिल्ली की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा सियासी धमाका हुआ। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब उसके वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद ने पार्टी से अलग होने का ऐलान कर दिया। उनके साथ कुल 7 सांसदों के अलग होने का दावा किया गया है, जिनमें से 3 नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता भी ले ली है।

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से भटक चुकी है। उन्होंने चुटीले अंदाज़ में खुद को “गलत पार्टी में सही आदमी” बताया और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी के भीतर घुटन महसूस हो रही थी।

बताया जा रहा है कि चड्ढा के साथ , , राजेंद्र गुप्ता, , विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल ने भी पार्टी से दूरी बना ली है। इनमें से राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पार्टी में शामिल हो गए।

इस घटनाक्रम पर भाजपा की ओर से स्वागत किया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि ये सभी नेता प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।

वहीं, AAP ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा का “ऑपरेशन लोटस” करार दिया है और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को “गद्दार” बताया है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की जाएगी।

राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद थे, जिनमें से 7 के अलग होने के दावे के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। यदि यह संख्या औपचारिक रूप से साबित होती है, तो यह AAP के लिए संसद में बड़ा झटका होगा।


कोहली-पडिक्कल की दमदार पारियां, RCB ने गुजरात को 5 विकेट से हराया

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बेंगलुरु, 24 अप्रैल 2026

इंडियन प्रीमियर लीग के 34वें मुकाबले में रॉयल चैलेंज बेंगलुरु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हरा दिया। 205 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए बेंगलुरु ने 7 गेंद शेष रहते जीत दर्ज की।

जीत के हीरो रहे विराट कोहली जिन्होंने 44 गेंदों पर 81 रनों की शानदार पारी खेली और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। उन्हें देवदत्त पडिकल (55 रन) का बेहतरीन साथ मिला।

इससे पहले गुजरात की ओर से साईं सुदर्शन ने शानदार शतक जड़ा और आईपीएल में सबसे तेज 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड भी बनाया, लेकिन उनकी यह उपलब्धि टीम को जीत नहीं दिला सकी। गुजरात ने निर्धारित 20 ओवर में 205/3 का मजबूत स्कोर खड़ा किया था।

लक्ष्य का पीछा करते हुए आरसीबी की शुरुआत धीमी रही और पहला विकेट 24 रन पर गिरा। इसके बाद कोहली और पडिक्कल ने पारी को संभालते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। 141 रन के स्कोर पर रशीद खान ने पडिक्कल को आउट कर साझेदारी तोड़ी।

कुछ देर बाद जोशन होल्डर ने कोहली को पवेलियन भेज दिया, जिससे मैच में रोमांच बढ़ गया। इसके बाद जितेश शर्मा और रजत पाटीदार भी जल्दी आउट हो गए और आरसीबी का स्कोर 173/5 हो गया।हालांकि, अंत में कृणाल पंड्या और टिम डेविड प्लेयर्स ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया।इस जीत के साथ आरसीबी ने 7 मैचों में 5वीं जीत दर्ज की और अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई।


बेमेतरा पुलिस की त्वरित कार्रवाई- चोरी की ट्रक और रेत बरामद, 3 आरोपी गिरफ्तार

बेमेतरा, 23 अप्रैल 2026

पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) रामकृष्ण साहू (IPS) के निर्देशन में बेमेतरा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए चोरी गए 16 चक्का ट्रक (कीमत लगभग₹ 9,50,000) और उसमें भरी रेत को बरामद कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?
9 अप्रैल 2026 को नायब तहसीलदार खम्हरिया ने बिना रायल्टी परमिट के रेत परिवहन करते पकड़े गए ट्रक क्रमांक CG 04 NV 8342 को जप्त कर तहसील कार्यालय के सामने सुरक्षार्थ खड़ा कराया था। 21 अप्रैल 2026 की रात करीब 11 बजे अज्ञात चोर उस जप्त ट्रक को रेत सहित चुरा ले गए। अगले दिन 22 अप्रैल को सुबह 5 बजे वाहन गायब पाया गया, जिस पर प्रार्थी विनोद कुमार पात्रे ने थाना खम्हरिया में रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने कहां पकड़ा आरोपी
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम को जानकारी मिली कि संदेही हेमंत मरकाम चोरी के वाहन के साथ कवर्धा में देखा गया है। टीम ने कवर्धा के एक पेट्रोल पंप के पास उसे दबोच लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि हंसुराम साहू और बैतल राम साहू के कहने पर उसने जप्त ट्रक चुराई, रेत सहसपुर लोहारा में डंप की और ट्रक को बाईपास रोड के पेट्रोल पंप पर छुपाकर रखा।

गिरफ्तार तीनों आरोपी कबीरधाम जिले के निवासी हैं —
1. हेमंत मरकाम (23 वर्ष) — चिलमखोदरा, थाना सहसपुर लोहारा।
2. हंसुराम साहू(36 वर्ष) — छोटूपारा, थाना सहसपुर लोहारा।
3. बैतल राम साहू (41 वर्ष) — पेन्ड्रीतराई, थाना सिंघनपुरी जंगल।

तीनों को धारा 303(2) व 3(5) BNS के तहत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में न्यायिक रिमांड पर प्रस्तुत किया गया है।

सराहनीय पुलिस टीम
इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक चंद्रदेव वर्मा के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक अजय कुमार लहरे, विनोद पात्रे, आरक्षक हीराचंद गेन्ड्रे, दिनेश निषाद, अशरफी खान, धर्मेन्द्र साहू सहित थाना खम्हरिया की पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा।

यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि जप्त वाहनों से भी छेड़छाड़ करने वालों को कानून का कड़ा जवाब मिलेगा।


खनिज विभाग की सख्ती अवैध रेत परिवहन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 3 हाईवा जब्त

बेमेतरा, 24 अप्रैल 2026

जिले में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश एवं मार्गदर्शन में खनिज विभाग बेमेतरा की टीम ने संयुक्त अभियान चलाते हुए अवैध रूप से रेत परिवहन कर रहे 3 हाईवा वाहनों को मौके पर ही जब्त कर लिया। सभी वाहनों को सुरक्षार्थ थाना बेमेतरा परिसर में खड़ा कराया गया है।

कैसे हुई कार्रवाई?
खनिज विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों और गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने सुनियोजित तरीके से दबिश दी। जांच के दौरान वाहन चालक वैध दस्तावेज एवं अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद नियमानुसार तीनों वाहन जब्त कर लिए गए। अब छत्तीसगढ़ खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण) नियमों के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही वाहन मालिकों और संचालकों से पूछताछ जारी है, ताकि अवैध नेटवर्क की जड़ तक पहुँचा जा सके।

प्रशासन का कड़ा संदेश
कलेक्टर सुश्री ममगाई ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में अवैध खनन एवं परिवहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमित निगरानी और सतत कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

आगे और अभियान के संकेत
खनिज विभाग ने संकेत दिया है कि आगामी दिनों में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष सघन जाँच अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनन या परिवहन की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचित करें।

इस कार्रवाई के बाद अवैध रेत कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है और यह संदेश साफ है — अब कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं होगा।

CSK ने MI को 103 रनों से रौंदा, ‘कन्कशन सब्स्टीट्यूट’ विवाद में घिरी मुंबई

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आईपीएल 2026 | वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई

संजू का शतक, अकील का कहर — CSK की धमाकेदार जीत

वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए हाई-वोल्टेज मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने मुंबई इंडियंस (MI) को 103 रनों के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी। संजू सैमसन की नाबाद शतकीय पारी और अकील होसेन के 4 विकेट ने मैच का पासा पलट दिया और मुंबई की टीम को मुँह की खानी पड़ी।

कन्कशन सब्स्टीट्यूट का विवाद
हार से भी ज्यादा चर्चा मुंबई के एक फैसले को लेकर हो रही है। मैच के 17वें ओवर में मिचेल सैंटनर कैच लेने की कोशिश में जमीन पर गिर पड़े। बाद में उन्हें कंधे पर पट्टी बंधी देखा गया, लेकिन मुंबई ने मैच रेफरी से सिर की चोट का हवाला देकर उनकी जगह शार्दुल ठाकुर को मैदान में उतारने की अनुमति माँगी।

IPL नियमों के अनुसार कन्कशन सब्स्टीट्यूट केवल **सिर में चोट** लगने पर ही मान्य होता है। ऐसे में दर्शकों और क्रिकेट जगत में सवाल उठ रहे हैं कि जब चोट कंधे में थी, तो सिर की चोट का नियम क्यों लगाया गया?

कोच जयवर्धने का पक्ष
मुंबई के हेड कोच महेला जयवर्धने ने सफाई देते हुए कहा कि गिरते समय सैंटनर का सिर सबसे पहले जमीन से टकराया था और बाद में गर्दन व कंधे पर झटका लगा। स्कैन के बाद भी सैंटनर को चक्कर आ रहे थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बदलाव की अंतिम मंजूरी मैच रेफरी की थी, टीम की नहीं।

MI की मुश्किलें बढ़ीं
इस हार के बाद मुंबई इंडियंस की स्थिति और कमजोर हो गई है। 7 मैचों में महज 4 अंक लेकर टीम संघर्ष कर रही है। जयवर्धने ने गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में शुरुआती ओवरों में खराब प्रदर्शन को हार का कारण बताया। हालाँकि, युवा अल्लाह गजनफर की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ी बेहद बहादुरी से खेल रहा है और टीम उसके साथ खड़ी है।

अब देखना यह होगा कि ICC और BCCI इस कन्कशन सब्स्टीट्यूट विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या मुंबई इंडियंस बचे हुए मैचों में वापसी कर पाती है।


पुस्तकें: ज्ञान, संस्कृति और चेतना का अमर स्रोत

पुस्तक दिवस विशेष_24/04/2026

पुस्तकों का महत्व(23/04/2026)

पुस्तकों में लिखे शब्द केवल अक्षर नहीं होते — वे विचारों की वह लौ हैं जो दिमाग में कौंधकर जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं। कभी सुकून देते हैं, कभी शांति और कभी-कभी एक पूरी क्रांति को जन्म दे देते हैं। यही कारण है कि सदियों से पुस्तकें मानव सभ्यता की सबसे विश्वसनीय साथी रही हैं।

प्राचीन भारत और पुस्तकालयों की विरासत

हमारी प्राचीन संस्कृति में पुस्तकों का स्थान अत्यंत गौरवशाली रहा है। पौराणिक ग्रंथ और पांडुलिपियाँ इसके जीवंत प्रमाण हैं। नालंदा का विश्वविख्यात पुस्तकालय ‘धर्मगंज’ इसी गौरव का प्रतीक था। इतिहास साक्षी है कि खिलजी ने जब उस पुस्तकालय में आग लगाई, तो वह आग तीन से छह महीने तक धधकती रही — इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि वहाँ ज्ञान का कितना विशाल भंडार संचित था। विश्व में टॉल्स्टॉय की लाइब्रेरी भी अपने समय में बहुत प्रसिद्ध हुई।

विश्व पुस्तक दिवस — 23 अप्रैल
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1995 से प्रतिवर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। इसे पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस भी कहा जाता है। इस दिवस के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं — पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करना। प्रकाशन उद्योग को बढ़ावा देना कॉपीराइट के प्रति जागरूकता फैलाना

आज के युग में जागरूक और सोचने वाले पाठकों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, इसलिए इस दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।

डिजिटल युग में पुस्तकों की स्थिति
आज का दौर मोबाइल और डिजिटल माध्यमों का है। युवाओं की पुस्तकों के प्रति घटती रुचि चिंता का विषय अवश्य है। दो-तीन दशक पहले शहरों में अनेक पुस्तकालय थे जो पाठकों से भरे रहते थे, किंतु समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ी और कई पुस्तकालय तथा साहित्यिक पुस्तकों की दुकानें बंद हो गईं। शहरों में ग्रंथालय धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं — यह एक गंभीर सांस्कृतिक क्षति है।

पुस्तक प्रेम — एक उज्ज्वल तस्वीर
हालाँकि, यह भी उतना ही सत्य है कि पुस्तकों के प्रति प्रेम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। भारत पुस्तक प्रकाशन में विश्व में छठे स्थान पर है और अंग्रेजी साहित्य के प्रकाशन में अमेरिका के बाद भारत दूसरे स्थान पर है। यह गर्व की बात है।

वर्ष 2025 में पुणे में आयोजित नौ दिवसीय पुस्तक महोत्सव में लगभग 13 लाख पुस्तक प्रेमियों ने भाग लिया और 50 करोड़ रुपये से अधिक की पुस्तकों की बिक्री हुई — जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में भी पाठकों की भारी भीड़ ने यह सिद्ध किया कि पुस्तकों का आकर्षण आज भी बरकरार है।

विशेष
पुस्तकें किसी भी समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना की पहचान होती हैं। जब तक मनुष्य में जिज्ञासा है, पुस्तकों की प्रासंगिकता बनी रहेगी। आवश्यकता इस बात की है कि हम नई पीढ़ी में पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करें, पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करें और ज्ञान की इस अमर परंपरा को आगे बढ़ाएँ।

“एक अच्छी पुस्तक वह है जो बीज की तरह बोई जाती है और विचारों की फसल उगाती है।”


मतदाताओं की भीड़:बंगाल-तमिलनाडु में ऐतिहासिक मतदान, टूटे सारे रिकॉर्ड

कोलकाता/चेन्नई, 24 अप्रैल 2026

देश की सियासत में गुरुवार को जबरदस्त हलचल देखने को मिली। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने उमड़कर इतिहास रच दिया।

बंगाल में 92% से अधिक मतदान
पश्चिम बंगाल में 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो स्वतंत्रता के बाद राज्य का अब तक का सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। हालाँकि, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत करीब 91 लाख नाम हटाए जाने का मुद्दा गरमाया रहा। TMC ने इसे मताधिकार छीनने की साजिश बताया, जबकि BJP ने इसे वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया करार दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदिया की रैली में इसे “परिवर्तन के लिए भारी जनादेश” बताया और दावा किया कि हिंसा पिछले पाँच दशकों में सबसे कम रही। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अधिक मतदान लोगों के अधिकारों और नागरिकता को लेकर उनकी चिंता को दर्शाता है।

तमिलनाडु में भी जबरदस्त उत्साह
तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान हुआ। शाम पाँच बजे तक 82.24 प्रतिशत मतदान हो चुका था। भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं।

जिलावार आंकड़ों में करूर जिला सबसे आगे रहा जहाँ 89.32 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि कन्याकुमारी में सबसे कम 73.44 प्रतिशत रहा। राजधानी चेन्नई में 81.34 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

दोनों राज्यों में रिकॉर्ड मतदान ने यह साफ कर दिया है कि भारत का मतदाता लोकतंत्र के प्रति पूरी तरह सजग और सक्रिय है। अब सबकी नजरें मतगणना पर टिकी हैं।