संडे न्यूज – 23 अगस्त 2026
देश की रसोई और सड़क, दोनों में एक साथ बड़ा बदलाव होने वाला है।
पिछले 20 साल में हमारी रसोई में सबसे बड़ा बदलाव LPG सिलेंडर था। अब अगला बदलाव दरवाजे पर है – एथेनॉल वाला चूल्हा और घर के बाहर चार्ज हो रही इलेक्ट्रिक कार। दोनों कहानियों का केंद्र एक ही है – आयात घटाओ, जेब बचाओ और हवा साफ रखो।
सरकार LPG के विकल्प के तौर पर एथेनॉल वाले चूल्हे की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय इसके लिए वैकल्पिक स्वच्छ कुकिंग नीति का मसौदा बना रहा है, जो सितंबर तक आ सकती है।
चूल्हा कैसा है?
ये पूरी तरह स्वदेशी है। हाल में नितिन गडकरी ने पानी और एथेनॉल के मिश्रण से चलने वाला चूल्हा पेश किया। ये सीधे एथेनॉल नहीं जलाता, बल्कि उसके भाप से ऊर्जा बनाता है, इसलिए LPG से सस्ता और सुरक्षित बताया जा रहा है।
सरकार का प्लान
पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल किचन फ्यूल के लिए अलग काउंटर।
IOCL, BPCL, HPCL चूल्हा और ईंधन दोनों बाजार में लाएंगी।
नया चूल्हा अपनाने पर सब्सिडी मिल सकती है। अच्छी बात है कि LPG सब्सिडी तुरंत बंद नहीं होगी।
क्यों जरूरी है?
तीन कारण हैं। पहला, भारत LPG का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा जाती है। पश्चिम एशिया तनाव में तो सप्लाई रुक जाती है। दूसरा, पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) का लक्ष्य पूरा होने के बाद देश में एथेनॉल सरप्लस है। सरकार के मुताबिक ब्लेंडिंग से ही 1.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची है। तीसरा, एथेनॉल गन्ना-मक्का से बनता है, तो फायदा सीधे किसान को होगा।
चुनौती भी है। एथेनॉल बहुत ज्वलनशील है, इसलिए स्टोरेज और चूल्हे के सुरक्षा मानक बहुत सख्त बनाने होंगे।
दूसरी तरफ, सड़क EV की है।
2026 में EV बाजार टॉप गियर में है। जनवरी में ही बिक्री 51% बढ़कर 18 हजार पार हो गई और पूरे FY26 में करीब 2 लाख इलेक्ट्रिक कारें बिकीं।
टाटा अभी भी नंबर-1 है, जुलाई 2026 में 101% ग्रोथ। लेकिन महिंद्रा सबसे तेज भाग रही है, जुलाई में 124% ग्रोथ और FY26 में उसकी हिस्सेदारी 10% से बढ़कर 24% हो गई।
लोग क्यों ले रहे हैं? बिजली पेट्रोल से 4 गुना सस्ती, मेंटेनेंस आधा और प्रदूषण जीरो।
मतलब साफ है, कल की रसोई खेत के एथेनॉल से जलेगी और कल की गाड़ी खेत की बिजली से चलेगी। स्वदेशी ईंधन, स्वदेशी बचत।