चीनी के दाम बढ़े तो सरकार ने उठाए सवाल, कहा- 15 दिन में इतनी तेजी सामान्य नहीं
नई दिल्ली – 22 अगस्त 2026
सरकार को उम्मीद है कि चीनी मिलों में इस साल करीब 15 अक्टूबर के आसपास पेराई सत्र शुरू हो जाएगा। इससे अक्टूबर महीने में ही लगभग 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की संभावना है।
देश में अचानक बढ़ी चीनी की कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में महज कुछ दिनों के भीतर चीनी के दाम में करीब 8 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी के बाद सरकार ने इसे सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव मानने से इनकार कर दिया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कीमतों में हुई इस तेज वृद्धि को अनुचित बताते हुए कहा कि देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध होने के बावजूद बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाया जा रहा है।
सरकार के मुताबिक, 20 जुलाई को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 56 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। मिल स्तर पर भी कीमत करीब 47-48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि इतनी कम अवधि में कीमतों में इतनी बड़ी छलांग के पीछे कोई ठोस बुनियादी कारण नजर नहीं आता।
एथनॉल को लेकर सरकार ने साफ किया रुख
चीनी की कीमतों में तेजी के लिए एथनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराए जाने के दावों को भी सरकार ने खारिज कर दिया है। खाद्य सचिव के अनुसार, चालू 2025-26 विपणन वर्ष में करीब 28 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन में हुआ है। वहीं, एथनॉल उत्पादन में अब चीनी पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई है और बड़ी मात्रा में एथनॉल अनाज, खासकर मक्का से तैयार किया जा रहा है।
सरकार का तर्क है कि केवल एथनॉल उत्पादन को चीनी की मौजूदा कीमतों में तेजी की वजह बताना सही तस्वीर पेश नहीं करता।
उत्पादन घटा, लेकिन मांग से ज्यादा उपलब्धता
इस साल चीनी उत्पादन पर मौसम और फसल में बीमारी का असर पड़ा है। गन्ने की फसल में ‘रेड रॉट’ और ‘टॉप बोरर’ जैसे रोगों के साथ अधिक बारिश और जलभराव से उत्पादन प्रभावित हुआ है। सरकार ने 2025-26 विपणन वर्ष में चीनी उत्पादन का अनुमान करीब 306 लाख टन लगाया है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था।
इसके बावजूद सरकार के मुताबिक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। देश में चीनी की सालाना खपत करीब 280-285 लाख टन बताई गई है।
सितंबर तक 33-35 लाख टन स्टॉक का अनुमान
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2026 के अंत तक देश में करीब 33 से 35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान है। इसके अलावा सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इससे घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने चीनी की जमाखोरी, कालाबाजारी और सट्टेबाजी रोकने के लिए राज्यों को भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अक्टूबर में फिर बढ़ेगी बाजार में चीनी की उपलब्धता।
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