डिजिटल डेस्क, 10 अप्रैल 2026
ईरान और अमेरिका के बीच चले युद्ध तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल ला दिया है। कतर में दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यात प्लांट पर हुए हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया की 20% गैस सप्लाई ठप हो गई है। इस वैश्विक हाहाकार के बीच रूस ने दक्षिण एशियाई देशों के लिए बड़ा दांव खेला है।
भारत और बांग्लादेश पर प्रभाव
सप्लाई बाधित होने से गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर दक्षिण एशिया पर पड़ा है:
1.बांग्लादेश: अपनी जरूरतों के लिए हाजिर बाजार (Spot Market) से दोगुने दामों पर गैस खरीदने को मजबूर है।
2.भारत: बढ़ती कीमतों के कारण फर्टिलाइजर (उर्वरक) क्षेत्र की गैस सप्लाई में कटौती करनी पड़ी है।
प्रतिबंधों का पेच और भारत का रुख
रूस भले ही आर्कटिक LNG 2 और पोर्टोवाया से एक्सपोर्ट बढ़ा रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से अधिकतर देश पीछे हट रहे हैं। भारत ने हमेशा प्रतिबंधों पर सतर्क रुख अपनाया है, हालांकि अतीत में रियायती दरों पर रूसी तेल की खरीद की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन वर्तमान में ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त जहाजों) के जरिए रूसी गैस का आयात जारी रखे हुए है।
रूस की ‘बंपर डिस्काउंट’ चाल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रूस अपने अमेरिकी प्रतिबंधित संयंत्रों (जैसे आर्कटिक LNG 2) से गैस बेचने के लिए **40% तक की भारी छूट दे रहा है।रूसी मध्यस्थ कंपनियां चीन के माध्यम से इन खेपों को ‘स्पॉट प्राइस’ से आधी कीमत पर ऑफर कर रही हैं।पहचान छिपाने की कोशिश के साथ सूत्रों में दावा किया जा रहा है कि रूस इन खेपों को ओमान या नाइजीरिया जैसे देशों के फर्जी दस्तावेजों के साथ बेचने की कोशिश कर रहा है ताकि खरीदार देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा न रहे।
समाचार निष्कर्ष: मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत और अन्य एशियाई देश अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रूस के इस ‘सस्ते मगर जोखिम भरे’ ऑफर को स्वीकार करते हैं या नहीं।
ऊर्जा बाजार: मिडिल ईस्ट में संकट के बीच रूस का ‘गैस कार्ड’, 40% छूट का ऑफर


