सनी देओल का ‘मौसी’ वाला बयान और ‘बंटवारा 1947’: फिल्म रिलीज से पहले सोशल मीडिया पर
बेमेतरा/रायपुर (छग) —10 अगस्त 2026
चौपाल में भी उठी तीखी प्रतिक्रिया
आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी बहुप्रतिक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ अपनी रिलीज से ठीक पहले बड़े विवादों में घिर गई है। फिल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है, लेकिन इसके प्रमोशन के दौरान अभिनेता सनी देओल द्वारा पड़ोसी देश पाकिस्तान को लेकर दिए गए एक बयान ने सोशल मीडिया पर कोहराम मचा दिया है। इस बयान के बाद से जनता और दर्शकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
क्या था सनी देओल का विवादित बयान?
फिल्म के प्रमोशन के दौरान जब एक रिपोर्टर ने सनी देओल से पूछा कि वह पड़ोसी देश को किस नजरिए से देखते हैं, तो अभिनेता ने जवाब दिया— “पहले दोनों देश एक ही थे। जैसा कि मेरे पिता कहा करते थे, भारत मां है और पाकिस्तान भारत से ही निकला है, इसलिए वो मौसी बन गया। हम सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।”
इस बयान के सामने आते ही इंटरनेट पर आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। यूजर्स ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जिस फिल्म की कहानी 1947 के विभाजन के दर्दनाक दौर, सांप्रदायिक दंगों और विस्थापन के काले इतिहास पर आधारित हो, उसके संदर्भ में पाकिस्तान को ‘मौसी’ कहना देश के दर्द और इतिहास का अपमान है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
सनी देओल के इस बयान पर यूजर्स ने जमकर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं:
एक यूजर ने लिखा, “अगर मौके का फायदा उठाना एक कला है, तो सनी देओल इसके कलाकार हैं।”
दूसरे यूजर ने सवाल उठाया, “गदर से गद्दार क्यों? क्या तारा सिंह अब सकीना के साथ पाकिस्तान में रहेंगे?”
एक अन्य यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “कितना शर्मनाक स्टेटमेंट है। अपने फ्लॉप करियर को संवारने के लिए कुछ भी बोल सकते हैं।”
कई लोगों ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि एक तरफ वे पौराणिक पात्रों को पर्दे पर जीते हैं, तो दूसरी तरफ ऐसा बयान देते हैं। एक यूजर ने पूछा, “अगर पाकिस्तान से इतना ही प्यार है, तो ‘रामायण’ में हनुमान का रोल क्यों निभाया?”
जन चौपाल में उठी तीखी बहस: “बंटवारा भारत के लिए सदमा, पाकिस्तान के लिए आजादी”
जब इस पूरे मामले पर ‘जन चौपाल’ में स्थानीय स्तर पर चर्चा की गई, तो लोगों का गुस्सा और चिंता साफ तौर पर झलकी। चौपाल में मौजूद लोगों ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि 1947 का भारत का विभाजन कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि यह देश के माथे पर ऐसा नासूर है जिसका दर्द आज भी देशवासियों के दिलों में जिंदा है।
चौपाल में चर्चा के दौरान लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी:
“बंटवारा भारत के लिए सदमा था और पाकिस्तान के लिए आजादी।” लोगों ने कहा कि जो देश भारत के टुकड़े करके बना हो, उसके प्रति इस तरह के हल्के बयान देना और उसे ‘मौसी’ की संज्ञा देना अस्वीकार्य है।
चौपाल में यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि क्या ऐसी फिल्में “ले के रहेंगे आजादी” जैसे देशविरोधी या अलगाववादी नारों या भावनाओं को कहीं न कहीं परोक्ष रूप से समर्थन तो नहीं दे रही हैं?
स्थानीय लोगों ने कड़े शब्दों में मांग उठाई कि यदि इस फिल्म की विषयवस्तु या प्रोमोशन में भारत के विभाजन के दर्द को कम करके आंका गया है, या गलत नैरेटिव सेट किया जा रहा है, तो ऐसी फिल्मों को भारत में रिलीज करने से पहले सोचना चाहिए।
चौपाल के लोगों का कहना था, “अगर यह फिल्म इतनी ही भाईचारे वाली है, तो ‘बंटवारा 1947’ को भारत से पहले पाकिस्तान में रिलीज किया जाना चाहिए।”
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