देश के तीन कोने, सुलगते तेवर: दिल्ली के Gen-Z, रांची के छात्र और गुजरात के किसानों की हुंकार
न्यूज डेस्क _11 अगस्त 2026
दिल्ली का Gen-Z हो, रांची के प्रतियोगी छात्र हों या फिर गुजरात के जमीन बचाते किसान—इन तीनों मोर्चों पर एक ही बात कॉमन है: व्यवस्था के प्रति गहराता असंतोष। जब तक नीति निर्माता युवाओं के भविष्य और अन्नदाताओं के हक पर संवेदनशीलता से विचार नहीं करेंगे, तब तक यह सुलगती हुई चिनगारी किसी भी वक्त बड़े बदलाव का रूप ले सकती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इन दिनों युवाओं, छात्रों और किसानों का आक्रोश सड़क पर साफ दिखाई दे रहा है। चाहे राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठा Gen-Z हो, झारखंड की राजधानी रांची में विधानसभा का घेराव करने वाले आक्रोशित छात्र हों या फिर गुजरात के मोरबी में अपनी जमीन के हक के लिए खड़े किसान—हर तरफ व्यवस्था के खिलाफ सुलगते तेवर नजर आ रहे हैं।
एक पोर्टल एडिटर की नजर से देखें, तो यह देश के तीन अलग-अलग कोनों से उठ रही उस जन-भावना का उबाल है, जिसे अब नजरअंदाज करना सरकार के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
दिल्ली का जंतर-मंतर: Gen-Z की हुंकार और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
जुलाई 2026 के दौरान देश की राजधानी नई दिल्ली का जंतर-मंतर युवाओं के आक्रोश का केंद्र बन गया था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में चला यह बड़ा Gen-Z (जेन-जी) आंदोलन शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
वजह और मांगें: इस आंदोलन की मुख्य वजह नीट पेपर लीक और तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली थी। युवाओं का यह गुस्सा तब अपने चरम पर पहुंचा जब आंदोलकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरी परीक्षा प्रणाली में अमूल्य सुधार की मांग को लेकर मोर्चा खोला।
रांची की सड़कें: JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन
दूसरी तस्वीर झारखंड की राजधानी रांची से सामने आ रही है, जहां अगस्त 2026 के शुरुआती हफ़्तों से JPSC और JSSC परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का उग्र आंदोलन जारी है। हालात तब और बेकाबू हो गए जब 10 अगस्त 2026 को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों ने सुरक्षा की कई बैरिकेडिंग तोड़ दीं।
प्रशासनिक कार्रवाई और मांगें: प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन, आंसू गैस और हल्के लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। छात्र इन परीक्षाओं की सीबीआई (CBI) जांच कराने, संपूर्ण धांधली की उच्चस्तरीय जांच और इसमें लिप्त जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। रांची की इन सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह है कि युवा वर्ग अब रोजगार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
गुजरात के मोरबी में किसानों का संग्राम और राष्ट्रीय हलचल
इन दोनों युवा आंदोलनों के बीच, गुजरात के मोरबी जिले से उठी किसानों की आवाज अब राष्ट्रीय फलक पर दस्तक दे रही है। मोरबी तालुका के जेतपर गांव में किसान बिजली के खंभे लगाने के एवज में जमीन के बदले उचित मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।
राष्ट्रीय नेताओं का समर्थन: इस स्थानीय आंदोलन को अब पंजाब के कद्दावर किसान नेताओं का भी खुला समर्थन मिल गया है।
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रेसिडेंट रघुवीर सिंह चौधरी और नेशनल स्पोक्सपर्सन राकेश टिकैत ने जेतपर गांव की किसान छावनी का दौरा कर आंदोलनकारियों को समर्थन का पूरा भरोसा दिया है।
चार गुना मुआवजे की मांग: किसानों का साफ कहना है कि उन्हें सरकार द्वारा जारी किया गया मौजूदा सर्कुलर और मुआवजा मंजूर नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन के बदले चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। राकेश टिकैत ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो इस आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर दिल्ली का घेराव भी किया जा सकता है।
बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने हर जिले के किसानों को एकजुट होकर मजबूत संगठन बनाने की अपील की है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह चिंगारी अब थमने वाली नहीं है।
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