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Saturday, September 19, 2026

एनआईटी रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने वाली तकनीक पर अंतरराष्ट्रीय मंथन

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रायपुर, 19 सितंबर 2026

AI और मशीन लर्निंग से बीमारी की पहचान से लेकर डॉक्टर की सलाह तक आसान बनाने पर चर्चा, बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर|राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक के जरिए बेहतर और आसान बनाने को लेकर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ। ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एम्बिएंट इंटेलिजेंस इन हेल्थ केयर’ (ICAIHC-2026) में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और स्मार्ट तकनीक के स्वास्थ्य क्षेत्र में इस्तेमाल पर चर्चा की।

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक की मदद से लोगों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखने, बीमारी के शुरुआती संकेत पहचानने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से परामर्श के लिए समय तय करने जैसे काम आसान हो सकते हैं। इसका उद्देश्य केवल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना नहीं, बल्कि मरीजों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए।

महंगी तकनीक गरीबों की पहुंच से बाहर न हो

एनआईटी रायपुर के निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में AI और दूसरी आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका के साथ उनकी लागत को भी बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सके।

उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य तकनीक का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गांवों और दूरदराज के इलाकों तक इसकी पहुंच बढ़ाना जरूरी है।

भारतीय जरूरतों के हिसाब से बने तकनीक

एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) अशोक जिंदल ने चिकित्सा और इंजीनियरिंग संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर चिकित्सा उपकरण और तकनीक विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने भारतीय इंजीनियरिंग संस्थानों, विशेषकर एनआईटी रायपुर, के साथ चिकित्सा क्षेत्र का डेटा और अनुभव साझा करने पर जोर दिया। इससे देश में ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है जो भरोसेमंद होने के साथ-साथ किफायती भी हो।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद मरीज और डॉक्टर के बीच मानवीय संबंध और व्यक्तिगत देखभाल का महत्व बना रहना चाहिए।

1200 से ज्यादा शोध-पत्र मिले

आईसीएआईएचसी-2026 में देश-विदेश के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के लिए 1,200 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं में AI, मशीन लर्निंग और स्मार्ट कंप्यूटिंग के इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न विषय शामिल हैं।

आईआईआईटी नवा रायपुर के निदेशक डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने AI के विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में इसके संभावित उपयोगों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भविष्य में स्मार्ट तकनीक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत पहचानने और मरीजों को समय पर चिकित्सा सलाह उपलब्ध कराने में मददगार हो सकती है।

अमेरिका स्थित एथेरोपॉइंट के सीईओ डॉ. जसजीत एस. सूरी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को व्यक्ति की जरूरत के अनुसार बेहतर बनाने में एम्बिएंट तकनीक की संभावनाओं पर चर्चा की। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी सम्मेलन में विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक का विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ बड़े शहरों के साथ गांवों, गरीबों और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक भी पहुंचे।

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