24.3 C
Raipur
Thursday, July 30, 2026

थर्मल इमेजिंग तकनीक:बस्तर के जंगलों की सुरक्षा अब हाई‑टेक नजरों के बीच

Must read

रायपुर – 29 जुलाई 2026

सुरक्षा के लिए थर्मल इमेजिंग तकनीक शरीर की ऊष्मा (हीट सिग्नेचर) को पहचानकर अँधेरे में भी मनुष्य और जानवरों की उपस्थिति का तुरंत संकेत देती है। इससे जंगलों के अंदर छिपे समूह, अवैध ढेर या गतिशील शिकारियों की वास्तविक‑समय पहचान संभव हो रही है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर वन मंडल में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए थर्मल इमेजिंग वाले ड्रोन तैनात कर दिए गए हैं। ये उच्च क्षमता वाले ड्रोन रात्रिकालीन निगरानी कर घने जंगलों में रात के अंधेरे में भी तस्करों, शिकारियों और अवैध कटाई जैसी गतिविधियों का पता लगा रहे हैं। विभाग का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से पारंपरिक पैट्रोलिंग की सीमाएँ कम हुई हैं और सुरक्षा व्यवस्था में तेज़ी आई है।

अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन के कैमरे से मिलने वाली लाइव फुटेज क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को त्वरित और सटीक जानकारी देती है, जिससे समय पर कार्रवाई व अभियानों का संचालन आसान हुआ है।

इस नई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा और अवैध कटाई तथा तस्करी पर प्रभावी रोक लगाना है। पर्यावरण अधिकारीयों ने बताया कि तकनीक के साथ-साथ इलाके में ऑन‑ग्राउंड टीमों का समन्वय बढ़ा है, जिससे कानून‑व्यवस्था मजबूत हुई है और मानव‑वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद मिल रही है।

स्थानीय वन संरक्षक और समुदाय भी इस पहल को स्वागत कर रहे हैं क्योंकि इससे गश्ती अधिक प्रभावी और सुरक्षात्मक हुई है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया कि यह कदम सुशासन और तकनीक‑आधारित संरक्षण नीतियों का हिस्सा है। राज्य सरकार आगे भी बस्तर में जैव‑विविधता और वनों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देगी, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकें।


- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article